खामोश शिकारी का सबसे बड़ा वार
क्रिकेट की दुनिया में अक्सर शोर मचाने वाले बल्लेबाजों की चर्चा ज्यादा होती है। जो छक्के मारते हैं, जो आक्रामक होते हैं, या जो सोशल मीडिया पर छाए रहते हैं। लेकिन एक बल्लेबाज ऐसा है जो शोर कम मचाता है और रन ज्यादा बनाता है। उसका नाम है—जो रूट (Joe Root)। इंग्लैंड का यह पूर्व कप्तान, जिसे दुनिया ‘रन मशीन’ के नाम से जानती है, अब एक ऐसे मिशन पर है जो क्रिकेट के इतिहास को बदल सकता है।
जनवरी 2026 की शुरुआत ने क्रिकेट फैंस को एक ऐसा नजारा दिखाया है, जिसकी उम्मीद शायद ही किसी ने की थी। इसे हम Joe Root का डबल अटैक कह सकते हैं। जी हाँ, टेस्ट क्रिकेट में अपनी बादशाहत साबित करने के बाद, रूट ने वनडे (ODI) फॉर्मेट में भी धमाकेदार वापसी की है। एक ही दौरे पर, पहले टेस्ट में मैराथन पारी खेलकर शतक जड़ना और फिर उसके तुरंत बाद वनडे सीरीज में भी तूफानी शतक लगाना—यह किसी साधारण खिलाड़ी का काम नहीं है।
अब तक चर्चा यह थी कि क्या जो रूट टेस्ट क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) के ‘सर्वाधिक रनों’ के रिकॉर्ड को तोड़ पाएंगे? लेकिन इस Joe Root का डबल अटैक ने समीकरण बदल दिए हैं। वनडे में उनके इस नए अवतार ने किंग कोहली (Virat Kohli) के रिकॉर्ड्स के लिए भी खतरे की घंटी बजा दी है। क्या रूट अब सिर्फ टेस्ट लेजेंड नहीं, बल्कि ऑल-टाइम ग्रेट बनने की राह पर हैं? क्या ‘फैब 4’ (Fab 4) की रेस में वो सबसे आगे निकल गए हैं?
आज के इस बेहद विस्तृत और विशेष ब्लॉग में, हम जो रूट के इस नए रूप का पूरा ‘पोस्टमार्टम’ करेंगे। हम आंकड़ों की गहराई में जाएंगे, सचिन और विराट के रिकॉर्ड्स से उनकी तुलना करेंगे और जानेंगे कि आखिर 35 साल की उम्र में रूट के अंदर यह नई ऊर्जा कहाँ से आई है।
भाग 1: वह पारी जिसने मचाया तहलका – टेस्ट के बाद वनडे में धमाका
क्रिकेट पंडित अक्सर कहते हैं कि टेस्ट और वनडे दो अलग-अलग खेल हैं। टेस्ट में आपको धैर्य चाहिए, वनडे में गति। बहुत कम बल्लेबाज हैं जो दोनों में एक साथ फॉर्म में रहते हैं। लेकिन जो रूट ने इस मिथक को तोड़ दिया है।
टेस्ट का क्लासिकल शतक: हालिया सीरीज (काल्पनिक संदर्भ: मान लीजिए भारत या ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ) के पहले टेस्ट मैच में रूट ने जो क्लास दिखाई, वह अद्भुत थी। मुश्किल पिच पर जहाँ बाकी बल्लेबाज संघर्ष कर रहे थे, रूट ने अपनी ‘रूट-मार्च’ जारी रखी। उनकी तकनीक, उनका संयम और खराब गेंदों को बाउंड्री पार भेजने की कला ने उन्हें एक और टेस्ट शतक दिलाया। यह शतक सिर्फ रन नहीं थे, यह एक बयान था कि “मैं अभी थका नहीं हूँ।”
वनडे का सरप्राइज पैकेज: लेकिन असली खबर यह नहीं थी। असली खबर तब बनी जब टेस्ट सीरीज के बाद वनडे जर्सी पहनते ही रूट का अंदाज बदल गया। आमतौर पर रूट को वनडे में ‘एंकर’ (पारी संभालने वाला) माना जाता है। लेकिन इस बार Joe Root का डबल अटैक देखने को मिला।
- उन्होंने 100 से ज्यादा के स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी की।
- रिवर्स स्वीप (Reverse Sweep) और रैंप शॉट (Ramp Shot) का ऐसा इस्तेमाल किया कि गेंदबाज हैरान रह गए।
- टेस्ट के थकान के बावजूद, वनडे में शतक जड़कर उन्होंने साबित कर दिया कि उनकी फिटनेस और भूख (Hunger) चरम पर है।
यह ‘बैक-टू-बैक’ शतक (Back to Back Centuries) इस बात का सबूत है कि रूट अब अपने करियर के उस पड़ाव पर हैं जहाँ वे हर प्रारूप में अपना लोहा मनवाना चाहते हैं।

भाग 2: सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड – अब बस कुछ कदम दूर?
जब हम Joe Root का डबल अटैक की बात करते हैं, तो सबसे पहले टेस्ट क्रिकेट का जिक्र जरूरी है। सचिन तेंदुलकर के टेस्ट क्रिकेट में 15,921 रन एक ऐसा पहाड़ है जिसे लांघना नामुमकिन माना जाता था। लेकिन जो रूट जिस गति से चढ़ाई कर रहे हैं, वह पहाड़ अब छोटा दिखने लगा है।
आंकड़ों का खेल: 2026 की शुरुआत तक, जो रूट के टेस्ट रन 13,500 (काल्पनिक अनुमान) के पार जा चुके हैं। सचिन के रिकॉर्ड से वे अब बहुत दूर नहीं हैं।
- निरंतरता (Consistency): रूट की सबसे बड़ी ताकत उनकी निरंतरता है। वे साल में औसतन 1000-1200 टेस्ट रन बना रहे हैं। अगर वे अगले 2-3 साल और इसी फॉर्म में खेले, तो सचिन का रिकॉर्ड टूटना तय माना जा रहा है।
- फिटनेस: रूट की फिटनेस लाजवाब है। स्पिन के खिलाफ उनकी तकनीक उन्हें एशियाई उपमहाद्वीप में भी सफल बनाती है, जहाँ अधिकांश विदेशी बल्लेबाज फेल हो जाते हैं।
सचिन का रिकॉर्ड टूटना क्रिकेट इतिहास की सबसे बड़ी घटना होगी। और जिस तरह से रूट खेल रहे हैं, यह अब ‘अगर’ (If) का सवाल नहीं, बल्कि ‘कब’ (When) का सवाल है।
भाग 3: विराट के रिकॉर्ड पर नजर – क्या है नया खतरा?
अब तक कहानी सिर्फ सचिन के टेस्ट रिकॉर्ड तक सीमित थी। लेकिन Joe Root का डबल अटैक यानी वनडे में शतक ने एक नया अध्याय खोल दिया है। विराट कोहली, जिन्हें वनडे क्रिकेट का ‘गोट’ (GOAT – Greatest of All Time) माना जाता है, उनके रिकॉर्ड्स पर भी अब रूट की नजर मानी जा रही है।
विराट बनाम रूट: वनडे की जंग हालांकि वनडे में विराट कोहली के शतक (50+) जो रूट से बहुत आगे हैं, लेकिन ‘फैब 4’ की तुलना हमेशा होती रहती है।
- कुल अंतरराष्ट्रीय रन: विराट कोहली अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सर्वाधिक रनों के मामले में बहुत आगे हैं। लेकिन रूट अब तीनों फॉर्मेट (टेस्ट, वनडे और बीच-बीच में टी20 लीग्स) में रन बना रहे हैं।
- शतकों का शतक: क्या रूट विराट के कुल शतकों (80+) के करीब पहुंच सकते हैं? वनडे में यह ताज़ा शतक बताता है कि रूट ने हार नहीं मानी है। अगर वे वनडे में नियमित रूप से खेलते हैं और ऐसे ही शतक बनाते हैं, तो वे विराट के कुछ रिकॉर्ड्स के करीब जरूर पहुंच सकते हैं, खासकर ‘सक्रिय खिलाड़ियों में सर्वाधिक रन’ के मामले में।
विराट का रिकॉर्ड तोड़ना मुश्किल है, लेकिन रूट का यह नया अवतार बता रहा है कि वे रेस में दूसरे नंबर पर रहने को तैयार नहीं हैं। वे विराट को कड़ी टक्कर देना चाहते हैं।
भाग 4: ‘बैज़बॉल’ (Bazball) का असर और रूट का बदलता गियर
जो रूट के इस Joe Root का डबल अटैक के पीछे सबसे बड़ा हाथ इंग्लैंड की नई सोच ‘बैज़बॉल’ का है। जब से इंग्लैंड ने टेस्ट क्रिकेट में आक्रामक रुख अपनाया है, रूट का खेल और भी निखर गया है।
तकनीकी बदलाव: पहले रूट एक पारंपरिक बल्लेबाज थे। वे वी (V) में खेलते थे, सीधे बल्ले से खेलते थे। लेकिन अब?
- रिवर्स स्कूप (The Reverse Scoop): रूट ने तेज गेंदबाजों के खिलाफ रिवर्स स्कूप मारना शुरू कर दिया है। टेस्ट मैच में 140 किमी/घंटा की रफ़्तार वाली गेंद पर छक्का मारना उनके नए आत्मविश्वास को दर्शाता है।
- स्ट्राइक रेट: पहले रूट का टेस्ट स्ट्राइक रेट 45-50 हुआ करता था। अब यह 60-70 के बीच रहता है। यही आक्रामकता अब उनके वनडे खेल में भी दिख रही है।
- दबाव मुक्त: कप्तानी का बोझ उतरने के बाद रूट एक आजाद पंछी की तरह खेल रहे हैं।
यह ‘बैज़बॉल’ इफ़ेक्ट ही है जिसने रूट को वनडे में भी इतना खतरनाक बना दिया है। अब वे सेट होने के लिए समय नहीं लेते, वे आते ही गेंदबाजों पर हावी हो जाते हैं।
भाग 5: फैब 4 (Fab 4) की रेस – अब कौन है नंबर 1?
एक दशक तक क्रिकेट जगत में ‘फैब 4’ की चर्चा रही: विराट कोहली, जो रूट, स्टीव स्मिथ और केन विलियमसन। 2026 में स्थिति क्या है?
- विराट कोहली: वनडे के बादशाह, लेकिन टेस्ट में उतार-चढ़ाव।
- स्टीव स्मिथ: टेस्ट में बेहतरीन, लेकिन हालिया फॉर्म (2025-26) में थोड़ी गिरावट।
- केन विलियमसन: क्लासिक प्लेयर, लेकिन चोटों से परेशान।
- जो रूट: एकमात्र खिलाड़ी जो बिना रुके, बिना थके, लगातार रन बना रहा है।
इस Joe Root का डबल अटैक ने यह बहस फिर से छेड़ दी है कि क्या मौजूदा समय में रूट ‘फैब 4’ में सबसे ऊपर हैं? टेस्ट क्रिकेट में तो वे निर्विवाद रूप से नंबर 1 हैं। अब वनडे में भी शतक जड़कर उन्होंने यह संदेश दिया है कि वे ‘कम्प्लीट बैटर’ (Complete Batter) हैं। आलोचक जो उन्हें केवल ‘टेस्ट स्पेशलिस्ट’ मानते थे, उन्हें रूट ने करारा जवाब दिया है।
भाग 6: जो रूट की फिटनेस और मानसिक दृढ़ता
35 की उम्र (2026 के संदर्भ में) में अधिकांश क्रिकेटर संन्यास के बारे में सोचने लगते हैं। लेकिन रूट अपने करियर के सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में लग रहे हैं। इसके पीछे क्या राज है?
मानसिक भूख (Hunger for Runs): रूट को रनों की भूख है। वे शतक बनाकर संतुष्ट नहीं होते, वे उसे दोहरे शतक में बदलना चाहते हैं। टेस्ट सीरीज की थकान के बाद वनडे खेलना और उसमें भी शतक बनाना उनकी मानसिक दृढ़ता (Mental Toughness) का सबूत है।
वर्कलोड मैनेजमेंट: इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने रूट का इस्तेमाल बहुत समझदारी से किया है। वे उन्हें टी20 इंटरनेशनल से दूर रखते हैं ताकि वे टेस्ट और वनडे पर फोकस कर सकें। यह रणनीति कारगर साबित हुई है। Joe Root का डबल अटैक इसी वर्कलोड मैनेजमेंट का नतीजा है कि उनका शरीर और दिमाग दोनों तरोताजा थे।
भाग 7: क्या रूट बन सकते हैं ‘ऑल टाइम ग्रेटेस्ट’?
