IT Stocks Crash

शुक्रवार, १३ तारीख और दलाल स्ट्रीट का अपशकुन

नमस्कार निवेशक मित्रों! आज तारीख १३ फरवरी २०२६, शुक्रवार है। पश्चिमी देशों में ‘फ्राइडे द १३थ’ (Friday the 13th) को अपशकुन माना जाता है, और आज भारतीय शेयर बाजार, विशेषकर आईटी सेक्टर (IT Sector) के लिए यह तारीख सचमुच डरावनी साबित हुई है। सुबह ९:१५ बजे जैसे ही बाजार की घंटी बजी, सेंसेक्स और निफ्टी धड़ाम से नीचे आ गिरे। लेकिन सबसे ज्यादा तबाही निफ्टी आईटी इंडेक्स (Nifty IT Index) में देखने को मिली।

महज कुछ ही मिनटों के भीतर, भारत की दिग्गज आईटी कंपनियों—टीसीएस (TCS), इंफोसिस (Infosys), एचसीएल टेक (HCL Tech) और विप्रो (Wipro)—के मार्केट कैप से लगभग ₹१.३ लाख करोड़ रुपये हवा हो गए। निवेशकों की स्क्रीन लाल रंग से भर गई और सोशल मीडिया पर #MarketCrash और #ITBloodBath ट्रेंड करने लगा।

आखिर ऐसा क्या हुआ? कल तक जो आईटी सेक्टर एआई (Artificial Intelligence) और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की लहर पर सवार होकर नई ऊंचाइयां छू रहा था, आज वह अचानक ताश के पत्तों की तरह क्यों बिखर गया? क्या यह अमेरिका से आई कोई बुरी खबर है? या फिर एआई का बुलबुला फूटने वाला है?

इस गिरावट के पीछे कई अदृश्य ताकतें यानी Invisible Forces काम कर रही हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था, ब्याज दरें, और निवेशकों का मनोविज्ञान—इन सभी Forces ने मिलकर आज बाजार को घुटनों पर ला दिया है।

भाग १: सुबह ९:१५ का मंजर – जब दौलत स्वाहा हो गई (The Crash Scenario)

१३ फरवरी २०२६ की सुबह बाजार खुलते ही जो हुआ, उसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा। प्री-ओपन सेशन (Pre-open session) से ही संकेत मिल रहे थे कि आज का दिन भारी रहने वाला है।

आंकड़ों की जुबानी:

  • निफ्टी आईटी इंडेक्स: बाजार खुलते ही इंडेक्स ४% से ज्यादा टूट गया। यह पिछले दो सालों की सबसे बड़ी इंट्रा-डे गिरावट थी।
  • दिग्गजों की पिटाई: इंफोसिस ५% नीचे, टीसीएस ३.५% नीचे, और मिड-कैप आईटी स्टॉक्स (जैसे कोफोर्ज और एलटीआई-माइंडट्री) तो ७-८% तक टूट गए।
  • निवेशकों का नुकसान: एक अनुमान के मुताबिक, शुरुआती १५ मिनट में ही निवेशकों की संपत्ति में ₹१.३ लाख करोड़ की कमी आ गई। यह रकम इतनी बड़ी है कि इससे कई छोटे देशों की अर्थव्यवस्था चल सकती है।

Selling Forces का तांडव:

बाजार में बिकवाली का दबाव इतना तेज था कि खरीदार दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहे थे। बड़े विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) अपनी होल्डिंग्स खाली कर रहे थे। ऐसा लग रहा था कि किसी ने ‘पैनिक बटन’ दबा दिया है और Selling Forces (बिकवाली की ताकतें) पूरी तरह से बाजार पर हावी हो चुकी हैं।

भाग २: अमेरिका (US) कनेक्शन – गिरावट की असली जड़

भारतीय आईटी कंपनियों की कमाई का बड़ा हिस्सा (लगभग ६०-७०%) अमेरिका और यूरोप से आता है। इसलिए, जब अमेरिका को छींक आती है, तो भारतीय आईटी सेक्टर को जुकाम हो जाता है।

१. अमेरिकी महंगाई का जिन्न (US Inflation Data):

कल रात अमेरिका में जनवरी २०२६ के महंगाई (CPI) के आंकड़े जारी हुए।

  • उम्मीद थी कि महंगाई कम होगी, लेकिन आंकड़े अनुमान से कहीं ज्यादा ‘गर्म’ (Hot) आए।
  • महंगाई बढ़ने का मतलब है कि लोगों की खर्च करने की क्षमता कम हो रही है।
  • जब अमेरिकी कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ता है, तो वे सबसे पहले अपने आईटी बजट (IT Budget) में कटौती करती हैं। यह भारतीय कंपनियों के लिए खतरे की घंटी है।

