राजपाल यादव

भारतीय सिनेमा में अपनी बेमिसाल कॉमिक टाइमिंग और शानदार अभिनय से दर्शकों को हंसा-हंसा कर लोटपोट करने वाले दिग्गज अभिनेता राजपाल यादव (Rajpal Yadav) के लिए फरवरी 2026 का महीना किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। अपने एक पुराने वित्तीय विवाद और चेक बाउंस मामले के चलते उन्हें दिल्ली की तिहाड़ जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ा। हालांकि, 17 फरवरी 2026 की शाम उनके, उनके परिवार और उनके करोड़ों फैंस के लिए एक बड़ी राहत लेकर आई।

दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) द्वारा उनकी 6 महीने की सजा पर 18 मार्च 2026 तक के लिए अंतरिम रोक (Interim Stay) लगाने के बाद, राजपाल यादव को तिहाड़ जेल से रिहा कर दिया गया है। यह लेख सिर्फ एक न्यूज़ रिपोर्ट नहीं है, बल्कि एक विस्तृत ‘मेटा ब्लॉग’ है। इसमें हम राजपाल यादव की गिरफ्तारी, 14 साल पुराने उस ‘कर्ज’ के विवाद, कर्ज देने वाले बिजनेसमैन के दर्द, जेल से बाहर आने के बाद अभिनेता के भावुक बयान, बॉलीवुड इंडस्ट्री के समर्थन और कानूनी पचड़ों की पूरी टाइमलाइन का गहराई से विश्लेषण करेंगे।

1. तिहाड़ जेल से रिहाई: 17 फरवरी 2026 की वो शाम

राजपाल यादव को 9 करोड़ रुपये के पुराने कर्ज और चेक बाउंस मामले में अदालत के आदेशों की अवहेलना करने के कारण 5 फरवरी 2026 को तिहाड़ जेल में सरेंडर करना पड़ा था। लगभग 11-12 दिनों तक जेल में रहने के बाद, आखिरकार 17 फरवरी 2026 (मंगलवार) को शाम करीब 4:50 बजे वे तिहाड़ से बाहर आए।

जेल के बाहर आते ही मीडिया और उनके समर्थकों की भारी भीड़ वहां मौजूद थी। सफेद शर्ट पहने और चेहरे पर एक थका हुआ लेकिन राहत भरा भाव लिए राजपाल ने हाथ जोड़कर सबका अभिवादन किया। उनके लिए यह रिहाई केवल शारीरिक नहीं थी, बल्कि मानसिक रूप से भी एक बड़ी लड़ाई का पहला पड़ाव जीतने जैसी थी। यह अंतरिम रिहाई 19 फरवरी को उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में उनकी भतीजी की शादी में शामिल होने की उनकी याचिका पर मानवीय आधार और वित्तीय शर्तों को पूरा करने के बाद दी गई है।

2. दिल्ली हाई कोर्ट की कड़ी शर्तें और जस्टिस का फैसला

राजपाल यादव को यह रिहाई यूं ही नहीं मिली है। दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा (Justice Swarana Kanta Sharma) की पीठ ने इस मामले की गहन सुनवाई की। अदालत ने स्पष्ट किया कि उन्हें यह अंतरिम जमानत (Interim Bail) 18 मार्च तक के लिए दी जा रही है।

अदालत द्वारा रखी गई प्रमुख शर्तें:

  • 1.5 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट: अदालत के निर्देशानुसार, राजपाल यादव के वकील भास्कर उपाध्याय ने शिकायतकर्ता (M/S Murali Projects Pvt Ltd) के खाते में 1.5 करोड़ रुपये की राशि जमा कराई। पहले एफडीआर (FDR) के जरिए पैसे जमा करने की बात हुई थी, लेकिन अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया कि भुगतान डिमांड ड्राफ्ट (DD) के माध्यम से ही होना चाहिए।
  • निजी मुचलका (Bail Bond): अभिनेता को 1 लाख रुपये का निजी मुचलका (Personal Bond) और इतनी ही राशि की एक जमानत (Surety) अदालत में जमा करानी पड़ी।
  • पासपोर्ट सरेंडर: राजपाल यादव को अपना पासपोर्ट अदालत में सरेंडर करने का आदेश दिया गया है। वे अदालत की पूर्व अनुमति के बिना भारत छोड़कर नहीं जा सकते।
  • अदालत में उपस्थिति: उन्हें 18 मार्च 2026 को होने वाली अगली सुनवाई में व्यक्तिगत या वर्चुअली रूप से उपस्थित रहने का सख्त निर्देश दिया गया है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राजपाल यादव को फटकार भी लगाई थी। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा था, “आप इसलिए जेल नहीं गए क्योंकि कोर्ट ने कोई आदेश पारित किया था। आप जेल इसलिए गए क्योंकि आप कोर्ट के प्रति अपनी ही प्रतिबद्धताओं (Commitments) का पालन करने में विफल रहे। आपको पैसे चुकाने के 25-30 मौके दिए गए थे।”

3. जेल से बाहर आते ही राजपाल यादव का भावुक बयान

तिहाड़ की सलाखों से बाहर आने के बाद राजपाल यादव ने सबसे पहले मीडिया से बातचीत की। उनके शब्दों में अपनी कला के प्रति समर्पण और दर्शकों के लिए असीम कृतज्ञता झलक रही थी।

“बचपन से लेकर पचपन तक… पूरा देश मेरे साथ है” राजपाल यादव ने भावुक होते हुए कहा, “मुझे बॉलीवुड में 2027 में 30 साल हो जाएंगे। पूरे देश का, दुनिया का बच्चा-बच्चा मेरे साथ रहा, तभी तो मैं 200-250 फिल्में कर पाया। भारतीय सिनेमा का बच्चा, बूढ़ा और नौजवान मेरे कलेजे का टुकड़ा है। वो मेरे साथ था और आज भी मेरे साथ है।” कानूनी प्रक्रिया पर पूरा भरोसा अपने ऊपर लगे आरोपों पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा, “यह किस्सा 2010-12 में शुरू हुआ था, आज 2026 है। पिछले 10 साल में माननीय हाई कोर्ट ने जहां-जहां मुझे बुलाया है, मैंने हर आदेश का पालन किया है। मैं 100 प्रतिशत उपलब्ध हूं। अगर मुझ पर कोई आरोप है, तो मैं हर चौराहे पर उसका जवाब देने को तैयार हूं। मैं हाई कोर्ट को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने मुझे अपनी बात रखने का और सुनने का मौका दिया।”

4. काम की गुहार: “किरदार मेरी मर्जी का, पैसा उनकी मर्जी का”

जेल में बिताए गए 11-12 दिनों ने अभिनेता को बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर दिया। अपनी कला को अपना जीवन मानने वाले राजपाल ने बॉलीवुड इंडस्ट्री और निर्माताओं से एक खास अपील की।

उन्होंने कहा, “मैं उन सभी का धन्यवाद करता हूं जिन्होंने सोशल मीडिया या व्यक्तिगत रूप से मेरा समर्थन किया। मैं अपने आलोचकों का भी आभारी हूं क्योंकि आलोचनाओं से ही इंसान सीखता है। अब मैं इंडस्ट्री के अपने दोस्तों से कहना चाहता हूं कि— ‘जिन्होंने मदद की है, वो एक और मदद कर दें। किरदार (Role) मेरी मर्जी का दे दें, और पैसा (Remuneration) उनकी मर्जी का हो।’ मैं बस फिर से कैमरे के सामने जाकर लोगों का मनोरंजन करना चाहता हूं।”

यह बयान एक कलाकार की उस तड़प को दर्शाता है, जो विवादों के कारण अपने काम से दूर हो गया हो।

5. बॉलीवुड का मिला जबरदस्त समर्थन: संकट के समय कौन खड़ा रहा?

राजपाल यादव भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के सबसे चहेते सह-कलाकारों में से एक रहे हैं। इस कठिन दौर में पूरी इंडस्ट्री उनके समर्थन में एकजुट होती नजर आई।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बॉलीवुड के ‘भाईजान’ सलमान खान (Salman Khan), संकटमोचक के रूप में पहचाने जाने वाले सोनू सूद (Sonu Sood), अजय देवगन (Ajay Devgn), वरुण धवन (Varun Dhawan) और गायक मीका सिंह (Mika Singh) जैसे दिग्गजों ने उनकी मदद के लिए हाथ बढ़ाया। न केवल आर्थिक मदद की पेशकश की गई, बल्कि कई निर्माताओं ने उन्हें अपनी आने वाली फिल्मों में कास्ट करने और साइनिंग अमाउंट देकर उनका मनोबल बढ़ाने का प्रयास भी किया। फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) ने भी उनके पक्ष में अपनी आवाज बुलंद की।

6. तिहाड़ के अनुभव और जेल सुधार की मांग (Prison Reforms)

जेल से बाहर आने के बाद राजपाल यादव ने न सिर्फ अपने केस की बात की, बल्कि जेल के भीतर बंद अन्य कैदियों के अधिकारों और सुधारों पर भी एक गहरी टिप्पणी की।

कैदियों के लिए ‘KBC लाइफलाइन’ जैसी दूसरी छटपटाहट राजपाल ने बताया कि तिहाड़ में लगभग 20,000 कैदी हैं। उन्होंने कहा, “वहां कई कैदी ऐसे हैं जिन्होंने अपनी जिंदगी में सिर्फ एक गलती की है और पिछले 10-10 सालों से सजा काट रहे हैं। मेरी सरकार और सिस्टम से अपील है कि ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (KBC) की लाइफलाइन की तरह, ऐसे कैदियों को भी जिंदगी में एक दूसरी लाइफलाइन (मौका) मिलनी चाहिए। अगर 10 प्रतिशत लोगों को भी सुधरने का मौका मिले, तो समाज में बड़ा बदलाव आ सकता है।”

स्मोकिंग रूम्स (Smoking Rooms) की मांग उन्होंने जेल प्रशासन से जेल परिसर के अंदर ‘निर्धारित धूम्रपान कक्ष’ (Designated Smoking Areas) बनाने की भी वकालत की। उन्होंने कहा कि जेल के भीतर भी बुनियादी मानवाधिकारों और कुछ आवश्यक सुधारों पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

7. आखिर विवाद की जड़ क्या है? फिल्म ‘अता पता लापता’

इस पूरी कानूनी उलझन को समझने के लिए हमें आज से 14 साल पीछे, यानी साल 2010 में जाना होगा। यह वह समय था जब राजपाल यादव एक सफल अभिनेता के रूप में स्थापित हो चुके थे और उनके मन में निर्देशन (Direction) के क्षेत्र में कदम रखने की इच्छा जागी।

उन्होंने ‘अता पता लापता’ (Ata Pata Laapata) नाम की एक राजनीतिक व्यंग्य (Political Satire) फिल्म बनाने का फैसला किया। इस फिल्म के निर्माण के लिए उन्हें धन की आवश्यकता थी। दिल्ली स्थित एक कंपनी M/s Murali Projects Pvt Ltd से उन्होंने 5 करोड़ रुपये का कर्ज (Loan) लिया।

दुर्भाग्यवश, 2012 में जब यह फिल्म रिलीज हुई, तो यह बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप हो गई। फिल्म अपनी लागत का एक छोटा हिस्सा भी नहीं निकाल पाई। यहीं से राजपाल यादव के वित्तीय पतन और कानूनी लड़ाई की शुरुआत हुई।

8. कर्ज देने वाले बिजनेसमैन माधव गोपाल अग्रवाल का छलका दर्द

जहां एक तरफ राजपाल यादव के जेल जाने पर उनके फैंस निराश थे, वहीं दूसरी तरफ वह शख्स भी अपनी पीड़ा बयां कर रहा था जिसका करोड़ों रुपया 14 साल से फंसा हुआ था। मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के मालिक और बिजनेसमैन माधव गोपाल अग्रवाल ने हाल ही में ‘न्यूज़ पिंच’ को दिए एक इंटरव्यू में अपनी आपबीती सुनाई।

“मैं उनके सामने बच्चों की तरह रोया था” अग्रवाल ने खुलासा किया कि उन्हें राजपाल यादव से सांसद मिथिलेश कुमार कठेरिया ने मिलवाया था। राजपाल ने कहा था कि फिल्म लगभग पूरी हो चुकी है और अगर तुरंत फंड नहीं मिला तो सब बर्बाद हो जाएगा। अग्रवाल ने कहा, “मैं कोई फाइनेंसर नहीं था। मैं शुरुआत में हिचकिचा रहा था, लेकिन राजपाल जी की पत्नी राधा के कई भावुक मैसेज आने के बाद मैंने पिघल कर 5 करोड़ रुपये दे दिए।”

अग्रवाल ने बताया कि जब पैसे वापस मिलने का समय आया तो अभिनेता टालमटोल करने लगे। “मैं मुंबई में उनके घर 3-4 बार गया। दो बार तो मैं उनके सामने एक बच्चे की तरह फूट-फूट कर रोया, क्योंकि जो 5 करोड़ रुपये मैंने उन्हें दिए थे, वो मैंने खुद बैंक और अन्य लोगों से उधार लिए थे। मैं आज तक बैंक को उसका भारी ब्याज चुका रहा हूं।”

“यह कोई इन्वेस्टमेंट नहीं, बल्कि 100% लोन था” अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि एग्रीमेंट में साफ लिखा था कि फिल्म के हिट या फ्लॉप होने से पैसे की वापसी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। राजपाल और उनकी पत्नी ने पर्सनल गारंटी दी थी और पोस्ट-डेटेड चेक (Post-dated cheques) दिए थे। फिल्म के फ्लॉप होने के बाद 2013 में कोर्ट के जरिए 10.40 करोड़ रुपये का सेटलमेंट तय हुआ। राजपाल ने इस राशि को चुकाने के लिए 7 चेक दिए, लेकिन वे सभी बाउंस हो गए। अग्रवाल ने कहा, “मैं एक बिजनेसमैन हूं, मुझे किसी की बर्बादी में कोई खुशी नहीं मिलती। मुझे बस मेरे मेहनत के और उधार लिए हुए पैसे वापस चाहिए।”

9. 2010 से 2026 तक: कानूनी लड़ाई की पूरी टाइमलाइन

इस हाई-प्रोफाइल मामले को सिलसिलेवार ढंग से समझना आवश्यक है:

  • वर्ष 2010: राजपाल यादव ने फिल्म ‘अता पता लापता’ के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स से 5 करोड़ रुपये का लोन लिया।
  • वर्ष 2012: फिल्म रिलीज से ठीक पहले विवाद हुआ। म्यूजिक लॉन्च (जिसमें अमिताभ बच्चन भी शामिल हुए थे) के बाद अग्रवाल को लगा कि पैसे डूब सकते हैं। उन्होंने कोर्ट से रिलीज पर स्टे (Stay) लगवाया। राजपाल के भरोसे के बाद स्टे हटा, लेकिन फिल्म फ्लॉप हो गई।
  • वर्ष 2013: पैसे वापस न मिलने पर अग्रवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट की मध्यस्थता में 10.40 करोड़ रुपये का सेटलमेंट हुआ। राजपाल ने 7 चेक दिए।
  • चेक बाउंस: ये सातों चेक बैंक में बाउंस हो गए, जिसके बाद नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट (NI Act) की धारा 138 के तहत आपराधिक मामला दर्ज हुआ।
  • अप्रैल 2018: कड़कड़डूमा की मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा को चेक बाउंस का दोषी ठहराया और 6 महीने की जेल की सजा सुनाई।
  • वर्ष 2019: सेशन कोर्ट ने भी इस सजा को बरकरार रखा।
  • अक्टूबर 2025 – जनवरी 2026: राजपाल यादव ने कोर्ट में आश्वासन दिया था कि वे पैसे चुका देंगे। उन्होंने कुछ ड्राफ्ट (75-75 लाख के) दिए भी थे, लेकिन पूरी रकम (लगभग 9 करोड़ जो ब्याज समेत बन गई थी) चुकाने में वे विफल रहे।
  • 4 फरवरी 2026: कोर्ट के सब्र का बांध टूट गया। उन्हें 4 फरवरी की शाम 4 बजे तक सरेंडर करने का आदेश मिला।
  • 5 फरवरी 2026: राजपाल यादव ने तिहाड़ जेल में सरेंडर किया और उनकी सजा शुरू हुई।
  • 16-17 फरवरी 2026: 1.5 करोड़ रुपये का डीडी जमा करने और भतीजी की शादी का हवाला देने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने 18 मार्च तक सजा को निलंबित किया। 17 फरवरी को वे जेल से बाहर आ गए।

10. राजपाल यादव का 30 साल का स्वर्णिम सफर: फर्श से अर्श तक की कहानी

राजपाल यादव का जन्म उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले के एक छोटे से गांव में हुआ था। गांव की रामलीलाओं से शुरू हुआ उनका सफर ‘भारतेंदु नाट्य अकादमी’ (लखनऊ) और फिर ‘नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा’ (NSD, दिल्ली) तक पहुंचा।

1990 के दशक के अंत में वे मुंबई आए। राम गोपाल वर्मा की फिल्म ‘शूल’ (1999) में एक कुली के छोटे से रोल और फिर ‘जंगल’ (2000) में खूंखार विलेन ‘सिप्पा’ के किरदार ने उन्हें रातों-रात मशहूर कर दिया। लेकिन उनकी असली पहचान बनी कॉमेडी। ‘हंगामा’, ‘चुप चुप के’ (बंड्या का किरदार), ‘ढोल’, ‘भूल भुलैया’ (छोटा पंडित), ‘मुझसे शादी करोगी’, ‘मालामाल वीकली’, ‘गरम मसाला’, और ‘फिर हेरा फेरी’ जैसी फिल्मों ने उन्हें भारत के घर-घर में लोकप्रिय बना दिया। उनका शारीरिक हाव-भाव, चेहरे के एक्सप्रेशन और संवाद अदायगी बेजोड़ है। इसीलिए, जब वे जेल गए, तो सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री को ही नहीं, बल्कि आम जनता को भी बड़ा झटका लगा।

11. कानूनी पहलू: नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट (Section 138)

राजपाल यादव का मामला ‘चेक बाउंस’ का है, जो भारत में ‘नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881’ (Negotiable Instruments Act) की धारा 138 के तहत आता है।

  • कानून क्या कहता है? जब कोई व्यक्ति किसी कर्ज या देनदारी को चुकाने के लिए चेक जारी करता है और वह चेक बैंक खाते में पर्याप्त राशि (Insufficient Funds) न होने के कारण बाउंस हो जाता है, तो यह एक आपराधिक कृत्य (Criminal Offence) माना जाता है।
  • सजा का प्रावधान: इस अपराध में दोषी पाए जाने पर अधिकतम 2 साल की जेल, या चेक की राशि का दोगुना जुर्माना, या दोनों की सजा हो सकती है।
  • राजपाल यादव के मामले में कई चेक बाउंस हुए थे और उन्होंने बार-बार कोर्ट में किए गए वादों को तोड़ा था, जिसके कारण अंततः अदालत को सख्त रुख अपनाना पड़ा।