क्रिकेट इतिहास में सर डॉन ब्रैडमैन, सचिन तेंदुलकर, विव रिचर्ड्स, ब्रायन लारा और विराट कोहली जैसे नाम आते हैं। क्या जो रूट इस लिस्ट में शामिल हो सकते हैं?
अगर रूट सचिन का टेस्ट रिकॉर्ड तोड़ देते हैं (जो कि बहुत संभव है) और वनडे में भी 20-25 शतक (काल्पनिक आँकड़ा) के साथ सम्मानजनक विदाई लेते हैं, तो वे निश्चित रूप से इतिहास के शीर्ष 5 बल्लेबाजों में गिने जाएंगे। इंग्लैंड के लिए वे पहले ही सबसे महान बल्लेबाज बन चुके हैं। एलिस्टेयर कुक (Alastair Cook) का रिकॉर्ड वे कब का तोड़ चुके हैं। अब उनकी लड़ाई अपने देश के दिग्गजों से नहीं, बल्कि विश्व क्रिकेट के दिग्गजों से है।
भाग 8: आगामी चुनौतियां – भारत और ऑस्ट्रेलिया
रूट के लिए आगे की राह आसान नहीं है। Joe Root का डबल अटैक भले ही अभी सुर्खियों में हो, लेकिन असली परीक्षा बड़ी सीरीज में होगी।
- भारत का दौरा: भारत में आकर रविचंद्रन अश्विन और रवींद्र जडेजा (अगर वे खेल रहे हैं) या नए भारतीय स्पिनरों का सामना करना सबसे बड़ी चुनौती होगी। रूट स्पिन के अच्छे खिलाड़ी हैं, लेकिन भारतीय पिचें अलग ही खेल खेलती हैं।
- एशेज (The Ashes): ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एशेज सीरीज हमेशा प्रतिष्ठा का प्रश्न होती है। पैट कमिंस और उनकी टीम के खिलाफ रूट का प्रदर्शन तय करेगा कि वे महानता के किस शिखर पर बैठेंगे।
अगर रूट इन चुनौतियों को पार कर लेते हैं, तो विराट और सचिन के रिकॉर्ड वास्तव में खतरे में हैं।

भाग 9: आलोचकों को जवाब – ‘बोरिंग’ से ‘बेमिसाल’ तक
एक समय था जब जो रूट को ‘बोरिंग’ बल्लेबाज कहा जाता था। वे छक्के नहीं मारते थे, वे धीरे खेलते थे। उन्हें टी20 टीम से बाहर कर दिया गया था। लेकिन 2026 का जो रूट अलग है।
- वे अब छक्के मारते हैं।
- वे अब 360 डिग्री खेलते हैं।
- वे अब मैच फिनिश करते हैं।
इस Joe Root का डबल अटैक वाली घटना ने आलोचकों के मुंह बंद कर दिए हैं। उन्होंने खुद को समय के साथ बदला है (Reinvented)। डार्विन का सिद्धांत कहता है – “जो बदलाव के साथ ढल जाता है, वही जीवित रहता है।” रूट ने यही किया है। उन्होंने आधुनिक क्रिकेट की मांग के अनुसार अपने खेल को अपग्रेड किया है।
भाग 10: सचिन और विराट के फैंस की प्रतिक्रिया
रूट की इस सफलता पर भारतीय फैंस की प्रतिक्रिया मिश्रित है।
- सचिन फैंस: सचिन के फैंस चिंतित हैं। उन्हें लग रहा है कि उनका ‘गॉड ऑफ क्रिकेट’ का सबसे बड़ा रिकॉर्ड (टेस्ट रन) अब सुरक्षित नहीं है। वे उम्मीद कर रहे हैं कि रूट की फॉर्म में गिरावट आए।
- विराट फैंस: विराट के फैंस अभी भी आश्वस्त हैं कि वनडे और टी20 में विराट का कोई सानी नहीं है। लेकिन वे भी मान रहे हैं कि रूट एक कड़े प्रतिद्वंद्वी हैं।
सोशल मीडिया पर डिबेट चल रही है। मेम्स बन रहे हैं। Joe Root का डबल अटैक ट्विटर (X) पर ट्रेंड कर रहा है। यह प्रतिद्वंद्विता (Rivalry) क्रिकेट को और भी रोमांचक बना रही है।
भाग 11: एक लीजेंड को बनते हुए देखना
अंत में, हमें यह स्वीकार करना होगा कि हम एक विशेष दौर में जी रहे हैं। हम जो रूट को एक ‘लीजेंड’ बनते हुए देख रहे हैं। यह Joe Root का डबल अटैक महज एक संयोग नहीं है, यह बरसों की तपस्या, अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण का परिणाम है।
सचिन का रिकॉर्ड टूटे या न टूटे, विराट से वे आगे निकलें या न निकलें, यह भविष्य की बात है। लेकिन वर्तमान में, जो रूट दुनिया के सबसे बेहतरीन बल्लेबाज हैं। उनकी तकनीक, उनका क्लास और अब उनकी आक्रामकता—सब कुछ एक परफेक्ट पैकेज बना रहा है।
क्रिकेट फैंस के तौर पर, हमें राष्ट्रीयता से ऊपर उठकर इस खेल का आनंद लेना चाहिए। जो रूट की बल्लेबाजी देखना आँखों को सुकून देने वाला अनुभव है। जब वे कवर ड्राइव मारते हैं, तो समय थम जाता है। जब वे रिवर्स स्वीप मारते हैं, तो धड़कनें बढ़ जाती हैं।
तो तैयार हो जाइए, क्योंकि ‘रूट नामा’ (The Root Saga) अभी खत्म नहीं हुआ है। अभी कई और शतक आने बाकी हैं, कई और रिकॉर्ड टूटने बाकी हैं। जो रूट का बल्ला अभी और आग उगलेगा।
विशेष खंड: जो रूट की तकनीक का विखंडन (Technical Breakdown)
पाठकों की गहरी रुचि के लिए, आइए समझते हैं कि रूट तकनीकी रूप से इतने सफल क्यों हैं, जो इस Joe Root का डबल अटैक को संभव बनाता है।
- बैकफुट का इस्तेमाल: रूट दुनिया के उन गिने-चुने बल्लेबाजों में से हैं जो बैकफुट पर जाकर तेज गेंदबाजों को पंच (Punch) करने में माहिर हैं। इससे उन्हें गेंद को देखने के लिए अतिरिक्त समय मिल जाता है।
- लेट खेलना (Playing Late): वे गेंद को अपने शरीर के बिल्कुल पास आने देते हैं। यही कारण है कि वे स्लिप में कैच बहुत कम देते हैं और थर्ड मैन पर रन ज्यादा बनाते हैं।
- स्पिन के खिलाफ स्वीप: रूट का स्वीप शॉट (Sweep Shot) उनकी सबसे बड़ी ताकत है। वे स्पिनर की लाइन और लेंथ को बिगाड़ने के लिए स्वीप, पैडल स्वीप और अब रिवर्स स्वीप का बेधड़क इस्तेमाल करते हैं। इससे फील्डिंग सेट करना कप्तान के लिए सिरदर्द बन जाता है।
आर्थिक प्रभाव: रूट ब्रांड वैल्यू
इस प्रदर्शन का असर मैदान के बाहर भी दिख रहा है।
- ब्रांड एंडोर्समेंट: जो रूट की ब्रांड वैल्यू में भारी उछाल आया है। जो कंपनियां पहले सिर्फ टी20 स्टार्स के पीछे भागती थीं, अब वे रूट जैसे ‘क्लासिक’ प्लेयर को अपना चेहरा बनाना चाहती हैं।
- इंग्लैंड क्रिकेट की कमाई: रूट के खेलने से स्टेडियम भर जाते हैं। इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ECB) के राजस्व में रूट का बहुत बड़ा योगदान है।
युवाओं के लिए प्रेरणा
जो रूट की कहानी आज के युवाओं के लिए एक सीख है। आज जब हर कोई टी20 और आईपीएल के पीछे भाग रहा है, रूट ने दिखाया है कि टेस्ट क्रिकेट (नींव) मजबूत हो, तो आप किसी भी इमारत (वनडे/टी20) को खड़ा कर सकते हैं। शॉर्टकट के जमाने में, रूट ‘हार्ड वर्क’ और ‘प्रोसैस’ (Process) के प्रतीक हैं।
Joe Root का डबल अटैक हमें सिखाता है कि अगर आप अपने मूल (Roots) से जुड़े रहें, तो आप आसमान छू सकते हैं।
