भारतीय बैंकिंग इतिहास के पन्नों पर काले अक्षरों में लिखा गया पंजाब नेशनल बैंक (PNB) घोटाला एक ऐसा अध्याय है जो खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। साल दर साल इस घोटाले की परतें खुलती जा रही हैं और हर नई परत के साथ नए चेहरे बेनकाब हो रहे हैं। आज, 16 जनवरी 2026 को, इस मामले में एक ऐसा मोड़ आया है जिसने न केवल जांच एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं, बल्कि आर्थिक अपराधों की दुनिया में हड़कंप मचा दिया है।
पीएनबी घोटाले में नया मोड़ और एक और गिरफ्तारी की तैयारी
भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी, जो एंटीगुआ में बैठकर भारतीय कानून से बचने की कोशिश कर रहा है, अब अपने परिवार को भी इस दलदल में फंसता हुआ देख रहा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की ताजा रिपोर्टों और सूत्रों के अनुसार, अब जांच की सुई मेहुल चोकसी के बेटे की तरफ घूम गई है। जांच एजेंसी का यह बड़ा दावा है कि मेहुल चोकसी का बेटा भी मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल है और उसने घोटाले की रकम को इधर-उधर करने में अपने पिता की सक्रिय मदद की है।
1. पीएनबी घोटाला: एक नासूर जो भरता नहीं
इस नई खबर को समझने के लिए हमें थोड़ा पीछे मुड़कर देखना होगा। वर्ष 2018 में जब पंजाब नेशनल बैंक का 13,500 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया था, तो इसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। नीरव मोदी और उसके मामा मेहुल चोकसी ने फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LoU) के जरिए भारतीय बैंकों को चूना लगाया और देश छोड़कर फरार हो गए।
तब से लेकर आज 2026 तक, भारतीय जांच एजेंसियां लगातार इन भगोड़ों को वापस लाने और जनता का पैसा वसूलने के लिए संघर्ष कर रही हैं। संपत्तियां जब्त की गईं, नीलामी हुई, प्रत्यर्पण के मुकदमे चले, लेकिन चोकसी एंटीगुआ की नागरिकता लेकर कानून के शिकंजे से बचता रहा। लेकिन, अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, वह कोई न कोई निशान जरूर छोड़ता है। जांच एजेंसियों का मानना है कि मेहुल चोकसी ने चुराए गए पैसे को ठिकाने लगाने के लिए जिन रास्तों का इस्तेमाल किया, उन रास्तों पर अब उनके बेटे के पैरों के निशान भी मिल गए हैं। यही कारण है कि आज की सबसे बड़ी हेडलाइन यह है कि मेहुल चोकसी का बेटा भी मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल हो सकता है।
2. जांच एजेंसी का धमाका: बेटे की भूमिका पर बड़ा दावा
प्रवर्तन निदेशालय (ED) हमेशा से इस बात की जांच कर रहा था कि घोटाले का पैसा भारत से बाहर कैसे गया और उसका अंतिम इस्तेमाल कहां हुआ। शुरुआती जांच में ध्यान मुख्य रूप से मेहुल चोकसी और नीरव मोदी पर केंद्रित था। लेकिन जैसे-जैसे ‘मनी ट्रेल’ (पैसे का रास्ता) का पीछा किया गया, जांचकर्ताओं को कुछ ऐसे संदिग्ध लेनदेन मिले जिनका सीधा संबंध मेहुल चोकसी के बेटे से था।
एजेंसी के सूत्रों का दावा है कि जब मेहुल चोकसी भारत से भागा और एंटीगुआ में सेटल होने की कोशिश कर रहा था, उस दौरान उसके बेटे ने ‘फ्रंट मैन’ की भूमिका निभाई। आरोप है कि उसने दुबई, हांगकांग और अमेरिका में स्थित कई शेल कंपनियों (फर्जी कंपनियों) का प्रबंधन संभाला। ये वो कंपनियां थीं जिनका कोई वास्तविक व्यापार नहीं था, लेकिन इनके खातों में करोड़ों डॉलर का लेनदेन हो रहा था।
एजेंसी का दावा है कि मेहुल चोकसी का बेटा भी मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल है, क्योंकि उसने न केवल इन शेल कंपनियों के निदेशक के रूप में हस्ताक्षर किए, बल्कि कई बेनामी संपत्तियों की खरीद-फरोख्त में भी उसकी सीधी भूमिका पाई गई है। यह दावा महज संदेह पर आधारित नहीं है, बल्कि इसके पीछे डिजिटल सबूत, ईमेल कम्युनिकेशन और बैंकिंग ट्रांजेक्शन की एक लंबी कड़ी है जिसे जांच एजेंसियों ने पिछले आठ वर्षों में कड़ी मेहनत से जोड़ा है।

3. ‘ऑपरेशन लेयरिंग’: कैसे छुपाया गया जनता का पैसा?
मनी लॉन्ड्रिंग की दुनिया में ‘लेयरिंग’ एक तकनीक है जिसका इस्तेमाल पैसे के असली स्रोत को छुपाने के लिए किया जाता है। जांच एजेंसी का आरोप है कि चोकसी के बेटे ने इसी तकनीक में महारत हासिल की थी।
शेल कंपनियों का मकड़जाल: जांच में पता चला है कि पीएनबी से लूटा गया पैसा सीधे चोकसी के निजी खातों में नहीं गया। इसे दर्जनों शेल कंपनियों के जरिए घुमाया गया। दावा किया जा रहा है कि इन कंपनियों को बनाने और संचालित करने में बेटे की अहम भूमिका थी। इन कंपनियों के बीच फर्जी इनवॉइस (बिल) बनाए गए। यानी, माल बिका नहीं, लेकिन कागजों पर दिखाया गया कि हीरे और जवाहरात खरीदे और बेचे गए। इस फर्जी व्यापार के नाम पर पैसा एक देश से दूसरे देश भेजा गया।
क्रिप्टोकरेंसी और हवाला: 2026 में वित्तीय अपराधों की जांच में क्रिप्टोकरेंसी एक बड़ा पहलू बनकर उभरी है। एजेंसियों को संदेह है कि चोकसी परिवार ने पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम की निगरानी से बचने के लिए बड़ी रकम को डिजिटल करेंसी में बदल दिया। आरोप है कि मेहुल चोकसी का बेटा भी मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल होने के नाते, इस डिजिटल ट्रांजेक्शन को मैनेज कर रहा था। हवाला के जरिए पैसे को एंटीगुआ और अन्य सुरक्षित पनाहगाहों तक पहुंचाने में उसकी कथित भूमिका की जांच की जा रही है।
4. सबूत जो बोलते हैं: एजेंसी के हाथ क्या लगा?
प्रवर्तन निदेशालय कोई भी दावा बिना ठोस आधार के नहीं करता, खासकर जब मामला इतना हाई-प्रोफाइल हो। सूत्रों के मुताबिक, एजेंसी के पास निम्नलिखित सबूत मौजूद हैं:
- ईमेल डंप: जांचकर्ताओं ने कुछ ऐसे ईमेल रिकवर किए हैं जो चोकसी के बेटे और उनके वित्तीय सलाहकारों के बीच हुए थे। इन ईमेल्स में फंड डायवर्जन और शेल कंपनियों के स्ट्रक्चर पर चर्चा की गई है।
- बैंक स्टेटमेंट: विदेशी जांच एजेंसियों के सहयोग से ईडी को कुछ विदेशी बैंक खातों की जानकारी मिली है। इन खातों में ‘बेनिफिशियरी ओनर’ (लाभार्थी स्वामी) के रूप में बेटे का नाम या उससे जुड़ी संस्थाओं का नाम सामने आया है।
- गवाहों के बयान: मेहुल चोकसी के पुराने कर्मचारियों और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, जो अब सरकारी गवाह बन चुके हैं, उन्होंने भी पूछताछ में संकेत दिया है कि जब मेहुल चोकसी कानूनी उलझनों में व्यस्त था, तब उसके बेटे ने वित्तीय ऑपरेशंस की कमान संभाल ली थी।
- प्रॉपर्टी के दस्तावेज: लंदन और न्यूयॉर्क में कुछ लग्जरी अपार्टमेंट्स खरीदे गए थे। जांच में पाया गया कि इन संपत्तियों की खरीद में इस्तेमाल किया गया पैसा उसी रूट से आया था जिससे पीएनबी घोटाले का पैसा डायवर्ट किया गया था। और इन संपत्तियों के स्वामित्व के दस्तावेजों में बेटे का कनेक्शन मिला है।
इन तमाम सबूतों के आधार पर ही एजेंसी ने यह निष्कर्ष निकाला है कि मेहुल चोकसी का बेटा भी मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल है और वह केवल एक मूकदर्शक नहीं, बल्कि अपराध में बराबर का हिस्सेदार है।
5. पिता का अपराध, बेटे की विरासत?
अपराध की दुनिया में अक्सर देखा गया है कि जब मुख्य सरगना पर कानून का शिकंजा कसता है, तो वह अपनी काली कमाई को बचाने की जिम्मेदारी अपने सबसे भरोसेमंद व्यक्ति को सौंपता है, और अक्सर वह व्यक्ति उसका अपना बेटा या बेटी होती है। मेहुल चोकसी के मामले में भी यही पैटर्न दिखाई दे रहा है।
जांच अधिकारियों का मानना है कि मेहुल चोकसी जानता था कि उसे कभी भी गिरफ्तार किया जा सकता है या उसकी संपत्ति जब्त की जा सकती है। इसलिए, उसने अपने बेटे को तैयार किया ताकि वह ‘प्लान बी’ को अंजाम दे सके। यह प्लान बी था – लूटी गई दौलत को दुनिया भर में फैलाना ताकि भारतीय एजेंसियां उसे आसानी से जब्त न कर सकें।
बेटे की संलिप्तता का खुलासा यह दर्शाता है कि यह घोटाला किसी एक व्यक्ति का काम नहीं था, बल्कि यह एक ‘फैमिली एंटरप्राइज’ (पारिवारिक व्यवसाय) की तरह चलाया जा रहा था। जब पिता भारत में बैंकों को चूना लगा रहा था, तब बेटा विदेश में उस पैसे को ‘सफेद’ करने के इंतजाम कर रहा था। यह खुलासा चोकसी परिवार के लिए एक बड़ा झटका है क्योंकि अब तक वे यह दिखाने की कोशिश करते रहे हैं कि उनका परिवार निर्दोष है और उन्हें राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है।
6. कानूनी शिकंजा: अब आगे क्या होगा?
जांच एजेंसी के इस दावे के बाद कानूनी प्रक्रिया में तेजी आना तय है।
- सप्लीमेंट्री चार्जशीट: ईडी जल्द ही अदालत में एक पूरक आरोप पत्र (Supplementary Charge Sheet) दाखिल कर सकती है, जिसमें मेहुल चोकसी के बेटे को आरोपी बनाया जाएगा।
- रेड कॉर्नर नोटिस (RCN): एक बार अदालत से वारंट जारी होने के बाद, सीबीआई इंटरपोल से संपर्क करके बेटे के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की मांग करेगी। इसका मतलब यह होगा कि दुनिया के किसी भी देश की पुलिस उसे गिरफ्तार कर सकती है।
- संपत्ति की कुर्की: मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत, बेटे के नाम पर मौजूद संपत्तियों को भी अब ‘अपराध की कमाई’ माना जाएगा और उन्हें जब्त करने की प्रक्रिया शुरू होगी।
- फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर: यदि बेटा जांच में सहयोग नहीं करता है और विदेश में छिपा रहता है, तो उसे भी अपने पिता की तरह ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी’ (FEO) घोषित किया जा सकता है।
यह खबर कि मेहुल चोकसी का बेटा भी मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल है, मेहुल चोकसी के वकीलों के लिए भी एक दुःस्वप्न है। अब उन्हें दो मोर्चों पर लड़ना होगा – पिता को बचाने के लिए और बेटे को बचाने के लिए।
7. अंतरराष्ट्रीय सहयोग और प्रत्यर्पण की चुनौतियां
मेहुल चोकसी पहले से ही एंटीगुआ में नागरिकता लेकर बैठा है, और भारत सरकार लंबे समय से उसके प्रत्यर्पण की कोशिश कर रही है। अब अगर बेटे का नाम भी जुड़ता है, तो भारत को फिर से कूटनीतिक प्रयास तेज करने होंगे।
समस्या यह है कि आर्थिक अपराधियों को पनाह देने वाले कई देश अपने जटिल कानूनों का सहारा लेते हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में, भारत ने G20 और अन्य मंचों पर आर्थिक अपराधियों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग का मुद्दा जोर-शोर से उठाया है। FATF (Financial Action Task Force) के कड़े नियमों के कारण अब एंटीगुआ या दुबई जैसे देशों के लिए भी ऐसे लोगों को बचाना मुश्किल हो रहा है जिनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के ठोस सबूत हों।
यदि भारत यह साबित करने में सफल हो जाता है कि मेहुल चोकसी का बेटा भी मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल है, तो जिन देशों में उसकी संपत्ति या उपस्थिति है, उन पर कार्रवाई करने का दबाव बनेगा। अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देश, जहां वित्तीय प्रणाली का दुरुपयोग गंभीर अपराध माना जाता है, वहां से सहयोग मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।
8. जनता का पैसा और वसूली की उम्मीद
आम आदमी के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि “क्या मेरा पैसा वापस आएगा?” पीएनबी घोटाले में फंसी 13,500 करोड़ की रकम जनता की गाढ़ी कमाई थी। बैंकों ने अपनी बैलेंस शीट साफ कर ली हो, लेकिन नुकसान तो देश का ही हुआ है।
बेटे की संलिप्तता का खुलासा वसूली की प्रक्रिया में मददगार साबित हो सकता है। अब तक एजेंसियां केवल मेहुल चोकसी की ज्ञात संपत्तियों तक ही पहुंच पाई थीं। लेकिन अगर बेटा भी शामिल था, तो इसका मतलब है कि संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा उसके नाम पर या उसके नियंत्रण में हो सकता है, जो अब तक जांच के दायरे से बाहर था।
जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि बेटे पर दबाव बनाकर वे उन गुप्त खातों और लॉकरों तक पहुंच सकती हैं जहां असली खजाना छुपाया गया है। यह ‘लीवरेज’ (Leverage) की तरह काम करेगा। पिता को बचाने के लिए या खुद को बचाने के लिए, वे पैसे का रास्ता बताने पर मजबूर हो सकते हैं। इसलिए, यह खबर कि मेहुल चोकसी का बेटा भी मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल है, वसूली के नजरिए से एक सकारात्मक खबर मानी जा सकती है।
9. क्या यह अन्य भगोड़ों के लिए एक सबक है?
भारत में विजय माल्या, नीरव मोदी और संदेसरा बंधु जैसे कई आर्थिक अपराधी हैं जो विदेश भाग गए हैं। ये सभी अपने परिवारों के साथ आलीशान जीवन जी रहे हैं। मेहुल चोकसी के बेटे पर कसता शिकंजा इन सभी के लिए एक कड़ा संदेश है।
यह संदेश साफ है: यदि आप सोचते हैं कि आप भारत से भागकर और अपने परिवार के नाम पर संपत्ति ट्रांसफर करके बच जाएंगे, तो आप गलतफहमी में हैं। भारत की जांच एजेंसियां अब केवल मुख्य आरोपी तक सीमित नहीं रहतीं, वे ‘बेनिफिशियरी’ (लाभार्थी) तक पहुंचती हैं। चाहे वह पत्नी हो, बेटा हो या भाई।
इस कार्रवाई से यह स्थापित होगा कि आर्थिक अपराध का आनंद लेने वाला परिवार भी सजा का हकदार है। यह भविष्य के संभावित घोटालेबाजों के लिए एक निवारक (Deterrent) का काम करेगा। उन्हें पता होगा कि उनका अपराध उनकी अगली पीढ़ी को भी बर्बाद कर सकता है।
10. जांच में आने वाली बाधाएं
हालांकि एजेंसी का दावा मजबूत है, लेकिन राह आसान नहीं है।
- कानूनी दांवपेच: चोकसी परिवार के पास दुनिया के सबसे महंगे वकील हैं। वे हर सबूत को चुनौती देंगे। वे क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) का मुद्दा उठाएंगे। वे दावा करेंगे कि बेटे का भारत के बिजनेस से कोई लेना-देना नहीं था और वह एक स्वतंत्र एनआरआई (NRI) है।
- सबूतों की गुणवत्ता: मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में सबसे मुश्किल काम होता है ‘लिंक’ स्थापित करना। पैसे का एक खाते से दूसरे खाते में जाना तो साबित हो जाता है, लेकिन यह साबित करना कि वह पैसा ‘अपराध की कमाई’ (Proceeds of Crime) ही था, कई बार मुश्किल होता है।
- विदेशी कानूनों की पेचीदगी: हर देश के अपने निजता कानून (Privacy Laws) होते हैं। कई बार विदेशी बैंक जानकारी साझा करने में आनाकानी करते हैं।
बावजूद इसके, एजेंसी का आत्मविश्वास बताता है कि उनके पास इस बार कुछ ठोस है। मेहुल चोकसी का बेटा भी मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल होने के सबूत अगर कोर्ट में टिक गए, तो यह सीबीआई और ईडी के लिए एक बड़ी जीत होगी।
11. पीएनबी घोटाले का भविष्य: 2026 और उसके बाद
आठ साल हो चुके हैं, और यह मामला अभी भी जीवित है। यह भारतीय न्याय प्रणाली की दृढ़ता को दर्शाता है। मेहुल चोकसी के बेटे की भूमिका का खुलासा इस मामले को एक निर्णायक मोड़ पर ले आया है।
आने वाले दिनों में हम देख सकते हैं:
- इंटरपोल द्वारा नए नोटिस जारी करना।
- विदेशों में संपत्तियों की नई कुर्की।
- मेहुल चोकसी पर मनोवैज्ञानिक दबाव का बढ़ना।
यह लड़ाई लंबी है, लेकिन हार मानने का विकल्प नहीं है। यह सिर्फ पैसे की बात नहीं है, यह कानून के शासन (Rule of Law) की बात है।
