फिजियोथेरेपी प्रवेश: BPT/BOT में NEET अनिवार्य करने पर विचार, विरोध भी।

“डॉक्टर बनने का सपना केवल स्टेथोस्कोप और सर्जरी तक सीमित नहीं है, यह उससे कहीं आगे उपचार और पुनर्वास (Rehabilitation) तक जाता है।”

भारतीय चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में आज, 18 फरवरी 2026 को एक बड़ी बहस छिड़ गई है। अब तक, राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) मुख्य रूप से MBBS, BDS, BAMS (आयुर्वेद) और BHMS (होम्योपैथी) के लिए अनिवार्य थी। लेकिन अब, केंद्र सरकार और ‘राष्ट्रीय संबद्ध और स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर आयोग’ (National Commission for Allied and Healthcare Professions – NCAHP) एक क्रांतिकारी, लेकिन विवादास्पद कदम उठाने पर विचार कर रहे हैं।

प्रस्ताव यह है कि बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी (BPT) और बैचलर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी (BOT) पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए भी NEET स्कोर को अनिवार्य कर दिया जाए।

इस खबर ने हजारों छात्रों, कोचिंग सेंटरों और निजी कॉलेजों में हलचल मचा दी है। जहाँ एक तरफ इसे ‘गुणवत्ता सुधार’ (Quality Control) का कदम बताया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ छात्र संगठन और कॉलेज इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं।

अध्याय 1: क्या है पूरा मामला? (The Core Proposal)

अब तक, भारत के अधिकांश राज्यों (जैसे गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु) में फिजियोथेरेपी और अन्य पैरामेडिकल कोर्सेस में प्रवेश कक्षा 12वीं (विज्ञान प्रवाह) के मार्क्स के आधार पर होता आया है। कुछ राज्य अपनी अलग सीईटी (Common Entrance Test) लेते हैं।

नया प्रस्ताव क्या है? नियमों में एकरूपता लाने के लिए, यह प्रस्ताव रखा गया है कि देश भर के सभी सरकारी और निजी फिजियोथेरेपी कॉलेजों में प्रवेश केवल NEET (National Eligibility cum Entrance Test) की मेरिट सूची के आधार पर ही दिया जाए।

BPT/BOT में NEET अनिवार्य

इसका मतलब क्या है?

  1. 12वीं के बोर्ड मार्क्स की भूमिका केवल पात्रता (Eligibility) तक सीमित रह जाएगी (जैसे 50% अंक)।
  2. प्रवेश पूरी तरह से NEET में प्राप्त अंकों और रैंक पर निर्भर करेगा।
  3. ‘वन नेशन, वन एग्जाम’ की तर्ज पर मेडिकल से जुड़े हर कोर्स के लिए एक ही परीक्षा होगी।

यह विचार 2021 के ‘संबद्ध और स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर अधिनियम’ के तहत आया है, जिसका उद्देश्य इन व्यवसायों को विनियमित (Regulate) और मानकीकृत करना है।

अध्याय 2: सरकार का तर्क – NEET क्यों जरूरी है? (Arguments in Favor)

सरकार और इस कदम का समर्थन करने वाले विशेषज्ञों के पास अपने तर्क हैं। उनका मानना है कि फिजियोथेरेपी अब एक ‘सहायक’ सेवा नहीं, बल्कि मुख्य चिकित्सा का हिस्सा है।

1. गुणवत्ता में सुधार (Quality Assurance): वर्तमान में, कई निजी कॉलेज केवल डोनेशन या कम मार्क्स वाले छात्रों को प्रवेश दे देते हैं। फिजियोथेरेपी में मानव शरीर रचना (Anatomy) और कार्यप्रणाली (Physiology) का गहरा ज्ञान जरूरी है। NEET यह सुनिश्चित करेगा कि केवल वे छात्र ही इस क्षेत्र में आएं जिनका बायोलॉजी और विज्ञान का आधार मजबूत है।human skeleton and muscular system anatomy, AI generated

2. मानकीकरण (Standardization): हर राज्य का बोर्ड अलग है। गुजरात बोर्ड में 90% लाना और सीबीएसई में 90% लाने का स्तर अलग हो सकता है। NEET एक राष्ट्रीय स्तर का पैमाना है जो सभी छात्रों को एक समान मंच (Level Playing Field) पर लाता है।

3. पेशे का सम्मान बढ़ाना: एमबीबीएस और बीडीएस के लिए नीट अनिवार्य है। अगर बीपीटी के लिए भी यह अनिवार्य होता है, तो समाज और चिकित्सा जगत में फिजियोथेरेपिस्ट का दर्जा बढ़ेगा। उन्हें भी ‘मेरिटोरियस डॉक्टर्स’ के रूप में देखा जाएगा।

4. फर्जी कॉलेजों पर लगाम: देश भर में कई ऐसे कॉलेज चल रहे हैं जो बिना बुनियादी ढांचे के डिग्रियां बांट रहे हैं। केंद्रीकृत काउंसलिंग (Centralized Counseling) होने से ऐसे संस्थानों पर लगाम लगेगी।

