गोलियों की तड़तड़ाहट से जागी राजधानी
नमस्कार बिहार! आज तारीख 11 फरवरी 2026 है। राजधानी पटना की सुबह आज पक्षियों की चहचहाहट से नहीं, बल्कि गोलियों की गूंज से हुई है। बिहार पुलिस और एसटीएफ (STF) ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए राजधानी के सबसे वांछित और खूंखार अपराधियों में से एक, राजीव (उर्फ राजीव डॉन) को एक मुठभेड़ के बाद धर दबोचा है।
लंबे समय से पुलिस के लिए सिरदर्द बना कुख्यात राजीव, जो हत्या, रंगदारी और अपहरण के दर्जनों मामलों में वांछित था, आज पुलिस की गोली का शिकार हो गया। Patna Encounter की खबर आग की तरह पूरे शहर में फैल गई है। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में राजीव के पैर में गोली लगी है, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। यह घटना पटना के बाहरी इलाके (संभावित रूप से मरीन ड्राइव या दियारा क्षेत्र) में हुई है।
इस Live Encounter Update ने शहर के व्यापारियों और आम नागरिकों को बड़ी राहत दी है, जो पिछले कुछ महीनों से राजीव के आतंक के साये में जी रहे थे। पुलिस प्रशासन ने इसे ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का हिस्सा बताया है।
भाग 1: सुबह 4 बजे का वो खौफनाक मंजर (The Incident Timeline)
घटना की शुरुआत आज, 11 फरवरी 2026 की अहले सुबह हुई। पटना पुलिस को खुफिया जानकारी मिली थी कि कुख्यात अपराधी राजीव अपने एक साथी के साथ किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने या शहर छोड़ने की फिराक में है।
घेराबंदी और सरेंडर की अपील:
सूत्रों के मुताबिक, पटना एसएसपी (SSP) के नेतृत्व में एक विशेष टीम ने दीघा-आशियाना रोड या मरीन ड्राइव के पास एक सुनसान इलाके में नाकेबंदी की थी। सुबह करीब 4:30 बजे, एक तेज रफ्तार बाइक आती दिखाई दी। जब पुलिस ने उसे रुकने का इशारा किया, तो बाइक सवारों ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी।
जवाबी फायरिंग:
पुलिस ने पहले लाउडस्पीकर से उन्हें सरेंडर करने को कहा, लेकिन अपराधियों ने पुलिस जीप को निशाना बनाते हुए गोलियां चलाईं। आत्मरक्षा में पुलिस ने भी फायरिंग की। इस Patna Police Encounter में करीब 15-20 राउंड गोलियां चलीं। अंततः, एक गोली राजीव के दाहिने पैर में लगी और वह बाइक से गिर पड़ा। उसका साथी अंधेरे और कोहरे का फायदा उठाकर भागने में सफल रहा (जिसकी तलाश जारी है)।

भाग 2: कौन है कुख्यात राजीव? – अपराध की दुनिया का बेताज बादशाह
इस Patna Encounter की अहमियत समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि राजीव आखिर है कौन। राजीव का नाम पिछले 5 सालों से पटना और आसपास के जिलों (वैशाली, आरा) में दहशत का पर्याय बन चुका था।
अपराध का ग्राफ:
- रंगदारी (Extortion): राजीव का मुख्य धंधा शहर के बड़े बिल्डरों और ज्वैलर्स से ‘प्रोटेक्शन मनी’ वसूलना था। 2025 के अंत में एक प्रमुख व्यवसायी के घर पर हुई फायरिंग में भी इसका नाम सामने आया था।
- हत्या (Murder): उस पर आधा दर्जन से अधिक हत्या के मामले दर्ज हैं, जिनमें दो राजनीतिक कार्यकर्ताओं की हत्या शामिल है।
- जमीन कब्जा: विवादित जमीनों पर कब्जा करना और उसे औने-पौने दाम पर बेचना उसका साइड बिजनेस था।
Criminal Rajiv Arrested होने की खबर से उन तमाम गवाहों और पीड़ितों ने राहत की सांस ली है, जिन्हें वह लगातार जान से मारने की धमकियां दे रहा था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उस पर 50,000 रुपये का इनाम भी घोषित था।
भाग 3: पुलिस की रणनीति – ‘ऑपरेशन लंगड़ा’ की तर्ज पर कार्रवाई?
