भारत के दूरसंचार क्षेत्र और ई-कॉमर्स जगत में एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने ऑनलाइन व्यापार करने वाले बड़े प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। डिजिटल युग में हम घर बैठे कुछ भी मंगवा सकते हैं, सुई से लेकर इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स तक, लेकिन क्या यह सुविधा देश की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है? इस प्रश्न का उत्तर भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) ने हाल ही में की गई अपनी सख्त कार्रवाई के द्वारा दिया है। सरकार ने बिना लाइसेंस वाले वायरलेस उपकरणों को बेचने वाली 13 बड़ी ई-कॉमर्स वेबसाइट्स और प्लेटफॉर्म्स पर शिकंजा कसा है और प्रत्येक पर ₹10 लाख का जुर्माना लगाया है। इस कार्रवाई का मुख्य केंद्र बिंदु अवैध वॉकी-टॉकी बिक्री है, जो बिना किसी जांच-पड़ताल और नियमों के उल्लंघन के साथ खुलेआम ऑनलाइन बेचे जा रहे थे।
राष्ट्रीय सुरक्षा और ऑनलाइन व्यापार के नियमों
1. घटना का विवरण: सरकार की डिजिटल सर्जिकल स्ट्राइक
भारत सरकार के संचार मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले दूरसंचार विभाग (DoT) को पिछले काफी समय से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि देश की नामी-गिरामी ई-कॉमर्स वेबसाइट्स पर ऐसे वायरलेस सेट्स और वॉकी-टॉकी बेचे जा रहे हैं जो भारतीय नियमों के अनुसार मान्य नहीं हैं। ये उपकरण बिना किसी लाइसेंस या सरकारी मंजूरी के धड़ल्ले से बिक रहे थे।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए दूरसंचार विभाग की वायरलेस मॉनिटरिंग ऑर्गेनाइजेशन (WMO) ने एक गहन जांच अभियान चलाया। इस जांच में यह बात सामने आई कि अमेज़न, फ्लिपकार्ट और अन्य कई बड़ी साइट्स सहित कुल 13 प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे अनाधिकृत उपकरण लिस्टेड थे। सरकार ने पहले इन प्लेटफॉर्म्स को नोटिस भेजा था और जवाब मांगा था, लेकिन जब संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई, तो अंततः जुर्माने का हथियार उठाया गया। प्रत्येक कंपनी को दस-दस लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जो भले ही इन विशाल कंपनियों के लिए छोटी रकम हो, लेकिन यह एक सांकेतिक और कड़ा संदेश है कि अवैध वॉकी-टॉकी बिक्री को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यह कार्रवाई सिर्फ जुर्माने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य के लिए एक चेतावनी है कि भारत के एयरवेव्स (Airwaves) के साथ खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
2. वॉकी-टॉकी: मात्र खिलौना नहीं, एक संवेदनशील सुरक्षा उपकरण
आम जनता के लिए वॉकी-टॉकी एक मनोरंजन का साधन या इवेंट मैनेजमेंट का उपकरण हो सकता है। बच्चे इसे खेलने के लिए इस्तेमाल करते हैं, या सुरक्षा गार्ड्स इसका उपयोग सोसाइटियों में करते हैं। लेकिन तकनीकी दृष्टि से देखें तो ये रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) पर काम करने वाले अत्यंत संवेदनशील उपकरण हैं।
वॉकी-टॉकी एक निश्चित फ्रीक्वेंसी बैंड पर काम करते हैं। हवा में तैरने वाली ये रेडियो तरंगें एक राष्ट्रीय संपत्ति (National Resource) हैं और ये सीमित होती हैं। इस फ्रीक्वेंसी का उपयोग देश की पुलिस, सेना, अर्धसैनिक बल, एविएशन (विमानन विभाग) और रेलवे जैसे महत्वपूर्ण विभाग अपने संचार के लिए करते हैं। यदि कोई व्यक्ति बाजार से गैरकानूनी वॉकी-टॉकी खरीदता है जो अनाधिकृत फ्रीक्वेंसी पर काम करता हो, तो वह इन सरकारी एजेंसियों के संचार में बाधा (Interference) उत्पन्न कर सकता है।
उदाहरण के लिए, यदि कोई अनाधिकृत अवैध वॉकी-टॉकी बिक्री के जरिए खरीदा गया सेट पुलिस की फ्रीक्वेंसी के साथ मैच कर जाए, तो वह व्यक्ति पुलिस की गुप्त बातचीत सुन सकता है या उनके संचार में शोर उत्पन्न कर सकता है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा है। यही कारण है कि सरकार इस मुद्दे पर इतनी सख्त है और इसे रोकने के लिए कड़े कदम उठा रही है।