अध्याय 3: विरोध के स्वर – छात्र और कॉलेज क्यों डरे हुए हैं? (The Opposition)

जैसे ही यह खबर बाहर आई, विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। ‘इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट’ (IAP) के कुछ धड़ों और छात्र संगठनों ने इसके खिलाफ आवाज उठाई है।

1. पाठ्यक्रम और योग्यता में अंतर: विरोधियों का मुख्य तर्क यह है कि NEET का सिलेबस (फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी) मुख्य रूप से एमबीबीएस/बीडीएस के लिए डिजाइन किया गया है।

  • फिजियोथेरेपी में ‘बायोमैकेनिक्स’ और ‘फिजिकल रिहैबिलिटेशन’ की जरूरत होती है।
  • आलोचकों का कहना है कि एक बेहतरीन फिजियोथेरेपिस्ट बनने के लिए जिस ‘एप्टीट्यूड’ (कौशल) की जरूरत है, उसे NEET पूरी तरह नहीं परख सकता।

2. सीटों के खाली रहने का डर: डेंटल (BDS) का उदाहरण सबके सामने है। जब से BDS में NEET अनिवार्य हुआ है, तब से कई निजी कॉलेजों में सीटें खाली रह जाती हैं क्योंकि छात्र कट-ऑफ पार नहीं कर पाते। निजी BPT कॉलेजों को डर है कि अगर NEET अनिवार्य हुआ, तो उनकी 30-40% सीटें खाली रह जाएंगी, जिससे कॉलेज बंद होने की कगार पर आ जाएंगे।

3. कोचिंग का बोझ और खर्चा: अभी छात्र 12वीं की पढ़ाई पर फोकस करके BPT में एडमिशन ले लेते हैं। NEET अनिवार्य होने का मतलब है—महंगी कोचिंग।

  • ग्रामीण और मध्यम वर्गीय छात्रों पर लाखों रुपये की कोचिंग फीस का बोझ पड़ेगा।
  • यह उन छात्रों के लिए अन्याय होगा जो डॉक्टर नहीं बनना चाहते, बल्कि शुरू से ही फिजियोथेरेपी या नर्सिंग में जाना चाहते हैं।

4. राज्य के अधिकारों का हनन: स्वास्थ्य राज्य का विषय है। गुजरात, तमिलनाडु और महाराष्ट्र जैसे राज्यों की अपनी प्रवेश समितियां (जैसे गुजरात में ACPMEC) हैं जो बहुत ही पारदर्शी तरीके से काम करती हैं। केंद्र द्वारा NEET थोपना संघीय ढांचे के खिलाफ माना जा रहा है।

BPT/BOT में NEET अनिवार्य

अध्याय 4: BPT/BOT क्या है और इसका महत्व?

इस विवाद को और गहराई से समझने के लिए, हमें यह समझना होगा कि ये कोर्स क्या हैं।

BPT (Bachelor of Physiotherapy): यह 4.5 साल का कोर्स है। इसमें दवाइयों (Medicine) के बजाय व्यायाम, इलेक्ट्रोथेरेपी और मैनुअल थेरेपी के जरिए इलाज किया जाता है।

  • हड्डी रोग, नसों की बीमारी, और खेल चोटों (Sports Injuries) में इनका रोल अहम है।

BOT (Bachelor of Occupational Therapy): यह भी 4.5 साल का कोर्स है। यह उन रोगियों के लिए है जो मानसिक या शारीरिक रूप से अक्षम हैं। इसका उद्देश्य उन्हें दैनिक जीवन के कार्यों (जैसे खाना, कपड़े पहनना, लिखना) करने में सक्षम बनाना है।

ये दोनों ही क्षेत्र अब बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं, और इनमें प्रवेश प्रक्रिया का कठिन होना यह दर्शाता है कि इनकी मांग बढ़ रही है।

अध्याय 5: छात्रों पर प्रभाव (Impact Analysis)

अगर 2026 या 2027 से यह नियम लागू हो जाता है, तो एक छात्र के रूप में आप पर क्या असर पड़ेगा?

