Taj Mahal Tricolor

26 जनवरी, यानी गणतंत्र दिवस, भारत के हर नागरिक के लिए गर्व और सम्मान का दिन होता है। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक पूरा देश देशभक्ति के रंग में रंगा होता है। दिल्ली के कर्तव्य पथ पर जहाँ भारत अपनी सैन्य ताकत और सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन कर रहा था, वहीं दुनिया के सात अजूबों में शामिल और भारत की पहचान माने जाने वाले ताजमहल से एक ऐसी खबर सामने आई जिसने प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी।

आगरा में स्थित ऐतिहासिक इमारत ताजमहल एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। गणतंत्र दिवस के मौके पर सुरक्षा के कड़े इंतजामों को धता बताते हुए कुछ कार्यकर्ताओं ने ताजमहल परिसर के अंदर भारतीय राष्ट्रीय ध्वज, तिरंगा फहरा दिया। इतना ही नहीं, इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया। इस कृत्य की जिम्मेदारी एक हिंदू संगठन ने ली है, जिसके बाद से देश भर में बहस छिड़ गई है।

यह घटना महज एक झंडा फहराने की नहीं है, बल्कि यह देश के सबसे सुरक्षित स्मारकों में से एक की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। आज के इस विस्तृत ब्लॉग में, हम ताजमहल में तिरंगा फहराने की इस घटना, इसके पीछे के हिंदू संगठन के दावों, सुरक्षा में हुई चूक, वायरल वीडियो की सच्चाई और इसके ऐतिहासिक व कानूनी पहलुओं पर गहराई से चर्चा करेंगे।

घटनाक्रम: 26 जनवरी की सुबह क्या हुआ?

गणतंत्र दिवस के मद्देनजर ताजमहल समेत देश के सभी प्रमुख स्मारकों पर ‘हाई अलर्ट’ जारी था। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवान चप्पे-चप्पे पर तैनात थे। पर्यटकों की गहन तलाशी ली जा रही थी। लेकिन इन सब के बावजूद, सुबह के वक्त कुछ ऐसा हुआ जिसकी उम्मीद प्रशासन को नहीं थी।

प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस सूत्रों के अनुसार, सुबह करीब 10:30 से 11:00 बजे के बीच, तीन से चार युवक पर्यटक बनकर ताजमहल परिसर में दाखिल हुए। उन्होंने आम पर्यटकों की तरह टिकट लिया और सुरक्षा जांच से गुजरे। यहीं पर सबसे बड़ा सवाल उठता है कि इतनी कड़ी चेकिंग के बावजूद वे अपने साथ तिरंगा झंडा अंदर ले जाने में कैसे सफल हुए?

ताजमहल के मुख्य गुंबद के पास स्थित पार्क में पहुंचकर, इन युवकों ने अचानक अपनी जेब या कपड़ों के नीचे छिपाया हुआ तिरंगा निकाला। इससे पहले कि वहां मौजूद सुरक्षाकर्मी या अन्य पर्यटक कुछ समझ पाते, उन्होंने ताजमहल में तिरंगा लहराना शुरू कर दिया। वे जोर-जोर से ‘भारत माता की जय’, ‘वंदे मातरम’ और ‘जय श्री राम’ के नारे लगाने लगे।

वहां मौजूद अन्य पर्यटकों ने अपने मोबाइल फोन से इस घटना को रिकॉर्ड करना शुरू कर दिया। देखते ही देखते यह वायरल वीडियो सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स जैसे ट्विटर (X), फेसबुक और व्हाट्सएप पर ट्रेंड करने लगा। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे युवक बिना किसी डर के स्मारक के सामने झंडा लहरा रहे हैं।

taj mahal Teranga

हिंदू संगठन का दावा और जिम्मेदारी

घटना के कुछ ही देर बाद, एक स्थानीय हिंदू संगठन ने इस कृत्य की जिम्मेदारी ली। संगठन के पदाधिकारियों ने मीडिया के सामने आकर दावा किया कि ताजमहल असल में ‘तेजो महालय’ है, जो एक प्राचीन शिव मंदिर था। उनका कहना है कि गणतंत्र दिवस के अवसर पर अपने ही देश के एक स्मारक, जो उनकी आस्था का केंद्र भी है, वहां राष्ट्रध्वज फहराना कोई अपराध नहीं है।

संगठन के प्रवक्ता ने बयान जारी करते हुए कहा, “हमने बहुत पहले ही प्रशासन को चेताया था कि हम गणतंत्र दिवस पर वहां जाएंगे और तिरंगा फहराएंगे। यह हमारा संवैधानिक अधिकार है। ताजमहल की जगह पर पहले शिव मंदिर था, और वहां भगवा और तिरंगा फहराना हमारी देशभक्ति और धर्म के प्रति निष्ठा का प्रतीक है।”

