Mona Singh on age shaming

ग्लैमर की दुनिया और उम्र का तकाजा

भारतीय मनोरंजन जगत, जिसे हम प्यार से बॉलीवुड या टीवी इंडस्ट्री कहते हैं, वहां सुंदरता के मायने अक्सर सिर्फ जवान दिखने तक ही सीमित कर दिए जाते हैं। यहां टैलेंट से ज्यादा चर्चा कई बार इस बात पर होती है कि कौन एक्ट्रेस अपनी उम्र से छोटी दिख रही है और किसके चेहरे पर झुर्रियां नजर आने लगी हैं। लेकिन, कुछ कलाकार ऐसे होते हैं जो इस बनावटी दुनिया में अपनी शर्तों पर जीते हैं और अपनी कला के दम पर आलोचकों का मुंह बंद करते हैं। ऐसी ही एक दमदार अभिनेत्री हैं मोना सिंह (Mona Singh)।

‘जस्सी जैसी कोई नहीं’ से अपने करियर की शुरुआत करने वाली मोना सिंह ने हमेशा लीक से हटकर काम किया है। लेकिन हाल ही में, 44 साल की उम्र में उन्हें एक अजीबोगरीब सवाल और ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा। सवाल था – “आप स्क्रीन पर इतनी बूढ़ी क्यों लगती हैं?” (Why do you look old on screen?)।

यह सवाल सिर्फ मोना सिंह से नहीं, बल्कि उस हर महिला से है जो अपनी उम्र को गरिमा (Grace) के साथ अपनाना चाहती है। इस पर मोना सिंह ने जो जवाब दिया, उसने न केवल ट्रोलर्स की बोलती बंद कर दी, बल्कि इंडस्ट्री की उस कड़वी सच्चाई को भी उजागर कर दिया जिसे अक्सर मेकअप की परतों के नीचे छुपा दिया जाता है।

आज के इस बेहद विस्तृत ब्लॉग पोस्ट में, हम Mona Singh On Age Shaming के मुद्दे की तह तक जाएंगे। हम जानेंगे कि मोना ने आखिर क्या कहा? बॉलीवुड में बढ़ती उम्र की अभिनेत्रियों के साथ कैसा व्यवहार होता है? और क्यों मोना सिंह का यह बेबाक अंदाज आज की युवा पीढ़ी के लिए एक मिसाल है।

भाग 1: आखिर क्या है पूरा मामला? (The Context of Controversy)

मोना सिंह पिछले कुछ समय से अपने बेहतरीन काम को लेकर चर्चा में हैं। चाहे वह फिल्म ‘मुंज्या’ (Munjya) हो, वेब सीरीज ‘मेड इन हेवन 2’ (Made in Heaven 2) हो या फिर ‘काला पानी’ (Kaala Paani)। हर जगह उन्होंने साबित किया है कि अभिनय उम्र का मोहताज नहीं होता। लेकिन सोशल मीडिया और कुछ साक्षात्कारों में उनसे उनकी लुक्स और उम्र को लेकर सवाल किए गए।

Mona Singh On Age Shaming पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए, उन्होंने हाल ही में एक मीडिया इंटरैक्शन में बताया कि कैसे लोग उनसे पूछते हैं कि वे अपनी असल उम्र से ज्यादा बड़ी या “बूढ़ी” क्यों नजर आती हैं।

मोना ने कहा: “मैं एक एक्टर हूँ। मेरा काम है किरदार को निभाना, न कि हर वक्त सुंदर दिखना। अगर मैं एक माँ का रोल कर रही हूँ, या एक ऐसी महिला का जो संघर्ष कर रही है, तो मैं वैसी ही दिखूँगी। मैं अपनी उम्र को लेकर शर्मिंदा नहीं हूँ। मैंने अपनी ग्रे हेयर (सफेद बाल) और फाइन लाइन्स को छुपाने के लिए कभी एक्स्ट्रा एफर्ट नहीं डाला क्योंकि यही मेरी वास्तविकता है और यही मेरे किरदारों में जान डालता है।”

यह बयान उन लोगों के लिए एक तमाचा था जो मानते हैं कि एक्ट्रेसेस को हमेशा 20 साल का दिखना चाहिए, चाहे उनकी असल उम्र 40 या 50 के पार क्यों न हो।

Mona Singh on age shaming

भाग 2: Mona Singh On Age Shaming – क्या यह सिर्फ मोना की कहानी है?

