Indian Sailors Stranded in Tehran

समुद्र की लहरें जितनी शांत और सुंदर दिखती हैं, कई बार उनकी गहराइयों में उतने ही खौफनाक राज दबे होते हैं। भारत के हजारों युवा अपनी आंखों में डॉलर में कमाई करने और दुनिया घूमने का सपना लेकर मर्चेंट नेवी का रुख करते हैं। लेकिन जब यह सपना टूटता है, तो उसकी गूंज हजारों किलोमीटर दूर भारत के छोटे-छोटे गांवों में सुनाई देती है, जहां बूढ़ी माताएं और लाचार पत्नियां अपने बेटों और पतियों की वापसी की राह देख रही होती हैं। आज हम एक ऐसी ही दिल दहला देने वाली घटना का विस्तृत विश्लेषण करने जा रहे हैं जिसने भारत सरकार और विदेश मंत्रालय के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। फारस की खाड़ी (Persian Gulf) के अशांत जल में एक भारतीय जहाज पर हुई फायरिंग और उसके बाद चालक दल के सदस्यों की गिरफ्तारी ने हड़कंप मचा दिया है। खुले समंदर में गोलीबारी और गिरफ्तारी, तेहरान में फंसे 16 भारतीय नाविकों की दर्दनाक कहानी आज हर उस भारतीय के लिए चिंता का विषय है जिसका कोई अपना विदेश में काम कर रहा है।

16 जनवरी, 2026 की सुबह आई खबरों के अनुसार, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स या कोस्ट गार्ड द्वारा एक जहाज को रोका गया, उस पर कथित तौर पर गोलियां चलाई गईं और उसमें सवार 16 भारतीय नाविकों को हिरासत में ले लिया गया। ये नाविक अब तेहरान की जेलों में बंद हैं, जहां से उनकी रिहाई की गुहार लगाई जा रही है। इस

1. वह खौफनाक रात: समंदर के बीच मौत का तांडव

घटनाक्रम को समझने के लिए हमें उस रात की कल्पना करनी होगी जब यह हादसा हुआ। फारस की खाड़ी, जो तेल व्यापार का मुख्य मार्ग है, अक्सर भू-राजनीतिक तनावों का केंद्र रहती है। 16 भारतीय नाविक जिस जहाज पर सवार थे, वह एक मालवाहक जहाज (Cargo Ship) या तेल टैंकर बताया जा रहा है। ये नाविक अपनी नियमित ड्यूटी पर थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि अगले कुछ पल उनकी जिंदगी को हमेशा के लिए बदल देंगे।

अचानक, अंधेरे में कुछ तेज रफ्तार गश्ती नौकाओं ने जहाज को घेर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों (जो अन्य जहाजों पर थे या जिन्होंने अंतिम कॉल सुनी) के अनुसार, चेतावनी दिए बिना ही फायरिंग शुरू कर दी गई। गोलियों की तड़तड़ाहट से जहाज का डेक गूंज उठा। जहाज के कप्तान और चालक दल ने जान बचाने के लिए खुद को केबिन में बंद कर लिया, लेकिन ईरानी सुरक्षा बलों ने जहाज को अपने कब्जे में ले लिया।

Indian Sailors Stranded in Tehran

यह मुठभेड़ किसी फिल्मी दृश्य जैसी नहीं, बल्कि रोंगटे खड़े कर देने वाली वास्तविकता थी। खुले समंदर में गोलीबारी और गिरफ्तारी, तेहरान में फंसे 16 भारतीय नाविकों की दर्दनाक कहानी का यह सबसे भयावह अध्याय था। नाविकों को हथियारों के दम पर सरेंडर कराया गया। उन्हें हथकड़ियां पहनाई गईं और उनकी आंखों पर पट्टी बांधकर अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। बाद में पुष्टि हुई कि उन्हें ईरान की राजधानी तेहरान ले जाया गया है। इस दौरान कुछ नाविकों को मामूली चोटें आने की भी खबर है, लेकिन सबसे गहरी चोट उनके मानसिक पटल पर लगी है।

2. तेहरान की जेल: अनिश्चितता और भय का माहौल

गिरफ्तारी के बाद का जीवन इन 16 भारतीयों के लिए किसी नर्क से कम नहीं है। तेहरान की जेलों की स्थिति और वहां की कानूनी प्रक्रिया अत्यंत जटिल और सख्त मानी जाती है। परिजनों को मिली छन-छन कर आ रही जानकारी के मुताबिक, इन नाविकों को एक छोटे से कमरे में रखा गया है। भाषा की समस्या सबसे बड़ी बाधा है। नाविकों को फारसी (Persian) नहीं आती और जेल के गार्ड्स को हिंदी या अंग्रेजी की समझ नहीं है।

आरोप क्या हैं? ईरानी अधिकारियों का दावा है कि यह जहाज अवैध गतिविधियों में शामिल था। अक्सर ऐसे मामलों में दो तरह के आरोप लगाए जाते हैं:

  1. समुद्री सीमा का उल्लंघन: जहाज गलती से या जानबूझकर ईरानी जलक्षेत्र (Territorial Waters) में दाखिल हुआ।
  2. डीजल तस्करी (Oil Smuggling): यह सबसे गंभीर और सामान्य आरोप है। खाड़ी देशों में सब्सिडी वाला तेल चोरी-छिपे दूसरे देशों में बेचने का बड़ा रैकेट चलता है। अक्सर भारतीय नाविकों को यह पता ही नहीं होता कि जिस जहाज पर वे काम कर रहे हैं, वह तस्करी में लिप्त है। उन्हें सिर्फ माल लोड और अनलोड करने का आदेश मिलता है।

लेकिन हकीकत यह है कि इन नाविकों को ‘मोहरा’ बनाया गया है। असली अपराधी वे शिपिंग कंपनियां और एजेंट हैं जो एसी कमरों में बैठकर यह काला कारोबार चलाते हैं, जबकि सजा इन गरीब नाविकों को भुगतनी पड़ती है।

3. भारत में परिवारों का हाल: आंसुओं का सैलाब

जब तेहरान में ये नाविक जेल की रोटियां तोड़ रहे हैं, तब भारत में उनके घरों में चूल्हा नहीं जला है। ये 16 नाविक देश के अलग-अलग हिस्सों—केरल, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल से ताल्लुक रखते हैं। इनमें से कई अपने घर के अकेले कमाने वाले सदस्य हैं।

एक नाविक की पत्नी ने रोते हुए मीडिया को बताया, “उस रात उनका आखिरी फोन आया था। वे बहुत डरे हुए थे। गोलियों की आवाज आ रही थी। उन्होंने कहा कि ‘शायद हम अब कभी बात न कर सकें, बच्चों का ख्याल रखना’। उसके बाद से फोन बंद है।” यह व्यथा केवल एक घर की नहीं, बल्कि 16 परिवारों की है। माता-पिता अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। किसी ने अपनी जमीन गिरवी रखकर बेटे को विदेश भेजा था, तो किसी ने ब्याज पर पैसा उठाया था। अब न तो पैसा आ रहा है और न ही बेटा। खुले समंदर में गोलीबारी और गिरफ्तारी, तेहरान में फंसे 16 भारतीय नाविकों की दर्दनाक कहानी इन परिवारों के लिए एक आर्थिक और सामाजिक त्रासदी बन गई है।

4. फर्जी एजेंट्स का मकड़जाल: सपनों का सौदागर या अपराधी?

इस पूरी घटना की जड़ में वे फर्जी रिक्रूटमेंट एजेंट्स (Recruitment Agents) हैं जो भारत के बड़े शहरों में अपने ऑफिस खोलकर बैठे हैं। मर्चेंट नेवी में नौकरी के नाम पर भोले-भाले युवाओं से 2 लाख से 5 लाख रुपये तक वसूले जाते हैं।

धोखाधड़ी का तरीका (Modus Operandi): युवाओं को बताया जाता है कि उन्हें किसी बड़ी अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनी में नौकरी मिल रही है। लेकिन जब वे दुबई या ईरान पहुंचते हैं, तो उन्हें छोटे और खस्ताहाल जहाजों या ‘ढो’ (Dhows) पर चढ़ा दिया जाता है। उनके पासपोर्ट मालिकों द्वारा जब्त कर लिए जाते हैं। उन्हें ऐसी गतिविधियों में शामिल होने के लिए मजबूर किया जाता है जो गैरकानूनी होती हैं।

इस मामले में भी यही आशंका जताई जा रही है कि एजेंट ने नाविकों को धोखे में रखा था। जहाज के दस्तावेजों में गड़बड़ी थी या कार्गो के बारे में झूठ बोला गया था। जब ईरानी नेवी ने जहाज को रोका, तो मालिक ने फोन उठाना बंद कर दिया और नाविकों को उनके हाल पर छोड़ दिया। भारत सरकार को इन एजेंट्स पर सख्त कार्रवाई करने की जरूरत है जो चंद पैसों के लिए देश के नागरिकों की जान जोखिम में डालते हैं।

5. कूटनीतिक चुनौतियां: भारत और ईरान के संबंध

भारत और ईरान के बीच ऐतिहासिक रूप से अच्छे संबंध रहे हैं। चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट और तेल व्यापार के कारण दोनों देश एक-दूसरे के करीब हैं। लेकिन जब ऐसे मामले सामने आते हैं, तो कूटनीति की परीक्षा होती है।

कानूनी पेंच: ईरान का अपना सख्त कानून है। अगर वहां की अदालत में यह साबित हो गया कि जहाज तस्करी में शामिल था, तो नाविकों को लंबी सजा हो सकती है। भारतीय दूतावास के अधिकारियों के लिए सबसे पहली चुनौती ‘कॉन्सुलर एक्सेस’ (Consular Access) प्राप्त करना है, यानी जेल में जाकर भारतीय नागरिकों से मिलने की अनुमति। अक्सर देखा गया है कि कानूनी प्रक्रिया में महीनों लग जाते हैं। दस्तावेज पूरे न होने या जहाज मालिक के फरार होने की स्थिति में नाविकों को रिहा कराना टेढ़ी खीर साबित होता है।

विदेश मंत्रालय की भूमिका: भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) इस मामले में सक्रिय हो गया है। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ईरानी विदेश मंत्रालय के संपर्क में है। भारत का तर्क यह होता है कि नाविक केवल कर्मचारी हैं, वे निर्णय लेने वाले (Decision Makers) नहीं हैं। यदि कोई अपराध हुआ है, तो उसकी जिम्मेदारी जहाज के मालिक और कप्तान की होनी चाहिए, न कि निचले स्तर के कर्मचारियों की। खुले समंदर में गोलीबारी और गिरफ्तारी, तेहरान में फंसे 16 भारतीय नाविकों की दर्दनाक कहानी अब दो देशों के विदेश मंत्रियों की टेबल पर एक प्राथमिकता वाला मुद्दा बन चुकी है।

6. मनोवैज्ञानिक आघात: जेल की चारदीवारी के पीछे

शारीरिक यातना से भी बड़ी होती है मानसिक यातना। इन 16 नाविकों में से कई बहुत कम उम्र के हैं (20 से 25 वर्ष)। उन्होंने कभी पुलिस थाना भी नहीं देखा था और आज वे एक विदेशी जेल में बंद हैं। अनिश्चितता का डर उन्हें अंदर ही अंदर खाए जा रहा है। “क्या हम कभी घर वापस जा पाएंगे?” यह सवाल हर पल उनके मन में गूंजता है। खराब खाना, सोने की उचित व्यवस्था न होना और परिवार से संपर्क टूट जाना—ये स्थितियां किसी को भी तोड़ सकती हैं। कई बार ऐसे मामलों में नाविक डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं या आत्महत्या जैसे कदम उठाने की सोचते हैं। इसलिए, भारत सरकार के लिए यह केवल कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि एक मानवीय मिशन (Humanitarian Mission) भी है।

7. अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून और नाविकों के अधिकार

संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) और समुद्री श्रम कन्वेंशन (MLC) के तहत नाविकों के कुछ अधिकार सुरक्षित हैं। इसके मुताबिक, नाविकों को अपराधी की तरह ट्रीट नहीं किया जाना चाहिए, जब तक कि उनके खिलाफ ठोस सबूत न हों। लेकिन खाड़ी क्षेत्र में अक्सर इन अंतरराष्ट्रीय कानूनों की अनदेखी की जाती है। ‘सिफेरर्स राइट्स इंटरनेशनल’ (Seafarers’ Rights International) जैसी संस्थाएं अक्सर आवाज उठाती हैं कि नाविकों को ‘राजनीतिक फुटबॉल’ की तरह इस्तेमाल किया जाता है। जब दो देशों के बीच तनाव बढ़ता है, तो अक्सर जहाजों को पकड़ लिया जाता है। हमें यह जांचने की भी जरूरत है कि क्या यह गिरफ्तारी किसी भू-राजनीतिक तनाव का परिणाम तो नहीं है?

8. क्या हम इससे बच सकते थे? युवाओं के लिए सबक

यह घटना भविष्य के मर्चेंट नेवी उम्मीदवारों के लिए एक गंभीर चेतावनी है। खुले समंदर में गोलीबारी और गिरफ्तारी, तेहरान में फंसे 16 भारतीय नाविकों की दर्दनाक कहानी से हमें कुछ महत्वपूर्ण सबक सीखने चाहिए:

  • एजेंट की जांच: कभी भी बिना ‘आरपीएसएल’ (RPSL – Recruitment and Placement Services License) नंबर वाले एजेंट के माध्यम से विदेश न जाएं। डीजी शिपिंग (DG Shipping) की वेबसाइट पर रजिस्टर्ड एजेंट्स की सूची होती है।
  • अनुबंध (Contract) पढ़ें: साइन करने से पहले नौकरी के अनुबंध को ध्यान से पढ़ें। देखें कि आपको किस जहाज पर भेजा जा रहा है और मालिक कौन है।
  • जोखिम वाले क्षेत्र: ईरान, यमन, लीबिया और सोमालिया जैसे हाई-रिस्क जोन में जाने से पहले पूरी जानकारी प्राप्त करें।
  • इमरजेंसी संपर्क: विदेश जाने से पहले भारतीय दूतावास का नंबर और ‘मदद’ (MADAD) पोर्टल की जानकारी अपने पास रखें।

जागरूकता ही बचाव है। अक्सर बेरोजगारी और जल्द पैसा कमाने की होड़ में युवा शॉर्टकट अपनाते हैं जो उन्हें ऐसे दलदल में फंसा देता है।

9. पूर्व के मामले: इतिहास खुद को दोहरा रहा है

यह पहली बार नहीं है जब भारतीय नाविक ईरान में फंसे हैं।

  • 2013 में, ‘एमटी देश शांति’ नामक भारतीय टैंकर को ईरान ने रोका था।
  • 2019 में, ‘स्टेना इम्पेरो’ नामक ब्रिटिश फ्लैग वाले जहाज को ईरान ने पकड़ा था, जिसमें कई भारतीय सवार थे।
  • हाल के वर्षों में कई छोटे जहाजों को तेल तस्करी के आरोप में पकड़ा गया है। हर बार कहानी लगभग एक जैसी होती है—मालिक गायब हो जाता है, और नाविक फंस जाते हैं। सरकार को हर बार हस्तक्षेप करना पड़ता है। लेकिन सवाल यह है कि हम इस समस्या का स्थायी समाधान क्यों नहीं ढूंढ पा रहे हैं? क्या हमें खाड़ी देशों के साथ मिलकर नाविकों की सुरक्षा के लिए कोई विशेष संधि नहीं करनी चाहिए?

10. सोशल मीडिया और जनमत का दबाव

आज के डिजिटल युग में, नाविकों की रिहाई में सोशल मीडिया एक बड़ा हथियार बन सकता है। ट्विटर (X) और फेसबुक पर चलने वाले कैंपेन सरकार पर दबाव बनाते हैं। जब लोग पूछते हैं कि खुले समंदर में गोलीबारी और गिरफ्तारी, तेहरान में फंसे 16 भारतीय नाविकों की दर्दनाक कहानी का अंत कब होगा, तो प्रशासन को जवाब देना पड़ता है। पीड़ित परिवारों को चाहिए कि वे एकजुट होकर अपनी आवाज उठाएं। एनजीओ और मानवाधिकार संगठनों को भी इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाना चाहिए।

11. सरकार से उम्मीदें: “उन्हें घर लाओ”

अब सबकी निगाहें प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और विदेश मंत्री एस. जयशंकर पर टिकी हैं। भारत ने अतीत में यमन और यूक्रेन जैसे युद्ध क्षेत्रों से अपने नागरिकों को सुरक्षित निकाला है। ऑपरेशन गंगा और ऑपरेशन राहत की सफलता बताती है कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। इस मामले में भी उम्मीद है कि सरकार उच्च स्तरीय बातचीत करेगी। यह संभव है कि कानूनी प्रक्रिया के समानांतर ‘कूटनीतिक समाधान’ (Diplomatic Solution) निकाला जाए। हो सकता है कि नाविकों को सजा के बजाय भारत निर्वासित (Deport) कर दिया जाए, जो उनके लिए सबसे बड़ी राहत होगी।

12. एक अधूरी कहानी जिसे सुखद अंत की तलाश है

अंत में, खुले समंदर में गोलीबारी और गिरफ्तारी, तेहरान में फंसे 16 भारतीय नाविकों की दर्दनाक कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। यह एक संघर्ष है जो अभी जारी है। वे 16 लोग सिर्फ नाविक नहीं हैं; वे किसी के बेटे, किसी के भाई और किसी के पिता हैं। वे भारत का हिस्सा हैं।

उस रात समंदर में चली गोलियों ने उनके शरीर को भले ही न भेदा हो, लेकिन उनके सपनों को छलनी कर दिया है। तेहरान की ठंडी सलाखों के पीछे वे अपनी मातृभूमि की गर्मी महसूस करने के लिए तरस रहे हैं।

एक राष्ट्र के रूप में, यह हमारा कर्तव्य है कि हम उनके साथ खड़े हों। यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं रहनी चाहिए। यह व्यवस्था में सुधार का कारण बननी चाहिए। उन ठग एजेंट्स की गिरफ्तारी होनी चाहिए जिन्होंने उन्हें मौत के मुंह में धकेला। और सबसे बढ़कर, उन 16 भारतीयों की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित होनी चाहिए।

हम प्रार्थना करते हैं कि कूटनीति सफल हो और जल्द ही वह दिन आए जब ये नाविक अपने घर के आंगन में मुस्कुराते हुए नजर आएं, और यह डरावना अनुभव सिर्फ एक बुरा सपना बनकर रह जाए। तब तक, संघर्ष जारी रहेगा, आवाज उठती रहेगी।

सत्यमेव जयते।

By Isha Patel

Isha Patel Tez Khabri के साथ जुड़ी एक समाचार रिपोर्टर हैं। वे भारत और राज्यों से जुड़ी ताज़ा, ब्रेकिंग और जनहित से संबंधित खबरों को कवर करती हैं। Isha Patel शिक्षा, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर सत्यापित व तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करती हैं।

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