पिछले कुछ समय से उत्तर प्रदेश की तर्ज पर बिहार में भी अपराधियों के पैर में गोली मारकर उन्हें पकड़ने का ट्रेंड बढ़ा है। इसे अनौपचारिक रूप से ‘ऑपरेशन लंगड़ा’ कहा जाता है। आज का Patna Police Encounter इसी रणनीति का हिस्सा लगता है।
एसटीएफ की भूमिका:
पटना पुलिस के साथ बिहार एसटीएफ (Special Task Force) पिछले 72 घंटों से राजीव को ट्रैक कर रही थी।
- टेक्निकल सर्विलांस: राजीव बहुत चालाक था और वह स्मार्टफोन का इस्तेमाल कम करता था। पुलिस ने उसके गुर्गों के फोन इंटरसेप्ट करके उसकी लोकेशन ट्रेस की।
- मुखबिरों का जाल: पुलिस को सटीक सूचना मिली थी कि वह आज सुबह अपनी ‘सेफ हाउस’ बदलने वाला है।
पुलिस का उद्देश्य उसे जान से मारना नहीं, बल्कि कानून के शिकंजे में लाना था ताकि उसके पूरे नेटवर्क को ध्वस्त किया जा सके। पैर में गोली लगना यह दर्शाता है कि पुलिस ने उसे जिंदा पकड़ने की पूरी कोशिश की।
भाग 4: अस्पताल का दृश्य – पीएमसीएच में छावनी जैसा माहौल
जैसे ही गोली लगने के बाद राजीव जमीन पर गिरा, पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए उसे अपनी कस्टडी में लिया और इलाज के लिए पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (PMCH) ले गई।
इमरजेंसी वार्ड में हलचल:
फिलहाल राजीव का इलाज पीएमसीएच के इमरजेंसी वार्ड में चल रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक, गोली उसके घुटने के नीचे लगी है और उसकी हालत खतरे से बाहर है।
- सुरक्षा घेरा: अस्पताल के बाहर और अंदर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। किसी भी बाहरी व्यक्ति को वार्ड के पास जाने की अनुमति नहीं है।
- मीडिया का जमावड़ा: सुबह से ही मीडियाकर्मी और Bihar Crime News कवर करने वाले रिपोर्टर्स अस्पताल के बाहर डटे हुए हैं।
- परिजनों का रोना-धोना: राजीव के परिवार वाले भी अस्पताल पहुँच चुके हैं और उन्होंने पुलिस पर ‘फर्जी एनकाउंटर’ का आरोप लगाया है, जैसा कि अक्सर ऐसे मामलों में होता है।

भाग 5: बरामदगी – हथियार और दस्तावेज
घटनास्थल से पुलिस को कई अहम सुराग मिले हैं जो आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे कर सकते हैं।
- 9mm पिस्टल: राजीव के पास से एक विदेशी मेड 9mm पिस्टल बरामद हुई है, जिससे उसने पुलिस पर फायर किया था।
- जिंदा कारतूस: उसकी जेब से और घटनास्थल से कई जिंदा कारतूस मिले हैं।
- चोरी की बाइक: जिस बाइक (अपाचे या पल्सर) पर वे सवार थे, वह भी चोरी की निकली।
- मोबाइल फोन: उसका फोन पुलिस के लिए सोने की खान साबित हो सकता है, जिसमें उसके आकाओं और फंडिंग करने वालों के नंबर हो सकते हैं।
इस Patna Encounter के बाद फॉरेंसिक टीम (FSL) ने मौके से खून के नमूने और गोलियों के खोखे जमा किए हैं ताकि कोर्ट में पुख्ता सबूत पेश किए जा सकें।
भाग 6: व्यापारियों और जनता की प्रतिक्रिया
राजीव की गिरफ्तारी की खबर जंगल की आग की तरह फैली। पटना के प्रमुख बाजारों (जैसे खेतान मार्केट, बोरिंग रोड, हथुआ मार्केट) में व्यापारियों ने दबी जुबान में खुशी जाहिर की है।
- व्यापारी संघ का बयान: “हम पुलिस की इस कार्रवाई का स्वागत करते हैं। राजीव के डर से कई दुकानदारों ने दुकानें खोलना बंद कर दिया था। Law and Order in Bihar के लिए यह एक सकारात्मक संकेत है।”
- आम जनता: मॉर्निंग वॉक पर निकले लोगों ने भी कहा कि अगर पुलिस ऐसे ही सख्त रही, तो पटना फिर से सुरक्षित महसूस करेगा।
हालांकि, कुछ मानवाधिकार संगठनों ने इस एनकाउंटर की निष्पक्ष जांच की मांग की है, यह कहते हुए कि पुलिस को कानून हाथ में लेने का अधिकार नहीं है।
भाग 7: राजनीतिक गलियारों में हलचल
बिहार में अपराध और राजनीति का चोली-दामन का साथ रहा है। 11 फरवरी 2026 की यह घटना विधानसभा के बजट सत्र से ठीक पहले हुई है, जिससे राजनीतिक पारा चढ़ गया है।
भाग 8: राजीव का ‘प्लान बी’ – क्या करने वाला था वो?