3. भारत में वायरलेस कानून और WPC की महत्वपूर्ण भूमिका
भारत में वायरलेस उपकरणों का उपयोग और बिक्री ‘इंडियन टेलीग्राफ एक्ट, 1885’ और ‘इंडियन वायरलेस टेलीग्राफी एक्ट, 1933’ के तहत कड़ाई से नियंत्रित होती है। इन कानूनों के मुताबिक, कोई भी व्यक्ति बिना लाइसेंस के वायरलेस ट्रांसमीटर (जैसे कि वॉकी-टॉकी) न तो रख सकता है और न ही बेच सकता है।
इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए संचार मंत्रालय का ‘वायरलेस प्लानिंग एंड कोऑर्डिनेशन’ (WPC) विंग जिम्मेदार है। WPC ही यह तय करता है कि कौन सी फ्रीक्वेंसी किसे आवंटित की जाएगी।
- लाइसेंस बैंड: कुछ हाई-पावर और लंबी रेंज वाले वॉकी-टॉकी के लिए सरकार से विशेष लाइसेंस लेना अनिवार्य होता है।
- लाइसेंस फ्री बैंड: कुछ निश्चित लो-पावर फ्रीक्वेंसी (जैसे कि PMR 446 MHz) नागरिकों के उपयोग के लिए लाइसेंस फ्री रखी गई हैं, लेकिन इन उपकरणों का भी WPC द्वारा प्रमाणित (Type Approved) होना अनिवार्य है।
ई-कॉमर्स साइट्स पर जो अवैध वॉकी-टॉकी बिक्री हो रही थी, उनमें से अधिकांश उपकरण WPC द्वारा प्रमाणित नहीं थे। इनमें से कई उपकरण विदेशी निर्माण (खासकर चीनी) के थे जो उन फ्रीक्वेंसी रेंज में काम करते थे जो भारत में रक्षा सेवाओं के लिए आरक्षित हैं।
4. ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की लापरवाही और जवाबदेही
आज के समय में ई-कॉमर्स कंपनियां ‘मार्केटप्लेस’ मॉडल पर काम करती हैं। उनका तर्क होता है कि वे केवल एक प्लेटफॉर्म प्रदान करते हैं और सामान बेचने की जिम्मेदारी थर्ड-पार्टी सेलर (विक्रेता) की है। वे अक्सर आईटी एक्ट के तहत ‘सेफ हार्बर’ (Safe Harbor) सुरक्षा का हवाला देते हैं। लेकिन यह तर्क अब कानूनी रूप से स्वीकार्य नहीं है, खासकर जब मामला राष्ट्रीय सुरक्षा का हो।
जब आप अपनी वेबसाइट से कोई प्रोडक्ट बेचते हैं और उससे कमीशन कमाते हैं, तो आपकी नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी बनती है कि आप जांचें कि वह वस्तु वैध है या नहीं। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अवैध वॉकी-टॉकी बिक्री के लिए प्लेटफॉर्म भी उतना ही जिम्मेदार है जितना कि बेचने वाला। इन 13 वेबसाइट्स ने ‘ड्यू डिलिजेंस’ (उचित जांच-पड़ताल) करने में घोर लापरवाही बरती है। उन्होंने सेलर्स से WPC सर्टिफिकेट मांगे बिना ही प्रोडक्ट्स को अपनी साइट पर लिस्ट होने दिया। यह लापरवाही सिर्फ एक तकनीकी चूक नहीं है, बल्कि देश के कानूनों का सीधा उल्लंघन है।
5. राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा: आतंकवाद और नक्सलवाद का कोण
यह मुद्दा केवल व्यापारिक नियमों के उल्लंघन का नहीं, बल्कि देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा का है। मोबाइल फोन में सिम कार्ड होता है, जिसके जरिए यूजर की पहचान (KYC) होती है और उसका लोकेशन ट्रेस किया जा सकता है। लेकिन वॉकी-टॉकी में सिम कार्ड नहीं होता। यह पॉइंट-टू-पॉइंट संचार करता है और इसे ट्रैक करना बेहद मुश्किल होता है।
जरा सोचिए, यदि आतंकवादी या नक्सलवादी तत्व ई-कॉमर्स साइट पर से आसानी से ऐसे हाई-रेंज वॉकी-टॉकी मंगवा लें, तो वे सुरक्षा एजेंसियों की रडार में आए बिना आपस में बातचीत कर सकते हैं। जम्मू-कश्मीर और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में यह एक बड़ी चुनौती है। सीमा पार से होने वाली घुसपैઠ में भी अक्सर ऐसे अनाधिकृत सेट्स का उपयोग देखा गया है। इसलिए, अवैध वॉकी-टॉकी बिक्री को रोकना आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने का एक अनिवार्य हिस्सा है। जिस आसानी से ये उपकरण ऑनलाइन उपलब्ध थे, वह किसी भी सुरक्षा एजेंसी के लिए चिंता का विषय था।
6. दंड की राशि और उसका सांकेतिक महत्व
बहुत से लोगों को ₹10 लाख का जुर्माना कम लग सकता है, क्योंकि इन ई-कॉमर्स कंपनियों का टर्नओवर अरबों में है। लेकिन यहां राशि से ज्यादा सरकार का इरादा और संदेश महत्वपूर्ण है। यह जुर्माना एक आधिकारिक चेतावनी है। यह दर्शाता है कि सरकार अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की मनमानी को मूकदर्शक बनकर नहीं देखेगी।