इस हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने जानबूझकर इस दिन को चुना ताकि वे दुनिया को यह संदेश दे सकें कि भारत के हर कण पर भारत का ही अधिकार है और वे तुष्टीकरण की राजनीति को नहीं मानेंगे। यह पहली बार नहीं है जब इस संगठन ने ऐसा दावा किया है या ऐसा करने का प्रयास किया है, लेकिन इस बार वे सुरक्षा घेरे को तोड़ने में सफल रहे, जो एक बड़ी बात है।

वायरल वीडियो: सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़

घटना का वायरल वीडियो सामने आते ही इंटरनेट पर बहस छिड़ गई। वीडियो में देखा जा सकता है कि एक युवक ने भगवा गमछा पहना हुआ है और हाथ में तिरंगा लेकर उसे हवा में लहरा रहा है। उसके साथी उसे कवर कर रहे हैं और नारे लगा रहे हैं। कुछ ही सेकंड बाद, सीआईएसएफ (CISF) के जवान दौड़ते हुए आते हैं और युवकों को पकड़ लेते हैं।

सोशल मीडिया पर लोगों की राय दो हिस्सों में बंटी हुई नजर आ रही है:

  1. समर्थन में: एक बड़ा वर्ग इसे देशभक्ति का कार्य बता रहा है। उनका तर्क है कि भारत में कहीं भी तिरंगा फहराना गर्व की बात होनी चाहिए, न कि अपराध। वे हिंदू संगठन के इस कदम की सराहना कर रहे हैं और कह रहे हैं कि ताजमहल में तिरंगा फहराने से उसकी शान और बढ़ गई है।
  2. विरोध में: दूसरा वर्ग इसे कानून का उल्लंघन और ऐतिहासिक धरोहर के नियमों की अवहेलना मान रहा है। उनका कहना है कि एएसआई (ASI) के नियमों के मुताबिक, ऐतिहासिक स्मारकों के अंदर किसी भी तरह की प्रचार सामग्री या झंडे (लाल किले को छोड़कर) की अनुमति नहीं है। वे इसे सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश बता रहे हैं।

सुरक्षा में सेंध: CISF और प्रशासन पर सवाल

इस पूरी घटना में सबसे चिंताजनक पहलू सुरक्षा में हुई चूक है। ताजमहल देश के उन चुनिंदा स्थानों में से है जहां की सुरक्षा व्यवस्था संसद भवन या एयरपोर्ट जैसी होती है। यहाँ परिंदा भी पर नहीं मार सकता। तो फिर गणतंत्र दिवस जैसे संवेदनशील मौके पर यह कैसे हुआ?

1. मेटल डिटेक्टर और फ्रिस्किंग की विफलता

ताजमहल में प्रवेश करने के लिए हर पर्यटक को मेटल डिटेक्टर से गुजरना पड़ता है और सुरक्षाकर्मी उन्हें हाथ से भी चेक (Frisking) करते हैं। माचिस, लाइटर, पेन, यहाँ तक कि कभी-कभी किताबें ले जाने पर भी पाबंदी होती है। ऐसे में, एक पूरा झंडा, चाहे वह कपड़े का ही क्यों न हो, अंदर कैसे पहुँचा? क्या यह सुरक्षाकर्मियों की लापरवाही थी या मिलीभगत?

2. इंटेलिजेंस फेलियर (Intelligence Failure)

जब हिंदू संगठन ने पहले ही सांकेतिक चेतावनी दी थी, तो स्थानीय पुलिस और खुफिया विभाग (L.I.U.) क्या कर रहे थे? उन्हें इन कार्यकर्ताओं को स्मारक के बाहर ही रोक लेना चाहिए था। यह स्पष्ट रूप से खुफिया तंत्र की विफलता को दर्शाता है।

3. वीडियो रिकॉर्डिंग

ताजमहल के अंदर प्रोफेशनल वीडियो कैमरे ले जाना मना है, लेकिन मोबाइल की अनुमति है। वायरल वीडियो मोबाइल से बनाया गया था, लेकिन जिस तरह से इसे शूट किया गया, वह प्री-प्लान्ड लगता है।

सीआईएसएफ के अधिकारियों ने कहा है कि वे इस मामले की आंतरिक जांच करेंगे। ड्यूटी पर तैनात जवानों से पूछताछ की जा रही है और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि यह पता चल सके कि झंडा किस तरह छिपाकर लाया गया था।