सकारात्मक प्रभाव:

  • आपको देश के किसी भी शीर्ष कॉलेज में मेरिट के आधार पर प्रवेश मिल सकेगा।
  • आपका पीयर ग्रुप (सहपाठी) बहुत ही होशियार और प्रतिस्पर्धी होगा।
  • भविष्य में सरकारी नौकरियों में आपकी डिग्री की वैल्यू अधिक होगी।

नकारात्मक प्रभाव:

  • तनाव (Stress): बोर्ड परीक्षा के साथ-साथ NEET की तैयारी का डबल प्रेशर।
  • गैप ईयर: अगर इस साल एडमिशन नहीं मिला, तो ड्रॉप लेकर अगले साल तैयारी करनी होगी, जिससे करियर में देरी होगी।
  • विकल्प की कमी: पहले अगर किसी का एमबीबीएस में नहीं होता था, तो वह आसानी से बीपीटी ले लेता था। अब बीपीटी के लिए भी वही परीक्षा देनी होगी, जिससे ‘प्लान बी’ (Plan B) भी मुश्किल हो जाएगा।

अध्याय 6: गुजरात का परिदृश्य (The Gujarat Scenario)

गुजरात में फिजियोथेरेपी कॉलेजों की संख्या काफी अधिक है (80 से ज्यादा कॉलेज)। यहाँ की प्रवेश प्रक्रिया ‘प्रवेश समिति’ (ACPMEC) द्वारा संचालित होती है।

  • वर्तमान स्थिति: गुजरात बोर्ड के छात्रों के लिए BPT में प्रवेश अपेक्षाकृत आसान है।
  • विरोध: गुजरात के सेल्फ-फाइनांस कॉलेज एसोसिएशन ने इसका कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि गुजरात के ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र NEET में सीबीएसई बोर्ड के छात्रों का मुकाबला नहीं कर पाते, जिससे स्थानीय छात्र पिछड़ जाएंगे।

अध्याय 7: विशेषज्ञों की राय

हमने इस मुद्दे पर कुछ वरिष्ठ डॉक्टरों और शिक्षाविदों से बात की।

डॉ. आर. के. पटेल (वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक सर्जन): “मैं इस कदम का स्वागत करता हूं। फिजियोथेरेपिस्ट हमारे दाहिने हाथ की तरह होते हैं। उन्हें शरीर की रचना का उतना ही ज्ञान होना चाहिए जितना एक डॉक्टर को। NEET से अच्छे छात्र आएंगे, जिससे मरीजों को बेहतर इलाज मिलेगा।”

प्रो. मेहता (शिक्षाविद): “यह अव्यावहारिक है। हमें BPT के लिए एक अलग ‘एप्टीट्यूड टेस्ट’ रखना चाहिए, न कि NEET। NEET पूरी तरह से रट्टा-आधारित (Rote Learning) होती जा रही है। हमें ऐसे थेरेपिस्ट चाहिए जिनमें सेवा भाव और कौशल हो, न कि सिर्फ बायोलॉजी रटने की क्षमता।”

अध्याय 8: क्या है बीच का रास्ता? (The Middle Ground)

क्या कोई ऐसा समाधान है जिससे गुणवत्ता भी बनी रहे और छात्रों पर बोझ भी न पड़े?

  1. अलग प्रवेश परीक्षा: नर्सिंग और पैरामेडिकल के लिए एक अलग राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा आयोजित की जा सकती है, जिसका कठिनाई स्तर NEET से थोड़ा कम हो।
  2. राज्य को छूट: राज्यों को यह विकल्प दिया जा सकता है कि वे अपनी सरकारी सीटों के लिए NEET अपनाएं, लेकिन निजी सीटों के लिए 12वीं के मार्क्स को आधार बनाए रखें।
  3. पर्सेंटाइल कम रखना: BPT प्रवेश के लिए NEET की पात्रता पर्सेंटाइल को कम रखा जा सकता है (जैसे 50 के बजाय 40 पर्सेंटाइल)।

अध्याय 9: निष्कर्ष – छात्र क्या करें?

अभी यह प्रस्ताव ‘विचाराधीन’ (Under Consideration) है। अभी तक कोई आधिकारिक गैजेट नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है। लेकिन जिस तरह से चिकित्सा शिक्षा में सुधार हो रहे हैं, यह बदलाव आज नहीं तो कल आना तय है।

मेरी सलाह:

  • अगर आप कक्षा 11 या 12 में हैं, तो NEET की तैयारी को गंभीरता से लें। भले ही आप BPT का लक्ष्य रख रहे हों।
  • NCERT की किताबों (खासकर बायोलॉजी) पर अपनी पकड़ मजबूत करें।
  • अफवाहों पर ध्यान न दें। केवल आधिकारिक वेबसाइट (जैसे nmc.org.in या mohfw.gov.in) पर आए नोटिस पर ही भरोसा करें।

अंत में, चाहे प्रवेश परीक्षा कोई भी हो, लक्ष्य एक ही है – एक बेहतरीन स्वास्थ्य पेशेवर बनना। अगर आपके अंदर जुनून है, तो कोई भी परीक्षा आपके रास्ते की बाधा नहीं बन सकती।

अपडेट्स के लिए जुड़े रहें।

By Vivan Verma

विवान तेज खबरी (Tez Khabri) के समाचार रिपोर्टर हैं, जो ब्रेकिंग न्यूज़ और राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को कवर करते हैं। विवान तथ्यात्मक रिपोर्टिंग और तेज अपडेट के लिए जाने जाते हैं और प्रशासनिक व जनहित से जुड़े मामलों पर नियमित लेखन करते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *