कश्मीर की वादियों में सर्दियों का आगमन जहाँ एक ओर पर्यटकों के चेहरे पर मुस्कान लाता है, वहीं दूसरी ओर यह घाटी के परिवहन और कनेक्टिविटी के लिए एक बड़ी चुनौती भी पेश करता है। हाल के दिनों में कश्मीर घाटी में भारी हिमपात और घने कोहरे के कारण सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। इस खराब मौसम का असर सबसे अधिक हवाई यातायात पर देखने को मिला है। श्रीनगर के शेख-उल-आलम अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से संचालित होने वाली दर्जनों उड़ानें रद्द कर दी गई हैं, जिससे हजारों यात्रियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
श्रीनगर एयरपोर्ट कश्मीर को देश और दुनिया के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाला मुख्य मार्ग है। जब भी यहाँ दृश्यता (Visibility) कम होती है या रनवे पर बर्फ जमा हो जाती है, तो सुरक्षा कारणों से उड़ानों को स्थगित या रद्द करना अनिवार्य हो जाता है। लेकिन इस तकनीकी अनिवार्यता के पीछे उन यात्रियों का दर्द छिपा है जो घंटों एयरपोर्ट पर इंतजार करते हैं या जिनकी जरूरी योजनाएं इस व्यवधान के कारण मिट्टी में मिल जाती हैं।
कश्मीर का शीतकालीन भूगोल और विमानन चुनौतियां
श्रीनगर हवाई अड्डा एक भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण स्थान पर स्थित है। चारों ओर हिमालय की ऊँची चोटियों से घिरी कश्मीर घाटी में सर्दियों के दौरान ‘इंवर्जन’ (Inversion) की स्थिति बन जाती है, जिससे धुंध और कोहरा जमीन के करीब जमा हो जाता है। विमानन विज्ञान के अनुसार, एक विमान को सुरक्षित रूप से उतरने के लिए रनवे पर एक निश्चित दृश्यता की आवश्यकता होती है। श्रीनगर एयरपोर्ट पर अक्सर दृश्यता 500 मीटर से भी कम हो जाती है, जो सुरक्षित लैंडिंग के लिए अपर्याप्त है।
जब हम कहते हैं कि खराब मौसम का असर उड़ानों पर पड़ा है, तो इसका मतलब केवल बर्फ गिरना नहीं होता। तकनीकी रूप से, कोहरा (Fog) बर्फबारी से भी अधिक खतरनाक साबित होता है। कोहरे के कारण पायलट को रनवे की लाइटें दिखाई नहीं देतीं। हालांकि अब श्रीनगर एयरपोर्ट पर इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) को अपग्रेड किया गया है, लेकिन अत्यधिक खराब परिस्थितियों में वह भी बेअसर हो जाता है।

यात्रियों की परेशानी: एयरपोर्ट पर बढ़ता इंतजार
जैसे ही फ्लाइट्स के रद्द होने की घोषणा होती है, श्रीनगर एयरपोर्ट का नजारा बदल जाता है। यात्रियों की भीड़ टर्मिनल के बाहर और अंदर जमा होने लगती है। इनमें से कई ऐसे पर्यटक होते हैं जिनका होटल चेक-आउट हो चुका होता है और उनके पास वापस जाने के लिए कोई जगह नहीं होती। वहीं कई ऐसे स्थानीय लोग होते हैं जिन्हें मेडिकल इमरजेंसी या जरूरी काम से दिल्ली या अन्य शहरों में जाना होता है।
उड़ानें रद्द होने से न केवल समय की बर्बादी होती है, बल्कि यात्रियों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ जाता है। एयरलाइंस अक्सर अगली उपलब्ध उड़ान में सीट देने का वादा करती हैं, लेकिन पीक सीजन के दौरान अगली फ्लाइट मिलना आसान नहीं होता। ऐसे में यात्रियों को महंगे दामों पर नए टिकट खरीदने पड़ते हैं या फिर श्रीनगर के होटलों में रुकने के लिए अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है।