पुलिस पूछताछ (जो अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद होगी) में यह साफ होगा, लेकिन प्रारंभिक जांच में पता चला है कि राजीव एक बड़ी साजिश रच रहा था।
- जेल ब्रेक की योजना? कुछ खुफिया इनपुट्स थे कि वह अपने साथियों को छुड़ाने के लिए कोर्ट परिसर में हमले की योजना बना रहा था।
- बड़ा अपहरण: शहर के एक नामी डॉक्टर के अपहरण की साजिश भी रची जा रही थी ताकि चुनाव से पहले मोटा फंड इकट्ठा किया जा सके।
आज के STF Operation ने इन सभी नापाक मंसूबों पर पानी फेर दिया है।
भाग 9: बिहार में एनकाउंटर का इतिहास और बदलाव
बिहार पुलिस पारंपरिक रूप से एनकाउंटर से बचती रही है, लेकिन 2024-2026 के बीच इसमें बदलाव आया है। अपराधियों के मन में खौफ पैदा करने के लिए अब पुलिस ‘आक्रामक पुलिसिंग’ (Aggressive Policing) अपना रही है।
- मनोवैज्ञानिक असर: जब एक बड़ा अपराधी पुलिस की गोली का शिकार होता है, तो छोटे-मोटे अपराधी अपने आप अंडरग्राउंड हो जाते हैं या सरेंडर कर देते हैं।
- टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल: अब बिहार पुलिस ड्रोन, AI-आधारित फेस रिकग्निशन और आधुनिक हथियारों से लैस है, जिससे Bihar Crime News की हेडलाइंस बदल रही हैं।
भाग 10: कानूनी प्रक्रिया – आगे क्या होगा?
Criminal Rajiv Arrested होने के बाद अब कानूनी प्रक्रिया शुरू होगी।
- प्राथमिकी (FIR): पुलिस पर जानलेवा हमला (IPC 307), आर्म्स एक्ट और सरकारी काम में बाधा डालने की नई धाराएं जोड़ी जाएंगी।
- रिमांड: अस्पताल से डिस्चार्ज होते ही पुलिस कोर्ट से उसकी रिमांड मांगेगी।
- स्पीडी ट्रायल: सरकार कोशिश करेगी कि राजीव के पुराने मामलों को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाकर उसे जल्द से जल्द सजा दिलाई जाए।
भाग 11: फरार साथी की तलाश – पुलिस का अगला कदम
राजीव तो पकड़ा गया, लेकिन उसका साथी (जिसका नाम ‘विक्की’ या ‘छोटू’ बताया जा रहा है) अभी भी फरार है।
- पुलिस ने पटना के सभी निकास द्वार (एक्जिट पॉइंट्स) सील कर दिए हैं।
- गंगा नदी के दियारा इलाके में कॉम्बिंग ऑपरेशन (Combing Operation) चलाया जा रहा है।
- पुलिस को शक है कि वह किसी झुग्गी-झोपड़ी या निर्माणाधीन इमारत में छिपा हो सकता है।
भाग 12: क्या राजीव का सिंडिकेट खत्म हो जाएगा?
किसी भी गैंग का सरगना जब पकड़ा जाता है, तो गैंग बिखर जाता है। राजीव की गिरफ्तारी से उसके गुर्गों में भगदड़ मच गई है।
- वसूली बंद: जिन लोगों ने डर के मारे पैसा देने का वादा किया था, वे अब पीछे हट जाएंगे।
- मुखबिरी: उसके ही साथी अब पुलिस का गवाह बनने (Approver) की कोशिश करेंगे ताकि अपनी सजा कम करा सकें।
यह Patna Encounter राजीव के साम्राज्य के अंत की शुरुआत है।
खाकी का इकबाल बुलंद
अंत में, 11 फरवरी 2026 की यह सुबह पटनावासियों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है। Patna Encounter केवल एक अपराधी के पकड़े जाने की खबर नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि कानून के हाथ अब पहले से कहीं ज्यादा लंबे और मजबूत हैं।
कुख्यात राजीव, जिसे लगता था कि वह कानून से ऊपर है, आज अस्पताल के बिस्तर पर हथकड़ियों में जकड़ा हुआ है। उसके पैर का जख्म उसे जिंदगी भर याद दिलाएगा कि अपराध का रास्ता अंततः बर्बादी की ओर ही जाता है।
बिहार पुलिस और एसटीएफ की टीम बधाई की पात्र है जिन्होंने अपनी जान पर खेलकर राजधानी को एक बड़े खतरे से बचाया। हालांकि, जंग अभी खत्म नहीं हुई है। जब तक राजीव जैसे आखिरी अपराधी का सफाया नहीं हो जाता, तब तक ‘सुशासन’ की लड़ाई जारी रहेगी।