जब हम Mona Singh On Age Shaming की बात करते हैं, तो हमें यह समझना होगा कि यह समस्या व्यक्तिगत नहीं, बल्कि संस्थागत (Institutional) है। बॉलीवुड का इतिहास गवाह है कि यहाँ उम्रदराज़ होने के नियम पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग हैं।

पुरुष बनाम महिला (The Gender Gap):

  • सुपरस्टार्स: शाहरुख खान, सलमान खान, या अक्षय कुमार 55-60 की उम्र में भी लीड हीरो का रोल करते हैं और अपने से आधी उम्र की हीरोइनों के साथ रोमांस करते हैं। उनकी झुर्रियों को ‘अनुभव’ और ‘चार्म’ कहा जाता है।
  • एक्ट्रेसेस: वहीं, जब कोई एक्ट्रेस 40 का आंकड़ा पार करती है, तो उसे लीड रोल मिलने बंद हो जाते हैं। उसे माँ, चाची या बुआ के रोल ऑफर होने लगते हैं।

मोना सिंह ने इस मुद्दे पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने ‘लाल सिंह चड्ढा’ (Laal Singh Chaddha) में आमिर खान की माँ का रोल किया था। आमिर खान उम्र में उनसे काफी बड़े हैं। फिर भी, मोना ने उस चुनौती को स्वीकार किया। लेकिन विडंबना देखिए, लोगों ने उनकी एक्टिंग की तारीफ करने के बजाय यह सवाल ज्यादा उठाया कि उन्होंने “बूढ़ा” दिखना क्यों स्वीकार किया।

भाग 3: ‘जस्सी’ से लेकर आज तक – मोना का सफर

मोना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत ही एक ऐसे शो से की थी जिसने सुंदरता के मानकों को तोड़ दिया था। सीरियल ‘जस्सी जैसी कोई नहीं’ (Jassi Jaissi Koi Nahin) में उन्होंने एक ऐसी लड़की का किरदार निभाया था जो पारंपरिक रूप से ‘सुंदर’ नहीं थी। चश्मा, ब्रेसेस और अजीब कपड़े।

स्टीरियोटाइप्स को तोड़ना: मोना ने कभी भी “ग्लैमर डॉल” बनने की कोशिश नहीं की।

  • जब दूसरी एक्ट्रेसेस आइटम नंबर और रोमैंटिक रोल्स के पीछे भाग रही थीं, मोना ने टीवी पर रिस्क लिया।
  • उन्होंने ‘3 इडियट्स’ में करीना कपूर की बहन का रोल किया, जो एक बहुत ही इमोशनल और इंटेंस किरदार था।
  • अब Mona Singh On Age Shaming पर उनका स्टैंड यह साबित करता है कि वे आज भी उसी विचारधारा पर कायम हैं – “कंटेंट इज किंग” (Content is King)।

मोना का कहना है कि उन्होंने जानबूझकर ऐसे रोल चुने जहाँ उन्हें मेकअप की परतों के पीछे छुपना न पड़े। ‘काला पानी’ सीरीज में उन्होंने एक डॉक्टर का रोल किया जो महामारी से जूझ रही है। वहां ग्लैमर की कोई जगह नहीं थी, वहां सिर्फ अभिनय और वास्तविकता की जरूरत थी। और यही बात शायद ट्रोल्स को हजम नहीं हुई।

भाग 4: सोशल मीडिया और “Botox” का दबाव

आज के दौर में इंस्टाग्राम और फिल्टर वाली दुनिया ने लोगों की मानसिकता को बीमार कर दिया है। हर कोई परफेक्ट दिखना चाहता है। जरा सी झुर्रियां या डार्क सर्कल्स दिखते ही लोग ट्रोल करना शुरू कर देते हैं।

Mona Singh On Age Shaming के संदर्भ में, यह दबाव और भी ज्यादा है क्योंकि वे कैमरा के सामने रहती हैं।

  • कॉस्मेटिक सर्जरी का बाजार: कई अभिनेत्रियां जवान दिखने के लिए बोटोक्स (Botox), फिलर्स और प्लास्टिक सर्जरी का सहारा लेती हैं। यह उनकी व्यक्तिगत च्वाइस है, लेकिन इससे एक गलत संदेश भी जाता है कि प्राकृतिक रूप से बूढ़ा होना (Natural Aging) गलत है।
  • मोना का प्राकृतिक रुख: मोना सिंह ने इस कृत्रिमता को नकारा है। उन्होंने कहा कि वे अपने चेहरे के साथ छेड़छाड़ नहीं करना चाहतीं क्योंकि एक एक्टर के तौर पर उनके चेहरे के एक्सप्रेशंस (हाव-भाव) ही उनकी पूंजी हैं। अगर चेहरा प्लास्टिक जैसा हो जाएगा, तो दर्द या खुशी का भाव कैसे दिखेगा?

