Stock Market

शेयर बाजार में आज, यानी 16 फरवरी 2026, हाहाकार मच गया है। सेंसेक्स और निफ्टी में तो गिरावट है ही, लेकिन सबसे ज्यादा पिटाई उन कंपनियों की हुई है जो खुद शेयर बाजार का धंधा चलाती हैं। हम बात कर रहे हैं स्टॉक एक्सचेंजों और ब्रोकरेज हाउसों की।

आज सुबह बाजार खुलते ही BSE (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज), Angel One, Motilal Oswal और IIFL Securities जैसी कंपनियों के शेयरों में 9% से 15% तक का लोअर सर्किट (Lower Circuit) लग गया। निवेशकों के करोड़ों रुपये मिनटों में स्वाहा हो गए।

आखिर ऐसा क्या हुआ? इसका कारण है भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी किए गए नए लेंडिंग नियम (New Lending Norms)। ये नियम विशेष रूप से ‘लोन अगेंस्ट शेयर्स’ (LAS) और आईपीओ फाइनेंसिंग (IPO Financing) को लेकर हैं।

1. आज का बाजार: खूनी सोमवार (Bloody Monday)

आज के टॉप लूजर्स (Top Losers) की लिस्ट देखें तो आपको यकीन नहीं होगा:

  • BSE Ltd: -12% (सबसे बड़ी गिरावट)
  • Angel One: -10%
  • Motilal Oswal Financial Services: -9.5%
  • IIFL Securities: -8%
  • Geojit Financial: -7%
  • Groww / Zerodha: (ये अनलिस्टेड हैं, लेकिन इनके वैल्युएशन और बिजनेस पर भी खतरा मंडरा रहा है)

बाजार में यह डर इतना ज्यादा है कि निवेशकों ने बिना सोचे-समझे बिकवाली (Panic Selling) शुरू कर दी है।

2. RBI का ‘बम’: क्या हैं नए नियम?

RBI ने बैंकों और NBFCs (नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनीज) के लिए शेयर बाजार में पैसा उधार देने के नियमों को सख्त कर दिया है। इसे तीन मुख्य बिंदुओं में समझें:

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(A) IPO फाइनेंसिंग पर लगाम:

अभी तक क्या होता था? जब कोई बड़ा आईपीओ (जैसे 2024-25 में आए थे) आता था, तो हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (HNI) ब्रोकरेज फर्म से करोड़ों रुपये उधार लेकर आईपीओ में बोली लगाते थे। इसे ‘IPO Funding’ कहते हैं।

  • नया नियम: RBI ने अब आईपीओ फंडिंग की सीमा (Limit) तय कर दी है। अब कोई भी NBFC एक व्यक्ति को ₹1 करोड़ से ज्यादा का लोन आईपीओ के लिए नहीं दे सकती।
  • असर: इससे आईपीओ में जो भारी ओवरसब्सक्रिप्शन (Oversubscription) दिखता था, वह कम हो जाएगा। ब्रोकरेज फर्म्स को इस फंडिंग से जो मोटा ब्याज (Interest Income) मिलता था, वह बंद हो जाएगा।

(B) लोन अगेंस्ट शेयर्स (LAS) में सख्ती:

ब्रोकर्स अपने ग्राहकों को उनके शेयरों के बदले मार्जिन (Margin) देते थे ताकि वे और ज्यादा ट्रेडिंग कर सकें।

  • नया नियम: RBI ने ‘लोन टू वैल्यू’ (LTV) रेश्यो को घटा दिया है। मतलब, अगर आपके पास ₹100 के शेयर हैं, तो पहले आपको ₹70 तक का लोन मिलता था, अब शायद ₹50 ही मिले।
  • असर: इससे बाजार में लिक्विडिटी (तरलता) कम होगी और ट्रेडिंग वॉल्यूम घटेगा।

(C) NBFCs की निगरानी:

ज्यादातर ब्रोकरेज हाउस (जैसे Angel One, Motilal Oswal) अपनी खुद की NBFC आर्म के जरिए यह पैसा उधार देते थे। RBI ने अब इन NBFCs पर कैपिटल रिस्क वेटेज (Risk Weightage) बढ़ा दिया है, जिससे उनके लिए पैसा जुटाना महंगा हो जाएगा।

3. ब्रोकरेज कंपनियों को क्यों हो रहा है नुकसान?

आप सोच रहे होंगे कि नियम तो उधार देने पर है, तो शेयर क्यों गिर रहे हैं?