प्रशासनिक कार्यवाही और गिरफ्तारियां

घटना के तुरंत बाद, सीआईएसएफ के जवानों ने युवकों को हिरासत में ले लिया और उन्हें स्थानीय ताजगंज पुलिस स्टेशन के हवाले कर दिया। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज किया है।

आगरा के पुलिस अधीक्षक (SP City) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि, “ताजमहल परिसर के अंदर धार्मिक या राजनीतिक गतिविधियों पर प्रतिबंध है। गणतंत्र दिवस पर कुछ लोगों ने वहां झंडा फहराकर नियमों का उल्लंघन किया है। हमने संबंधित हिंदू संगठन के चार कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है। उन पर शांति भंग करने और सरकारी आदेशों की अवहेलना करने की धाराओं में केस दर्ज किया गया है।”

पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) ने भी इस घटना पर अपनी रिपोर्ट संस्कृति मंत्रालय को भेजने की बात कही है। एएसआई के नियमों के अनुसार, ताजमहल के 500 मीटर के दायरे में किसी भी तरह का प्रदर्शन प्रतिबंधित है।

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ताजमहल और विवादों का पुराना रिश्ता

यह कोई पहली घटना नहीं है जब ताजमहल विवादों में आया हो। इसका एक लंबा इतिहास रहा है, जो अक्सर हिंदू संगठन के दावों के इर्द-गिर्द घूमता है।

तेजो महालय थ्योरी

इतिहासकार पी.एन. ओक ने अपनी किताब में दावा किया था कि ताजमहल वास्तव में एक शिव मंदिर था जिसे ‘तेजो महालय’ कहा जाता था। उनका तर्क था कि शाहजहाँ ने इसे जयपुर के राजा से कब्जाया था और इसे मकबरे में बदल दिया था। इसी थ्योरी के आधार पर कई संगठन ताजमहल में पूजा करने और वहां भगवा या तिरंगा फहराने की मांग करते रहे हैं।

बंद कमरों का रहस्य

ताजमहल के तहखाने में 22 कमरे हैं जो हमेशा बंद रहते हैं। कई बार कोर्ट में याचिकाएं दायर की गई हैं कि इन कमरों को खोला जाए ताकि “सच्चाई” सामने आ सके। हालांकि, एएसआई ने हमेशा सुरक्षा और संरचनात्मक स्थिरता का हवाला देते हुए इन्हें खोलने से इनकार किया है। यह रहस्यवाद अक्सर ऐसी घटनाओं को हवा देता है।

शिव चालीसा पाठ और जलाभिषेक

इससे पहले भी कई बार कार्यकर्ताओं ने ताजमहल के अंदर शिव चालीसा पढ़ने या पानी की बोतल से ‘जलाभिषेक’ करने का प्रयास किया है। हर बार पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया है, लेकिन ये घटनाएं यह साबित करती हैं कि एक बड़े वर्ग के लिए ताजमहल केवल एक मकबरा नहीं, बल्कि आस्था का प्रश्न भी है।

कानूनी पहलू: क्या कहता है कानून?

क्या ताजमहल में तिरंगा फहराना अपराध है? यह एक जटिल प्रश्न है।

  1. फ्लैग कोड ऑफ इंडिया (Flag Code of India): भारतीय ध्वज संहिता के अनुसार, तिरंगा फहराना हर नागरिक का अधिकार है, बशर्ते कि झंडे का सम्मान बना रहे। लेकिन यह अधिकार “उचित स्थानों” पर ही लागू होता है।
  2. AMASR Act, 1958: प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम (AMASR Act) के तहत, संरक्षित स्मारकों (Protected Monuments) में ऐसी कोई भी गतिविधि वर्जित है जो स्मारक के मूल स्वरूप या वहां की परंपरा से अलग हो। ताजमहल में केवल शुक्रवार को नमाज की अनुमति है (वह भी केवल स्थानीय लोगों के लिए)। इसके अलावा वहां किसी भी धार्मिक या राजनीतिक गतिविधि की अनुमति नहीं है।
  3. सुप्रीम कोर्ट के आदेश: सुप्रीम कोर्ट ने ताजमहल की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर कड़े निर्देश दिए हैं। परिसर के अंदर किसी भी तरह का प्रदर्शन कोर्ट के आदेशों की अवमानना माना जा सकता है।

इसलिए, यद्यपि तिरंगा फहराना एक देशभक्तिपूर्ण कार्य है, लेकिन निषिद्ध क्षेत्र (Prohibited Area) में नियमों को तोड़कर ऐसा करना कानूनी दायरे में अपराध की श्रेणी में आता है।