२. फेडरल रिजर्व और ब्याज दरें:

महंगाई के आंकड़े देखकर यह तय हो गया है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक (Federal Reserve) ब्याज दरों में कटौती नहीं करेगा। बल्कि, डर यह है कि दरें और बढ़ाई जा सकती हैं।

  • Global Economic Forces: उच्च ब्याज दरें टेक्नोलॉजी कंपनियों के लिए जहर होती हैं। इससे उनकी भविष्य की कमाई (Future Earnings) का वर्तमान मूल्य कम हो जाता है। नैस्डैक (NASDAQ) कल रात ३% टूटा था, जिसका सीधा असर आज भारत पर दिखा।

भाग ३: एआई का बुलबुला? – Technological Forces का नया डर

२०२३-२०२५ तक पूरी दुनिया ‘जेनेरेटिव एआई’ (Generative AI) के पीछे पागल थी। भारतीय आईटी कंपनियों ने भी एआई प्रोजेक्ट्स के नाम पर खूब वैल्यूएशन बटोरी। लेकिन २०२६ में अब वास्तविकता सामने आ रही है।

रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (ROI) की चिंता:

निवेशक अब पूछ रहे हैं कि एआई पर जो अरबों डॉलर खर्च किए गए, उसका मुनाफा कहां है?

  • कई रिपोर्ट्स का दावा है कि एआई को लागू करने की लागत बहुत ज्यादा है और अभी तक क्लाइंट्स को उतना फायदा नहीं मिल रहा है।
  • इस ‘Reality Check’ ने आईटी स्टॉक्स की हवा निकाल दी है। Technological Forces जो पहले शेयर को ऊपर ले जा रही थीं, अब वही सवाल खड़े कर रही हैं कि क्या यह सब सिर्फ एक प्रचार (Hype) था?

भाग ४: रुपया बनाम डॉलर – Currency Forces का खेल

आम तौर पर, जब डॉलर मजबूत होता है (जैसा आज है), तो भारतीय आईटी कंपनियों को फायदा होता है क्योंकि वे डॉलर में कमाती हैं और रुपये में खर्च करती हैं। लेकिन आज यह नियम काम नहीं आया। क्यों?

दोधारी तलवार:

  • डॉलर इंडेक्स (DXY) १०५ के पार चला गया है। यह रुपये के लिए कमजोर है, लेकिन यह अमेरिकी मंदी (Recession) का संकेत भी है।
  • निवेशक सोच रहे हैं—”अगर डॉलर महंगा हुआ, लेकिन क्लाइंट ने काम ही नहीं दिया, तो डॉलर के रेट का क्या करेंगे?”
  • इसलिए, आज Currency Forces (मुद्रा की ताकतें) आईटी सेक्टर को बचाने में विफल रहीं। मंदी का डर करेंसी के फायदे पर भारी पड़ गया।

भाग ५: विदेशी निवेशकों (FIIs) की बेरुखी – Institutional Forces

भारतीय बाजार की दिशा तय करने में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का बड़ा हाथ होता है।

  • पैसे की निकासी: पिछले कुछ हफ्तों से FIIs भारतीय बाजार से पैसा निकालकर चीन और अन्य सस्ते बाजारों में लगा रहे हैं।
  • वैल्यूएशन की चिंता: भारतीय आईटी स्टॉक्स अपने ऐतिहासिक औसत (Historical Average) से काफी महंगे ट्रेड कर रहे थे (PE Ratio २५-३० के आसपास)।
  • १३ फरवरी को जैसे ही अमेरिकी बाजार गिरे, FIIs ने भारत में अपनी ‘रिस्क’ कम करने के लिए भारी बिकवाली शुरू कर दी। Institutional Forces का यह पलायन बाजार को तोड़ने का मुख्य कारण बना।

भाग ६: प्रमुख कंपनियों का हाल – किसने कितना खोया?

आइए देखते हैं कि बाजार की इस मार (Market Forces) का असर हमारी पसंदीदा कंपनियों पर कैसे पड़ा:

१. टीसीएस (TCS):

देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी भी नहीं बच सकी। इसका शेयर ३.५% टूटा। निवेशकों को डर है कि बीएफएसआई (BFSI) सेक्टर में सुस्ती के कारण टीसीएस की डील पाइपलाइन सूख सकती है।

२. इंफोसिस (Infosys):

इंफोसिस को ५% का नुकसान हुआ। हाल ही में कंपनी ने अपने रेवेन्यू गाइडेंस (Revenue Guidance) को लेकर सतर्कता बरती थी, और आज के अमेरिकी डेटा ने आग में घी का काम किया।

३. विप्रो और टेक महिंद्रा:

ये कंपनियां टर्नअराउंड (Turnaround) की कोशिश कर रही थीं, लेकिन आज की गिरावट ने इनकी रिकवरी को ६ महीने पीछे धकेल दिया है। मिड-कैप आईटी (जैसे परसिस्टेंट, कोफोर्ज) में तो हाहाकार मचा हुआ है क्योंकि वे ‘हाई बीटा’ (High Beta) स्टॉक्स हैं—बाजार गिरता है तो वे दोगुना गिरते हैं।

भाग ७: तकनीकी विश्लेषण (Technical Analysis) – चार्ट क्या कहते हैं?

