क्रिकेट के मैदान से बाहर की जंग
क्रिकेट को ‘जेंटलमैन गेम’ कहा जाता है, लेकिन जब बात भारत और पाकिस्तान की आती है, तो यह खेल सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं रहता। यह भावनाओं, राजनीति, कूटनीति और अब ‘बायकॉट’ की संस्कृति का अखाड़ा बन चुका है। साल २०२६ का टी20 वर्ल्ड कप (T20 World Cup 2026), जिसकी सह-मेजबानी भारत और श्रीलंका कर रहे हैं, अभी शुरू भी नहीं हुआ है कि विवादों के काले बादल इस टूर्नामेंट पर मंडराने लगे हैं।
हर बार की तरह, कहानी वही पुरानी है – IND vs PAK का महामुकाबला खतरे में है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने सुरक्षा कारणों और ‘पारस्परिकता’ (Reciprocity) का हवाला देते हुए भारत में खेलने से मना कर दिया है और टूर्नामेंट के Bred (बायकॉट) की धमकी दी है। लेकिन, इस बार कहानी में एक नया और चौंकाने वाला मोड़ आया है। इस बार यह लड़ाई सिर्फ बीसीसीआई (BCCI) और पीसीबी (PCB) के बीच नहीं रही। इस हाई-वोल्टेज ड्रामा में अब Bangladesh Entry (बांग्लादेश की एंट्री) हो चुकी है, जिसने पूरे समीकरण को बदल कर रख दिया है।
ढाका से आए एक बयान ने आईसीसी (ICC) के माथे पर पसीना ला दिया है। क्या बांग्लादेश पाकिस्तान का समर्थन कर रहा है? या फिर बांग्लादेश ने खुद को एक ‘तटस्थ स्थल’ (Neutral Venue) के रूप में पेश किया है? या फिर कहानी कुछ और ही है? यह New Twist (नया ट्विस्ट) क्रिकेट फैंस के लिए किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं है।
भाग 1: विवाद की जड़ – आखिर क्यों अड़ा है पाकिस्तान? (The Root Cause)
इस पूरे विवाद को समझने के लिए हमें थोड़ा पीछे जाना होगा। भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय सीरीज (Bilateral Series) पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय से बंद हैं। दोनों टीमें केवल आईसीसी टूर्नामेंट्स या एशिया कप में ही भिड़ती हैं।
चैंपियंस ट्रॉफी का बदला?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, २०२५ में हुई चैंपियंस ट्रॉफी (जिसकी मेजबानी पाकिस्तान के पास थी) में भारत ने सुरक्षा कारणों से पाकिस्तान जाने से मना कर दिया था। उस वक्त बीसीसीआई ने ‘हाइब्रिड मॉडल’ (Hybrid Model) की मांग की थी, जिसके तहत भारत के मैच दुबई या श्रीलंका में कराए गए थे। उस समय पाकिस्तान को झुकना पड़ा था क्योंकि भारतीय टीम के बिना कोई भी टूर्नामेंट आर्थिक रूप से सफल नहीं हो सकता।
अब, जब २०२६ में T20 World Cup की मेजबानी भारत (और श्रीलंका) कर रहा है, तो पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) इसे बदला लेने का सही मौका मान रहा है। पीसीबी के अध्यक्ष का कहना है, “अगर भारत पाकिस्तान नहीं आ सकता, तो पाकिस्तान भी भारत नहीं जाएगा।” यह ‘जैसे को तैसा’ वाली नीति ने आईसीसी को मुश्किल में डाल दिया है। पाकिस्तान की मांग है कि उसके मैच भारत में नहीं, बल्कि श्रीलंका या बांग्लादेश में कराए जाएं।
BCCI का कड़ा रुख:
दूसरी तरफ, BCCI अपनी बात पर अडिग है। भारत सरकार की नीति स्पष्ट है – “आतंकवाद और क्रिकेट साथ-साथ नहीं चल सकते।” बीसीसीआई सचिव ने साफ कर दिया है कि यह एक आईसीसी इवेंट है और सभी टीमों को होस्ट नेशन (भारत) में खेलना ही होगा। अगर पाकिस्तान नहीं आता है, तो आईसीसी को कड़े कदम उठाने पड़ेंगे। यह IND vs PAK विवाद अब स्वाभिमान की लड़ाई बन चुका है।