मोना ने अपनी बात रखते हुए कहा कि 44 साल की उम्र में 25 का दिखने की कोशिश करना खुद को धोखा देने जैसा है।

भाग 5: OTT प्लेटफॉर्म्स – एक नई उम्मीद की किरण

शायद अगर मोना सिंह सिर्फ फिल्मों पर निर्भर रहतीं, तो Mona Singh On Age Shaming का असर उनके करियर पर ज्यादा पड़ता। लेकिन OTT प्लेटफॉर्म्स (Netflix, Amazon Prime, SonyLIV) ने खेल बदल दिया है।

कहानी में बदलाव: ओटीटी पर अब ऐसी कहानियां लिखी जा रही हैं जहाँ 40+ महिलाओं के लिए मजबूत किरदार हैं।

  • ‘दिल्ली क्राइम’ में शेफाली शाह।
  • ‘आर्या’ में सुष्मिता सेन।
  • ‘मेड इन हेवन’ में मोना सिंह।

मोना सिंह ने बताया कि ओटीटी ने उन्हें “बूढ़ा” या “जवान” के ठप्पे से बचाकर रखा है। यहाँ मेकर्स को इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि आपके बाल सफेद हैं या काले, उन्हें बस यह चाहिए कि आप किरदार में फिट बैठते हैं या नहीं। Mona Singh On Age Shaming पर बात करते हुए उन्होंने ओटीटी को श्रेय दिया कि आज वे ऐसे रोल कर पा रही हैं जो 10 साल पहले शायद उन्हें नहीं मिलते।

भाग 6: लाल सिंह चड्ढा – एक साहसिक फैसला

मोना सिंह के करियर का सबसे बड़ा और साहसिक फैसला था फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ में आमिर खान की माँ का रोल निभाना।

  • उस वक्त मोना की उम्र 40 के आसपास थी और आमिर 50 के पार थे।
  • किसी भी एक्ट्रेस के लिए यह “करियर सुसाइड” हो सकता था। इंडस्ट्री में माना जाता है कि एक बार माँ का रोल कर लिया, तो फिर हीरोइन का रोल नहीं मिलता।

लेकिन मोना ने रिस्क लिया। उन्होंने प्रोस्थेटिक्स (Prosthetics) का इस्तेमाल करके खुद को और बूढ़ा दिखाया। फिल्म भले ही बॉक्स ऑफिस पर कमाल न कर पाई हो, लेकिन मोना के अभिनय की हर किसी ने तारीफ की।

हालाँकि, इसी फिल्म के बाद Mona Singh On Age Shaming के स्वर तेज हुए। लोगों ने पूछा, “आपने अपनी उम्र से इतना बड़ा रोल क्यों किया?” मोना का जवाब सरल था – “क्योंकि वह रोल चुनौतीपूर्ण था। मैं एक एक्टर हूँ, मुझे चुनौतियां पसंद हैं।”

Mona Singh on age shaming

भाग 7: समाज का नजरिया और औरतों पर दबाव

Mona Singh On Age Shaming का मुद्दा सिर्फ बॉलीवुड तक सीमित नहीं है। यह हमारे समाज का आईना है। हमारे समाज में औरतों को एक ‘एक्सपायरी डेट’ के साथ देखा जाता है।

  • शादी के लिए: “30 से पहले कर लो वरना बूढ़ी हो जाओगी।”
  • बच्चे के लिए: “बायोलॉजिकल क्लॉक टिक कर रही है।”
  • करियर के लिए: “अब तो उम्र हो गई, अब क्या करोगी?”

मोना सिंह ने अपनी निजी जिंदगी में भी इन रूढ़ियों को तोड़ा है। उन्होंने 38 साल की उम्र में शादी की। उन्होंने अपने एग्स फ्रीज (Egg Freezing) करवाए ताकि वे मां बनने का फैसला अपनी मर्जी और सही समय पर ले सकें। उन्होंने समाज के बनाए टाइमटेबल को फॉलो नहीं किया।

जब एक महिला अपनी शर्तों पर जीती है, खुश रहती है और सफल होती है, तो समाज अक्सर उसे नीचा दिखाने के लिए उसकी उम्र या लुक्स को निशाना बनाता है। मोना सिंह के साथ भी यही हो रहा है।

भाग 8: मोना सिंह का संदेश – “ग्रेसफुली एजिंग” (Aging Gracefully)