एयरलाइंस और अथॉरिटी का प्रबंधन
श्रीनगर एयरपोर्ट अथॉरिटी और विभिन्न एयरलाइंस के लिए उड़ानों का रद्दीकरण एक प्रशासनिक चुनौती है। जैसे ही मौसम विभाग की ओर से चेतावनी जारी की जाती है, एयरपोर्ट पर बर्फ हटाने वाली मशीनों (Snow Blowers) को सक्रिय कर दिया जाता है। रनवे से बर्फ हटाना एक निरंतर प्रक्रिया है, क्योंकि यदि बर्फ जम गई तो विमान के टायर फिसलने का डर रहता है।
एयरलाइंस की जिम्मेदारी होती है कि वे यात्रियों को समय पर सूचना दें। अक्सर यह देखा गया है कि यात्री एयरपोर्ट पहुँच जाते हैं और उसके बाद उन्हें पता चलता है कि उनकी फ्लाइट रद्द हो गई है। डिजिटल दौर में एसएमएस और ईमेल के माध्यम से सूचना देने के बावजूद, कई बार मौसम इतनी तेजी से बदलता है कि अंतिम समय में रद्दीकरण करना पड़ता है।
पर्यटन उद्योग पर रद्दीकरण का प्रभाव
कश्मीर की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा पर्यटन पर टिका है। सर्दियों में गुलमर्ग, पहलगाम और सोनमर्ग की बर्फ देखने के लिए देशभर से लोग आते हैं। लेकिन खराब मौसम का असर सीधे तौर पर पर्यटन उद्योग की साख पर पड़ता है। जब पर्यटक एयरपोर्ट पर फंसते हैं या उनकी छुट्टियां खराब होती हैं, तो इसका संदेश अन्य संभावित पर्यटकों तक पहुँचता है।
होटल व्यवसायियों के लिए भी यह दोहरी मार होती है। एक तरफ नए आने वाले पर्यटक नहीं पहुँच पाते, जिससे उनकी बुकिंग रद्द होती है। दूसरी तरफ, जो पर्यटक वापस जाना चाहते हैं, उन्हें मजबूरन रुकना पड़ता है, जिससे कमरों की उपलब्धता कम हो जाती है। ट्रेवल एजेंटों को भी लगातार बुकिंग रिशेड्यूल करने के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
सड़क मार्ग की स्थिति: क्या कोई विकल्प है?
जब हवाई यातायात बंद होता है, तो यात्रियों की नजरें श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-44) पर टिक जाती हैं। लेकिन दुर्भाग्य से, जिस मौसम में फ्लाइट्स रद्द होती हैं, उसी मौसम में राजमार्ग पर भी भूस्खलन (Landslides) और बर्फबारी के कारण रास्ता बंद हो जाता है। रामबन और बनिहाल के इलाकों में पहाड़ों से गिरते पत्थर और बर्फ सड़क यातायात को नामुमकिन बना देते हैं।
ऐसे में कश्मीर घाटी पूरी तरह से देश के अन्य हिस्सों से कट जाती है। रेल मार्ग (बनिहाल-श्रीनगर-बारामूला) स्थानीय स्तर पर तो राहत देता है, लेकिन पूरी तरह से घाटी के बाहर जाने के लिए यह अभी भी निर्माणाधीन सुरंगों और लिंक पर निर्भर है। कनेक्टिविटी का यह अभाव कश्मीर की एक स्थायी समस्या बन गया है।

तकनीकी समाधान और भविष्य की राह
श्रीनगर एयरपोर्ट को ‘कोहरे’ से निपटने के लिए और अधिक आधुनिक तकनीक की आवश्यकता है। CAT-II या CAT-III इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम की स्थापना से बहुत कम दृश्यता में भी विमान उतर सकते हैं। हालांकि, श्रीनगर एयरपोर्ट भारतीय वायु सेना के नियंत्रण में है, जिससे यहाँ नागरिक विमानन के लिए तकनीकी अपग्रेडेशन में सामरिक और सुरक्षा संबंधी बाधाएं आती हैं।
