PM Modi German Chancellor Visit

साल 2026 की शुरुआत भारतीय कूटनीति के लिए एक और सुनहरे अध्याय के साथ हुई है। आज गुजरात की धरती एक बार फिर दो वैश्विक महाशक्तियों के मिलन की साक्षी बनी। भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi और जर्मनी के नव-निर्वाचित चांसलर Friedrich Merz (फ्रेडरिक मर्ज) आज अहमदाबाद में एक साथ नजर आए।

‘काइट डिप्लोमेसी’ से भारत-जर्मनी के रिश्तों में नई उड़ान!

अपने पहले आधिकारिक भारत दौरे पर आए जर्मन चांसलर ने न केवल राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को नमन किया, बल्कि पीएम मोदी के साथ मिलकर साबरमती के तट पर पतंग भी उड़ाई। यह दृश्य सिर्फ एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बदलती दुनिया में भारत और जर्मनी की Strategic Partnership (रणनीतिक साझेदारी) की नई ऊंचाई को दर्शाता है।

1. साबरमती आश्रम: बापू के चरणों में नमन

सुबह का सूरज अभी चढ़ ही रहा था जब पीएम मोदी और चांसलर मर्ज का काफिला ऐतिहासिक Sabarmati Ashram पहुंचा। यह वही जगह है जहां से महात्मा गांधी ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम की कई महत्वपूर्ण लड़ाइयों का नेतृत्व किया था।

हृदय कुंज का दौरा: पीएम मोदी ने एक गाइड की भूमिका निभाते हुए चांसलर मर्ज को आश्रम का भ्रमण कराया। वे उन्हें ‘Hriday Kunj’ (हृदय कुंज) ले गए, जो बापू और कस्तूरबा का निवास स्थान था।

  • वहां चांसलर ने गांधीजी के चरखे को बड़े कौतूहल से देखा।
  • आश्रम के ट्रस्टियों ने उन्हें सूत कातने की प्रक्रिया समझाई, जिसे देखकर मर्ज काफी प्रभावित हुए।
  • दोनों नेताओं ने गांधीजी की प्रतिमा पर सूत की माला पहनाकर पुष्पांजलि अर्पित की।
PM Modi German Chancellor Visit

विजिटर्स बुक का संदेश: सबसे भावुक पल तब आया जब चांसलर मर्ज ने विजिटर्स बुक में अपना संदेश लिखा। उन्होंने लिखा:

“महात्मा गांधी की स्वतंत्रता और प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा में अटूट आस्था हमें आज भी प्रेरित करती है। गांधीजी की शिक्षाओं की दुनिया को आज पहले से कहीं ज्यादा जरूरत है। यह विरासत भारतीयों और जर्मनों को दोस्तों के रूप में जोड़ती है।”

यह संदेश बताता है कि हिंसा और युद्धों से घिरी आज की दुनिया में गांधी के विचार पश्चिमी नेताओं के लिए भी कितने प्रासंगिक हैं।

2. साबरमती रिवरफ्रंट: जब आसमान में उड़ी ‘हनुमान’ वाली पतंग

आश्रम में शांति और सादगी का अनुभव करने के बाद, दोनों नेता Sabarmati Riverfront पहुंचे, जहां International Kite Festival 2026 का आयोजन किया गया था। यहाँ का नजारा आश्रम से बिल्कुल अलग, रंग-बिरंगा और ऊर्जा से भरा था।

काइट डिप्लोमेसी (Kite Diplomacy): अहमदाबाद का उत्तरायण उत्सव पूरी दुनिया में मशहूर है। पीएम मोदी ने चांसलर मर्ज को गुजरात की इस संस्कृति से रूबरू कराया।

  • भगवान हनुमान की पतंग: सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें पीएम मोदी और चांसलर मर्ज एक साथ पतंग उड़ा रहे हैं। आसमान में भगवान हनुमान के चित्र वाली एक विशाल पतंग उड़ रही थी, जो भारत की सांस्कृतिक शक्ति का प्रतीक थी।
  • चांसलर मर्ज ने एक खुली जीप में पीएम मोदी के साथ रिवरफ्रंट का चक्कर लगाया और वहां मौजूद हजारों लोगों का अभिवादन स्वीकार किया।

कूटनीति में प्रतीकों का बड़ा महत्व होता है। एक साथ पतंग उड़ाना यह संदेश देता है कि भारत और जर्मनी अब एक साझा भविष्य की ओर उड़ान भरने के लिए तैयार हैं, चाहे हवा का रुख कैसा भी हो।

3. फ्रेडरिक मर्ज: कौन हैं जर्मनी के नए चांसलर?

शायद आप सोच रहे होंगे कि ओलाफ स्कोल्ज़ के बाद यह नया चेहरा कौन है? Friedrich Merz जर्मनी की राजनीति के एक दिग्गज नेता हैं।

  • वे क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (CDU) पार्टी से ताल्लुक रखते हैं।
  • उन्हें भारत का एक मजबूत समर्थक माना जाता है।
  • चांसलर बनने के बाद यह उनका पहला एशिया दौरा है, और उन्होंने चीन के बजाय भारत को चुना। यह अपने आप में एक बहुत बड़ा भू-राजनीतिक (Geopolitical) संकेत है।

4. भारत-जर्मनी संबंध: 75 साल का जश्न

यह यात्रा इसलिए भी खास है क्योंकि 2026 में भारत और जर्मनी अपने राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे कर रहे हैं। साथ ही, दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को भी 25 साल हो चुके हैं।

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क्यों करीब आ रहे हैं दोनों देश?

