भारतीय संस्कृति, विज्ञान और दर्शन का इतिहास हजारों साल पुराना है। आधुनिक युग में जहां पूरी दुनिया नई तकनीकों की ओर भाग रही है, वहीं यह भी सच है कि हमारी प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपराओं (Indian Knowledge Systems – IKS) में ऐसे कई रहस्य और वैज्ञानिक तथ्य छिपे हैं, जो आज की कई बड़ी समस्याओं का समाधान दे सकते हैं। इसी अमूल्य धरोहर को सहेजने, समझने और आधुनिक शिक्षा प्रणाली के साथ जोड़ने के लिए शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) और AICTE ने मिलकर एक शानदार पहल की है।
अगर आप एक युवा छात्र हैं, शोधकर्ता हैं, या भारतीय ज्ञान परंपरा में गहरी रुचि रखते हैं, तो यह लेख आपके लिए किसी स्वर्ण अवसर से कम नहीं है। सरकार युवाओं को रिसर्च के लिए प्रोत्साहित करने हेतु IKS इंटर्नशिप प्रोग्राम (BGSamvahan Karyakram) चला रही है। इस इंटर्नशिप के जरिए न केवल आपको प्राचीन ज्ञान पर काम करने का मौका मिलेगा, बल्कि प्रति माह ₹10,000 का स्टाइपेंड भी दिया जाएगा। इस विस्तृत गाइड में हम आपको इस प्रोग्राम से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी देंगे और यह भी बताएंगे कि आप IKS India Internship Form कैसे भर सकते हैं।
भारतीय ज्ञान प्रणाली (Indian Knowledge Systems – IKS) क्या है?
भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) का अर्थ केवल इतिहास या धर्मग्रंथों का अध्ययन करना नहीं है। यह ‘ज्ञान, विज्ञान और जीवन दर्शन’ (Jnan, Vignan, and Jeevan Darshan) का एक व्यापक संगम है। इसमें हमारे पूर्वजों के गहरे अनुभव, अवलोकन, प्रयोग और कठोर विश्लेषण का सार शामिल है।
IKS डिवीज़न की स्थापना राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए की गई थी। इसके तहत गणित (Vedic Mathematics), खगोल विज्ञान (Astronomy), वास्तुकला (Architecture), धातु विज्ञान (Metallurgy), आयुर्वेद (Ayurveda), योग, कला, संगीत और भाषाई विज्ञान जैसे विषयों पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से शोध किया जाता है। उद्देश्य यह है कि हम अपने पारंपरिक ज्ञान को केवल किताबों तक सीमित न रखें, बल्कि उसे आज के STEM (Science, Technology, Engineering, and Mathematics) और सामाजिक विज्ञान के साथ जोड़कर एक नई दिशा दें।

IKS इंटर्नशिप प्रोग्राम (BG Samvahan Karyakram) की रूपरेखा
युवाओं को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने के लिए IKS डिवीज़न ने ‘भागीरथी संवहन कार्यक्रम’ (BG Samvahan Karyakram) के तहत इंटर्नशिप की शुरुआत की है। पहले यह इंटर्नशिप केवल 2 महीने की होती थी, लेकिन छात्रों और संस्थानों के फीडबैक के बाद अब इसे अधिक लचीला (Flexible) बना दिया गया है।
- अवधि (Duration): अब यह इंटर्नशिप अधिकतम 6 महीने तक की हो सकती है। आप अपनी गर्मियों की छुट्टियों (Summer Breaks) में या साल के किसी भी समय इस प्रोजेक्ट पर काम कर सकते हैं।
- प्रोजेक्ट का स्वरूप: इसमें इंटर्न्स को किसी मान्यता प्राप्त संस्थान के ‘प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर’ (PI) या मेंटर के साथ जुड़कर काम करना होता है। इसमें साहित्य की खोज (Literature search), प्राचीन पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण, फील्ड विजिट और प्रयोग शामिल होते हैं।
- परिणाम (Deliverables): इस इंटर्नशिप का लक्ष्य स्पष्ट और मात्रात्मक परिणाम (Quantifiable deliverables) देना है। जैसे— कोई रिसर्च पेपर पब्लिश करना, विकिपीडिया पर IKS से जुड़े प्रामाणिक लेख लिखना, डॉक्यूमेंट्री बनाना, या स्कूली बच्चों के लिए पाठ्य सामग्री (Curriculum material) तैयार करना।
वित्तीय सहायता और स्टाइपेंड (Stipend and Financial Support)
सरकारी इंटर्नशिप होने के कारण, इसमें इंटर्न्स और मेंटर्स दोनों के लिए बेहतरीन वित्तीय सहायता का प्रावधान है।
- इंटर्न्स के लिए स्टाइपेंड: चयनित इंटर्न्स को AICTE के नियमों के अनुसार इंटर्नशिप की अवधि के दौरान अधिकतम ₹10,000 प्रति माह का स्टाइपेंड दिया जाता है।
- मेंटर्स/संस्थानों के लिए मानदेय: इंटर्नशिप प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए संस्थानों को भी प्रति इंटर्न कुछ निश्चित राशि (लगभग ₹2,500 से ₹5,000 प्रति व्यक्ति माह) प्रदान की जाती है, ताकि वे रिसर्च से जुड़े प्रशासनिक खर्चे, फील्ड ट्रिप या स्टेशनरी का खर्च निकाल सकें।
ध्यान दें: फेलोशिप की राशि प्रोजेक्ट के स्वरूप और IKS डिवीज़न के नवीनतम दिशानिर्देशों के आधार पर दो किश्तों में जारी की जाती है। पहली किश्त प्रोग्रेस रिपोर्ट जमा करने के बाद और दूसरी किश्त फाइनल रिपोर्ट जमा करने के बाद मिलती है।
कौन कर सकता है आवेदन? (Eligibility Criteria for Interns)
IKS इंटर्नशिप को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि देश का हर योग्य युवा इसका हिस्सा बन सके। इसके लिए पात्रता मानदंड (Eligibility) बहुत ही स्पष्ट रखे गए हैं:
- आयु सीमा: आवेदन करने वाले इंटर्न की आयु 16 वर्ष से 30 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
- शैक्षणिक योग्यता: * किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से अंडरग्रेजुएट (UG) या पोस्टग्रेजुएट (PG) डिग्री कर रहे छात्र।
- ऐसे छात्र जिन्होंने हाल ही में (पिछले 2 वर्षों के भीतर) अपनी डिग्री पूरी की है।
- स्वतंत्र शोधकर्ता (Independent scholars) जो किसी संस्थान से नहीं जुड़े हैं, वे भी योग्य हैं।
- पारंपरिक गुरुकुलों (Gurukulas) और पाठशालाओं में पढ़ने वाले छात्र भी इस इंटर्नशिप के लिए पूरे गर्व के साथ आवेदन कर सकते हैं।
शोध के प्रमुख विषय (Research Themes & Domains)
अगर आप सोच रहे हैं कि इस इंटर्नशिप में आपको किस तरह के विषयों पर काम करने का मौका मिलेगा, तो यहाँ IKS डिवीज़न द्वारा सुझाए गए कुछ प्रमुख रिसर्च डोमेन दिए गए हैं:
- प्राचीन विज्ञान और तकनीक: भारत का प्राचीन धातु विज्ञान (Metallurgy), रसायन विज्ञान (Chemistry of dyes and pigments), और जल प्रबंधन प्रणालियां (Water management systems)।
- आयुर्वेद और स्वास्थ्य: पारंपरिक औषधि प्रणाली, योग विज्ञान (Yoga Consciousness), और आहार विज्ञान।
- गणित और खगोल शास्त्र: आर्यभट्ट, भास्कराचार्य और माधव के गणितीय सिद्धांत, और प्राचीन भारतीय खगोलीय ज्ञान (Astronomy) का पुनरुद्धार।
- वास्तुकला और शिल्प शास्त्र: प्राचीन भारतीय मंदिरों की वास्तुकला (Temple Architecture), एकॉस्टिक डिजाइन (Acoustic architecture), और वास्तु शास्त्र के वैज्ञानिक पहलू।
- भाषा और साहित्य: संस्कृत वांग्मय (Sanskrit Vangmaya) का डिजिटलीकरण, पांडुलिपियों (Manuscripts) का संरक्षण, और भारतीय सामाजिक सिद्धांतों का अध्ययन।
- कृषि विज्ञान: प्राचीन कृषि तकनीकें, बीज संरक्षण, और पर्यावरण संरक्षण के पारंपरिक भारतीय तरीके।
आप अपनी विशेषज्ञता और रुचि के अनुसार इनमें से किसी भी विषय का चुनाव कर सकते हैं।
स्टेप-बाय-स्टेप गाइड: IKS India Internship Form कैसे भरें?
आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन और पारदर्शी है। सही तरीके से फॉर्म भरने के लिए नीचे दिए गए दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करें:
चरण 1: आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं सबसे पहले आपको भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) की आधिकारिक वेबसाइट iksindia.org पर जाना होगा। वहां ‘Internships’ सेक्शन में जाकर वर्तमान में चल रहे ‘BG Samvahan Karyakram’ के दिशा-निर्देशों (Guidelines) को ध्यान से पढ़ें।
चरण 2: अपना मेंटर (Mentor) चुनें इंटर्नशिप के लिए आपको एक मेंटर या मार्गदर्शक की आवश्यकता होती है। वेबसाइट पर उन संस्थानों और ‘प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर्स’ (PIs) की सूची उपलब्ध होती है, जिनके प्रोजेक्ट्स को IKS डिवीज़न ने मंजूरी दी है। आप अपनी रुचि के विषय के अनुसार सही मेंटर का चुनाव कर सकते हैं।

चरण 3: रिसर्च प्रपोजल (Abstract) तैयार करें IKS India Internship Form भरने से पहले, आपको यह तय करना होगा कि आप किस विषय पर काम करना चाहते हैं। इसके लिए लगभग 250 शब्दों का एक मजबूत ‘एब्स्ट्रेक्ट’ (Abstract) तैयार करें। इसमें स्पष्ट करें कि आपका शोध विषय क्या है, आप इसे कैसे पूरा करेंगे और इसका परिणाम क्या होगा।
चरण 4: ऑनलाइन फॉर्म भरना वेबसाइट पर दिए गए IKS India Internship Form लिंक पर क्लिक करें। यह आमतौर पर एक डिजिटल फॉर्म या गूगल फॉर्म के रूप में होता है। इसमें अपनी व्यक्तिगत जानकारी, शैक्षणिक योग्यता, उम्र के प्रमाण पत्र और संपर्क विवरण सावधानी से भरें।
चरण 5: दस्तावेज अपलोड करें फॉर्म के साथ आपको अपना अपडेटेड रिज्यूमे (Resume), 250 शब्दों का रिसर्च एब्स्ट्रेक्ट, और कॉलेज/संस्थान का बोनाफाइड सर्टिफिकेट (यदि मांगा गया हो) अपलोड करना होगा। सुनिश्चित करें कि सभी दस्तावेज साफ और स्पष्ट हों।
चरण 6: फाइनल सबमिशन सभी जानकारियों को दोबारा जांच लें। एक बार संतुष्ट होने के बाद अपना IKS India Internship Form सबमिट कर दें। सबमिट करने के बाद आपको एक कन्फर्मेशन ईमेल प्राप्त होगा।
(नोट: आवेदन की अंतिम तिथि हर सत्र में अलग-अलग होती है, इसलिए IKS वेबसाइट पर ‘Dates to Remember’ सेक्शन को नियमित रूप से चेक करते रहें।)
संस्थानों और मेंटर्स (PI) की भूमिका
यह इंटर्नशिप केवल छात्रों के लिए ही नहीं, बल्कि शैक्षणिक संस्थानों के लिए भी एक बड़ा अवसर है। देश भर के सरकारी और निजी विश्वविद्यालय, सरकारी मान्यता प्राप्त लैब, और IKS के क्षेत्र में काम कर रहे NGO/Trusts इस प्रोग्राम के तहत ‘प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर’ (PI) के रूप में आवेदन कर सकते हैं।
- मेंटर्स की जिम्मेदारी: मेंटर्स से अपेक्षा की जाती है कि वे प्रति सप्ताह कम से कम 3-4 घंटे का समय इंटर्न्स को दें। वे इंटर्न्स को विषय की गहराई समझाते हैं, प्रासंगिक साहित्य (Literature) उपलब्ध कराते हैं, और रिपोर्ट राइटिंग में उनकी मदद करते हैं।
- प्रोजेक्ट का प्रस्ताव: संस्थानों को पहले IKS डिवीज़न को अपना प्रोजेक्ट प्रपोजल भेजना होता है। विशेषज्ञों की एक टीम इन प्रपोजल्स की समीक्षा करती है और जिन प्रोजेक्ट्स का लक्ष्य स्पष्ट होता है, उन्हें फंडिंग के लिए चुना जाता है। इसके बाद ही इंटर्न्स उन संस्थानों के साथ जुड़ सकते हैं।
सफल आवेदन के लिए एक्सपर्ट टिप्स
हजारों की संख्या में आने वाले आवेदनों के बीच अपने प्रपोजल को खास बनाने के लिए आपको कुछ रणनीतिक कदम उठाने होंगे। यहां कुछ एक्सपर्ट टिप्स दिए गए हैं जो आपके प्रपोजल को स्वीकृति दिलाने में मदद करेंगे:
- भारतीय दृष्टि (Bhartiya Drishti) को प्राथमिकता दें: आपका रिसर्च प्रपोजल पश्चिमी लेंस (Western lens) से नहीं, बल्कि ‘भारतीय दृष्टि’ से लिखा होना चाहिए। आपके शोध में यह स्पष्ट झलकना चाहिए कि आप भारतीय ज्ञान को उसके मूल स्वरूप में समझना चाहते हैं।
- स्पष्ट और मापने योग्य परिणाम (Quantifiable Deliverables): यह मत लिखिए कि “मैं आयुर्वेद के बारे में पढूंगा।” इसके बजाय लिखिए, “मैं आयुर्वेद में जड़ी-बूटियों के उपयोग पर 2000 शब्दों का एक रिसर्च पेपर तैयार करूंगा और विकिपीडिया पर 5 प्रामाणिक लेख प्रकाशित करूंगा।”
- हवा-हवाई बातों से बचें: तथ्यों पर बात करें। यदि आप संस्कृत के किसी श्लोक या ग्रंथ का संदर्भ दे रहे हैं, तो उसका सटीक उल्लेख करें।
- ओरिजिनल आइडिया (Originality): कॉपी-पेस्ट किए गए प्रपोजल्स तुरंत रिजेक्ट कर दिए जाते हैं। आपकी सोच में नवीनता होनी चाहिए। विचार करें कि प्राचीन ज्ञान को आज की समस्याओं (जैसे क्लाइमेट चेंज, सस्टेनेबल एग्रीकल्चर) को सुलझाने में कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है।
करियर में इस इंटर्नशिप का महत्व (Impact on your Career)
आजकल की कॉर्पोरेट दुनिया और अकादमिक क्षेत्र (Academia) में, केवल किताबी ज्ञान ही काफी नहीं है। नियोक्ता (Employers) और दुनिया के बेहतरीन विश्वविद्यालय ऐसे छात्रों की तलाश में रहते हैं जिनके पास हटकर सोचने की क्षमता हो और जिनके पास ‘रिसर्च का वास्तविक अनुभव’ (Hands-on research experience) हो।
- रिज्यूमे (Resume) में जबरदस्त वृद्धि: शिक्षा मंत्रालय (MoE) और AICTE के अधीन की गई यह इंटर्नशिप आपके सीवी (CV) में एक बहुत मजबूत ‘गवर्नमेंट प्रोजेक्ट’ का टैग जोड़ती है।
- पब्लिकेशन का अवसर: इंटर्नशिप के अंत में आपका प्रोजेक्ट रिपोर्ट IKS डिवीज़न की वेबसाइट पर एक ‘सर्चबल डेटाबेस’ में पब्लिश किया जाता है। एक युवा छात्र के रूप में आपके नाम से पब्लिश हुआ रिसर्च पेपर आपके आगे के मास्टर या पीएचडी (PhD) एडमिशन में ब्रह्मास्त्र का काम करेगा।
- गहरी नेटवर्किंग: इस प्रोग्राम के जरिए आपको देश के दिग्गज शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और मेंटर्स के साथ सीधे काम करने का मौका मिलता है, जो भविष्य में आपके करियर के लिए बेहतरीन ‘रेफरेंस’ बन सकते हैं।
प्रोग्रेस रिपोर्ट और फाइनल सबमिशन की अनिवार्यता
IKS India Internship Form भरते समय ही आपको यह समझना होगा कि यह कोई कैजुअल इंटर्नशिप नहीं है। इसमें आपको अपनी प्रगति का नियमित हिसाब देना होता है।
जब आप अपना काम शुरू करते हैं, तो पहले महीने के अंत में आपको 1000 शब्दों की एक प्रोग्रेस रिपोर्ट (Progress Report) ऑनलाइन जमा करनी होती है। इसी रिपोर्ट के आधार पर आपके स्टाइपेंड की पहली किश्त जारी की जाती है। यदि पहले महीने में आपका काम संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो IKS डिवीज़न के पास इंटर्नशिप और फंडिंग को तुरंत रद्द करने का अधिकार सुरक्षित होता है।
इंटर्नशिप पूरी होने पर आपको एक विस्तृत ‘व्यापक प्रोजेक्ट रिपोर्ट’ (Comprehensive Project Report) सबमिट करनी होती है। इस रिपोर्ट को आपके मेंटर द्वारा अप्रूव किया जाना अनिवार्य है। इसी के बाद आपका बचा हुआ स्टाइपेंड और इंटर्नशिप पूरा होने का सरकारी सर्टिफिकेट जारी किया जाता है।
अक्सर की जाने वाली गलतियां जिनसे आपको बचना चाहिए
- डेडलाइन मिस करना: IKS डिवीज़न की टाइमलाइन बहुत सख्त होती है। यदि फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि 30 जून है, तो पोर्टल रात 12 बजे के बाद किसी भी आवेदन को स्वीकार नहीं करेगा।
- गलत मेंटर का चुनाव: बिना रिसर्च किए किसी भी मेंटर को चुन लेना एक बड़ी भूल है। हमेशा उस मेंटर को चुनें जिसकी विशेषज्ञता (Expertise) आपके रिसर्च विषय से 100% मेल खाती हो।
- भाषाई अशुद्धियां: चूंकि यह कार्यक्रम भारतीय भाषाओं (Bharatiya Bhashas) और अंग्रेजी दोनों में उपलब्ध है, आप जिस भी भाषा का चयन करें, उसमें व्याकरण और वर्तनी (Grammar and Spelling) की कोई गलती नहीं होनी चाहिए।
- अधूरा फॉर्म: अगर आप IKS India Internship Form भरते समय कोई अनिवार्य फील्ड खाली छोड़ देते हैं या गलत दस्तावेज अपलोड कर देते हैं, तो आपका फॉर्म बिना किसी पूर्व सूचना के रिजेक्ट कर दिया जाएगा।
NEP 2020 के विजन को कैसे साकार कर रहा है IKS?
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 का एक प्रमुख सिद्धांत यह है कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो छात्रों को उनकी जड़ों से जोड़े रखे और साथ ही उन्हें 21वीं सदी की चुनौतियों के लिए भी तैयार करे। भारत का पारंपरिक ज्ञान कोई अंधविश्वास नहीं है; यह हजारों वर्षों के वैज्ञानिक परीक्षणों की कसौटी पर खरा उतरा हुआ विज्ञान है।
दुर्भाग्य से, मैकाले की शिक्षा पद्धति ने हमें हमारे ही ज्ञान से दूर कर दिया था। IKS डिवीज़न का यह इंटर्नशिप प्रोग्राम उसी ऐतिहासिक भूल को सुधारने का एक महायज्ञ है। इसके माध्यम से आधुनिक विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र जब वेदों, उपनिषदों, सुश्रुत संहिता या चरक संहिता का अध्ययन करेंगे, तो देश में एक नई बौद्धिक क्रांति का जन्म होगा।
अपनी जड़ों की ओर लौटें और भविष्य का निर्माण करें
भारत आज दुनिया का सबसे युवा देश है। हमारे युवाओं के कंधों पर सिर्फ देश की अर्थव्यवस्था को आगे ले जाने की जिम्मेदारी ही नहीं है, बल्कि अपनी उस खोई हुई बौद्धिक विरासत (Intellectual Heritage) को वापस लाने की जिम्मेदारी भी है जिसने कभी भारत को ‘विश्व गुरु’ का दर्जा दिलाया था।
शिक्षा मंत्रालय का IKS इंटर्नशिप प्रोग्राम आपको इसी महान उद्देश्य का हिस्सा बनने का निमंत्रण दे रहा है। यह इंटर्नशिप सिर्फ कुछ महीनों का प्रोजेक्ट या 10 हजार रुपये का स्टाइपेंड नहीं है; यह एक अवसर है अपनी मिट्टी के ज्ञान को वैज्ञानिक नजरिए से परखने का, उसे दुनिया के सामने एक प्रामाणिक रूप में प्रस्तुत करने का।
अगर आपके भीतर शोध की वह आग है और आप भारत के प्राचीन ज्ञान को आधुनिक विश्व पटल पर स्थापित करने का जज्बा रखते हैं, तो आज ही आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। पूरी लगन के साथ अपना प्रपोजल तैयार करें और बिना किसी देरी के अपना IKS India Internship Form सबमिट करें।
याद रखें, जो समाज अपने इतिहास और पारंपरिक ज्ञान का सम्मान नहीं करता, वह कभी एक मजबूत भविष्य का निर्माण नहीं कर सकता। तो उठिए, इस सुनहरे अवसर का लाभ उठाइए और भारत की ज्ञान-यात्रा में अपना बहुमूल्य योगदान दर्ज कराइए!

भावेश Tez Khabri के सह-संस्थापक और प्रबंध संपादक हैं। अभिनय के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने के बाद, अब वे पत्रकारिता के माध्यम से समाज में पारदर्शिता लाने का प्रयास कर रहे हैं। भावेश जी मुख्य रूप से राजनीति, क्राइम और शिक्षा से जुड़ी खबरों का नेतृत्व करते हैं और सुनिश्चित करते हैं कि हर खबर पूरी तरह से सत्यापित (Verified) हो।