भाग 2: बांग्लादेश की एंट्री – कहानी में नया ट्विस्ट (The Bangladesh Twist)
अभी तक दुनिया की नजरें सिर्फ दिल्ली और लाहौर पर टिकी थीं। लेकिन अचानक, बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) की ओर से आए एक प्रस्ताव ने सबको चौंका दिया है। इसे ही हम New Twist कह रहे हैं।

BCB का चौंकाने वाला प्रस्ताव:
सूत्रों के अनुसार, बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने आईसीसी और पीसीबी के साथ अनौपचारिक बातचीत में एक ‘मध्यस्थता’ (Mediation) का प्रस्ताव रखा है। लेकिन यह मध्यस्थता भारत के पक्ष में है या पाकिस्तान के? यहाँ पेच फंसा हुआ है।
- वैकल्पिक वेन्यू (Alternative Venue) की पेशकश: बांग्लादेश ने कथित तौर पर प्रस्ताव दिया है कि अगर पाकिस्तान भारत में खेलने को तैयार नहीं है और श्रीलंका में लॉजिस्टिक समस्याएं हैं, तो बांग्लादेश ‘हाइब्रिड मॉडल’ के तहत पाकिस्तान के मैचों की मेजबानी करने को तैयार है।
- यह प्रस्ताव पाकिस्तान के लिए एक “फेस-सेविंग” (इज्जत बचाने वाला) रास्ता हो सकता है।
- लेकिन भारत के लिए यह मंजूर करना मुश्किल है क्योंकि इसका मतलब होगा कि वर्ल्ड कप का एक हिस्सा भारत से बाहर जा रहा है।
- पाकिस्तान का समर्थन या कूटनीति? राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बांग्लादेश में हाल ही में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद वहां की सरकार पाकिस्तान के साथ संबंध सुधारने की कोशिश कर रही है। ऐसे में, Bangladesh Entry को पाकिस्तान के ‘मौन समर्थन’ के रूप में देखा जा रहा है। बीसीबी ने दबे शब्दों में कहा है कि “खिलाड़ियों की सुरक्षा और मानसिक स्थिति सर्वोपरि है,” जो कि परोक्ष रूप से पाकिस्तान के तर्क (सुरक्षा चिंता) को बल देता है।
- तीसरा कोण – रिप्लेसमेंट: एक और थ्योरी यह भी चल रही है (जो सोशल मीडिया पर वायरल है) कि अगर पाकिस्तान T20 World Cup Boycott करता है, तो क्या बांग्लादेश को इसका फायदा मिलेगा? नहीं, क्योंकि बांग्लादेश तो पहले से ही क्वालीफाई कर चुका है। लेकिन बांग्लादेश का यह कदम एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) में उसकी स्थिति मजबूत करने की एक चाल हो सकती है।

भाग 3: क्या वाकई पाकिस्तान वर्ल्ड कप छोड़ सकता है? (Reality of Boycott)
Pakistan Threatens – यह हेडलाइन हम हर साल पढ़ते हैं। लेकिन क्या पीसीबी वाकई में टी20 वर्ल्ड कप का बहिष्कार करने की हिम्मत कर सकता है? इसके आर्थिक और खेल संबंधी पहलुओं का विश्लेषण करना जरूरी है।
1. आईसीसी की फंडिंग (ICC Revenue Share):
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की कमाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा (लगभग 50% से ज्यादा) आईसीसी से मिलने वाले रेवेन्यू शेयर से आता है। और आईसीसी की कमाई का 80% हिस्सा भारतीय बाजार (BCCI) से आता है। अगर पाकिस्तान वर्ल्ड कप का बायकॉट करता है, तो:
- आईसीसी उस पर प्रतिबंध लगा सकता है।
- उसकी फंडिंग रोकी जा सकती है।
- पाकिस्तानी खिलाड़ियों का भविष्य अधर में लटक सकता है।
2. ब्रॉडकास्टर्स का दबाव:
वर्ल्ड कप के प्रसारण अधिकार जिन चैनलों (जैसे डिज्नी-स्टार, स्काई स्पोर्ट्स) के पास हैं, उन्होंने अरबों रुपये का निवेश सिर्फ IND vs PAK मैच को ध्यान में रखकर किया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत-पाक मैच का 10 सेकंड का विज्ञापन करोड़ों में बिकता है। अगर पाकिस्तान नहीं आता, तो ब्रॉडकास्टर्स आईसीसी पर जुर्माना ठोक सकते हैं। ऐसे में आईसीसी एड़ी-चोटी का जोर लगा देगा कि पाकिस्तान भारत आए।
3. खिलाड़ियों का नुकसान:
बाबर आजम, शाहीन अफरीदी और नसीम शाह जैसे खिलाड़ी अपने करियर के पीक पर हैं। वर्ल्ड कप जैसा मंच छोड़ना उनके करियर के लिए आत्मघाती होगा। खिलाड़ी खुद भी बायकॉट के पक्ष में नहीं होते, यह सिर्फ बोर्ड की राजनीति होती है।
इसलिए, विश्लेषकों का मानना है कि T20 World Cup Boycott की धमकी सिर्फ एक ‘बार्गेनिंग चिप’ (सौदेबाजी का हथियार) है ताकि पीसीबी आईसीसी से ज्यादा फंड या सुविधाएं मांग सके।
भाग 4: हाइब्रिड मॉडल – समाधान या समस्या? (The Hybrid Model Dilemma)
पाकिस्तान की मांग है कि ‘हाइब्रिड मॉडल’ लागू किया जाए। यानी भारत अपने मैच भारत में खेले, लेकिन पाकिस्तान अपने मैच किसी न्यूट्रल वेन्यू पर खेले। लेकिन २०४६ के टी20 वर्ल्ड कप में यह मॉडल लागू करना एक लॉजिस्टिक दुःस्वप्न (Logistical Nightmare) होगा।
हाइब्रिड मॉडल की चुनौतियां:
- यात्रा की थकान: अगर फाइनल मैच भारत में है (जैसे कि नरेंद्र मोदी स्टेडियम, अहमदाबाद में), और पाकिस्तान फाइनल में पहुंचता है, तो क्या वह तब भी भारत आने से मना करेगा? अगर वह फाइनल खेलने भारत आता है, तो फिर लीग मैच खेलने में क्या दिक्कत है? यह तर्क हास्यास्पद लगता है।
- बांग्लादेश का रोल: यहाँ Bangladesh Entry महत्वपूर्ण हो जाती है। अगर मैच बांग्लादेश शिफ्ट होते हैं, तो टीमों को भारत और बांग्लादेश के बीच बार-बार यात्रा करनी होगी। वीज़ा, फ्लाइट्स और बायो-बबल (अगर जरूरत पड़ी) का खर्च दोगुना हो जाएगा।
- फैंस की परेशानी: जो फैंस टिकट बुक कर चुके हैं, वे अगर मैच वेन्यू बदल गया तो क्या करेंगे?
बीसीसीआई ने साफ कर दिया है कि वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में हाइब्रिड मॉडल स्वीकार्य नहीं है। “होस्ट मतलब होस्ट” – या तो भारत आओ, या घर बैठो।
भाग 5: भारत की तैयारी और स्टेडियमों का हाल
विवाद अपनी जगह है, लेकिन भारत में वर्ल्ड कप की तैयारियां जोरों पर हैं। BCCI ने इस बार वेन्यू चयन में बहुत सावधानी बरती है।
- अहमदाबाद: फाइनल और IND vs PAK (अगर पाकिस्तान आया तो) के लिए।
- चेन्नई, मुंबई, कोलकाता: नॉकआउट मैचों के लिए।
- वडोदरा (Vadodara): प्रैक्टिस मैचों और वार्म-अप गेम्स के लिए वडोदरा के रिलायंस स्टेडियम और अन्य ग्राउंड्स को तैयार किया जा रहा है। हम वडोदरा से ही यह रिपोर्ट दे रहे हैं, और यहाँ का उत्साह देखने लायक है।
अगर पाकिस्तान नहीं आता है, तो आईसीसी को शेड्यूल दोबारा बनाना पड़ेगा, जो कि टूर्नामेंट से कुछ महीने पहले एक बड़ा सिरदर्द होगा।
भाग 6: सोशल मीडिया वॉर – फैंस का गुस्सा और मीम्स (Fan Reactions)
जैसे ही Pakistan Boycott की खबरें आईं, सोशल मीडिया पर #BoycottWorldCup और #IndiaStandsStrong ट्रेंड करने लगा।
- भारतीय फैंस: भारतीय फैंस का कहना है, “पाकिस्तान के बिना भी वर्ल्ड कप सुपरहिट होगा। हमें उनकी जरूरत नहीं है।” कई लोग इसे पाकिस्तान का ‘ड्रामा’ बता रहे हैं।
- पाकिस्तानी फैंस: वहां के फैंस अपनी सरकार और बोर्ड का समर्थन कर रहे हैं। उनका कहना है, “आत्मसम्मान सबसे पहले है। अगर भारत नहीं आया, तो हम क्यों जाएं?”