जो लोग चार्ट्स और कैंडलस्टिक्स समझते हैं, उनके लिए आज का दिन बहुत महत्वपूर्ण है।

  • सपोर्ट लेवल टूटा: निफ्टी आईटी इंडेक्स ने अपना महत्वपूर्ण २००-दिन का मूविंग एवरेज (200 DMA) तोड़ दिया है। यह लंबी अवधि के ट्रेंड के लिए बुरा संकेत है।
  • RSI (रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स): इंडेक्स अब ‘ओवरसोल्ड’ (Oversold) जोन के करीब जा रहा है, लेकिन अभी भी और गिरावट की गुंजाइश है।
  • वॉल्यूम: आज की गिरावट भारी वॉल्यूम के साथ हुई है। इसका मतलब है कि यह गिरावट सिर्फ छोटे निवेशकों की वजह से नहीं, बल्कि बड़े फंड हाउस की वजह से है। Technical Forces स्पष्ट रूप से ‘बैरिश’ (Bearish – मंदी) संकेत दे रहे हैं।

भाग ८: निवेशक मनोविज्ञान – डर और लालच (Psychological Forces)

शेयर बाजार गणित से ज्यादा मनोविज्ञान (Psychology) का खेल है। आज जो हुआ, वह ‘डर’ (Fear) का परिणाम है।

पैनिक सेलिंग (Panic Selling):

जब एक खुदरा निवेशक देखता है कि उसका पोर्टफोलियो १०% लाल हो गया है, तो उसकी तार्किक क्षमता खत्म हो जाती है। वह बस ‘बेचो और भागो’ की रणनीति अपनाता है।

  • यह Herd Mentality (भेड़चाल) बाजार को और नीचे ले जाती है।
  • Psychological Forces आज तार्किकता पर हावी हो गए। जो शेयर कल तक सोना लग रहे थे, आज वे पत्थर नजर आने लगे।

भाग ९: ऐतिहासिक संदर्भ – क्या यह २००० या २००८ जैसा है?

क्या यह डॉट-कॉम बबल (२०००) जैसा क्रैश है? या २००८ की मंदी जैसा? विशेषज्ञों का मानना है कि यह २०२६ का क्रैश उतना भयावह नहीं है।

  • फंडामेंटल्स मजबूत हैं: भारतीय आईटी कंपनियों की बैलेंस शीट बहुत मजबूत है। उनके पास नकदी का भंडार है और कर्ज न के बराबर है।
  • डिजिटल दुनिया: आज दुनिया बिना आईटी के नहीं चल सकती। यह मांग कभी खत्म नहीं होगी।
  • यह एक ‘करेक्शन’ (Correction) है, न कि ‘डिप्रेशन’ (Depression)। बाजार अपनी अतार्किक तेजी (Irrational Exuberance) को संतुलित कर रहा है

भाग १०: अब आगे क्या? – २०२६ का आउटलुक

१३ फरवरी का यह झटका क्या लंबे समय तक चलेगा?

अल्पकालिक (Short Term):

अगले कुछ हफ्तों तक बाजार में उतार-चढ़ाव (Volatility) रहेगा। अमेरिकी फेड की अगली बैठक तक निवेशक नर्वस रहेंगे। और गिरावट आ सकती है।

दीर्घकालिक (Long Term):

२०२६ के अंत तक स्थिति सुधरने की उम्मीद है।

  • एआई का हाइप खत्म होगा और असली काम शुरू होगा।
  • अमेरिकी अर्थव्यवस्था ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ (Soft Landing) कर सकती है।
  • भारतीय आईटी कंपनियां लागत कम करने और मार्जिन बढ़ाने पर फोकस करेंगी।
  • Long-term Economic Forces अभी भी डिजिटल इंडिया और ग्लोबल टेक के पक्ष में हैं।

भाग ११: क्या यह खरीदारी का मौका है? (Opportunity in Crisis)

वारेन बफेट का प्रसिद्ध कथन है: “जब दूसरे डर रहे हों, तब लालची बन जाओ।” क्या आज वह दिन है?

