India G20 Global

भारत की G20 अध्यक्षता को वैश्विक कूटनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। जब दुनिया महामारी, आर्थिक अस्थिरता, जलवायु संकट और भू-राजनीतिक तनावों से जूझ रही थी, तब भारत ने ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से उठाया।

Bharat G20 Global South Initiative ने विकासशील देशों के मुद्दों—जैसे ऋण संकट, खाद्य सुरक्षा, जलवायु वित्त और डिजिटल समावेशन—को वैश्विक एजेंडा में प्रमुख स्थान दिलाया। इससे न केवल भारत की वैश्विक छवि मजबूत हुई, बल्कि अंतरराष्ट्रीय नीतियों में भी ठोस प्रगति देखने को मिली।

G20 क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है?

G20 दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जिसमें विकसित और उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। यह वैश्विक GDP का लगभग 85% और अंतरराष्ट्रीय व्यापार का बड़ा हिस्सा प्रतिनिधित्व करता है।

इस मंच पर लिए गए फैसलों का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। इसलिए जब भारत ने G20 की अध्यक्षता संभाली, तो उसकी प्राथमिकताएं भी वैश्विक विमर्श का केंद्र बन गईं।

‘ग्लोबल साउथ’ की परिभाषा

‘ग्लोबल साउथ’ उन विकासशील और उभरते देशों को कहा जाता है, जो एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और ओशिनिया में स्थित हैं। ये देश अक्सर जलवायु परिवर्तन, आर्थिक असमानता और ऋण संकट जैसी चुनौतियों का सामना करते हैं।

भारत ने अपनी G20 अध्यक्षता के दौरान इन देशों की चिंताओं को केंद्र में रखा।

Bharat G20 Global

Bharat G20 Global South Initiative के तहत भारत ने ‘Voice of Global South Summit’ का आयोजन कर 100 से अधिक देशों को एक मंच पर जोड़ा।

भारत की प्राथमिकताएं

भारत की G20 अध्यक्षता का मूल मंत्र था—“वसुधैव कुटुंबकम” यानी ‘एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’।

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने कई मंचों पर कहा कि विकासशील देशों की आवाज को अनसुना नहीं किया जा सकता।

भारत ने निम्नलिखित मुद्दों को प्राथमिकता दी:

  • जलवायु वित्त और हरित ऊर्जा
  • ऋण राहत और वित्तीय स्थिरता
  • डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर
  • खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा
  • महिला सशक्तिकरण

इन पहलों ने Bharat G20 Global South Initiative को वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली बनाया।

अफ्रीकी संघ की स्थायी सदस्यता

भारत की पहल का एक बड़ा परिणाम यह रहा कि African Union को G20 की स्थायी सदस्यता मिली।

यह कदम ऐतिहासिक माना गया, क्योंकि इससे अफ्रीका की आवाज सीधे वैश्विक आर्थिक मंच तक पहुंची।

इस निर्णय को ‘ग्लोबल साउथ’ की कूटनीतिक जीत के रूप में देखा गया।

जलवायु परिवर्तन पर प्रगति

विकासशील देशों की सबसे बड़ी चिंता जलवायु परिवर्तन और उससे जुड़े वित्तीय संसाधनों की कमी है।

भारत ने G20 में जलवायु न्याय (Climate Justice) की अवधारणा को आगे बढ़ाया।

Bharat G20 Global South Initiative के तहत विकसित देशों से जलवायु वित्त की प्रतिबद्धताओं को पूरा करने पर जोर दिया गया।

इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और हरित विकास समझौतों को भी समर्थन मिला।

ऋण संकट पर समाधान

कई विकासशील देश भारी विदेशी कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं। भारत ने G20 मंच पर ऋण पुनर्गठन और राहत की प्रक्रिया को तेज करने का आग्रह किया।

इससे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों और कर्जदाताओं के बीच समन्वय बढ़ा।

यह पहल आर्थिक स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल

भारत ने अपने डिजिटल अनुभव—जैसे आधार, यूपीआई और डिजिटल भुगतान प्रणाली—को वैश्विक स्तर पर साझा किया।

Digital India मॉडल को विकासशील देशों के लिए सुलभ और किफायती समाधान के रूप में प्रस्तुत किया गया।

Bharat G20 Global

Bharat G20 Global South Initiative ने डिजिटल समावेशन को विकास का महत्वपूर्ण साधन बताया।

खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा

यूक्रेन संकट और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के कारण कई देशों में खाद्य संकट गहराया।

भारत ने G20 में खाद्य सुरक्षा को लेकर ठोस कदमों पर चर्चा की और कृषि सहयोग को बढ़ावा दिया।

ऊर्जा के क्षेत्र में नवीकरणीय स्रोतों को बढ़ावा देने और सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।

महिला सशक्तिकरण और सामाजिक समावेशन

भारत ने G20 एजेंडा में महिला नेतृत्व और उद्यमिता को प्रमुखता दी।

महिला सशक्तिकरण को आर्थिक विकास से जोड़ते हुए कई पहलें शुरू की गईं।

Bharat G20 Global South Initiative ने लैंगिक समानता को सतत विकास के लिए आवश्यक बताया।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

भारत की पहल को व्यापक समर्थन मिला। कई विकासशील देशों ने इसे अपनी आवाज को मजबूती देने वाला कदम बताया।

विकसित देशों ने भी भारत की संतुलित और समावेशी कूटनीति की सराहना की।

भू-राजनीतिक संतुलन

आज की दुनिया बहुध्रुवीय हो रही है। ऐसे समय में भारत ने G20 मंच को संवाद और सहयोग का माध्यम बनाया।

भारत ने पश्चिमी देशों और विकासशील देशों के बीच संतुलन कायम रखते हुए सहमति आधारित घोषणापत्र तैयार कराया।

यह कूटनीतिक सफलता Bharat G20 Global South Initiative की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

आर्थिक प्रभाव

भारत की पहल से वैश्विक निवेश और व्यापार के नए अवसर खुले। विकासशील देशों के लिए वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठे। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता आने की उम्मीद जताई जा रही है।

भविष्य की दिशा

G20 में उठाए गए मुद्दे केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं हैं। आने वाले वर्षों में इनके कार्यान्वयन पर ध्यान दिया जाएगा।

भारत ने यह स्पष्ट किया है कि वह ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज उठाता रहेगा।

Bharat G20 Global South Initiative आने वाले समय में वैश्विक नीतियों को प्रभावित करता रहेगा।

भारत की G20 अध्यक्षता ने ‘ग्लोबल साउथ’ के मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाई। अफ्रीकी संघ की सदस्यता, जलवायु वित्त पर जोर, ऋण राहत और डिजिटल समावेशन जैसे कदमों ने वैश्विक सहयोग को नई दिशा दी।

Bharat G20 Global South Initiative ने यह साबित किया कि विकासशील देशों की आवाज भी वैश्विक नीति निर्धारण में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

भारत की यह कूटनीतिक सफलता आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय संबंधों और वैश्विक आर्थिक संतुलन को प्रभावित करती रहेगी।

By Vivan Verma

विवान तेज खबरी (Tez Khabri) के समाचार रिपोर्टर हैं, जो ब्रेकिंग न्यूज़ और राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को कवर करते हैं। विवान तथ्यात्मक रिपोर्टिंग और तेज अपडेट के लिए जाने जाते हैं और प्रशासनिक व जनहित से जुड़े मामलों पर नियमित लेखन करते हैं।

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