- बांग्लादेशी फैंस: Bangladesh Entry के बाद वहां के फैंस उत्साहित हैं। वे चाहते हैं कि उनके देश में बड़े मैच हों। वे सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं, “ढाका इज रेडी टू होस्ट।”
इस ऑनलाइन युद्ध में मीम्स की बाढ़ आ गई है। एक मीम में आईसीसी को एक परेशान माता-पिता की तरह दिखाया गया है जो दो लड़ते हुए बच्चों (भारत-पाक) को शांत कराने की कोशिश कर रहा है, जबकि पड़ोसी (बांग्लादेश) खिड़की से झांक रहा है।
भाग 7: बांग्लादेश की राजनीति और क्रिकेट (Geopolitics of Cricket)
क्रिकेट को राजनीति से अलग नहीं किया जा सकता। बांग्लादेश का अचानक इस विवाद में कूदना सिर्फ खेल प्रेम नहीं है।
- दक्षिण एशिया में शक्ति संतुलन: बांग्लादेश, भारत और पाकिस्तान के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। हाल के वर्षों में बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था और क्रिकेट दोनों में सुधार हुआ है। वे खुद को एक प्रमुख एशियाई शक्ति के रूप में प्रोजेक्ट करना चाहते हैं।
- भारत-बांग्लादेश संबंध: हालांकि भारत और बांग्लादेश के संबंध ऐतिहासिक रूप से अच्छे रहे हैं, लेकिन तीस्ता जल विवाद और सीमा मुद्दों को लेकर कभी-कभी तनाव रहता है। ऐसे में क्रिकेट डिप्लोमेसी का इस्तेमाल करके बांग्लादेश भारत पर दबाव बनाने की कोशिश भी कर सकता है।
- पाकिस्तान का एंगल: पाकिस्तान, बांग्लादेश को अपने पाले में करके भारत को एशिया में अलग-थलग (Isolate) करने की कोशिश कर सकता है, हालांकि यह आसान नहीं है क्योंकि बीसीसीआई के पास पैसे की ताकत (Money Power) है।
भाग 8: आईसीसी का रुख – क्या होगा अंतिम फैसला? (ICC’s Stance)
अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) अभी ‘वेट एंड वॉच’ (Wait and Watch) की स्थिति में है। आईसीसी के लिए यह स्थिति ‘इधर कुआं, उधर खाई’ जैसी है।
- अगर वह पाकिस्तान की बात मानता है, तो BCCI नाराज हो जाएगा (जो आईसीसी का खजाना भरता है)।
- अगर वह पाकिस्तान को बाहर करता है, तो वर्ल्ड कप की चमक फीकी पड़ जाएगी और ब्रॉडकास्टर्स नाराज हो जाएंगे।
सूत्रों के मुताबिक, आईसीसी बैक-चैनल डिप्लोमेसी (गुप्त बातचीत) कर रहा है। एक संभावना यह है कि पाकिस्तान को ‘लिखित आश्वासन’ (Written Assurance) दिया जाए कि उनकी सुरक्षा में कोई चूक नहीं होगी। साथ ही, Bangladesh Entry वाले प्रस्ताव को एक ‘बैकअप प्लान’ के रूप में रखा जा सकता है, लेकिन इसे प्राथमिक विकल्प नहीं माना जा रहा।
भाग 9: अगर पाकिस्तान नहीं आया तो कौन खेलेगा? (The Replacement Scenario)
यह एक हाइपोथेटिकल (काल्पनिक) लेकिन दिलचस्प सवाल है। अगर PCB अपनी जिद पर अड़ा रहा और उसने टीम भेजने से मना कर दिया, तो क्या होगा?
नियमों के अनुसार, अगर कोई क्वालीफाई की हुई टीम टूर्नामेंट से हटती है, तो क्वालीफायर राउंड में तीसरे या चौथे नंबर पर रहने वाली टीम को मौका मिल सकता है।
- क्या जिम्बाब्वे या स्कॉटलैंड जैसी टीम को वाइल्ड कार्ड एंट्री मिलेगी?
- या फिर टूर्नामेंट के फॉर्मेट को छोटा कर दिया जाएगा?
हालांकि, इतिहास गवाह है कि वर्ल्ड कप जैसे बड़े मंच पर कोई भी देश अपनी टीम वापस नहीं लेता। १९९६ के वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज ने सुरक्षा कारणों से श्रीलंका में खेलने से मना कर दिया था, लेकिन उन्होंने टूर्नामेंट का बायकॉट नहीं किया था, बस उन मैचों के अंक गंवा दिए थे। पाकिस्तान भी शायद यही करे – भारत आए, लेकिन विरोध दर्ज कराए।
भाग 10: क्रिकेट का नुकसान या राजनीति की जीत?
