लैटिन अमेरिका का सबसे अमीर देश रहा वेनेजुएला आज एक ऐसे ज्वालामुखी पर बैठा है, जो कभी भी फट सकता है। हालिया रिपोर्टों ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है खबर है कि अमेरिकी सेना के एक सर्जिकल स्ट्राइक या हवाई हमले में 32 क्यूबाई सैनिकों की मौत हो गई है। ये सैनिक वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की सुरक्षा और उनके सैन्य तंत्र को मजबूत करने के लिए वहां तैनात थे।
यह घटना केवल दो देशों के बीच की झड़प नहीं है, बल्कि यह शीत युद्ध (Cold War) के उन काले दिनों की याद दिलाती है जब महाशक्तियां दूसरे देशों की धरती पर अपनी ताकत का प्रदर्शन करती थीं। आइए, इस पूरे घटनाक्रम को विस्तार से समझते हैं।

1. घटना की पृष्ठभूमि: आखिर वेनेजुएला में क्या हुआ?
वेनेजुएला पिछले कई वर्षों से राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक बदहाली से जूझ रहा है। एक तरफ निकोलस मादुरो हैं, जिन्हें रूस, चीन और क्यूबा का समर्थन प्राप्त है। दूसरी तरफ अमेरिका और उसके सहयोगी देश हैं, जो मादुरो को एक तानाशाह मानते हैं और वहां सत्ता परिवर्तन चाहते हैं।
हमला कैसे हुआ?
ताजा जानकारी के अनुसार, वेनेजुएला की सीमा के पास एक गुप्त सैन्य ठिकाने पर अमेरिका ने सटीक ड्रोन हमला (Precision Drone Strike) किया। अमेरिका का दावा है कि इस ठिकाने का इस्तेमाल नशीली दवाओं की तस्करी और अमेरिकी हितों के खिलाफ साजिश रचने के लिए किया जा रहा था। लेकिन, इस हमले की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि मारे गए लोगों में बड़ी संख्या क्यूबाई सैनिकों की थी।
2. मादुरो की रक्षा में क्यूबा की भूमिका
क्यूबा और वेनेजुएला का रिश्ता दशकों पुराना है। फिदेल कास्त्रो और ह्यूगो शावेज के समय से ही दोनों देश एक-दूसरे के रणनीतिक साझेदार रहे हैं।
- सुरक्षा घेरा: यह जगजाहिर है कि निकोलस मादुरो की निजी सुरक्षा और खुफिया जानकारी का जिम्मा क्यूबा के विशिष्ट सैनिकों (Special Forces) के हाथों में है।
- सैन्य ट्रेनिंग: क्यूबाई सैनिक वेनेजुएला की सेना को गुरिल्ला युद्ध और इंटेलिजेंस की ट्रेनिंग देते हैं।
- राजनीतिक अस्तित्व: मादुरो के लिए क्यूबा का साथ उनकी सत्ता बचाए रखने के लिए ऑक्सीजन की तरह है।

3. अमेरिका का रुख: “हम और बर्दाश्त नहीं करेंगे”
वाशिंगटन की ओर से इस हमले के बाद कड़ा बयान आया है। पेंटागन के सूत्रों का कहना है कि वेनेजुएला में विदेशी सैनिकों की मौजूदगी (विशेषकर क्यूबा और रूस की) क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है।
- मोनरो सिद्धांत (Monroe Doctrine): अमेरिका हमेशा से मानता रहा है कि पश्चिमी गोलार्ध (Western Hemisphere) में किसी भी बाहरी शक्ति का हस्तक्षेप उसे बर्दाश्त नहीं है।
- दबाव की राजनीति: इस हमले के जरिए अमेरिका ने क्यूबा और रूस को साफ संदेश दिया है कि वह मादुरो को बचाने की उनकी कोशिशों को सैन्य चुनौती दे सकता है।
4. वैश्विक प्रतिक्रिया: रूस और चीन का कड़ा विरोध
32 क्यूबाई सैनिकों की मौत ने मॉस्को और बीजिंग में भी हलचल पैदा कर दी है।
- रूस: रूसी विदेश मंत्रालय ने इसे “अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन” और “आतंकवादी कृत्य” करार दिया है। रूस ने चेतावनी दी है कि वह वेनेजुएला में अपने रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए चुप नहीं बैठेगा।
- चीन: चीन ने संयम बरतने की अपील की है लेकिन साथ ही अमेरिकी विस्तारवाद की निंदा की है।
- क्यूबा: क्यूबा के राष्ट्रपति ने इसे ‘कायरतापूर्ण हमला’ बताते हुए देश में शोक की घोषणा की है और संयुक्त राष्ट्र (UN) से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

5. क्या यह ‘तीसरे विश्व युद्ध’ की शुरुआत है?
इस घटना ने विश्लेषकों के बीच डर पैदा कर दिया है कि क्या यह तनाव एक बड़े युद्ध में बदल सकता है?
| कारक | प्रभाव |
| प्रॉक्सि वॉर (Proxy War) | वेनेजुएला अब रूस और अमेरिका के बीच प्रॉक्सी वॉर का नया केंद्र बन गया है, जैसे सीरिया था। |
| ऊर्जा संकट | वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है। युद्ध की स्थिति में वैश्विक तेल की कीमतें $150 प्रति बैरल के पार जा सकती हैं। |
| शरणार्थी संकट | युद्ध छिड़ा तो लाखों वेनेजुएला के लोग पड़ोसी देशों (कोलंबिया, ब्राजील) और अमेरिका की ओर पलायन करेंगे, जिससे एक नया मानवीय संकट पैदा होगा। |
6. वेनेजुएला की जनता पर असर
इस पूरी जंग में जो सबसे ज्यादा पिस रहा है, वह है वेनेजुएला का आम नागरिक।
- महंगाई: वहां मुद्रास्फीति (Inflation) पहले से ही आसमान छू रही है।
- डर का माहौल: युद्ध की आहट ने लोगों को जरूरी सामान जमा करने पर मजबूर कर दिया है।
- विभाजित समाज: देश दो हिस्सों में बंटा हुआ है—एक जो मादुरो को देशभक्त मानता है और दूसरा जो उन्हें देश की बर्बादी का जिम्मेदार समझता है।
7. निष्कर्ष: कूटनीति ही एकमात्र रास्ता
32 सैनिकों की मौत एक बड़ी त्रासदी है और यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बिगड़ने का संकेत है। यदि अमेरिका और रूस-क्यूबा के बीच बातचीत का रास्ता नहीं खुला, तो वेनेजुएला की धरती लैटिन अमेरिका के वियतनाम में बदल सकती है। दुनिया अब एक और युद्ध झेलने की स्थिति में नहीं है।