  1. चीन पर निर्भरता कम करना: जर्मनी की अर्थव्यवस्था चीन पर बहुत ज्यादा निर्भर थी, लेकिन अब वे ‘डी-रिस्किंग’ (De-risking) की नीति अपना रहे हैं। उन्हें एशिया में एक भरोसेमंद साथी चाहिए, और भारत से बेहतर विकल्प कोई नहीं है।
  2. कुशल कामगारों की जरूरत: जर्मनी में काम करने वाले युवाओं की भारी कमी है, जबकि भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी है।
  3. ग्रीन एनर्जी: दोनों देश जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए हरित ऊर्जा पर बड़ा दांव लगा रहे हैं।

5. समझौतों का पिटारा: भारत को क्या मिला? (Key Outcomes)

इस दौरे पर सिर्फ पतंगबाजी नहीं हुई, बल्कि गांधीनगर के महात्मा मंदिर में गंभीर द्विपक्षीय वार्ता भी हुई। खबरों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच 19 समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर हुए हैं।

A. वीज़ा-फ्री ट्रांजिट (Visa-Free Transit)

आम भारतीयों के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी! जर्मनी ने भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए Visa-Free Transit की घोषणा की है।

  • इसका मतलब है कि अगर आप अमेरिका या कनाडा जा रहे हैं और आपकी कनेक्टिंग फ्लाइट जर्मनी (फ्रैंकफर्ट या म्यूनिख) से है, तो अब आपको अलग से ट्रांजिट वीज़ा लेने की झंझट नहीं होगी। यह एक बड़ी राहत है।

B. रक्षा सौदे (Defense Deals)

भारत और जर्मनी के बीच रक्षा सहयोग का एक नया रोडमैप तैयार हुआ है।

  • पनडुब्बी डील: भारत की ‘Project-75I’ के तहत 6 अत्याधुनिक पनडुब्बियां बनाने के लिए जर्मनी की कंपनी थिसनक्रुप मरीन सिस्टम्स (TKMS) एक प्रमुख दावेदार है। इस दौरे पर इस डील को लेकर सकारात्मक चर्चा हुई है।
  • यह भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए गेम-चेंजर साबित होगा।

C. स्किल्ड लेबर और शिक्षा

जर्मनी ने भारतीय छात्रों और पेशेवरों के लिए वीज़ा नियमों को आसान बनाने का वादा किया है। जर्मनी चाहता है कि भारत के इंजीनियर, नर्स और आईटी प्रोफेशनल्स वहां आकर काम करें।

6. गुजरात मॉडल: कूटनीति का नया केंद्र

पीएम मोदी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि दिल्ली के बाहर भी कूटनीति हो सकती है। शी जिनपिंग, शिंजो आबे और डोनाल्ड ट्रंप के बाद अब जर्मन चांसलर को गुजरात लाना एक सोची-समझी रणनीति है।

  • इससे न केवल गुजरात को निवेश मिलता है (वाइब्रेंट गुजरात समिट के ठीक बाद यह दौरा हुआ है), बल्कि विदेशी मेहमानों को भारत की सांस्कृतिक विविधता देखने को मिलती है।
  • चांसलर मर्ज के साथ 23 बड़े जर्मन सीईओ (CEOs) का एक डेलिगेशन भी आया है, जो गुजरात में निवेश की संभावनाएं तलाश रहा है।

7. भू-राजनीतिक समीकरण (Geopolitics)

यूरोप अभी मुश्किल दौर से गुजर रहा है। यूक्रेन युद्ध और आर्थिक मंदी ने जर्मनी को नए दोस्त बनाने पर मजबूर किया है।

  • पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज़ बन गया है।
  • जर्मनी जानता है कि अगर उसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार चाहिए या जलवायु परिवर्तन पर कोई ठोस कदम उठाना है, तो भारत का साथ जरूरी है।

8. निष्कर्ष: एक नई दोस्ती की शुरुआत (Conclusion)

चांसलर फ्रेडरिक मर्ज का यह दौरा भारत और जर्मनी के रिश्तों में एक ‘टर्निंग पॉइंट’ है। साबरमती आश्रम की सादगी से लेकर रिवरफ्रंट की भव्यता तक, इस यात्रा ने दोनों देशों के बीच विश्वास की एक नई डोर बांधी है।

जैसे आसमान में दोनों नेताओं ने मिलकर पतंग उड़ाई, वैसे ही अब दोनों देश मिलकर विकास, तकनीक और सुरक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां छूने को तैयार हैं।

By Meera Shah

मीरा तेज खबरी (Tez Khabri) के साथ जुड़ी एक समाचार लेखिका हैं। वे सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, महिला संबंधित विषयों और जनहित से जुड़ी खबरों पर लेखन करती हैं। मीरा का उद्देश्य पाठकों तक सरल भाषा में सत्यापित, उपयोगी और भरोसेमंद जानकारी पहुंचाना है।

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