नेशनल साइंस डे

नई दिल्ली, 28 फरवरी 2026: भारत आज अपना राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (National Science Day 2026) मना रहा है। यह दिन न केवल महान भारतीय भौतिक विज्ञानी सर सी. वी. रमन (Sir C. V. Raman) की ऐतिहासिक खोज ‘रमन इफेक्ट’ (Raman Effect) को नमन करने का है, बल्कि यह भारत की निरंतर बढ़ती वैज्ञानिक शक्ति का जश्न मनाने का भी अवसर है। आज नेशनल साइंस डे पर नरेंद्र मोदी ने वैज्ञानिकों को दी बधाई और देश के विकास में उनके अमूल्य योगदान की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

इस विशेष अवसर पर, प्रधानमंत्री ने देश के युवाओं, शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि 2047 तक भारत को एक ‘विकसित राष्ट्र’ बनाने का जो संकल्प लिया गया है, उसकी नींव हमारे वैज्ञानिक और उनके द्वारा किए जा रहे नवाचार (Innovations) ही हैं।

प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संदेश और वैज्ञानिकों का सम्मान

आज सुबह सोशल मीडिया और विभिन्न समाचार माध्यमों के जरिए नेशनल साइंस डे पर नरेंद्र मोदी ने वैज्ञानिकों को दी बधाई। अपने आधिकारिक संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय वैज्ञानिकों ने अपने सीमित संसाधनों और असीमित इच्छाशक्ति के दम पर पूरी दुनिया में भारत का मस्तक ऊंचा किया है।

पीएम मोदी के संबोधन की मुख्य बातें:

  • सी. वी. रमन को श्रद्धांजलि: प्रधानमंत्री ने सर चंद्रशेखर वेंकट रमन को याद करते हुए कहा कि उनकी खोज ‘रमन इफेक्ट’ आज भी आधुनिक विज्ञान और चिकित्सा क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हो रही है। उनकी जिज्ञासा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण आज के युवाओं के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है।
  • नवाचार (Innovation) पर जोर: पीएम मोदी ने कहा, “आज का नया भारत सिर्फ तकनीक का उपभोक्ता (Consumer) नहीं है, बल्कि तकनीक का निर्माता (Creator) बन रहा है। हमारी सरकार देश में एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार कर रही है ताकि हर युवा अपने इनोवेटिव आइडियाज को धरातल पर उतार सके।”
  • आत्मनिर्भर भारत और विज्ञान: रक्षा क्षेत्र, अंतरिक्ष अनुसंधान, और कृषि से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तक, भारतीय वैज्ञानिकों ने आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।

‘विकसित भारत 2047’ का रोडमैप और भारतीय विज्ञान

जब नेशनल साइंस डे पर नरेंद्र मोदी ने वैज्ञानिकों को दी बधाई, तो उनका मुख्य फोकस ‘विकसित भारत 2047’ (Viksit Bharat 2047) के विजन पर था। सरकार का मानना है कि अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) पर निवेश बढ़ाना सबसे महत्वपूर्ण है।

नेशनल साइंस डे पर नरेंद्र मोदी ने वैज्ञानिकों को दी बधाई

1. अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF)

हाल के वर्षों में भारत सरकार ने ‘अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन’ की स्थापना की है, जिसका उद्देश्य देश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में अनुसंधान की संस्कृति को बढ़ावा देना है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में बताया कि इसके जरिए छोटे शहरों के छात्रों को भी विश्वस्तरीय शोध करने के अवसर मिल रहे हैं।

2. डीप ओशन मिशन (Deep Ocean Mission)

अंतरिक्ष के साथ-साथ भारत अब समुद्र की गहराइयों को भी खंगाल रहा है। ‘मत्स्य 6000’ (Matsya 6000) सबमर्सिबल के जरिए भारत डीप सी माइनिंग और समुद्री जैव विविधता के अध्ययन में एक नया अध्याय लिख रहा है। पीएम ने इस मिशन से जुड़े वैज्ञानिकों के साहस की सराहना की।

3. सेमीकंडक्टर और AI मिशन

2026 के भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (India AI Mission) सबसे प्रमुख रणनीतिक क्षेत्र बन चुके हैं। नेशनल साइंस डे के अवसर पर यह बताया गया कि कैसे भारत धीरे-धीरे चिप डिजाइनिंग और मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब बन रहा है।

अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की बादशाहत (ISRO की उपलब्धियां)

नेशनल साइंस डे पर नरेंद्र मोदी ने वैज्ञानिकों को दी बधाई देते समय विशेष रूप से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के वैज्ञानिकों की पीठ थपथपाई।

  • चंद्रयान और आदित्य एल-1 की सफलता: चंद्रयान-3 की चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर ऐतिहासिक लैंडिंग और सूर्य के अध्ययन के लिए भेजे गए ‘आदित्य एल-1’ मिशन ने भारत को एक ‘स्पेस सुपरपॉवर’ के रूप में स्थापित कर दिया है।
  • गगनयान मिशन (Gaganyaan Mission) की तैयारी: 2026 भारत के मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण वर्ष है। प्रधानमंत्री ने इस मिशन में लगे वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष यात्रियों (Astronauts) को शुभकामनाएं दीं और इसे भारत के अंतरिक्ष इतिहास का सबसे बड़ा कदम बताया।

28 फरवरी का ऐतिहासिक महत्व: क्यों मनाया जाता है विज्ञान दिवस?

कई बार लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि विज्ञान दिवस के लिए 28 फरवरी की ही तारीख क्यों चुनी गई? दरसअल, 28 फरवरी 1928 को सर सी. वी. रमन ने दुनिया के सामने अपनी उस महान खोज का ऐलान किया था, जिसे आज ‘रमन इफेक्ट’ के नाम से जाना जाता है।

नेशनल साइंस डे पर नरेंद्र मोदी ने वैज्ञानिकों को दी बधाई

क्या है ‘रमन इफेक्ट’?

जब प्रकाश की किरण किसी पारदर्शी माध्यम (Transparent Medium) जैसे पानी, कांच या गैस से गुजरती है, तो वह बिखर (Scatter) जाती है। रमन ने खोजा कि इस बिखरे हुए प्रकाश का एक बहुत छोटा हिस्सा ऐसा होता है जिसकी तरंग दैर्ध्य (Wavelength) और रंग मूल प्रकाश से अलग होता है।

इस खोज ने प्रकाश की प्रकृति (Quantum nature of light) को समझने में एक क्रांति ला दी थी। इसी महान कार्य के लिए 1930 में सर सी. वी. रमन को भौतिकी (Physics) के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। यह सम्मान पाने वाले वे न केवल पहले भारतीय थे, बल्कि विज्ञान के क्षेत्र में यह उपलब्धि हासिल करने वाले वे पहले गैर-श्वेत (Non-white) व्यक्ति भी थे।

1986 में भारत सरकार ने तय किया कि इस ऐतिहासिक दिन को हमेशा याद रखने और युवाओं में वैज्ञानिक सोच (Scientific Temper) विकसित करने के लिए हर साल 28 फरवरी को ‘नेशनल साइंस डे’ के रूप में मनाया जाएगा।

इस वर्ष की थीम और उसका प्रभाव

हर साल नेशनल साइंस डे के लिए एक विशेष थीम चुनी जाती है। इस वर्ष (2026) के आयोजनों में विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी और ‘विकसित भारत’ के निर्माण में उनके योगदान पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

जब नेशनल साइंस डे पर नरेंद्र मोदी ने वैज्ञानिकों को दी बधाई, तो उन्होंने महिला वैज्ञानिकों (Women in STEM) के योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया। मंगलयान से लेकर चंद्रयान तक, भारतीय महिलाओं ने विज्ञान के सबसे जटिल क्षेत्रों में अपनी नेतृत्व क्षमता का लोहा मनवाया है। सरकार की ‘किरण’ (KIRAN) योजना और ‘विज्ञान ज्योति’ जैसे कार्यक्रम लड़कियों को विज्ञान के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

देशभर में नेशनल साइंस डे का जश्न

आज देशभर के प्रमुख वैज्ञानिक संस्थानों, विश्वविद्यालयों और स्कूलों में विज्ञान दिवस बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है।

  • विज्ञान भवन, नई दिल्ली: विज्ञान भवन में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया है, जहां देश भर से आए युवा वैज्ञानिकों को उनके उत्कृष्ट शोध के लिए सम्मानित किया जा रहा है।
  • स्कूली स्तर पर जागरूकता: स्कूलों में विज्ञान प्रदर्शनी (Science Exhibitions), वाद-विवाद प्रतियोगिताएं और क्विज आयोजित किए जा रहे हैं। छात्रों को सिखाया जा रहा है कि विज्ञान केवल किताबों का विषय नहीं है, बल्कि यह हमारे रोजमर्रा के जीवन और सोच का हिस्सा है।
  • ओपन हाउस: CSIR, DRDO और ISRO की कई प्रयोगशालाओं को आज आम जनता और छात्रों के लिए खोल दिया गया है (Open House) ताकि वे भारत की वैज्ञानिक प्रगति को करीब से देख सकें।

भविष्य की चुनौतियां और भारतीय विज्ञान का उत्तरदायित्व

आज के समय में दुनिया के सामने जलवायु परिवर्तन (Climate Change), नई महामारियों का खतरा, और ऊर्जा संकट (Energy Crisis) जैसी बड़ी चुनौतियां हैं। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि इन वैश्विक समस्याओं का समाधान विज्ञान और तकनीक के पास ही है।

भारतीय वैज्ञानिक आज ग्रीन हाइड्रोजन (Green Hydrogen), रिन्यूएबल एनर्जी (सौर और पवन ऊर्जा), और सस्टेनेबल एग्रीकल्चर के क्षेत्र में विश्व स्तरीय शोध कर रहे हैं। भारत का लक्ष्य केवल अपने लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के कल्याण के लिए विज्ञान का उपयोग करना है।

नेशनल साइंस डे पर नरेंद्र मोदी ने वैज्ञानिकों को दी बधाई न केवल हमारे वैज्ञानिकों के लिए एक प्रोत्साहन है, बल्कि यह 140 करोड़ देशवासियों के लिए एक रिमाइंडर भी है कि भारत का भविष्य विज्ञान के हाथों में सुरक्षित है। सर सी. वी. रमन से शुरू हुई यह यात्रा आज अंतरिक्ष की गहराइयों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ऊंचाइयों तक पहुंच चुकी है।

एक नागरिक के रूप में, हमारा यह कर्तव्य है कि हम अपने दैनिक जीवन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अपनाएं, अंधविश्वासों से दूर रहें और देश के विकास में तार्किक रूप से अपना योगदान दें।

By Vivan Verma

विवान तेज खबरी (Tez Khabri) के समाचार रिपोर्टर हैं, जो ब्रेकिंग न्यूज़ और राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को कवर करते हैं। विवान तथ्यात्मक रिपोर्टिंग और तेज अपडेट के लिए जाने जाते हैं और प्रशासनिक व जनहित से जुड़े मामलों पर नियमित लेखन करते हैं।

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