PSLV Launch Problem

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के लिए आज का दिन उम्मीदों भरा था, लेकिन इसका अंत निराशाजनक रहा। भारत का सबसे भरोसेमंद लॉन्च व्हीकल, जिसे इसरो का ‘Workhorse’ कहा जाता है—PSLV (Polar Satellite Launch Vehicle)—आज अपनी उड़ान के दौरान निर्धारित रास्ते से भटक गया।

श्रीहरिकोटा के लॉन्च पैड से आज सुबह जैसे ही रॉकेट ने उड़ान भरी, सब कुछ सामान्य लग रहा था। लेकिन लॉन्च के कुछ मिनटों बाद ही मिशन कंट्रोल रूम में सन्नाटा छा गया। स्क्रीन्स पर डेटा आना बंद हो गया और रॉकेट अपनी तय Trajectory (प्रक्षेपवક્ર) से अलग दिशा में जाता दिखाई दिया।

ISRO ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए पुष्टि की है कि, “PSLV मिशन अपने निर्धारित मापदંડों को पूरा नहीं कर सका और उपग्रह को कक्षा में स्थापित करने में विफल रहा है।”

PSLV रॉकेट उड़ान के दौरान तय रास्ते से भटका

1. मिशन का आँखों देखा हाल: कब और कैसे गड़बड़ी हुई

आज सुबह का मौसम साफ़ था और उल्टी गिनती (Countdown) सुचारू रूप से चल रही थी। यह PSLV की 60वीं से अधिक उड़ान थी, इसलिए वैज्ञानिकों और देशवासियों को सफलता का पूरा भरोसा था।

घटनाक्रम (Timeline of Failure):

  1. Lift-off (उड़ान): ठीक सुबह 10:00 बजे (काल्पनिक समय) रॉकेट ने नारंगी लपटों के साथ आसमान का सीना चीरते हुए उड़ान भरी।
  2. First Stage Separation: पहले चरण (Solid Stage) ने अपना काम बखूबी किया और अलग हो गया।
  3. Second Stage: विकास इंजन (Liquid Stage) ने भी सही समय पर इग्निशन लिया। यहाँ तक सब ठीक था।
  4. The Critical Moment: समस्या तब शुरू हुई जब रॉकेट तीसरे या चौथे चरण (Upper Stage) में था। ग्राफ पर रॉकेट की लाइन, जो हरी होनी चाहिए थी (Planned Path), वह लाल लाइन (Actual Path) से दूर जाने लगी।
  5. Loss of Signal: ग्राउंड स्टेशन को रॉकेट से डेटा मिलना बंद हो गया। वैज्ञानिक एक-दूसरे को चिंतित नज़रों से देखने लगे।
  6. घोषणा: मिशन डायरेक्टर ने भारी मन से घोषणा की कि रॉकेट अपने रास्ते से भटक गया है और मिशन असफल रहा है।
PSLV Launch Problem

2. ‘रास्ते से भटकना’ (Trajectory Deviation) क्या होता है?

रॉकेट साइंस में, Deviation एक बहुत ही गंभीर शब्द है। इसका मतलब है कि रॉकेट उस रास्ते पर नहीं चल रहा जो गणितीय रूप से तय किया गया था।

इसके मुख्य कारण क्या हो सकते हैं?

  • Guidance System Failure: रॉकेट का दिमाग उसका ‘नेविगेशन कंप्यूटर’ होता है। अगर इसके सेंसर ख़राब हो जाएँ, तो रॉकेट को पता नहीं चलता कि वह कहाँ जा रहा है।
  • Thruster Malfunction: रॉकेट को दिशा देने के लिए छोटे इंजनों (Thrusters) का इस्तेमाल होता है। अगर कोई वाल्व जाम हो जाए या इंजन फायर न हो, तो रॉकेट अनियंत्रित हो जाता है।
  • Aerodynamic Load: वायुमंडल के दबाव या तेज हवाओं के कारण भी रॉकेट अस्थिर हो सकता है।

इसरो अध्यक्ष ने कहा है, “हम अभी डेटा का विश्लेषण कर रहे हैं कि गड़बड़ी नेविगेशन में थी या प्रोपल्शन (इंजन) में।”

3. PSLV: इसरो का ‘बाहुबली’ क्यों आज लड़खड़ाया?

PSLV (Polar Satellite Launch Vehicle) की विफलता बहुत दुर्लभ है। इसे दुनिया के सबसे सफल रॉकेट्स में गिना जाता है।

  • इसने भारत के लिए Chandrayaan-1 और Mangalyaan जैसे ऐतिहासिक मिशन लॉन्च किए हैं।
  • 1993 में अपनी पहली उड़ान के बाद से, PSLV ने 50 से ज्यादा लगातार सफल मिशन दिए हैं।
  • सिर्फ 2017 में (PSLV-C39) हीट शील्ड न खुलने के कारण एक मिशन फेल हुआ था।

आज की विफलता इसलिए भी चौंकाने वाली है क्योंकि यह एक Proven Technology थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह शायद कोई ‘मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट’ या ‘सॉफ्टवेयर ग्लिच’ हो सकता है, न कि डिज़ाइन की कमी।

4. खोए हुए सैटेलाइट्स: क्या था ‘पेलोड’?

इस मिशन के साथ इसरो ने एक महत्वपूर्ण Earth Observation Satellite (EOS) और कुछ छोटे कमर्शियल सैટેलाइट्स भेजे थे।

  • EOS: इसका काम देश की सीमाओं की निगरानी करना और प्राकृतिक आपदाओं (बाढ़/तूफान) का पूर्वानुमान लगाना था।
  • नुकसान: इस विफलता के कारण करोड़ों रुपये के सैटेलाइट्स अब अंतरिक्ष कचरा (Space Debris) बन गए हैं या समुद्र में गिर गए हैं।
  • यह न केवल आर्थिक नुकसान है, बल्कि सामरिक (Strategic) रूप से भी भारत के लिए एक झटका है क्योंकि हमें इस सैटेलाइट के डेटा की सख्त जरूरत थी।

5. डेटा विश्लेषण: इसरो अब क्या करेगा? (Data Analysis Process)

इसरो ने Failure Analysis Committee (FAC) का गठन कर दिया है।

  • टेलीमेट्री डेटा: रॉकेट के हर सेकंड का डेटा (दबाव, तापमान, गति) रिकॉर्ड किया गया है। वैज्ञानिक इसका अध्ययन करेंगे।
  • मलबे की खोज: अगर रॉकेट का कोई हिस्सा समुद्र में गिरा है, तो उसे खोजने का प्रयास किया जाएगा ताकि भौतिक जांच हो सके।
  • सिमुलेशन: कंप्यूटर पर दोबारा वही परिस्थिति बनाकर देखा जाएगा कि गलती कहाँ हुई।

आमतौर पर इसरो को किसी विफलता की तह तक जाने में 2 से 3 महीने का समय लगता है।

6. भविष्य के मिशनों पर असर (Impact on Future Missions)

2026 इसरो के लिए बहुत व्यस्त वर्ष होने वाला था।

  • Gaganyaan (गगनयान): मानव को अंतरिक्ष में भेजने के मिशन की तैयारियाँ चल रही हैं। हालाँकि वह GSLV-Mk3 से जाएगा, लेकिन PSLV की विफलता से सुरक्षा प्रोटोकॉल और सख्त हो सकते हैं।
  • Commercial Launches: इसरो वैश्विक बाज़ार में कमर्शियल सैटेलाइट लॉन्च करता है। इस घटना से विदेशी ग्राहकों के विश्वास पर थोड़ा असर पड़ सकता है, हालाँकि इसरो का पिछला रिकॉर्ड इतना शानदार है कि यह प्रभाव अस्थायी होगा।

7. सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया: #ISRO

जैसे ही यह खबर फैली, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई।

  • समर्थन: अधिकांश भारतीय इसरो के साथ खड़े हैं। ट्विटर (X) पर लोग लिख रहे हैं, “गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में। इसरो, हमें आप पर गर्व है।”
  • आलोचना: कुछ लोग करदाताओं के पैसों की बर्बादी पर सवाल उठा रहे हैं, जो कि लोकतंत्र में स्वाभाविक है।
PSLV Launch Problem

8. अंतरिक्ष: एक कठिन चुनौती (Space is Hard)

हमें यह समझना होगा कि रॉकेट साइंस दुनिया का सबसे कठिन काम है।

  • एलोन मस्क (SpaceX): उनके स्टारशिप रॉकेट भी कई बार फटे हैं।
  • रूस और अमेरिका: लूना-25 (रूस) की हालिया विफलता इसका उदाहरण है।
  • इसरो की सफलता दर (Success Rate) अभी भी 95% से ऊपर है, जो नासा और यूरोपीय एजेंसी के बराबर है। एक मिशन फेल होने का मतलब अंत नहीं है।

9. क्या रॉकेट रिमोट से नष्ट किया गया? (Self-Destruct Mechanism)

जब कोई रॉकेट रास्ते से भटकता है और रिहायशी इलाकों की तरफ जाने का खतरा होता है, तो मिशन कंट्रोल रूम के पास एक Kill Switch होता है।

  • इसे Range Safety Officer (RSO) दबाता है।
  • संभावना है कि जब PSLV तय रास्ते से बहुत दूर चला गया, तो सुरक्षा कारणों से उसे हवा में ही नष्ट करने या समुद्र में गिराने का कमांड दिया गया होगा।

वापसी करेगा इसरो

PSLV Launch Failure निस्संदेह एक झटके वाली खबर है। वैज्ञानिक, जिन्होंने इस मिशन के लिए सालों मेहनत की, आज निराश हैं। लेकिन इतिहास गवाह है कि इसरो हर असफलता के बाद और अधिक मजबूती से वापसी करता है।

चाहे वह SLV-3 की शुरुआती विफलता हो या चंद्रयान-2 की क्रैश लैंडिंग, इसरो ने हमेशा अपनी गलतियों से सीखा है और दुनिया को चौंकाया है। हमें पूरा विश्वास है कि वैज्ञानिक जल्द ही इस समस्या को ढूंढ निकालेंगे और अगला PSLV मिशन शान से उड़ान भरेगा।

जय हिन्द!

By Meera Shah

मीरा तेज खबरी (Tez Khabri) के साथ जुड़ी एक समाचार लेखिका हैं। वे सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, महिला संबंधित विषयों और जनहित से जुड़ी खबरों पर लेखन करती हैं। मीरा का उद्देश्य पाठकों तक सरल भाषा में सत्यापित, उपयोगी और भरोसेमंद जानकारी पहुंचाना है।

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