यदि भविष्य में ये प्लेटफॉर्म्स नहीं सुधरे, तो सरकार उनके लाइसेंस रद्द कर सकती है या उन पर और भी कड़े प्रतिबंध लगा सकती है। इस कार्रवाई के बाद ई-कॉमर्स कंपनियों को अब अपनी लिस्टिंग पॉलिसी में बड़े बदलाव करने होंगे। उन्हें अब सेलर्स से अनिवार्य रूप से WPC लाइसेंस और इंपोर्ट डॉक्यूमेंट्स मांगने होंगे। टेक्नोलॉजी का उपयोग करके ऑटोमैटिक फिल्टर्स लगाने होंगे ताकि ‘Walkie-Talkie’ या ‘Wireless Set’ जैसे कीवर्ड्स वाले प्रोडक्ट्स बिना वेरिफिकेशन के लाइव न हो सकें। यह अवैध वॉकी-टॉकी बिक्री रोकने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।
7. ग्राहकों के लिए जागरूकता: आप कैसे सुरक्षित रहें?
एक सामान्य नागरिक के रूप में हमें प्रश्न होता है कि क्या हम वॉकी-टॉकी खरीद सकते हैं? इसका उत्तर है – हाँ, लेकिन शर्तों के साथ। यदि आप ई-कॉमर्स साइट से वॉकी-टॉकी खरीदना चाहते हैं, तो नीचे दी गई बातों का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है ताकि आप अनजाने में अवैध वॉकी-टॉकी बिक्री का शिकार न बनें और कानूनी मुसीबत में न फंसे:
- लाइसेंस फ्री बैंड की जांच: भारत में केवल 446 MHz फ्रीक्वेंसी बैंड (PMR446) वाले लो-पावर (0.5 Watt) वॉकी-टॉकी ही सामान्य नागरिकों के लिए लाइसेंस फ्री हैं। खरीदने से पहले प्रोडक्ट डिस्क्रिप्शन में यह अवश्य चेक करें।
- WPC सर्टिफिकेट: सेलर के पास ETA (Equipment Type Approval) सर्टिफिकेट है या नहीं, यह जांचना आपका अधिकार है। प्रोडक्ट के बॉक्स पर या डिस्क्रिप्शन में इसकी जानकारी होनी चाहिए।
- रेंज के दावे: यदि कोई सेलर दावा करे कि वॉकी-टॉकी की रेंज 5-10 किलोमीटर या उससे अधिक है, तो सावधान हो जाएं। लाइसेंस फ्री वॉकी-टॉकी की रेंज बहुत सीमित होती है। लॉन्ग रेंज वॉकी-टॉकी अक्सर गैरकानूनी होते हैं या उनके लिए लाइसेंस की जरूरत होती है।
- पक्का बिल: हमेशा जीएसटी वाला पक्का बिल मांगें।
यदि आपके घर में या ऑफिस में गैरकानूनी वायरलेस सेट पकड़ा जाता है, तो उसे जब्त कर लिया जाएगा और आपके खिलाफ भी वायरलेस टेलीग्राफी एक्ट के तहत मामला दर्ज हो सकता है।
8. अंतर्राष्ट्रीय उदाहरण और भविष्य की राह
विश्व के कई देशों में वायरलेस उपकरणों की बिक्री पर कड़े नियंत्रण हैं। अमेरिका में FCC (Federal Communications Commission) और यूरोप में CE सर्टिफिकेशन के बिना ऐसे उपकरण बेचना असंभव है। भारत में अब डिजिटल मार्केट तेजी से बड़ा हो रहा है, ऐसे में इन अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करवाना जरूरी हो गया है।
भविष्य में सरकार इन नियमों को और अधिक सख्त बना सकती है। संभव है कि वॉकी-टॉकी खरीदने के लिए भी खरीदार का आधार कार्ड या केवाईसी (KYC) अनिवार्य कर दिया जाए। दूरसंचार विभाग ने ‘सरल संचार’ (Saral Sanchar) नामक एक पोर्टल बनाया है जिसके जरिए लाइसेंस प्रक्रिया को आसान बनाया गया है, ताकि लोग अवैध रास्ता अपनाने के बजाय कानूनी मार्ग अपनाएं। यह पोर्टल अवैध वॉकी-टॉकी बिक्री को हतोत्साहित करने और वैध व्यापार को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है।
9. विमानन सुरक्षा पर प्रभाव (Aviation Safety)
अवैध वायरलेस उपकरणों का एक और बड़ा खतरा विमानन सुरक्षा से जुड़ा है। पायलट और एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) के बीच संचार एक विशिष्ट फ्रीक्वेंसी पर होता है। यदि जमीन पर इस्तेमाल किया जा रहा कोई अवैध हाई-पावर वॉकी-टॉकी उस फ्रीक्वेंसी में हस्तक्षेप करता है, तो पायलट को एटीसी के निर्देश सुनने में दिक्कत हो सकती है। लैंडिंग या टेक-ऑफ के समय ऐसी गड़बड़ी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। इसलिए, अवैध वॉकी-टॉकी बिक्री पर यह कार्रवाई हवाई यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
10. तकनीकी पहलू: कैसे होती है गड़बड़ी?
तकनीकी रूप से समझें तो समस्या ‘प्रोग्रामेबल रेडियो’ (Programmable Radios) के साथ ज्यादा है। कई चीनी कंपनियां ऐसे वॉकी-टॉकी बनाती हैं जिन्हें कंप्यूटर से कनेक्ट करके किसी भी फ्रीक्वेंसी पर सेट किया जा सकता है। ये उपकरण बहुत सस्ते होते हैं और ई-कॉमर्स साइट्स पर ‘Ham Radio’ या ‘Amateur Radio’ के नाम पर बेचे जाते हैं। लेकिन हैम रेडियो का उपयोग करने के लिए भी एक विशेष परीक्षा पास करनी होती है और लाइसेंस लेना होता है। एक आम आदमी बिना जानकारी के इन रेडियो को पुलिस या सुरक्षा बलों की फ्रीक्वेंसी पर ट्यून कर सकता है, जो कि पूरी तरह गैरकानूनी है। ई-कॉमर्स साइट्स पर फिल्टर की कमी के कारण ये उपकरण आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं।
11. छोटे विक्रेताओं पर प्रभाव
इस कार्रवाई का एक पहलू यह भी है कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर बेचने वाले कई छोटे विक्रेता नियमों से अनजान होते हैं। वे मुनाफा कमाने के चक्कर में इंपोर्टेड माल बेचना शुरू कर देते हैं। इस जुर्माने के बाद, ई-कॉमर्स कंपनियां अब ऐसे विक्रेताओं को ब्लॉक कर देंगी। यह उन विक्रेताओं के लिए एक सबक है कि वे जिस देश में व्यापार कर रहे हैं, वहां के कानूनों की जानकारी रखना उनकी जिम्मेदारी है। अवैध वॉकी-टॉकी बिक्री से कुछ समय का मुनाफा हो सकता है, लेकिन अंततः यह भारी नुकसान और कानूनी पचड़े का कारण बनता है।
12. सुरक्षा और सुविधा के बीच संतुलन
अंत में, 13 ई-कॉमर्स वेबसाइट्स पर की गई यह दंडात्मक कार्रवाई यह साबित करती है कि भारत सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा की कीमत पर व्यापार को मंजूरी देने के लिए तैयार नहीं है। अवैध वॉकी-टॉकी बिक्री केवल एक तकनीकी भूल नहीं, बल्कि एक गंभीर अपराध है जिसके परिणाम भयावह हो सकते हैं।
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को अब यह समझना होगा कि वे केवल मुनाफा कमाने का साधन नहीं हैं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। अपने प्लेटफॉर्म पर लिस्ट होने वाले सेलर्स का वेरिफिकेशन करना और प्रतिबंधित वस्तुओं की बिक्री को रोकना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। ‘हम तो सिर्फ बिचौलिए हैं’ वाला बहाना अब नहीं चलेगा।
यह कार्रवाई अन्य ऑनलाइन बेची जा रही संदिग्ध वस्तुओं (जैसे कि जासूसी कैमरे, सिग्नल जैमर्स, हाई-पावर लेजर, ड्रोन आदि) के लिए भी एक नजीर पेश करेगी। एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में हमें भी सतर्क रहना चाहिए और देश के कानूनों का पालन करना चाहिए। टेक्नोलॉजी का उपयोग जीवन को सरल बनाने के लिए है, देश की सुरक्षा को जोखिम में डालने के लिए नहीं।