अंततः नुकसान किसका है? सिर्फ और सिर्फ क्रिकेट का। विराट कोहली की कवर ड्राइव और शाहीन अफरीदी की इनस्विंगर के बीच की जंग देखने के लिए पूरी दुनिया तरसती है। IND vs PAK मैच सिर्फ एक खेल नहीं, एक भावना है। अगर यह मैच रद्द होता है, तो करोड़ों फैंस का दिल टूट जाएगा।
Bangladesh Entry ने मामले को दिलचस्प जरूर बनाया है, लेकिन यह समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। समाधान तभी निकलेगा जब दोनों देशों की सरकारें आपस में बात करें। लेकिन मौजूदा राजनीतिक हालात को देखते हुए इसकी संभावना कम है।
भाग 11: वडोदरा और गुजरात के क्रिकेट प्रेमियों की राय
हम वडोदरा में हैं, जहाँ इरफान पठान और युसूफ पठान जैसे दिग्गज क्रिकेटर पैदा हुए हैं। यहाँ के स्थानीय क्रिकेट क्लबों और फैंस से बात करने पर मिला-जुला रिएक्शन मिलता है।
- एक स्थानीय कोच ने कहा, “खेल को खेल रहने देना चाहिए। पाकिस्तान को भारत आना चाहिए। हमने २०१९ और २०२३ में उनका स्वागत किया था, इस बार भी करेंगे।”
- एक युवा फैन ने कहा, “अगर वे नखरे दिखा रहे हैं, तो उन्हें बाहर करो। हमें बांग्लादेश या ऑस्ट्रेलिया के साथ मैच देखने में भी उतना ही मजा आएगा।”
गुजरात में वर्ल्ड कप को लेकर जबरदस्त क्रेज है। अगर पाकिस्तान के मैच अहमदाबाद या आसपास होते हैं, तो होटलों की बुकिंग अभी से फुल होने की कगार पर है। लेकिन इस अनिश्चितता ने ट्रैवल और हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री को भी चिंता में डाल दिया है।
भाग 12: क्या है आगे की राह? (Way Forward)
आने वाले कुछ हफ्ते बहुत महत्वपूर्ण होंगे। आईसीसी की सालाना बैठक दुबई में होने वाली है। वहां BCCI, PCB और अब BCB (बांग्लादेश) के अधिकारी आमने-सामने होंगे।
संभावित परिणाम:
- समझौता: पाकिस्तान भारत आने को तैयार हो जाएगा, बदले में आईसीसी उसे भविष्य के टूर्नामेंट्स के लिए कुछ अतिरिक्त फंड देगा।
- आंशिक हाइब्रिड: पाकिस्तान के कुछ मैच (शायद लीग मैच) बांग्लादेश में कराए जाएं और अगर वह नॉकआउट में पहुंचता है तो उसे भारत आना पड़े। (यह New Twist की सबसे प्रबल संभावना है)।
- कड़ा फैसला: आईसीसी पाकिस्तान को अल्टीमेटम देगा – या तो आओ, या बाहर जाओ।
खेल भावना की जीत होनी चाहिए
अंत में, IND vs PAK विवाद और T20 World Cup Boycott की धमकियां चाहे जो भी हों, जीत हमेशा क्रिकेट की होनी चाहिए। बांग्लादेश का इस मामले में कूदना यह दिखाता है कि एशियाई क्रिकेट में शक्ति प्रदर्शन का खेल चल रहा है।
८ फरवरी २०२६ का दिन है, और हम उम्मीद करते हैं कि जब अक्टूबर-नवंबर में वर्ल्ड कप शुरू होगा, तो सभी टीमें, चाहे वह भारत हो, पाकिस्तान हो या बांग्लादेश, एक ही मैदान पर अपने राष्ट्रगान के लिए खड़ी होंगी। बाउंड्री के बाहर की राजनीति, बाउंड्री के अंदर के खेल को खराब न करे, यही हर सच्चे क्रिकेट प्रेमी की दुआ है।
यह New Twist अभी और क्या रंग दिखाएगा, यह तो वक्त ही बताएगा। लेकिन एक बात तय है – २०२६ का टी20 वर्ल्ड कप इतिहास का सबसे विवादास्पद और रोमांचक वर्ल्ड कप होने वाला है।
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