मूल्यांकन (Valuation):

इस गिरावट के बाद, कई आईटी स्टॉक्स अब आकर्षक वैल्यूएशन पर आ गए हैं।

  • टीसीएस और एचसीएल टेक जैसे शेयर अब अपने ५ साल के औसत पीई (PE) के करीब मिल रहे हैं।
  • जो निवेशक लंबी अवधि (३-५ साल) का नजरिया रखते हैं, उनके लिए यह ‘सेल’ (Sale) जैसा है।
  • लेकिन एकमुश्त (Lumpsum) पैसा न लगाएं। बाजार के और गिरने का इंतजार करें या एसआईपी (SIP) शुरू करें।

भाग १२: म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए सलाह

अगर आपका पैसा आईटी सेक्टर म्यूचुअल फंड (Technology Funds) में लगा है, तो आज आपकी एनएवी (NAV) बुरी तरह टूटी होगी।

  • घबराएं नहीं: सेक्टर फंड हमेशा जोखिम भरे होते हैं। उनमें चक्र (Cycles) चलते हैं।
  • बने रहें: आईटी सेक्टर वापसी करेगा। अगर आप अभी बेचेंगे, तो आप अपने नुकसान को ‘पक्का’ (Realize) कर लेंगे।
  • SIP जारी रखें: गिरते बाजार में आपको ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं। यही रुपी कॉस्ट एवरेजिंग (Rupee Cost Averaging) की ताकत है।

भाग १३: एक आम निवेशक की चेकलिस्ट – सुरक्षा कवच

इस तरह के बाजारी तूफानों से बचने के लिए आपको अपनी Investment Forces को मजबूत करना होगा।

  1. डायवर्सिफिकेशन (विविधता): सारा पैसा आईटी में न रखें। फार्मा, बैंकिंग और एफएमसीजी में भी निवेश करें। आज जब आईटी गिरा, तो फार्मा और एफएमसीजी ने थोड़ा सहारा दिया।
  2. क्वालिटी स्टॉक्स: केवल लार्ज-कैप (बड़ी कंपनियों) में ही रहें। गिरावट में छोटी कंपनियां (Small Cap) खत्म हो सकती हैं, लेकिन टीसीएस-इंफोसिस वापस जरूर आएंगे।
  3. इमरजेंसी फंड: शेयर बाजार के पैसे को अपनी जरूरत का पैसा न बनाएं। बाजार में वही पैसा लगाएं जिसे आप ५ साल तक भूल सकते हैं।

भाग १४: विशेषज्ञों की राय – स्ट्रीट क्या कह रही है?

बाजार के दिग्गज इस गिरावट को कैसे देख रहे हैं?

  • संजीव भसीन (काल्पनिक संदर्भ): “यह एक ओवररिएक्शन है। अमेरिकी डेटा खराब था, लेकिन इतना भी नहीं। यह स्मार्ट मनी (Smart Money) द्वारा माल बटोरने का तरीका है।”
  • मधु केला (काल्पनिक संदर्भ): “आईटी में दर्द अभी बाकी है। अगले दो तिमाहियों तक मार्जिन पर दबाव रहेगा। मैं अभी दूर रहने की सलाह दूंगा।”

विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है, जो बाजार की अनिश्चितता को दर्शाता है।

भाग १५: निष्कर्ष – धैर्य ही सबसे बड़ी पूंजी है

अंत में, १३ फरवरी २०२६ का यह ‘ब्लैक फ्राइडे’ हमें शेयर बाजार का सबसे बड़ा पाठ पढ़ाता है—बाजार कभी एक सीधी रेखा में ऊपर नहीं जाता।

₹१.३ लाख करोड़ का नुकसान एक बड़ा आंकड़ा है, लेकिन यह ‘नोशनल लॉस’ (कागजी नुकसान) है जब तक आप बेचते नहीं हैं। भारतीय आईटी सेक्टर ने २००० का बबल देखा, २००८ की मंदी देखी, और २०२० का कोविड क्रैश देखा। हर बार यह सेक्टर पहले से ज्यादा मजबूत होकर उभरा है।

Market Forces, Economic Forces, और Technological Forces का चक्र चलता रहेगा। तेजी और मंदी सिक्के के दो पहलू हैं। एक समझदार निवेशक वह है जो गिरावट के शोर में अपनी शांति नहीं खोता।

आज का डर कल के मुनाफे की नींव बन सकता है। अपनी रिसर्च करें, अच्छे स्टॉक्स चुनें और धैर्य रखें। याद रखें, शेयर बाजार में पैसा धैर्यवान के पास ही आता है।

By Vivan Verma

विवान तेज खबरी (Tez Khabri) के समाचार रिपोर्टर हैं, जो ब्रेकिंग न्यूज़ और राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को कवर करते हैं। विवान तथ्यात्मक रिपोर्टिंग और तेज अपडेट के लिए जाने जाते हैं और प्रशासनिक व जनहित से जुड़े मामलों पर नियमित लेखन करते हैं।

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