Oscars 2026

Oscars के मंच पर भारतीय सिनेमा के ‘ही-मैन’ की अनदेखी?

सिनेमा की दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित सम्मान ‘ऑस्कर’ (Academy Awards) हर साल उन कलाकारों को याद करता है जिन्होंने पिछले साल दुनिया को अलविदा कह दिया। 15 मार्च 2026 को लॉस एंजिल्स के डॉल्बी थिएटर में आयोजित 98वें एकेडमी अवॉर्ड्स में भी ‘इन मेमोरियम’ (In Memoriam) सेगमेंट के दौरान कई दिग्गजों को श्रद्धांजलि दी गई। लेकिन जैसे ही यह सेगमेंट खत्म हुआ, सोशल मीडिया पर भारतीय प्रशंसकों का गुस्सा फूट पड़ा।

वजह थी बॉलीवुड के सदाबहार अभिनेता धर्मेंद्र (Dharmendra) की अनदेखी। 24 नवंबर 2025 को 89 वर्ष की आयु में निधन होने के बाद, फैंस को उम्मीद थी कि ऑस्कर के वैश्विक मंच पर उन्हें उचित सम्मान मिलेगा। हालांकि, एकेडमी ने उन्हें अपनी आधिकारिक वेबसाइट की ‘इन मेमोरियम’ सूची में तो शामिल किया, लेकिन मुख्य समारोह के वीडियो मोंटाज से उनका नाम गायब था। ऑस्कर 2026 में धर्मेंद्र का नाम टीवी पर न दिखाए जाने को लेकर अब एक नई बहस छिड़ गई है। इस ब्लॉग में हम इस विवाद की गहराई में जाएंगे और जानेंगे कि आखिर क्यों एकेडमी ने भारतीय सिनेमा के इस रत्न के साथ ऐसा व्यवहार किया।

ऑस्कर 2026 का ‘इन मेमोरियम’ सेगमेंट और धर्मेंद्र का ‘स्नब’

98वें ऑस्कर समारोह में ‘इन मेमोरियम’ सेगमेंट हमेशा की तरह भावुक था। इस साल हॉलीवुड के दिग्गज जैसे रॉब रीनर (Rob Reiner), डायने कीटन (Diane Keaton), और रॉबर्ट डुवैल (Robert Duvall) को विशेष श्रद्धांजलि दी गई। लेकिन जब बात अंतरराष्ट्रीय कलाकारों की आई, तो भारतीय प्रशंसकों की नजरें स्क्रीन पर धर्मेंद्र की एक झलक पाने के लिए बेकरार थीं।

दुर्भाग्य से, मुख्य टीवी प्रसारण के दौरान धर्मेंद्र का नाम या फोटो कहीं नजर नहीं आया। यह खबर जंगल की आग की तरह फैली कि ऑस्कर 2026 में धर्मेंद्र का नाम समारोह से बाहर रखा गया है।

तथ्य की जांच: एकेडमी की आधिकारिक वेबसाइट पर धर्मेंद्र का नाम करीब 300 अन्य फिल्मी हस्तियों के साथ ‘इन मेमोरियम’ पेज पर सूचीबद्ध है। एकेडमी अक्सर समय की पाबंदी के कारण समारोह के वीडियो में केवल कुछ ही चुनिंदा नामों को दिखाती है, जबकि बाकी सभी को ऑनलाइन गैलरी में स्थान दिया जाता है।

Oscars 2026 dharmendar

फैंस और नेटिजन्स का फूटा गुस्सा: “यह अपमानजनक है”

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे X (पूर्व में ट्विटर) और इंस्टाग्राम पर #Oscars2026 और #Dharmendra ट्रेंड करने लगा। भारतीय फैंस ने एकेडमी की इस ‘पिक एंड चूज’ (Pick and Choose) नीति पर कड़ा ऐतराज जताया।

