नमो शक्ति एक्सप्रेसवे

यह सिर्फ एक सड़क नहीं है। यह उत्तर गुजरात (North Gujarat) के सूखे और सीमावर्ती इलाकों को सौराष्ट्र (Saurashtra) के समृद्ध समुद्र तट से जोड़ने वाली एक आर्थिक क्रांति है। बनासकांठा के थराद से लेकर सौराष्ट्र के द्वारका/पोरबंदर तक जाने वाला यह कॉरिडोर गुजरात का नक्शा बदल देगा।

1. क्या है ‘नमो शक्ति एक्सप्रेसवे’? (Project Overview)

वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में स्पष्ट किया कि गुजरात अब ‘पोर्ट-लेड डेवलपमेंट’ (बंदरगाह आधारित विकास) से आगे बढ़कर ‘हाई-स्पीड कनेक्टिविटी’ की ओर बढ़ रहा है।

प्रोजेक्ट की मुख्य बातें:

  • नाम: नमो शक्ति एक्सप्रेसवे (Namo Shakti Expressway)
  • रूट: बनासकांठा (उत्तर गुजरात) से सौराष्ट्र का तटीय क्षेत्र।
  • प्रकृति: ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे (यानी नई जमीन पर बनने वाला, पुरानी सड़क का चौड़ीकरण नहीं)।
  • उद्देश्य: उत्तर भारत और उत्तर गुजरात के लॉजिस्टिक्स को सीधे सौराष्ट्र के बंदरगाहों और औद्योगिक हब से जोड़ना।

यह एक्सप्रेसवे ‘शक्ति’ (ऊर्जा) और ‘गति’ का प्रतीक होगा, क्योंकि यह गुजरात के रिन्यूएबल एनर्जी पार्कों (कच्छ/बनासकांठा) को इंडस्ट्रियल हब (मोरबी/जामनगर) से भी जोड़ेगा।

2. संभावित रूट मैप: किन जिलों की चमकेगी किस्मत?

हालांकि विस्तृत डीपीआर (DPR) आना बाकी है, लेकिन भूगोल और औद्योगिक जरूरतों को देखते हुए, यह एक्सप्रेसवे इन जिलों को कवर कर सकता है:

नमो शक्ति एक्सप्रेसवे

(A) शुरुआत: बनासकांठा (The Gateway)

  • थराद/वाव: यह एक्सप्रेसवे संभवतः थराद के पास से शुरू होगा, जो पहले से ही ‘अमृतसर-जामनगर इकोनॉमिक कॉरिडोर’ का हिस्सा है।
  • फायदा: बनासकांठा, जो आलू और अनार की खेती के लिए मशहूर है, उसे अपने उत्पाद सीधे एक्सपोर्ट करने के लिए बंदरगाह तक का सुपरफास्ट रास्ता मिलेगा।

(B) मध्य भाग: पाटन और लिटिल रन ऑफ कच्छ

  • यह एक्सप्रेसवे पाटन जिले और सुरेंद्रनगर के सीमावर्ती इलाकों (जैसे सांतलपुर, राधनपुर) से होकर गुजरेगा।
  • यह इलाका अब तक औद्योगिक रूप से पिछड़ा था। इस एक्सप्रेसवे के बनने से यहां वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स पार्क बन सकते हैं।

(C) इंडस्ट्रियल हब: मोरबी (The Ceramic City)

  • सबसे बड़ा गेम-चेंजर मोरबी के लिए होगा। मोरबी दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सिरेमिक (टाइल्स) मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर है।
  • अभी मोरबी के ट्रकों को कांडला/मुंद्रा जाने के लिए या उत्तर भारत जाने के लिए भारी ट्रैफिक का सामना करना पड़ता है। ‘नमो शक्ति एक्सप्रेसवे’ मोरबी को सीधा उत्तर भारत से जोड़ देगा।

(D) अंतिम पड़ाव: सौराष्ट्र का तट (Jamnagar & Dwarka)

  • जामनगर: दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी और रिलायंस का ग्रीन एनर्जी कॉम्प्लेक्स यहीं है।
  • देवभूमि द्वारका: भगवान कृष्ण की नगरी और पर्यटन का केंद्र।
  • इस एक्सप्रेसवे का अंतिम छोर तटीय राजमार्ग (Coastal Highway) से मिलेगा, जो पूरे सौराष्ट्र के तट को कवर करता है।

3. आर्थिक प्रभाव: गुजरात की GDP में बूस्टर डोज़

वित्त मंत्री ने इसे “₹3.70 लाख करोड़ के बजट का मुकुट” कहा है। आइए समझते हैं कि यह प्रोजेक्ट अर्थव्यवस्था को कैसे रफ़्तार देगा।

नमो शक्ति एक्सप्रेसवे

1. लॉजिस्टिक्स कॉस्ट में कमी:

अभी राजस्थान, पंजाब या दिल्ली से आने वाले ट्रक जो सौराष्ट्र (जामनगर/द्वारका) जाना चाहते हैं, उन्हें अक्सर अहमदाबाद या राजकोट के व्यस्त रास्तों से होकर जाना पड़ता है।

  • ‘नमो शक्ति एक्सप्रेसवे’ एक बाईपास (Bypass) का काम करेगा।
  • इससे समय और ईंधन दोनों की बचत होगी। लॉजिस्टिक्स लागत कम होने से मोरबी की टाइल्स और जामनगर का पेट्रोल सस्ता हो सकता है।

2. बंदरगाहों की कनेक्टिविटी:

गुजरात के पास देश की सबसे लंबी तटरेखा (1600 किमी) है। यह एक्सप्रेसवे नवलखी पोर्ट (Navlakhi), ओखा (Okha) और जामनगर की जेटी को सीधे उत्तर भारत के बाजारों से जोड़ेगा।

3. ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर:

कच्छ और बनासकांठा में एशिया के सबसे बड़े सोलर और विंड पार्क बन रहे हैं। इन पार्कों के निर्माण और रखरखाव के लिए भारी मशीनरी को लाने-ले जाने के लिए एक चौड़ी और मजबूत सड़क की जरूरत थी, जिसे यह एक्सप्रेसवे पूरा करेगा।

4. पर्यटन: रण से सागर तक का सफर

गुजरात टूरिज्म के लिए यह एक्सप्रेसवे ‘सोने पर सुहागा’ साबित होगा। अब पर्यटक एक ही ट्रिप में रेगिस्तान और समंदर दोनों का मजा ले सकेंगे।

  • सर्किट: नडाबेट (सीमा दर्शन) -> व्हाइट रण (कच्छ) -> नमो शक्ति एक्सप्रेसवे -> द्वारकाधीश मंदिर (शिवराजपुर बीच)।
  • अभी बनासकांठा से द्वारका जाने में 10-12 घंटे लगते हैं। इस एक्सप्रेसवे के बाद यह सफर 6-7 घंटे में सिमट सकता है।

5. सामरिक महत्व (Strategic Importance): सेना के लिए वरदान

हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि बनासकांठा पाकिस्तान सीमा से सटा हुआ है और जामनगर/द्वारका में भारतीय नौसेना और वायुसेना के महत्वपूर्ण बेस हैं।

  • युद्ध या आपातकाल की स्थिति में, सेना को उत्तर भारत से पश्चिमी तट तक रसद और हथियार पहुंचाने के लिए एक वैकल्पिक और तेज़ रास्ते की जरूरत होती है।
  • ‘नमो शक्ति एक्सप्रेसवे’ भारतीय सेना के लिए एक स्ट्रैटेजिक एसेट साबित होगा। यह भुज और नलिया एयरबेस को भी इनडायरेक्ट कनेक्टिविटी देगा।

6. रियल एस्टेट: कहां निवेश करें?

जैसे ही किसी एक्सप्रेसवे की घोषणा होती है, वहां जमीन के भाव आसमान छूने लगते हैं। निवेशकों के लिए यह एक बड़ा मौका है।

  • हॉटस्पॉट: थराद, राधनपुर, हलवद (Surendranagar), और मोरबी के बाहरी इलाके।
  • यहां भविष्य में इंडस्ट्रियल पार्क, होटल, ढाबे और आवासीय कॉलोनियां बनेंगी। जो लोग लंबी अवधि (5-10 साल) के लिए निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए यह रूट ‘गोल्ड माइन’ है।

7. चुनौतियां: राह आसान नहीं है

इतने बड़े प्रोजेक्ट में चुनौतियां भी कम नहीं होंगी।

  1. जमीन अधिग्रहण (Land Acquisition): किसानों से उपजाऊ जमीन लेना हमेशा एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। सरकार को उचित मुआवजा देकर इसे सुलझाना होगा।
  2. पर्यावरण (Environment): यह रूट ‘वाइल्ड ऐस सेंचुरी’ (Wild Ass Sanctuary – घुड़खर अभयारण्य) के पास से गुजर सकता है। पर्यावरण की मंजूरी लेना और वन्यजीवों को बचाना एक बड़ी चुनौती होगी।
  3. मानसून: सौराष्ट्र और उत्तर गुजरात में हाल के वर्षों में भारी बाढ़ देखी गई है। एक्सप्रेसवे को इस तरह डिजाइन करना होगा कि वह बाढ़ में डूबे नहीं और जल निकासी को न रोके।

8. अन्य एक्सप्रेसवे से तुलना

गुजरात में पहले से ही कई एक्सप्रेसवे बन रहे हैं। यह उनसे कैसे अलग है?

एक्सप्रेसवेरूटस्थिति‘नमो शक्ति’ से अंतर
अहमदाबाद-धोलेराअहमदाबाद से SIRलगभग पूर्णयह सेंट्रल गुजरात के लिए है।
दिल्ली-मुंबईवडोदरा-सूरत होकरनिर्माणाधीनयह पूर्वी गुजरात को कवर करता है।
अमृतसर-जामनगरथराद-जामनगरनिर्माणाधीन‘नमो शक्ति’ इसका पूरक (Complementary) हो सकता है या इसे और विस्तार देगा।

9. 2047 के गुजरात की नींव

वित्त मंत्री कनुभाई देसाई ने बजट पेश करते हुए कहा था, “हम आज का नहीं, 25 साल बाद का गुजरात देख रहे हैं।”

‘नमो शक्ति एक्सप्रेसवे’ उसी विजन का हिस्सा है। यह उत्तर गुजरात के सूखे खेतों को सौराष्ट्र के खारे पानी से नहीं, बल्कि व्यापार और समृद्धि की मीठी लहरों से जोड़ेगा। जब यह एक्सप्रेसवे बनकर तैयार होगा, तो साणंद में बनी चिप्स, मोरबी की टाइल्स और जामनगर का पेट्रोल इसी रास्ते से देश के कोने-कोने में जाएगा।

By Vivan Verma

विवान तेज खबरी (Tez Khabri) के समाचार रिपोर्टर हैं, जो ब्रेकिंग न्यूज़ और राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को कवर करते हैं। विवान तथ्यात्मक रिपोर्टिंग और तेज अपडेट के लिए जाने जाते हैं और प्रशासनिक व जनहित से जुड़े मामलों पर नियमित लेखन करते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *