Mouth Cancer Symptoms

कैंसर एक ऐसा शब्द है जो किसी भी व्यक्ति के मन में गहरा डर पैदा कर सकता है। जब बात मुंह के कैंसर या ओरल कैंसर की आती है, तो हमारे समाज में जागरूकता की भारी कमी दिखाई देती है। अधिकांश लोगों का मानना है कि यदि मुंह में कोई गांठ या ट्यूमर नहीं है, तो वे पूरी तरह से सुरक्षित हैं। यह एक बहुत ही खतरनाक भ्रांति है। चिकित्सा विज्ञान और ऑन्कोलॉजिस्ट (कैंसर विशेषज्ञ) बार-बार यह चेतावनी देते हैं कि मुंह में गांठ होना ही माउथ कैंसर का लक्षण नहीं, ये समस्या भी खतरा हो सकती है जिसे हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। मुंह का कैंसर भारत में सबसे आम कैंसरों में से एक है, और इसका मुख्य कारण तंबाकू, गुटखा और पान मसाले का सेवन है। लेकिन, सबसे बड़ी चुनौती यह है कि मरीज डॉक्टर के पास तब पहुंचते हैं जब बीमारी तीसरे या चौथे चरण में पहुंच चुकी होती है। इसका कारण लक्षणों की सही पहचान न होना है।

मुंह में गांठ होना ही माउथ कैंसर का लक्षण नहीं, ये समस्या भी खतरा

इस विस्तृत लेख में, हम उन तमाम लक्षणों, कारणों और निवारण के उपायों पर चर्चा करेंगे जो गांठ के अलावा भी मुंह के कैंसर का संकेत देते हैं। हमारा उद्देश्य आपको डराना नहीं, बल्कि जागरूक करना है ताकि समय रहते इस बीमारी को पहचाना जा सके और इसका इलाज किया जा सके।

ओरल कैंसर (मुंह का कैंसर) क्या है?

इससे पहले कि हम लक्षणों की गहराई में जाएं, यह समझना जरूरी है कि मुंह का कैंसर असल में क्या है। ओरल कैंसर सिर और गर्दन के कैंसर का एक प्रकार है। यह मुंह के किसी भी हिस्से में विकसित हो सकता है, जिसमें शामिल हैं:

  • होठ
  • मसूड़े
  • जीभ
  • गालों की अंदरूनी परत
  • मुंह का तालू (ऊपरी हिस्सा)
  • जीभ के नीचे का हिस्सा (फर्श)

कैंसर तब होता है जब मुंह के ऊतकों (tissues) में आनुवंशिक परिवर्तन होते हैं, जिससे कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं। जब ये कोशिकाएं एक जगह जमा होती हैं, तो ट्यूमर बनता है। लेकिन यह ट्यूमर या गांठ हमेशा शुरुआती लक्षण नहीं होता। कई बार बीमारी बहुत सूक्ष्म संकेतों के साथ शुरू होती है। इसीलिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि मुंह में गांठ होना ही माउथ कैंसर का लक्षण नहीं, ये समस्या भी खतरा है जो आपके जीवन को संकट में डाल सकती है।

Mouth Cancer Symptoms

गांठ के अलावा मुंह के कैंसर के अन्य खतरनाक लक्षण

अक्सर लोग दर्पण में अपना चेहरा देखते हैं लेकिन मुंह के अंदरूनी हिस्सों की जांच नहीं करते। यदि वे जांचते भी हैं, तो केवल एक स्पष्ट गांठ की तलाश करते हैं। लेकिन कैंसर कई अन्य रूपों में भी दस्तक दे सकता है। आइए उन लक्षणों पर विस्तार से चर्चा करें जो गांठ नहीं हैं लेकिन उतने ही खतरनाक हैं।

1. मुंह में ठीक न होने वाले छाले (Ulcers)

मुंह में छाले होना एक बहुत ही सामान्य समस्या है। यह पेट की गर्मी, विटामिन की कमी या कब्ज के कारण हो सकते हैं और आमतौर पर 7 से 10 दिनों में ठीक हो जाते हैं। लेकिन, अगर आपके मुंह में कोई ऐसा छाला है जो 2-3 सप्ताह बीत जाने के बाद भी ठीक नहीं हो रहा है, तो यह चिंता का विषय है।

कैंसर वाले छाले अक्सर दर्द रहित होते हैं (शुरुआती चरणों में), इसलिए लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते। यह छाला जीभ पर, गाल के अंदर या मसूड़ों पर हो सकता है। यदि आप तंबाकू का सेवन करते हैं और आपको ऐसा छाला है, तो तुरंत बायोप्सी करानी चाहिए। याद रखें, हर छाला कैंसर नहीं होता, लेकिन हर कैंसर की शुरुआत एक छोटे से घाव या छाले से हो सकती है। इसलिए, मुंह में गांठ होना ही माउथ कैंसर का लक्षण नहीं, ये समस्या भी खतरा साबित हो सकती है।

2. सफेद या लाल धब्बे (Leukoplakia और Erythroplakia)

मुंह के अंदर की त्वचा का रंग आम तौर पर गुलाबी होता है। यदि आपको मुंह के अंदर, गालों पर, जीभ पर या मसूड़ों पर सफेद या लाल रंग के धब्बे (Patches) दिखाई दें, तो यह प्री-कैंसरस (कैंसर से पहले की) स्थिति हो सकती है।

  • ल्यूकोप्लाकिया (Leukoplakia): यह सफेद या ग्रे रंग के धब्बे होते हैं जिन्हें खुरच कर हटाया नहीं जा सकता। यह अक्सर तंबाकू चबाने वालों में देखा जाता है। हालांकि अधिकांश ल्यूकोप्लाकिया सौम्य होते हैं, लेकिन कुछ कैंसर में बदल सकते हैं।
  • एरिथ्रोप्लाकिया (Erythroplakia): यह लाल रंग के धब्बे होते हैं जो थोड़े उभरे हुए या मखमली हो सकते हैं। ये ल्यूकोप्लाकिया की तुलना में अधिक खतरनाक होते हैं और इनके कैंसर में बदलने की संभावना बहुत अधिक होती है।
  • एरिथ्राल्यूकोप्लाकिया: जब लाल और सफेद धब्बे एक साथ दिखाई देते हैं, तो यह और भी गंभीर संकेत हो सकता है।

इन धब्बों में अक्सर कोई दर्द नहीं होता, इसलिए मरीज डॉक्टर के पास जाने में देरी करते हैं।

3. अकारण रक्तस्राव (Unexplained Bleeding)

मसूड़ों से खून आना अक्सर पायरिया या मसूड़ों की बीमारी (Gingivitis) का लक्षण माना जाता है। लेकिन अगर बिना किसी चोट के या दांतों को ब्रश किए बिना भी मुंह के किसी हिस्से से खून आ रहा है, तो यह कैंसर का संकेत हो सकता है। कैंसर युक्त ऊतक बहुत नाजुक होते हैं और हल्का सा स्पर्श होने पर भी उनसे खून निकल सकता है। यदि आपके मसूड़े या गाल की त्वचा से बार-बार खून आ रहा है और दंत चिकित्सक (Dentist) द्वारा किए गए सामान्य उपचार से यह ठीक नहीं हो रहा, तो ऑन्कोलॉजिस्ट की सलाह लेना अनिवार्य है। यह स्थिति सिद्ध करती है कि मुंह में गांठ होना ही माउथ कैंसर का लक्षण नहीं, ये समस्या भी खतरा है।

4. सुन्नपन या संवेदनशीलता में कमी (Numbness)

मुंह, चेहरे या गर्दन के किसी हिस्से में अचानक सुन्नपन महसूस होना, या ऐसा लगना कि वहां की त्वचा को छूने पर कोई अहसास नहीं हो रहा, खतरे की घंटी है। यह संकेत देता है कि कैंसर की कोशिकाएं नसों (Nerves) को प्रभावित कर रही हैं। यह लक्षण जीभ या निचले होंठ में सबसे अधिक महसूस किया जा सकता है। इसके अलावा, मुंह के किसी हिस्से में लगातार झुनझुनी होना भी एक लक्षण हो सकता है। नसों का डैमेज होना यह बताता है कि बीमारी शायद थोड़ी आगे बढ़ चुकी है।

5. दांतों का ढीला होना (Loose Teeth)

उम्र बढ़ने के साथ या मसूड़ों की गंभीर बीमारी में दांत ढीले होना स्वाभाविक हो सकता है। लेकिन अगर एक स्वस्थ व्यक्ति के दांत अचानक ढीले होने लगें, या दांत उखड़ने के बाद उसका घाव न भरे, तो यह जबड़े के कैंसर का संकेत हो सकता है। ट्यूमर जबड़े की हड्डी को गला सकता है, जिससे दांतों की पकड़ कमजोर हो जाती है। इसके अलावा, जो लोग डेंचर (नकली दांत) पहनते हैं, अगर उन्हें अचानक डेंचर फिट करने में परेशानी होने लगे या वह ढीला/तंग हो जाए, तो इसका मतलब है कि मसूड़ों या जबड़े के आकार में कोई बदलाव आ रहा है।

6. निगलने या चबाने में कठिनाई (Dysphagia)

मुंह का कैंसर केवल दिखावटी लक्षणों तक सीमित नहीं रहता। यह आपके रोजमर्रा के कार्यों को भी प्रभावित करता है। यदि आपको खाना चबाने, जीभ को हिलाने या भोजन निगलने में लगातार कठिनाई हो रही है, तो यह गले या जीभ के पिछले हिस्से में कैंसर का संकेत हो सकता है। कई बार ऐसा महसूस होता है कि गले में कुछ अटका हुआ है जो नीचे नहीं जा रहा। इसे ग्लोबस सेंसेशन कहते हैं। यह भोजन नली के कैंसर का भी लक्षण हो सकता है, जो मुंह के कैंसर से जुड़ा हो सकता है।

7. आवाज में बदलाव (Voice Changes)

यदि आपकी आवाज अचानक भारी हो गई है, या आप ठीक से बोल नहीं पा रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज न करें। यह स्वर रज्जु (Vocal Cords) या गले के आसपास ट्यूमर का संकेत हो सकता है। जो लोग धूम्रपान करते हैं, उनमें यह लक्षण बहुत आम है। यदि दो सप्ताह तक आवाज बैठी रहे और सामान्य उपचार से ठीक न हो, तो यह जांच का विषय है।

8. कान में दर्द (Ear Pain)

यह सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन मुंह का कैंसर कान में दर्द का कारण बन सकता है। इसे “रेफर्ड पेन” (Referred Pain) कहा जाता है। जब जीभ के पिछले हिस्से या गले में कोई समस्या होती है, तो उसका दर्द उसी नस के माध्यम से कान तक पहुंचता है। अगर आपको कान में कोई संक्रमण नहीं है, फिर भी लगातार कान में दर्द बना रहता है, तो डॉक्टर को मुंह और गले की जांच करने के लिए कहें। यह एक ऐसा लक्षण है जिसे लोग अक्सर ईएनटी (ENT) समस्या समझकर गलत दिशा में इलाज कराते रहते हैं, जबकि असल वजह मुंह में छिपी होती है। यह स्पष्ट करता है कि मुंह में गांठ होना ही माउथ कैंसर का लक्षण नहीं, ये समस्या भी खतरा हो सकती है।

9. वजन में अचानक कमी

कैंसर शरीर के मेटाबॉलिज्म को बदल देता है। इसके अलावा, मुंह में दर्द या निगलने में कठिनाई के कारण मरीज कम खाने लगता है। यदि बिना किसी प्रयास के आपका वजन तेजी से कम हो रहा है, तो यह शरीर में किसी गंभीर बीमारी का संकेत है, जिसमें ओरल कैंसर भी शामिल है।

Mouth Cancer Symptoms

जोखिम कारक: कौन है सबसे अधिक खतरे में?

लक्षणों को जानने के बाद यह समझना भी जरूरी है कि आखिर यह कैंसर होता क्यों है? क्या यह केवल भाग्य की बात है या हमारी जीवनशैली इसके लिए जिम्मेदार है?

1. तंबाकू (Tobacco) – सबसे बड़ा दुश्मन

भारत में मुंह के कैंसर के लगभग 80-90% मामले तंबाकू के सेवन से जुड़े होते हैं। चाहे वह सिगरेट, बीड़ी, हुक्का हो या धुआं रहित तंबाकू जैसे गुटखा, खैनी, जर्दा और पान मसाला। तंबाकू में निकोटीन के अलावा हजारों ऐसे रसायन होते हैं जो कोशिकाओं के डीएनए को नुकसान पहुंचाते हैं। जो लोग तंबाकू को गाल के एक ही हिस्से में दबाकर रखते हैं, वहां की त्वचा धीरे-धीरे खराब होने लगती है और कैंसर का रूप ले लेती है।

2. शराब (Alcohol)

शराब का अत्यधिक सेवन भी मुंह के कैंसर का जोखिम बढ़ाता है। शराब मुंह की कोशिकाओं को डिहाइड्रेट करती है और उन्हें कार्सिनोजेन्स (कैंसर पैदा करने वाले तत्व) के प्रति अधिक संवेदनशील बनाती है। जो लोग शराब और तंबाकू दोनों का सेवन करते हैं, उनमें कैंसर का खतरा उन लोगों की तुलना में कई गुना अधिक होता है जो केवल एक का सेवन करते हैं।

3. ह्यूमन पेपिलोमा वायरस (HPV)

हाल के वर्षों में, एचपीवी संक्रमण मुंह और गले के कैंसर के बढ़ते मामलों का एक प्रमुख कारण बन गया है। विशेष रूप से एचपीवी टाइप 16 का संबंध ओरोफारीन्जियल कैंसर (गले के पिछले हिस्से का कैंसर) से पाया गया है। यह वायरस असुरक्षित ओरल सेक्स के माध्यम से फैलता है।

4. धूप का संपर्क (Sun Exposure)

होंठ का कैंसर उन लोगों में अधिक आम है जो धूप में बहुत अधिक समय बिताते हैं, जैसे किसान या बाहरी काम करने वाले मजदूर। सूरज की अल्ट्रावायलेट (UV) किरणें होंठों की त्वचा को नुकसान पहुंचाती हैं।

5. तेज धार वाले दांत (Sharp Teeth)

यह एक ऐसा कारण है जिस पर कम ध्यान दिया जाता है। यदि आपका कोई दांत टूटा हुआ है या बहुत नुकीला है और वह लगातार जीभ या गाल को रगड़ रहा है, तो वह स्थान पर एक घाव (Chronic ulcer) बन सकता है। लंबे समय तक लगातार जलन और चोट कैंसर में बदल सकती है। इसी तरह, खराब फिटिंग वाले डेंचर भी जोखिम पैदा कर सकते हैं।

6. पोषण की कमी

फलों और सब्जियों से रहित आहार भी मुंह के कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकता है। एंटीऑक्सीडेंट्स की कमी से शरीर कैंसर कोशिकाओं से लड़ने में कमजोर हो जाता है।

निदान (Diagnosis): बीमारी की पहचान कैसे करें?

जैसा कि हमने बार-बार कहा है, मुंह में गांठ होना ही माउथ कैंसर का लक्षण नहीं, ये समस्या भी खतरा है। इसलिए, यदि आपको ऊपर बताए गए कोई भी लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। निदान की प्रक्रिया में निम्नलिखित चरण शामिल हो सकते हैं:

  1. शारीरिक परीक्षण (Physical Exam): डॉक्टर आपके मुंह, गले, जीभ, गाल और गर्दन की जांच करेंगे। वे किसी भी असामान्य धब्बे, गांठ या सूजन को देखेंगे।
  2. एंडोस्कोपी (Endoscopy): गले के अंदरूनी हिस्से को देखने के लिए डॉक्टर एक पतली ट्यूब का उपयोग कर सकते हैं जिसमें कैमरा लगा होता है।
  3. बायोप्सी (Biopsy): यह कैंसर के निदान का सबसे सटीक तरीका है। इसमें संदिग्ध जगह से ऊतक (tissue) का एक छोटा टुकड़ा लिया जाता है और प्रयोगशाला में माइक्रोस्कोप के नीचे जांचा जाता है कि क्या उसमें कैंसर कोशिकाएं हैं।
  4. इमेजिंग टेस्ट: कैंसर कितना फैला है, यह जानने के लिए सीटी स्कैन (CT Scan), एमआरआई (MRI), पीईटी स्कैन (PET Scan) या एक्स-रे किया जा सकता है।

उपचार के विकल्प (Treatment Options)

मुंह के कैंसर का इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि बीमारी किस चरण (Stage) में है, ट्यूमर का आकार क्या है और मरीज का सामान्य स्वास्थ्य कैसा है।

1. सर्जरी (Surgery)

शुरुआती चरणों में सर्जरी सबसे आम और प्रभावी उपचार है। इसका उद्देश्य कैंसर वाले ट्यूमर और उसके आसपास के थोड़े से स्वस्थ ऊतकों को हटाना है। यदि कैंसर गर्दन तक फैल गया है, तो ‘नेक डिसेक्शन’ (Neck Dissection) किया जाता है, जिसमें गर्दन की लिम्फ नोड्स को हटा दिया जाता है।

2. रेडिएशन थेरेपी (Radiation Therapy)

सर्जरी के बाद बचे हुए कैंसर सेल्स को मारने के लिए या जिन मामलों में सर्जरी संभव नहीं है, वहां रेडिएशन थेरेपी का उपयोग किया जाता है। इसमें उच्च ऊर्जा वाली किरणों का उपयोग किया जाता है।

3. कीमोथेरेपी (Chemotherapy)

इसमें शक्तिशाली दवाओं का उपयोग किया जाता है जो कैंसर कोशिकाओं को मारती हैं। कीमोथेरेपी अक्सर रेडिएशन के साथ दी जाती है ताकि उपचार का प्रभाव बढ़ाया जा सके।

4. लक्षित थेरेपी (Targeted Therapy)

यह एक आधुनिक उपचार है जिसमें ऐसी दवाओं का उपयोग किया जाता है जो कैंसर कोशिकाओं के विशिष्ट प्रोटीन को निशाना बनाती हैं और उनकी वृद्धि को रोकती हैं। सेटुक्सीमैब (Cetuximab) इसका एक उदाहरण है।

5. इम्यूनोथेरेपी (Immunotherapy)

यह उपचार शरीर की अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) को कैंसर से लड़ने में मदद करता है। यह आमतौर पर उन मामलों में उपयोग किया जाता है जहां कैंसर अन्य उपचारों का जवाब नहीं दे रहा है।

रोकथाम (Prevention): बचाव ही सबसे बेहतर इलाज है

चूंकि मुंह के कैंसर के उपचार के बाद जीवन की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है (जैसे बोलने या खाने में दिक्कत, चेहरे के आकार में बदलाव), इसलिए रोकथाम सबसे महत्वपूर्ण है।

तंबाकू छोड़ें

यह सबसे महत्वपूर्ण कदम है। तंबाकू के किसी भी रूप का सेवन न करें। यदि आप छोड़ नहीं पा रहे हैं, तो नशामुक्ति केंद्रों या डॉक्टर की मदद लें। तंबाकू छोड़ने के कुछ ही वर्षों में कैंसर का जोखिम काफी कम हो जाता है।

शराब का सेवन सीमित करें

शराब का सेवन संयम में करें या पूरी तरह बंद कर दें।

नियमित दंत जांच (Dental Checkups)

साल में कम से कम दो बार डेंटिस्ट के पास जाएं। एक अनुभवी डेंटिस्ट न केवल आपके दांतों की जांच करता है, बल्कि वह मुंह के कैंसर के शुरुआती लक्षणों (जैसे ल्यूकोप्लाकिया या एरिथ्रोप्लाकिया) को भी पहचान सकता है जो शायद आपको दिखाई न दें।

नुकीले दांतों का इलाज कराएं

यदि आपका कोई दांत गाल या जीभ में चुभ रहा है, तो उसे नजरअंदाज न करें। उसे घिसवाएं या उसका उचित उपचार कराएं।

स्वस्थ आहार लें

अपने भोजन में हरी सब्जियां, टमाटर, गाजर, खट्टे फल और ओमेगा-3 फैटी एसिड शामिल करें। एंटीऑक्सीडेंट्स कैंसर से लड़ने में मदद करते हैं।

धूप से बचें

तेज धूप में निकलते समय टोपी पहनें और होठों पर सनस्क्रीन या लिप बाम का उपयोग करें जिसमें एसपीएफ (SPF) हो।

स्वयं परीक्षण (Self-Examination): घर पर जांच कैसे करें?