  1. ब्याज आय (Interest Income) में गिरावट: Angel One और Motilal Oswal जैसी कंपनियों की कमाई का एक बड़ा हिस्सा (लगभग 20-30%) इस बात से आता है कि वे ग्राहकों को मार्जिन फंडिंग देते हैं और उस पर ब्याज कमाते हैं। नए नियमों से यह आय सीधे तौर पर घटेगी।
  2. ट्रेडिंग वॉल्यूम घटेगा: जब ग्राहकों को कम उधारी मिलेगी, तो वे कम ट्रेड करेंगे। कम ट्रेड मतलब कम ब्रोकरेज। इससे BSE और NSE को मिलने वाली ट्रांजेक्शन फीस (Transaction Charges) भी कम हो जाएगी। यही कारण है कि आज BSE का शेयर सबसे ज्यादा टूटा है।
  3. वैल्युएशन का डर: पिछले 2 सालों में इन शेयरों ने मल्टीबैगर रिटर्न दिए थे। अब जब कमाई (Earnings) घटने का डर है, तो निवेशक ऊंचे वैल्युएशन पर शेयर रखना नहीं चाहते।

4. BSE (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) क्यों गिरा?

BSE कोई ब्रोकर नहीं है, फिर वह 12% क्यों टूटा?

  • BSE की कमाई का मुख्य स्रोत है ‘ट्रांजेक्शन चार्जेज’
  • खासकर ऑप्शंस ट्रेडिंग (Options Trading) में BSE ने NSE को कड़ी टक्कर दी थी।
  • RBI के नियमों से सट्टेबाजी और अत्यधिक लीवरेज (Leverage) कम होगा। इसका सीधा मतलब है कि ऑप्शंस के वॉल्यूम में गिरावट आएगी।
  • वॉल्यूम कम होने का मतलब है BSE के मुनाफे में सेंध।
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5. Groww और Zerodha (अनलिस्टेड) पर क्या असर होगा?

भले ही Groww और Zerodha शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं हैं, लेकिन वे भारत के सबसे बड़े ब्रोकर्स हैं।

  • Groww: नए ग्राहकों को जोड़ने की रफ्तार धीमी हो सकती है क्योंकि अब बाजार में ‘इजी मनी’ (Easy Money) नहीं है।
  • Zerodha: नितिन कामत (Zerodha CEO) पहले ही कह चुके हैं कि वे मार्जिन फंडिंग के खिलाफ हैं, लेकिन पूरी इंडस्ट्री का वॉल्यूम घटने से उनकी रेवेन्यू ग्रोथ पर भी असर पड़ेगा।
  • भविष्य में अगर ये कंपनियां अपना IPO लाने की सोच रही थीं, तो अब उन्हें अपने वैल्युएशन (Valuation) कम करने पड़ सकते हैं।

6. एक निवेशक के तौर पर आपको क्या करना चाहिए?

अगर आपके पोर्टफोलियो में ये शेयर हैं, तो पैनिक न करें।

  • लंबी अवधि का नजरिया: भारत का फाइनेंशियल बाजार (Financialization of Savings) अभी शुरू हुआ है। लोग FD से निकलकर शेयर बाजार में आ रहे हैं। यह ट्रेंड रुकेगा नहीं। RBI के नियम बाजार को सुरक्षित बनाने के लिए हैं, खत्म करने के लिए नहीं।
  • डिप पर खरीदारी (Buy on Dips): Angel One और BSE जैसी कंपनियां फंडामेंटली बहुत मजबूत हैं। अगर ये शेयर 15-20% और गिरते हैं, तो यह लंबी अवधि के लिए जमा करने का अच्छा मौका हो सकता है।
  • मार्जिन ट्रेडिंग से बचें: RBI का संदेश साफ है – “उधार के पैसे से सट्टा मत खेलो।” एक निवेशक के तौर पर आपको अपने खुद के पैसे से (Cash Segment) में निवेश करना चाहिए, न कि ब्रोकर से उधार लेकर।

7. भविष्य की राह: कंसोलिडेशन का दौर

2026 में ब्रोकरेज इंडस्ट्री में एक बड़ा बदलाव (Consolidation) देखने को मिल सकता है। छोटे ब्रोकर्स, जो सिर्फ मार्जिन फंडिंग के दम पर चल रहे थे, वे बंद हो सकते हैं या बड़े ब्रोकर्स के साथ मर्ज हो सकते हैं। केवल वही कंपनियां टिकेंगी जिनके पास टेक्नोलॉजी है और जो ‘एडवाइजरी’ (Advisory) पर फोकस करेंगी।

RBI का यह ‘कड़वा घूंट’ अल्पावधि में दर्दनाक लग सकता है, लेकिन लंबी अवधि में यह भारतीय शेयर बाजार को एक सट्टा बाजार बनने से रोकेगा और एक परिपक्व निवेश गंतव्य (Mature Investment Destination) बनाएगा।

By Vivan Verma

विवान तेज खबरी (Tez Khabri) के समाचार रिपोर्टर हैं, जो ब्रेकिंग न्यूज़ और राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को कवर करते हैं। विवान तथ्यात्मक रिपोर्टिंग और तेज अपडेट के लिए जाने जाते हैं और प्रशासनिक व जनहित से जुड़े मामलों पर नियमित लेखन करते हैं।

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