इतिहास बदलने के लिए तैयार खड़ा है SLS रॉकेट
अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में आज का दिन बेहद खास है। फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर (Kennedy Space Center) में हलचल तेज हो गई है। दुनिया के सबसे शक्तिशाली रॉकेट, Space Launch System (SLS) के आसपास इंजीनियरों की फौज तैनात है। क्यों? क्योंकि NASA Moon Mission अपने अगले और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुँच चुका है।
नासा के महत्वाकांक्षी मिशन Artemis II की उलटी गिनती अनौपचारिक रूप से शुरू हो चुकी है। अपोलो मिशन के खत्म होने के 50 से अधिक वर्षों बाद, यह पहला मौका है जब इंसान पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) को छोड़कर चंद्रमा की तरफ जाएगा। लेकिन लॉन्च से पहले एक आखिरी और सबसे कठिन परीक्षा बाकी है, जिसे तकनीकी भाषा में Wet Dress Rehearsal (WDR) या ‘वेट टेस्ट’ कहा जाता है।
भाग 1: ब्रेकिंग न्यूज़ – लॉन्च पैड पर क्या हो रहा है? (Current Status)
ताज़ा रिपोर्ट्स के मुताबिक, नासा ने Artemis II के लॉन्च के लिए अपनी अंतिम तैयारियां शुरू कर दी हैं।
The Rollout: SLS रॉकेट और ओरियन कैप्सूल को व्हिकल असेंबली बिल्डिंग (VAB) से बाहर निकालकर लॉन्च पैड 39B (Launch Pad 39B) पर खड़ा कर दिया गया है। यह वही ऐतिहासिक पैड है जहाँ से अपोलो मिशन और स्पेस शटल लॉन्च हुए थे।
Wet Test की तैयारी: नासा के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि अगले 48 घंटों में Wet Dress Rehearsal शुरू की जाएगी। यह लॉन्च से पहले का ‘फाइनल एग्जाम’ है। अगर यह टेस्ट सफल रहा, तो अगले कुछ हफ्तों में हम इंसानों को चाँद की तरफ उड़ते हुए देखेंगे।
भाग 2: क्या होता है ‘Wet Dress Rehearsal’? (Understanding Wet Test)
आम लोगों के लिए ‘वेट टेस्ट’ शब्द नया हो सकता है। आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।
परिभाषा: यह लॉन्च के दिन की पूरी नक़ल (Simulation) है। इसमें रॉकेट के इंजन को आग (Ignition) लगाने के अलावा सब कुछ किया जाता है।
‘Wet’ क्यों कहते हैं? इसे ‘वेट’ (गीला) इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस टेस्ट के दौरान रॉकेट के फ्यूल टैंकों में असली, सुपर-कूल्ड लिक्विड प्रोपेलेंट (Liquid Propellant) भरा जाता है।
- Liquid Hydrogen: -423°F (-253°C) तापमान पर।
- Liquid Oxygen: -297°F (-183°C) तापमान पर।

प्रक्रिया (The Process):
- Countdown: उल्टी गिनती शुरू की जाती है (T-Minus 46 hours)।
- Fueling: लाखों गैलन क्रायोजेनिक फ्यूल भरा जाता है। यह सबसे खतरनाक हिस्सा है क्योंकि लिक्विड हाइड्रोजन बहुत ज्वलनशील होता है और लीक होने का डर रहता है।
- Terminal Count: उल्टी गिनती को लॉन्च के सिर्फ 10 सेकंड पहले (T-10 seconds) रोका जाता है।
- Drain: अंत में, सारा फ्यूल वापस निकाल लिया जाता है।
इस टेस्ट का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि रॉकेट, सॉफ्टवेयर और ग्राउंड सिस्टम लॉन्च के दबाव को झेलने के लिए तैयार हैं।
भाग 3: Artemis II मिशन क्या है? (Mission Overview)
बहुत से लोग सोचते हैं कि इस मिशन में इंसान चाँद पर उतरेंगे। लेकिन ऐसा नहीं है।
उद्देश्य: Artemis II एक ‘फ्लाई-बाय’ (Lunar Flyby) मिशन है।
- चार अंतरिक्ष यात्री ओरियन स्पेसक्राफ्ट में बैठकर चाँद की कक्षा में जाएंगे।
- वे चाँद के चारों ओर चक्कर लगाएंगे (उतरेंगे नहीं)।
- वे चाँद के पीछे के अंधेरे हिस्से (Dark Side of the Moon) से गुजरेंगे और वहां से पृथ्वी को ‘उदय’ (Earthrise) होते हुए देखेंगे।
- लगभग 10 दिनों की यात्रा के बाद वे प्रशांत महासागर में वापस लौट आएंगे।
महत्व: यह मिशन यह साबित करेगा कि ओरियन कैप्सूल के लाइफ सपोर्ट सिस्टम (Life Support Systems) अंतरिक्ष यात्रियों को गहरे अंतरिक्ष (Deep Space) में जीवित रखने में सक्षम हैं। इसके बाद ही Artemis III मिशन में इंसान चाँद की सतह पर कदम रखेंगे।
भाग 4: वे 4 हीरो जो इतिहास रचेंगे (Meet the Crew)
नासा ने इस मिशन के लिए जो टीम चुनी है, वह विविधता (Diversity) का प्रतीक है।
- Reid Wiseman (कमांडर): एक अनुभवी नेवल एविएटर और टेस्ट पायलट। मिशन की कमान इनके हाथ में होगी।
- Victor Glover (पायलट): यह चाँद की यात्रा करने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति (Person of Color) होंगे। वे रॉकेट को कंट्रोल करेंगे।
- Christina Koch (मिशन स्पेशलिस्ट): क्रिस्टीना चाँद के करीब जाने वाली पहली महिला (First Woman) बनेंगी। उनके नाम पहले से ही अंतरिक्ष में सबसे लंबे समय तक रहने वाली महिला का रिकॉर्ड है।
- Jeremy Hansen (मिशन स्पेशलिस्ट): ये कनाडाई स्पेस एजेंसी (CSA) के एस्ट्रोनॉट हैं। पहली बार कोई गैर-अमेरिकी व्यक्ति पृथ्वी की निचली कक्षा से बाहर जाएगा।