महीने में कम से कम एक बार आपको अपने मुंह की जांच खुद करनी चाहिए। इसके लिए एक अच्छी रोशनी वाली जगह और एक दर्पण की आवश्यकता होगी।

  1. होठ और मसूड़े: अपने होठों को ऊपर और नीचे पलट कर देखें। मसूड़ों पर किसी भी सफेद/लाल धब्बे या घाव की जांच करें।
  2. गाल: अपनी उंगली से गालों के अंदरूनी हिस्से को महसूस करें। देखें कि क्या कोई खुरदरापन या सूजन है।
  3. जीभ: जीभ को बाहर निकालें और दोनों तरफ घुमाकर देखें। जीभ के नीचे के हिस्से की भी जांच करें। किसी भी रंग परिवर्तन या गांठ पर ध्यान दें।
  4. तालू: सिर को पीछे झुकाएं और मुंह के ऊपरी हिस्से (तालू) को देखें।
  5. गर्दन: अपनी गर्दन और जबड़े के नीचे के हिस्से को छूकर देखें कि क्या कोई गांठ या सूजन महसूस हो रही है।

यदि आपको इस जांच के दौरान कुछ भी असामान्य लगता है, तो घबराएं नहीं, लेकिन देरी भी न करें। तुरंत डॉक्टर से मिलें। याद रखें, मुंह में गांठ होना ही माउथ कैंसर का लक्षण नहीं, ये समस्या भी खतरा हो सकती है जो आपकी नजरों से ओझल है।

मानसिक स्वास्थ्य और मुंह का कैंसर

कैंसर का निदान न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी तोड़ देने वाला होता है। मुंह के कैंसर के मरीज अक्सर अवसाद (Depression) और चिंता का शिकार हो जाते हैं। चेहरा बिगड़ने का डर, बोलने में असमर्थता और खाने-पीने की समस्याएं उन्हें समाज से अलग कर देती हैं। इसलिए, उपचार के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक सहायता (Counseling) और परिवार का समर्थन अत्यंत आवश्यक है।

बहुत से लोग लक्षणों को इसलिए भी छुपाते हैं क्योंकि वे निदान से डरते हैं। वे सोचते हैं कि अगर कैंसर निकला तो सब खत्म हो जाएगा। लेकिन सच्चाई यह है कि यदि पहले चरण में (Stage I) कैंसर का पता चल जाए, तो इसके ठीक होने की संभावना 80-90% तक होती है। लेकिन अगर आप डर के कारण डॉक्टर के पास नहीं जाते, तो आप बीमारी को उस स्तर तक पहुंचने का मौका दे रहे हैं जहां इलाज मुश्किल हो जाता है।

निष्कर्ष

मुंह का कैंसर एक जानलेवा बीमारी है, लेकिन यह उन कुछ कैंसरों में से एक है जिसे आसानी से रोका जा सकता है और शुरुआती दौर में पहचाना जा सकता है। समस्या यह है कि हमारे समाज में जागरूकता का अभाव है। लोग केवल गांठ या बड़े ट्यूमर को ही कैंसर मानते हैं। हमें इस सोच को बदलने की जरूरत है। छाले, रंग बदलना, खून आना, सुन्नपन, आवाज बदलना – ये सभी शरीर के वे संकेत हैं जो चीख-चीख कर कह रहे हैं कि कुछ गड़बड़ है।

इस ब्लॉग के माध्यम से हमने यह स्थापित करने का प्रयास किया है कि मुंह में गांठ होना ही माउथ कैंसर का लक्षण नहीं, ये समस्या भी खतरा है जिसे समय रहते पहचानना जरूरी है। अपनी जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाएं, नशीले पदार्थों से दूर रहें और अपने शरीर के संकेतों को सुनना सीखें। एक छोटा सा छाला जिसे आप नजरअंदाज कर रहे हैं, वह भविष्य में बड़ी मुसीबत बन सकता है। सतर्क रहें, स्वस्थ रहें और दूसरों को भी जागरूक करें। स्वास्थ्य ही सबसे बड़ी पूंजी है, और इसकी रक्षा करना आपकी जिम्मेदारी है।

By Meera Shah

मीरा तेज खबरी (Tez Khabri) के साथ जुड़ी एक समाचार लेखिका हैं। वे सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, महिला संबंधित विषयों और जनहित से जुड़ी खबरों पर लेखन करती हैं। मीरा का उद्देश्य पाठकों तक सरल भाषा में सत्यापित, उपयोगी और भरोसेमंद जानकारी पहुंचाना है।

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