12. बॉलीवुड अभिनेताओं के लिए एक बड़ा सबक: प्रोडक्शन का जोखिम

राजपाल यादव की यह स्थिति पूरी फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक “केस स्टडी” है। अक्सर देखा जाता है कि सफल अभिनेता अपनी एक्टिंग के पैसे से संतुष्ट नहीं होते और फिल्म निर्माण (Production) या निर्देशन में उतर जाते हैं।

फिल्म मेकिंग केवल एक रचनात्मक कार्य नहीं है, बल्कि यह एक विशुद्ध व्यवसाय (Hardcore Business) है। इसमें वित्तीय प्रबंधन (Financial Management), डिस्ट्रीब्यूशन और मार्केटिंग की गहरी समझ चाहिए। राजपाल यादव एक बेहतरीन अभिनेता हैं, लेकिन एक निर्माता और निर्देशक के रूप में ‘अता पता लापता’ में लिया गया उनका 5 करोड़ का वित्तीय जोखिम उनके करियर का सबसे बड़ा ब्लंडर साबित हुआ, जिसका खामियाजा वे 14 साल बाद आज तक भुगत रहे हैं।

13. आगे का रास्ता: 18 मार्च 2026 की अहमियत

तिहाड़ जेल से यह रिहाई कोई क्लीन चिट नहीं है। यह केवल एक ‘राहत की सांस’ है। 18 मार्च 2026 को इस मामले की अगली सुनवाई होनी है।

  • राजपाल यादव के पास क्या विकल्प हैं? 18 मार्च से पहले, राजपाल यादव और उनकी कानूनी टीम को शिकायतकर्ता माधव गोपाल अग्रवाल के साथ बैठकर बकाया राशि (Remaining Dues) के निपटान का कोई ठोस प्लान अदालत के सामने पेश करना होगा।
  • यदि वे 18 मार्च तक अदालत को संतुष्ट नहीं कर पाते हैं या फंड का इंतजाम नहीं कर पाते हैं, तो हाई कोर्ट यह अंतरिम जमानत रद्द कर सकता है और उन्हें अपनी बाकी बची 6 महीने की सजा पूरी करने के लिए वापस तिहाड़ जेल जाना पड़ सकता है।

हालांकि, जिस तरह से बॉलीवुड के बड़े सितारों और प्रोड्यूसर्स ने उन्हें फिल्में ऑफर करने और आर्थिक मदद का आश्वासन दिया है, ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि वे जल्द ही अपना कर्ज चुका कर इस कानूनी भंवर से हमेशा के लिए बाहर निकल आएंगे।

राजपाल यादव का जीवन किसी फिल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं है। गांव के एक साधारण लड़के का नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा जाना, बॉलीवुड में राज करना, एक गलती के कारण करोड़ों के कर्ज में डूबना और फिर जेल की हवा खाना—यह सब जीवन के उतार-चढ़ाव का एक कड़वा सच है।

उन्होंने अपनी एक्टिंग से करोड़ों लोगों के चेहरों पर जो मुस्कान लाई है, शायद वही दुआएं आज उनके काम आ रही हैं। 17 फरवरी 2026 को तिहाड़ जेल के गेट से बाहर निकलते राजपाल यादव के चेहरे पर जो संघर्ष और उम्मीद का मिला-जुला भाव था, वह यह बताता है कि कलाकार कभी हार नहीं मानता। उम्मीद है कि इंडस्ट्री उनकी अपील को सुनेगी और “छोटा पंडित” एक बार फिर बड़े पर्दे पर उसी ऊर्जा के साथ वापसी करेगा।

By Vivan Verma

विवान तेज खबरी (Tez Khabri) के समाचार रिपोर्टर हैं, जो ब्रेकिंग न्यूज़ और राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को कवर करते हैं। विवान तथ्यात्मक रिपोर्टिंग और तेज अपडेट के लिए जाने जाते हैं और प्रशासनिक व जनहित से जुड़े मामलों पर नियमित लेखन करते हैं।

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