Starlink India Approval

इतंजार की घड़ियाँ अब खत्म होने वाली हैं। भारत के इंटरनेट बाजार में एक बड़ा भूचाल आने वाला है। दुनिया के सबसे अमीर शख्स Elon Musk की कंपनी Starlink भारत में अपनी सेवाएं शुरू करने के बेहद करीब है, और ठीक उससे पहले उन्हें एक ऐसी ‘मेगा अप्रूवल’ मिल गई है जिसने उनकी ताकत को कई गुना बढ़ा दिया है।

ताजा ख़बरों के मुताबिक, अमेरिकी रेगुलेटर (FCC) ने SpaceX को 7,500 Next-Generation Starlink Satellites (Gen2) लॉन्च करने की अंतिम मंजूरी दे दी है। हालांकि यह मंजूरी अमेरिकी एजेंसी ने दी है, लेकिन इसका सीधा और सबसे बड़ा असर Starlink India Launch पर पड़ने वाला है।

7,500 नए सैटेलाइट लॉन्च का रास्ता साफ

क्यों? क्योंकि भारत एक विशाल देश है और यहां करोड़ों यूज़र्स को हाई-स्पीड इंटरनेट देने के लिए मस्क को अंतरिक्ष में और अधिक सैटेलाइट्स की जरूरत थी। इस मंजूरी के साथ अब रास्ता साफ़ हो गया है।

Starlink India Approval

1. बड़ी खबर: 7,500 सैटेलाइट्स की फौज तैयार (The Mega Approval)

स्पेसएक्स (SpaceX) पिछले कई सालों से अपनी Gen2 (Generation 2) सैटेलाइट्स को लॉन्च करने की अनुमति मांग रहा था। विरोधियों (जैसे अमेज़न के प्रोजेक्ट कुइपर और अन्य खगोलविदों) की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए, अब उन्हें हरी झंडी मिल गई है।

यह मंजूरी क्यों खास है?

  1. विशाल नेटवर्क: अभी अंतरिक्ष में स्टारलिंक के लगभग 5,000-6,000 सैटेलाइट्स हैं। 7,500 नए सैटेलाइट्स जुड़ने से नेटवर्क की क्षमता दोगुनी से ज्यादा हो जाएगी।
  2. भारत के लिए तैयारी: भारत जैसे अधिक जनसंख्या घनत्व (High Density) वाले देश में सर्विस देने के लिए ‘बैंडविड्थ’ की बहुत जरूरत होती है। यह नया बेड़ा उसी कमी को पूरा करेगा।
  3. लॉन्च वेहिकल: इन भारी-भरकम सैटेलाइट्स को मस्क के विशाल रॉकेट Starship या Falcon 9 के जरिए कक्षा में स्थापित किया जाएगा।

2. Gen2 सैटेलाइट्स: अंतरिक्ष में ‘फ्लाइंग टावर्स’ (New Technology)

यह सिर्फ संख्या का खेल नहीं है, यह टेक्नोलॉजी का भी खेल है। ये 7,500 नए सैटेलाइट्स पुराने वाले ‘टिन के डिब्बों’ जैसे नहीं हैं।

Gen2 की विशेषताएं:

  • Direct-to-Cell क्षमता: यह सबसे बड़ा गेम-चेंजर है। इन सैटेलाइट्स में ऐसे एंटीना लगे हैं जो सीधे आपके मौजूदा 4G/5G स्मार्टफोन से कनेक्ट हो सकते हैं। मतलब भविष्य में आपको ‘डिश’ (Dish) की भी जरूरत शायद न पड़े, कम से कम टेक्स्ट मैसेज और कॉलिंग के लिए।
  • आकार और वजन: ये सैटेलाइट्स आकार में बहुत बड़े और भारी हैं।
  • अधिक बैंडविड्थ: ये पहले से कई गुना ज्यादा डेटा ट्रांसफर कर सकते हैं, जिससे Internet Speed बढ़ेगी और ‘लेटेंसी’ (Latency – डेटा आने-जाने में लगने वाला समय) कम होगी।

3. स्टारलिंक इंडिया लॉन्च: स्टेटस क्या है? (Status of Starlink in India)

2026 में भारत का दूरसंचार विभाग (DoT) सैटेलाइट स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया को अंतिम रूप दे रहा है।

  • GMPCS लाइसेंस: स्टारलिंक को पहले ही ‘ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशन बाय सैटेलाइट’ (GMPCS) लाइसेंस मिल चुका है।
  • सुरक्षा मंजूरी: भारत सरकार की कड़ी शर्तों (डेटा लोकलाइजेशन) को मानने के लिए स्टारलिंक तैयार हो गया है। यानी भारतीयों का डेटा देश में ही रहेगा।
  • स्पेक्ट्रम आवंटन: हाल ही में पारित हुए Telecommunications Act ने स्पष्ट कर दिया है कि सैटेलाइट स्पेक्ट्रम की ‘नीलामी’ नहीं होगी, बल्कि उसे ‘प्रशासनिक रूप से’ (Administrative Allocation) दिया जाएगा। यह एलन मस्क की बहुत बड़ी जीत थी, क्योंकि मुकेश अंबानी चाहते थे कि नीलामी हो।

इस 7,500 सैटेलाइट्स की मंजूरी के बाद, मस्क अब पूरी ताकत के साथ भारतीय बाजार में उतरने को तैयार हैं।

4. अंबानी vs मस्क: आकाश में महायुद्ध (Jio vs Starlink)

भारत में स्टारलिंक का रास्ता खाली नहीं है। वहां पहले से ही मुकेश अंबानी की Reliance Jio अपनी JioSpaceFiber के साथ खड़ी है।

Starlink India Approval

मुकाबला:

  • टेक्नोलॉजी: जियो ने ‘SES’ (लक्ज़मबर्ग की कंपनी) के साथ साझेदारी की है जो MEO (Medium Earth Orbit) सैटेलाइट्स का उपयोग करती है। जबकि स्टारलिंक LEO (Low Earth Orbit) का उपयोग करता है। LEO पृथ्वी के ज्यादा करीब है, इसलिए इसमें स्पीड ज्यादा और रुकावट कम होती है।
  • कीमत: जियो हमेशा ‘प्राइस वॉर’ के लिए जाना जाता है। मस्क को भारत में टिकने के लिए अपनी वैश्विक कीमत ($100/महीना) को घटाकर भारतीय स्तर (₹500-₹1000/महीना) पर लाना होगा।
  • उपलब्धता: जियो के पास पहले से ही 45 करोड़ यूजर का बेस है, जबकि स्टारलिंक को शून्य से शुरुआत करनी है।

5. भारत के लिए यह क्यों जरूरी है? (Impact on Rural India)

आप सोचेंगे कि “मेरे पास तो 5G है, मुझे स्टारलिंक क्यों चाहिए?” स्टारलिंक शहरों के लिए नहीं, बल्कि उन जगहों के लिए है जहाँ फाइबर केबल नहीं पहुँच सकती।

  1. हिमालय और पूर्वोत्तर: लेह-लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश और पहाड़ी इलाकों में जहाँ मोबाइल टावर लगाना मुश्किल है, वहां स्टारलिंक वरदान साबित होगा।
  2. गांव और कस्बे: भारत के हजारों गांव अभी भी हाई-स्पीड इंटरनेट से वंचित हैं।
  3. समुद्र और रेगिस्तान: कच्छ के रण से लेकर हिंद महासागर में जहाजों तक, कनेक्टिविटी हर जगह मिलेगी।

6. डायरेक्ट-टू-सेल: क्या आपका फोन काम करेगा?

7,500 नए सैटेलाइट्स के साथ Direct-to-Cell फीचर भारत में ‘डेड जोन्स’ (No Network Zone) को खत्म कर देगा।

  • कल्पना कीजिए कि आप किसी घने जंगल में ट्रेकिंग कर रहे हैं जहाँ कोई टावर नहीं है।
  • आप आसमान की तरफ फोन करेंगे और आपका सामान्य फोन सीधे स्टारलिंक सैटेलाइट से जुड़ जाएगा।
  • आप इमरजेंसी मैसेज भेज सकेंगे या कॉल कर सकेंगे।

एलन मस्क ने कहा है, “अब दुनिया में कोई भी इलाका ऐसा नहीं होगा जहाँ संपर्क टूट जाए।”

7. चुनौतियां: मलबा और खगोल विज्ञान (Space Debris)

7,500 नए सैटेलाइट्स का मतलब है अंतरिक्ष में भारी ट्रैफिक।

  • टक्कर का खतरा: इतने सारे सैटेलाइट्स होने से अंतरिक्ष में टक्कर (Collision) का खतरा बढ़ जाता है।
  • खगोलविदों की चिंता: वैज्ञानिक शिकायत कर रहे हैं कि स्टारलिंक की चमकती ट्रेनें तारों को देखने में बाधा डाल रही हैं। मस्क ने वादा किया है कि नए Gen2 सैटेलाइट्स कम चमकदार (Darker) होंगे।

8. भारत में कब से शुरू होगी बुकिंग?

सूत्रों के अनुसार, स्टारलिंक 2026 की दूसरी तिमाही (April-June) तक भारत में कमर्शियल सर्विस शुरू कर सकता है।

  • प्री-बुकिंग पहले ही कई लोगों ने कर रखी थी (जिनके पैसे रिफंड हो गए थे), वे अब प्राथमिकता सूची में हो सकते हैं।
  • शुरुआत में हार्डवेयर (Dish + Router) की कीमत थोड़ी ज्यादा हो सकती है, लेकिन सरकार ‘मेड इन इंडिया’ के तहत इसे सस्ता करने का दबाव डाल सकती है।

9. क्या यह आपके लिए है? (Who should buy?)

  • शहरी यूजर: अगर आपके पास सस्ता फाइबर ब्रॉडबैंड है, तो आपको स्टारलिंक की जरूरत नहीं है।
  • रिमोट वर्कर: अगर आप पहाड़ों से ‘वर्क फ्रॉम होम’ करना चाहते हैं, तो यह आपके लिए बेस्ट है।
  • इमरजेंसी सर्विस: पुलिस, सेना और आपदा प्रबंधन के लिए यह गेम-चेंजर होगा।

7,500 Satellites Approval ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि एलन मस्क भारत में ‘टेस्टिंग’ करने नहीं, बल्कि ‘राज’ करने आ रहे हैं। तकनीकी रूप से स्टारलिंक के पास अभी कोई सानी नहीं है।

लेकिन भारत ‘कीमत’ (Price Sensitive Market) का बाजार है। अगर मस्क सही दाम पर यह टेक्नोलॉजी दे पाए, तो भारत का डिजिटल परिदृश्य पूरी तरह बदल जाएगा।

तैयार हो जाइए, क्योंकि अब इंटरनेट जमीन से नहीं, सीधे आसमान से बरसेगा!

By Meera Shah

मीरा तेज खबरी (Tez Khabri) के साथ जुड़ी एक समाचार लेखिका हैं। वे सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, महिला संबंधित विषयों और जनहित से जुड़ी खबरों पर लेखन करती हैं। मीरा का उद्देश्य पाठकों तक सरल भाषा में सत्यापित, उपयोगी और भरोसेमंद जानकारी पहुंचाना है।

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