सोशल मीडिया का प्रभाव और जनमत

आज के दौर में कोई भी घटना तब तक पूरी नहीं होती जब तक वह डिजिटल दुनिया में हलचल न मचा दे। ताजमहल में तिरंगा फहराने का वायरल वीडियो इस बात का प्रमाण है कि तकनीक ने विरोध प्रदर्शनों का तरीका बदल दिया है।

वीडियो में नारे लगाते युवक जानते थे कि उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा, लेकिन उनका मुख्य उद्देश्य वीडियो बनाना और उसे वायरल करना था। यह एक तरह का ‘डिजिटल सत्याग्रह’ या ‘डिजिटल विरोध’ बन गया है। हैशटैग #TajMahal, #TirangaInTaj और #TejoMahalaya ट्विटर पर शीर्ष ट्रेंड्स में शामिल हो गए।

  • एक यूजर ने लिखा: “अगर लाल किले पर तिरंगा फहर सकता है, तो ताजमहल पर क्यों नहीं? यह भारत है, यहाँ हर जगह तिरंगा होना चाहिए।”
  • दूसरे यूजर ने लिखा: “देशभक्ति दिल में होनी चाहिए, कानून तोड़ने में नहीं। ऐतिहासिक धरोहरों को राजनीति का अखाड़ा नहीं बनाना चाहिए।”

आगे की राह: क्या होगा इसका असर?

इस घटना के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।

  1. सुरक्षा प्रोटोकॉल में बदलाव: निश्चित रूप से आने वाले दिनों में ताजमहल की सुरक्षा और कड़ी की जाएगी। पर्यटकों की चेकिंग और सख्त होगी, जिससे आम पर्यटकों को थोड़ी असुविधा हो सकती है।
  2. कानूनी लड़ाई: गिरफ्तार किए गए कार्यकर्ताओं पर चलने वाला मुकदमा एक नजीर बनेगा। हिंदू संगठन इसे कानूनी लड़ाई के रूप में लड़ेगा और इसे ‘तेजो महालय’ के दावे को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल करेगा।
  3. पर्यटन पर असर: आगरा का पर्यटन उद्योग जो ताजमहल पर निर्भर है, ऐसी घटनाओं से चिंतित रहता है। विवाद और सुरक्षा की सख्ती से विदेशी पर्यटकों की संख्या पर असर पड़ सकता है।

गणतंत्र दिवस पर ताजमहल में तिरंगा फहराने की यह घटना भावनाओं और नियमों के टकराव का एक क्लासिक उदाहरण है। एक तरफ राष्ट्रप्रेम और धार्मिक अस्मिता का ज्वार है, तो दूसरी तरफ संविधान, कानून और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की जिम्मेदारी।

हिंदू संगठन ने जिम्मेदारी लेकर अपना संदेश साफ कर दिया है कि वे ताजमहल की पहचान को लेकर अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। वहीं, वायरल वीडियो ने देश के युवाओं के बीच एक नई बहस को जन्म दिया है।

लेकिन सबसे अहम सवाल प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के लिए है। अगर तीन-चार युवक झंडा लेकर अंदर घुस सकते हैं, तो कोई असामाजिक तत्व कुछ खतरनाक सामान लेकर भी घुस सकता है। यह घटना एक ‘वेक-अप कॉल’ है।

हमें यह समझना होगा कि तिरंगा हमारे गौरव का प्रतीक है। इसका सम्मान सर्वोपरि है। लेकिन लोकतंत्र में विरोध या अपनी बात रखने का तरीका भी संवैधानिक होना चाहिए। ताजमहल भारत की शान है और उसकी सुरक्षा हम सबकी जिम्मेदारी है। इस घटना को केवल एक आवेश में किया गया कृत्य न मानकर, इसके गहरे सामाजिक और राजनीतिक निहितार्थों को समझने की आवश्यकता है।

जैसे-जैसे पुलिस की जांच आगे बढ़ेगी, और भी कई तथ्य सामने आएंगे। तब तक, यह घटना भारतीय राजनीति और समाज में चर्चा का एक गर्म विषय बनी रहेगी।

जय हिंद!

By Meera Shah

मीरा तेज खबरी (Tez Khabri) के साथ जुड़ी एक समाचार लेखिका हैं। वे सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, महिला संबंधित विषयों और जनहित से जुड़ी खबरों पर लेखन करती हैं। मीरा का उद्देश्य पाठकों तक सरल भाषा में सत्यापित, उपयोगी और भरोसेमंद जानकारी पहुंचाना है।

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