  • पक्षीवाद का आरोप: कई यूजर्स ने कहा कि ऑस्कर केवल पश्चिमी कलाकारों को ही महत्व देता है। एक यूजर ने लिखा, “धर्मेंद्र ने 300 से अधिक फिल्मों में काम किया और भारतीय सिनेमा को 60 साल दिए। उनका नाम टीवी स्क्रीन पर न होना भारतीय सिनेमा का अपमान है।”
  • पूर्व मिसालें: फैंस ने याद दिलाया कि इरफान खान, श्री देवी, सुशांत सिंह राजपूत और शशि कपूर जैसे भारतीय कलाकारों को पहले ऑस्कर के मुख्य प्रसारण में जगह मिल चुकी है। ऐसे में ‘ही-मैन’ की अनदेखी फैंस के गले नहीं उतर रही।
  • BAFTA का उदाहरण: नेटिजन्स ने यह भी बताया कि ऑस्कर से कुछ हफ्ते पहले आयोजित 79वें बाफ्टा अवॉर्ड्स (BAFTA 2026) में धर्मेंद्र को मुख्य समारोह के दौरान उचित सम्मान दिया गया था।

क्यों होती है ‘इन मेमोरियम’ में काट-छाँट?

विशेषज्ञों (Expertise) और फिल्म उद्योग के जानकारों के अनुसार, ऑस्कर का ‘इन मेमोरियम’ सेगमेंट हर साल विवादों में रहता है। एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज (AMPAS) की एक विशेष समिति यह तय करती है कि टीवी प्रसारण के 3-4 मिनट के वीडियो में किन 40-50 नामों को जगह दी जाएगी।

  1. विशेषज्ञता (Expertise): समिति उन कलाकारों को प्राथमिकता देती है जिन्होंने हॉलीवुड फिल्मों में काम किया हो या जिनकी अंतरराष्ट्रीय पहचान बहुत मजबूत हो।
  2. सत्ताबद्धता (Authoritativeness): हालांकि धर्मेंद्र भारतीय सिनेमा के स्तंभ थे, लेकिन एकेडमी की नजर में उनकी ‘अकादमिक उपस्थिति’ (Academic Presence) शायद उतनी प्रभावी नहीं मानी गई जितनी कि इरफान खान की थी, जिन्होंने कई ऑस्कर विजेता हॉलीवुड प्रोजेक्ट्स में काम किया था।
  3. विश्वसनीयता (Trustworthiness): एकेडमी का बचाव अक्सर यह होता है कि वे सभी को अपनी वेबसाइट पर सम्मान देते हैं, लेकिन लाइव टीवी शो का समय सीमित होता है।
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धर्मेंद्र की विरासत: 65 साल और 300 फिल्में

भले ही ऑस्कर के मंच पर ऑस्कर 2026 में धर्मेंद्र का नाम टीवी पर न चमका हो, लेकिन उनकी विरासत किसी भी अंतरराष्ट्रीय सम्मान से परे है।

  • शोले (Sholay): भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर के नायक।
  • बहुमुखी प्रतिभा: उन्होंने ‘चुपके चुपके’ जैसी कॉमेडी, ‘सत्यकाम’ जैसी क्लासिक ड्रामा और ‘फूल और पत्थर’ जैसी एक्शन फिल्मों में अपनी छाप छोड़ी।
  • पद्म पुरस्कार: भारत सरकार ने उन्हें 2012 में पद्म भूषण से सम्मानित किया था और 2026 में उन्हें मरणोपरांत पद्म विभूषण से नवाजा गया।

क्या ऑस्कर को अपनी नीति बदलनी चाहिए?

यह विवाद एक बार फिर इस ओर इशारा करता है कि ऑस्कर को अपनी ‘ग्लोबल’ पहचान को सार्थक बनाने के लिए अधिक समावेशी (Inclusive) होने की जरूरत है। अगर आप दुनिया भर के सिनेमा का जश्न मनाने का दावा करते हैं, तो दुनिया के सबसे बड़े फिल्म उद्योग (बॉलीवुड) के सबसे बड़े सितारों को नजरअंदाज करना आपकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है।

भले ही ऑस्कर 2026 में धर्मेंद्र का नाम मुख्य प्रसारण में नहीं था, लेकिन भारत और दुनिया भर के करोड़ों सिनेप्रेमियों के दिलों में उनकी जगह हमेशा सुरक्षित रहेगी। ‘धरम पाजी’ किसी एक समारोह के मोहताज नहीं हैं; उनकी फिल्में ही उनका सबसे बड़ा मेमोरियल हैं।

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