भाग 5: तकनीक का चमत्कार – SLS और Orion (The Tech Stack)
इस मिशन की सफलता दो मशीनों पर टिकी है।
1. Space Launch System (SLS): यह दुनिया का अब तक का सबसे शक्तिशाली रॉकेट है।
- इसकी ऊंचाई स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से भी ज्यादा है।
- यह लिफ्ट-ऑफ के समय 8.8 मिलियन पाउंड का थ्रस्ट (Thrust) पैदा करता है।
2. Orion Spacecraft: यह वह कैप्सूल है जिसमें अंतरिक्ष यात्री रहेंगे।
- Heat Shield: जब यह पृथ्वी पर वापस लौटेगा, तो इसकी गति 25,000 मील प्रति घंटा होगी। इसे 5,000°F (2,760°C) तापमान सहन करना होगा। पिछली बार (Artemis I) में हीट शील्ड में कुछ दिक्कतें आई थीं, जिसे अब ठीक कर लिया गया है।
भाग 6: देरी क्यों हुई? (Why the Delay?)
मूल योजना के अनुसार, यह मिशन पहले ही हो जाना चाहिए था। लेकिन अंतरिक्ष विज्ञान में “Safety First” का नियम चलता है।
- Artemis I का डेटा: पहले मानवरहित मिशन के दौरान हीट शील्ड उम्मीद से ज्यादा घिस गई थी। नासा के इंजीनियरों ने इसे ठीक करने में महीनों लगा दिए।
- Batteries: ओरियन की बैटरियों में भी कुछ तकनीकी खामियां पाई गई थीं।
अब, 2026 में, नासा आश्वस्त है कि सभी सिस्टम “Go for Launch” हैं।
भाग 7: मंगल का रास्ता चाँद से होकर जाता है (Moon to Mars)
नासा बार-बार कह रहा है – “हम चाँद पर वापस जा रहे हैं, रहने के लिए।”
- Gateway: नासा चाँद की कक्षा में एक छोटा स्पेस स्टेशन बनाएगा जिसे Lunar Gateway कहा जाएगा। Artemis II इसका रास्ता साफ करेगा।
- Mars Mission: चाँद पर हम जो तकनीक सीखेंगे (जैसे वहां के पानी से फ्यूल बनाना, रेडिएशन से बचना), उसी का इस्तेमाल करके 2030 या 2040 के दशक में इंसान मंगल ग्रह (Red Planet) पर जाएगा।

भाग 8: भारत का कनेक्शन (The India Connection)
भले ही इसमें कोई भारतीय एस्ट्रोनॉट नहीं जा रहा, लेकिन भारत के लिए भी यह गर्व की बात है।
- Artemis Accords: भारत ने ‘आर्टेमिस अकॉर्ड्स’ पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका मतलब है कि भविष्य के मून मिशन में भारत, नासा का भागीदार होगा।
- इसरो (ISRO) अपना गगनयान मिशन लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है, और नासा के साथ मिलकर एक जॉइंट मिशन भी प्लान कर रहा है।
भाग 9: जोखिम और चुनौतियां (Risks Involved)
स्पेस मिशन कभी भी 100% सुरक्षित नहीं होते।
- Radiation: वान एलेन रेडिएशन बेल्ट (Van Allen Belts) से गुजरते समय अंतरिक्ष यात्रियों को भारी रेडिएशन का सामना करना पड़ेगा।
- Communication Blackout: जब कैप्सूल चाँद के पीछे जाएगा, तो पृथ्वी से उसका संपर्क कुछ समय के लिए टूट जाएगा। वह 45 मिनट का सन्नाटा सबसे डरावना होगा।
मानवता की एक नई छलांग
अंत में, NASA Artemis II का वेट टेस्ट सिर्फ एक तकनीकी प्रक्रिया नहीं है। यह मानवता के सपनों की उड़ान है। 1969 में नील आर्मस्ट्रांग ने कहा था, “एक छोटा कदम।” आज 2026 में, हम उस कदम को एक स्थायी दौड़ में बदलने जा रहे हैं।
अगले कुछ दिन बहुत महत्वपूर्ण हैं। अगर वेट टेस्ट सफल रहा, तो हम जल्द ही उस पल के गवाह बनेंगे जब इंसान दोबारा अपनी धरती को छोड़कर अनंत आकाश की गहराइयों में जाएगा।
क्या आप इस ऐतिहासिक लॉन्च को देखने के लिए उत्साहित हैं? क्या आपको लगता है कि हम अपने जीवनकाल में मंगल पर इंसानों को चलते हुए देख पाएंगे? कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।
Godspeed Artemis II!