भविष्य में, जब दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे और उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक पूरी तरह से तैयार हो जाएगा, तो हवाई यातायात पर निर्भरता कम होगी। तब खराब मौसम में भी यात्री सुरक्षित और वैकल्पिक मार्गों से यात्रा कर सकेंगे। लेकिन वर्तमान में, हवाई यात्रा ही सबसे तेज और प्राथमिक साधन है, जिसके कारण मौसम का मिजाज यात्रियों की किस्मत तय करता है।
यात्रियों के लिए कुछ जरूरी सुझाव
यदि आप सर्दियों के मौसम में कश्मीर की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो कुछ सावधानियां बरतनी जरूरी हैं:
- बफर डे (Buffer Day) रखें: अपनी वापसी की तारीख के बाद कम से कम एक अतिरिक्त दिन का समय रखें ताकि फ्लाइट रद्द होने पर आपकी आगे की योजनाएं प्रभावित न हों।
- एयरपोर्ट पहुँचने से पहले स्टेटस चेक करें: एयरलाइंस के ऐप और सोशल मीडिया हैंडल पर नजर रखें। अक्सर एयरपोर्ट पहुँचने के बाद पता चलता है कि फ्लाइट रद्द है।
- ट्रेवल इंश्योरेंस: उड़ानों के रद्दीकरण और होटल स्टे के अतिरिक्त खर्च को कवर करने के लिए एक अच्छा यात्रा बीमा जरूर लें।
- गर्म कपड़े और जरूरी दवाइयां: हमेशा अपने पास कुछ अतिरिक्त गर्म कपड़े और जरूरी दवाइयां रखें, क्योंकि यदि आप एयरपोर्ट पर लंबे समय तक फंसते हैं, तो वहाँ की ठंड और तनाव आपकी सेहत बिगाड़ सकता है।
मौसम विभाग की भूमिका
कश्मीर में मौसम का पूर्वानुमान लगाना एक जटिल कार्य है। पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) की तीव्रता और दिशा अंतिम समय में बदल सकती है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) लगातार श्रीनगर एयरपोर्ट को सटीक जानकारी प्रदान करता है। उनकी भविष्यवाणियों के आधार पर ही एयरलाइंस अपनी उड़ानों का समय तय करती हैं। लेकिन प्रकृति के आगे कई बार विज्ञान भी छोटा पड़ जाता है।
प्रकृति और आधुनिकता का संघर्ष
श्रीनगर एयरपोर्ट पर उड़ानों का रद्द होना केवल एक समाचार नहीं है, बल्कि यह प्रकृति की शक्ति और मानवीय प्रयासों के बीच के संघर्ष की कहानी है। कश्मीर की सुंदरता उसकी बर्फ में है, लेकिन यही बर्फ उसकी कनेक्टिविटी के लिए अभिशाप बन जाती है। यात्रियों की परेशानी को कम करने के लिए बेहतर बुनियादी ढांचे और अधिक पारदर्शी सूचना तंत्र की आवश्यकता है।
जब तक तकनीक हमें कोहरे और बर्फ पर पूर्ण विजय नहीं दिला देती, तब तक खराब मौसम का असर यात्रियों की योजनाओं को प्रभावित करता रहेगा। कश्मीर की यात्रा केवल शारीरिक नहीं, बल्कि एक मानसिक यात्रा भी है जहाँ आपको धैर्य और प्रकृति के प्रति सम्मान बनाए रखना पड़ता है।
आज जब श्रीनगर एयरपोर्ट के टर्मिनलों पर यात्री निराशा और उम्मीद के बीच झूल रहे हैं, तो यह हमें याद दिलाता है कि विकास के बावजूद हम अभी भी कुदरत के रहम-ओ-करम पर हैं। उम्मीद है कि आने वाले समय में श्रीनगर एयरपोर्ट पर ऐसी तकनीकें आएंगी जो धुंध के सीने को चीरकर विमानों को सुरक्षित उतार सकेंगी और यात्रियों का सफर बिना किसी रुकावट के पूरा होगा।
कश्मीर की वादियों में बिताया गया समय अनमोल है, और एयरपोर्ट की ये परेशानियां उस अनुभव का एक हिस्सा बन जाती हैं। लेकिन प्रशासन और एयरलाइंस को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यात्रियों को कम से कम असुविधा हो और उन्हें सुरक्षित रूप से उनकी मंजिल तक पहुँचाया जाए।