अपने इंटरव्यू में Mona Singh On Age Shaming पर बोलते हुए मोना ने एक बहुत ही खूबसूरत संदेश दिया। उन्होंने कहा कि बढ़ती उम्र कोई बीमारी नहीं है, यह एक विशेषाधिकार (Privilege) है। हर किसी को बूढ़ा होने का मौका नहीं मिलता।

ग्रेसफुली एजिंग का मतलब:

  1. स्वीकार करना: अपने बदलते शरीर और चेहरे को प्यार से अपनाना।
  2. आत्मविश्वास: आपकी चमक आपकी त्वचा से नहीं, आपके आत्मविश्वास से आती है।
  3. स्वास्थ्य: स्लिम दिखने के बजाय स्वस्थ (Healthy) और फिट रहने पर ध्यान देना।

मोना सिंह आज भी फिट हैं, योगा करती हैं और अपनी हेल्थ का ध्यान रखती हैं। लेकिन वे अपनी हंसी की लकीरों (Laugh Lines) को मिटाना नहीं चाहतीं क्योंकि वे लकीरें उनकी खुशियों की गवाह हैं।

भाग 9: इंडस्ट्री के अन्य कलाकारों का समर्थन

Mona Singh On Age Shaming के मुद्दे पर इंडस्ट्री की कई अन्य अभिनेत्रियां भी मुखर रही हैं।

  • जीनत अमान (Zeenat Aman): इंस्टाग्राम पर डेब्यू करने के बाद उन्होंने अपने सफेद बालों को फ्लॉन्ट किया और एज-शेमिंग के खिलाफ लिखा।
  • समीरा रेड्डी (Sameera Reddy): उन्होंने भी अपने ग्रे हेयर और बिना मेकअप लुक्स शेयर करके ‘इम्पर्फेक्टली परफेक्ट’ होने का संदेश दिया।
  • विद्या बालन (Vidya Balan): उन्हें अक्सर उनके वजन और उम्र के लिए ट्रोल किया जाता है, लेकिन वे अपनी एक्टिंग से सबका मुंह बंद कर देती हैं।

मोना सिंह अब इस ब्रिगेड का एक अहम हिस्सा बन गई हैं जो आने वाली पीढ़ी को बता रही हैं कि फिल्टर वाली दुनिया में रियल रहना ही असली सुपरपावर है।

भाग 10: दर्शक क्या चाहते हैं?

एक बड़ा सवाल यह भी है कि क्या वाकई दर्शक एक्ट्रेसेस को बूढ़ा होते नहीं देखना चाहते? या यह सिर्फ फिल्म मेकर्स और मीडिया का बनाया हुआ भ्रम है?

अगर हम हालिया ट्रेंड्स देखें, तो दर्शक ‘रियलिस्टिक सिनेमा’ (Realistic Cinema) पसंद कर रहे हैं।

  • ‘पंचायत’ में नीना गुप्ता को लोगों ने प्यार दिया।
  • ‘मुंज्या’ में मोना सिंह को पसंद किया गया।
  • ‘महाराज’ और ‘कोहरा’ जैसी सीरीज में अधेड़ उम्र के किरदारों को सराहा गया।

इसका मतलब है कि दर्शक अब परिपक्व हो चुके हैं। वे अच्छी कहानी और बेहतरीन अभिनय देखना चाहते हैं, न कि प्लास्टिक की गुड़िया। Mona Singh On Age Shaming पर जो लोग ट्रोल कर रहे हैं, वे मुट्ठी भर नकारात्मक लोग हैं, जबकि असली ऑडियंस मोना के काम की दीवानी है।

भाग 11: 44 की उम्र में मोना का करियर ग्राफ

जहाँ कई अभिनेत्रियां 40 के बाद गायब हो जाती हैं, वहीं मोना सिंह का करियर ग्राफ 44 की उम्र में ऊपर चढ़ रहा है।

  • मुंज्या (Munjya): 2024 की सरप्राइज हिट फिल्म, जिसने 100 करोड़ से ज्यादा का बिजनेस किया। इसमें मोना का रोल बहुत अहम था।
  • सुपरहिट वेब सीरीज: ‘मेड इन हेवन’, ‘काला पानी’ और ‘ये मेरी फैमिली’ जैसी सीरीज ने उन्हें घर-घर में फिर से लोकप्रिय बना दिया है।
  • आगामी प्रोजेक्ट्स: मोना के पास अभी शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की पहली निर्देशित वेब सीरीज ‘स्टारडम’ (Stardom) भी है।

यह सफलता इस बात का सबूत है कि टैलेंट के आगे उम्र सिर्फ एक नंबर है। Mona Singh On Age Shaming जैसी बातें उनकी सफलता की गूंज में कहीं दब कर रह जाती हैं।

भाग 12: एज-शेमिंग से निपटने के तरीके – मोना से सीखें

अगर आप भी अपनी निजी जिंदगी में एज-शेमिंग या बॉडी शेमिंग का शिकार हैं, तो मोना सिंह से कुछ बातें सीख सकते हैं:

  1. नजरअंदाज करें (Ignore): मोना कहती हैं कि वे नकारात्मक कमेंट्स पढ़ती ही नहीं हैं। अपनी मानसिक शांति सबसे ऊपर है।
  2. अपने काम पर फोकस करें: जवाब जुबान से नहीं, अपने काम और सफलता से दें।
  3. खुद से प्यार करें: जब आप खुद को पसंद करने लगते हैं, तो दुनिया क्या कहती है, इससे फर्क पड़ना बंद हो जाता है।
  4. ह्यूमर (Humor): मोना अक्सर ऐसे सवालों को हंसी में उड़ा देती हैं। जिंदगी को ज्यादा गंभीरता से न लेना भी एक कला है।

असली सुंदरता सच्चाई में है

अंत में, Mona Singh On Age Shaming का यह पूरा विवाद हमें यह सिखाता है कि समय बदल रहा है। अब अभिनेत्रियां शोपीस बनकर रहने को तैयार नहीं हैं। वे इंसान हैं, वे भी बड़ी होती हैं, उनके भी बाल सफेद होते हैं, और वे इसे छुपाने के बजाय गर्व से दिखा रही हैं।

मोना सिंह ने जो कहा – “स्क्रीन पर बूढ़ा दिखना कोई गुनाह नहीं है, बल्कि किरदार की मांग है” – यह एक क्रांतिकारी विचार है। हमें मोना सिंह जैसी अभिनेत्रियों का शुक्रगुजार होना चाहिए जो पर्दे पर ‘सच’ दिखाने की हिम्मत रखती हैं।

44 साल की उम्र में मोना सिंह जितनी खूबसूरत, आत्मविश्वास से भरी और टैलेंटेड दिखती हैं, वह काबिले तारीफ है। उनकी झुर्रियां उनकी कमजोरी नहीं, बल्कि उनके तजुर्बे के मेडल हैं।

तो अगली बार जब आप किसी एक्ट्रेस को स्क्रीन पर देखें और आपको लगे कि वे “बूढ़ी” दिख रही हैं, तो याद रखिएगा कि वे बूढ़ी नहीं, बल्कि “रियल” दिख रही हैं। और रील की दुनिया में रियल होना ही सबसे मुश्किल काम है।

अतिरिक्त: मोना सिंह की यादगार भूमिकाएं (जिनमें उन्होंने उम्र की परवाह नहीं की)

ब्लॉग को और अधिक समृद्ध बनाने के लिए, यहाँ मोना के कुछ बेहतरीन किरदारों पर एक नजर डालते हैं जिन्होंने स्टीरियोटाइप्स को तोड़ा:

  1. जस्सी (Jassi Jaissi Koi Nahin): बिना मेकअप, मोटा चश्मा। जिसने सुंदरता की परिभाषा बदली।
  2. डॉ. सौदामिनी सिंह (Kaala Paani): एक सख्त और व्यावहारिक डॉक्टर, जहाँ उन्होंने अपने डार्क सर्कल्स और थकान को नेचुरल रखा।
  3. बुलबुल जौहरी (Made in Heaven 2): एक ऐसी महिला जो घरेलू हिंसा सहती है लेकिन अपने परिवार को जोड़े रखती है। यहाँ उन्होंने एक परिपक्व महिला की संवेदनशीलता दिखाई।
  4. पाम्मी (Munjya): एक ओवर-प्रोटेक्टिव माँ, जो अपने बेटे के लिए कुछ भी कर सकती है। यह रोल उनकी वर्सटाइल एक्टिंग का सबूत था।

मोना सिंह का सफर जारी है, और हम उम्मीद करते हैं कि वे इसी तरह अपनी शर्तों पर काम करती रहेंगी और Mona Singh On Age Shaming जैसी संकीर्ण सोच को अपने बेहतरीन काम से जवाब देती रहेंगी।

By Isha Patel

Isha Patel Tez Khabri के साथ जुड़ी एक समाचार रिपोर्टर हैं। वे भारत और राज्यों से जुड़ी ताज़ा, ब्रेकिंग और जनहित से संबंधित खबरों को कवर करती हैं। Isha Patel शिक्षा, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर सत्यापित व तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करती हैं।

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