ईरान में महंगाई का विस्फोट

Iran Economic Crisis 2026: ईरान एक बार फिर बड़े नागरिक विद्रोह की आग में जल रहा है। दिसंबर 2025 के अंत में तेहरान के ऐतिहासिक ‘ग्रैंड बाजार’ से शुरू हुआ यह प्रदर्शन अब ईरान के 31 में से 27 प्रांतों तक फैल चुका है। इस बार विरोध की मुख्य वजह राजनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक तबाही है, जिसने आम जनता का जीना दूभर कर दिया है।

ईरान में इस समय आर्थिक बदहाली और आसमान छूती महंगाई को लेकर जबरदस्त जनाक्रोश फैला हुआ है। जनवरी 2026 की शुरुआत से ही ईरान के विभिन्न शहरों में विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए हैं। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में अब तक 25 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 1200 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

ईरान में महंगाई का विस्फोट

1. प्रदर्शन की मुख्य वजह: गिरता रियाल और महंगाई

ईरान की अर्थव्यवस्था इस समय अपने सबसे खराब दौर से गुजर रही है:

  • मुद्रा में गिरावट: ईरानी मुद्रा ‘रियाल’ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर (करीब 1.45 मिलियन रियाल प्रति डॉलर) पर पहुंच गई है।
  • महंगाई दर: ईरान में आधिकारिक महंगाई दर 42% के पार हो चुकी है, जिससे खाद्य पदार्थों और बुनियादी वस्तुओं की कीमतें दोगुनी हो गई हैं।
  • बेरोजगारी: युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी और सरकारी भ्रष्टाचार ने आग में घी डालने का काम किया है।

2. हिंसक झड़पें और हताहतों का आंकड़ा

मानवाधिकार संगठनों (जैसे HRANA और Hengaw) के मुताबिक, प्रदर्शन अब खूनी संघर्ष में बदल चुके हैं:

  • मौत: अब तक 25 से 35 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जिनमें 4 बच्चे और सुरक्षा बलों के 2 सदस्य भी शामिल हैं।
  • गिरफ्तारी: सरकार ने प्रदर्शनों को कुचलने के लिए 1200 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है। कई विश्वविद्यालयों के छात्रों और नागरिक समाज के सदस्यों को भी गिरफ्तार किया गया है।
  • सुरक्षा बलों का बल प्रयोग: सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में सुरक्षा बलों को आंसू गैस के गोले छोड़ते और प्रदर्शनकारियों पर सीधे फायरिंग करते देखा जा सकता है।
ईरान में महंगाई का विस्फोट

3. ‘रोटी’ की मांग अब ‘आजादी’ में बदली

शुरुआत में यह आंदोलन केवल बढ़ती कीमतों के खिलाफ था, लेकिन अब प्रदर्शनकारी सीधे देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और धार्मिक नेतृत्व के खिलाफ नारे लगा रहे हैं। प्रदर्शनों में “तानाशाही मुर्दाबाद” और “मुल्लाओं को जाना होगा” जैसे नारे आम हो गए हैं।

4. वैश्विक प्रतिक्रिया और भारत की चिंता

  • डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या नहीं रुकी, तो अमेरिका “मदद के लिए आगे आएगा।” उन्होंने ईरान को “लॉक्ड एंड लोडेड” रहने की चेतावनी दी है।
  • संयुक्त राष्ट्र (UN): यूएन ने हिंसा पर गहरी चिंता जताई है और ईरान से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करने की अपील की है।
  • भारतीयों के लिए एडवाइजरी: भारत सरकार ने ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों और वहां जाने वाले पर्यटकों के लिए ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है, जिसमें उन्हें भीड़भाड़ वाले इलाकों से बचने की सलाह दी गई है।

5. आगे क्या?

ईरान सरकार ने इन प्रदर्शनों के पीछे “विदेशी ताकतों” का हाथ बताया है और प्रदर्शनकारियों को “दंगाई” (Rioters) करार दिया है। इंटरनेट पर पाबंदियां और सोशल मीडिया ब्लॉक करने के बावजूद लोग सड़कों पर उतर रहे हैं। जानकारों का मानना है कि यदि आर्थिक सुधार तुरंत नहीं हुए, तो यह आंदोलन 2022 के ‘महसा अमीनी’ विद्रोह से भी बड़ा रूप ले सकता है।

निष्कर्ष: ईरान में “महंगाई का विस्फोट” केवल आर्थिक समस्या नहीं, बल्कि जनता के सब्र का बांध टूटना है। आने वाले कुछ दिन ईरान के भविष्य के लिए अत्यंत निर्णायक साबित होने वाले हैं।

By Isha Patel

Isha Patel Tez Khabri के साथ जुड़ी एक समाचार रिपोर्टर हैं। वे भारत और राज्यों से जुड़ी ताज़ा, ब्रेकिंग और जनहित से संबंधित खबरों को कवर करती हैं। Isha Patel शिक्षा, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर सत्यापित व तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करती हैं।

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