अंतरराष्ट्रीय राजनीति में सहयोग और समर्थन की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। हाल ही में इज़राइल के पूर्व प्रधान मंत्री और प्रमुख राजनीतिक नेता यायर लैपिड ने भारत के समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया है। यह बयान दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग और मजबूती से जुड़े रिश्तों का प्रतीक है। इस लेख में हम यायर लैपिड के बयान की पृष्ठभूमि, भारत-इज़राइल संबंधों, दोनों देशों की कूटनीति, और वैश्विक संदर्भ में इस समर्थन के महत्व पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
यायर लैपिड का बयान: एक विश्लेष
यायर लैपिड ने भारत के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि भारत ने इज़राइल को विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर समर्थन दिया है। उन्होंने इस समर्थन को दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और रणनीतिक साझेदारी का परिणाम बताया। लैपिड का यह बयान इज़राइल की विदेश नीति में भारत को एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में स्थापित करता है।
भारत-इज़राइल संबंधों का इतिहास
भारत और इज़राइल के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना 1992 में हुई थी, जिसके बाद दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ता गया।

- सैन्य और सुरक्षा सहयोग: दोनों देशों ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में रणनीतिक साझेदारी बनाई।
- विज्ञान और प्रौद्योगिकी: कृषि, जल प्रबंधन, और तकनीकी नवाचारों में सहयोग।
- व्यापारिक संबंध: व्यापार और निवेश के क्षेत्र में वृद्धि, जिससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं को लाभ हुआ।
भारत का इज़राइल के प्रति समर्थन
भारत ने इज़राइल के विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर समर्थन दिया है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र जैसे मंच शामिल हैं। भारत का यह समर्थन दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग को दर्शाता है।
- राजनयिक समर्थन: इज़राइल के सुरक्षा और राजनीतिक मुद्दों पर भारत के स्थिर रुख।
- आर्थिक सहयोग: व्यापारिक समझौतों और निवेश को प्रोत्साहित करना।
- सांस्कृतिक आदान-प्रदान: दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और शैक्षिक कार्यक्रमों का आयोजन।
यायर लैपिड की राजनीतिक भूमिका और प्रभाव
यायर लैपिड इज़राइल के एक प्रमुख राजनीतिक नेता और पूर्व प्रधानमंत्री हैं। उनकी विदेश नीति में भारत के प्रति विशेष रूचि रही है।
- विदेश नीति में बदलाव: भारत के साथ संबंधों को मजबूत करने की पहल।
- आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी: दोनों देशों के बीच वैश्विक मंचों पर सहयोग को बढ़ावा देना।
- विश्व राजनीति में भारत की भूमिका को मान्यता देना।
वैश्विक संदर्भ में भारत-इज़राइल संबंध
भारत और इज़राइल के संबंध केवल द्विपक्षीय नहीं हैं, बल्कि यह वैश्विक राजनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- क्षेत्रीय सुरक्षा: मध्य पूर्व क्षेत्र में स्थिरता के लिए सहयोग।
- वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई: साझा रणनीतियां और खुफिया साझेदारी।
- तकनीकी और नवाचार सहयोग: वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए संयुक्त प्रयास।
आर्थिक और तकनीकी सहयोग की विस्तार
दोनों देशों ने आर्थिक और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं।
- स्टार्टअप इकोसिस्टम: तकनीकी नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में भागीदारी।
- कृषि और जल प्रबंधन: इज़राइल की तकनीक का भारत में उपयोग।
- रक्षा तकनीक: सुरक्षा क्षेत्र में साझा परियोजनाएं।

भारत-इज़राइल सांस्कृतिक संबंध
सांस्कृतिक आदान-प्रदान दोनों देशों के बीच समझ और मित्रता को बढ़ावा देता है।
- संगीत, नृत्य और कला कार्यक्रम: सांस्कृतिक मंचों पर दोनों देशों की भागीदारी।
- शैक्षिक सहयोग: विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के बीच साझेदारी।
- पर्यटन और लोगों का संपर्क: यात्रा और पर्यटन को प्रोत्साहित करना।
भविष्य की संभावनाएं और चुनौतियां
भारत और इज़राइल के संबंधों में भविष्य में और भी विकास की संभावनाएं हैं, लेकिन कुछ चुनौतियां भी हैं।
- राजनीतिक स्थिरता: दोनों देशों में राजनीतिक बदलावों का प्रभाव।
- वैश्विक भू-राजनीति: अन्य देशों के साथ संबंधों में संतुलन बनाए रखना।
- सामाजिक और सांस्कृतिक अंतर: समझ और संवाद को बढ़ावा देना।
यायर लैपिड द्वारा भारत के समर्थन के लिए जताए गए आभार से यह स्पष्ट होता है कि भारत-इज़राइल संबंध समय के साथ और मजबूत होते जा रहे हैं। दोनों देशों के बीच सहयोग न केवल द्विपक्षीय हितों के लिए बल्कि वैश्विक शांति और विकास के लिए भी महत्वपूर्ण है। इस सहयोग को और बढ़ाने के लिए निरंतर संवाद और समझ आवश्यक है।
