IDFC First Bank Scam

जब भरोसे की बुनियाद में ही सेंध लग जाए

बैंकिंग सेक्टर पूरी तरह से ‘भरोसे’ (Trust) पर टिका होता है। जब कोई आम नागरिक या सरकार अपना पैसा बैंक में जमा करती है, तो उसे यह यकीन होता है कि उसका पैसा वहां 100% सुरक्षित है। लेकिन जब इसी सिस्टम के अंदर बैठे लोग करोड़ों की हेराफेरी कर दें, तो न केवल निवेशकों का पैसा डूबता है, बल्कि पूरे बैंकिंग तंत्र पर सवालिया निशान खड़ा हो जाता है।

23 फरवरी 2026, सोमवार का दिन भारतीय शेयर बाजार और IDFC First Bank के निवेशकों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं था। वीकेंड पर आई एक खबर ने सोमवार सुबह बाजार खुलते ही तबाही मचा दी। बैंक की चंडीगढ़ स्थित एक ब्रांच में ₹590 करोड़ के भारी-भरकम वित्तीय घोटाले (Financial Fraud) का खुलासा हुआ। इस खबर के बाहर आते ही बैंक के शेयरों में पैनिक सेलिंग (Panic Selling) का ऐसा दौर चला कि शेयर एक ही झटके में 20% का लोअर सर्किट (Lower Circuit) छू गया और दिन के अंत में 16% से ज्यादा की भारी गिरावट के साथ बंद हुआ।

IDFC First Bank Scam

1. घोटाले की पूरी इनसाइड स्टोरी: क्या, कहाँ और कैसे हुआ?

यह कोई साइबर हैकर्स द्वारा किया गया बाहरी हमला नहीं था, बल्कि बैंक के ही सिस्टम के अंदर मौजूद कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत (Internal Collusion) का नतीजा था।

घटना का केंद्र और शुरुआत:

  • लोकेशन: IDFC First Bank की चंडीगढ़ ब्रांच।
  • प्रभावित खाते: यह धोखाधड़ी किसी आम ग्राहक के खाते में नहीं, बल्कि हरियाणा सरकार (Haryana Government) के विभिन्न विभागों से जुड़े विशिष्ट सरकारी खातों में की गई।
  • खुलासा कैसे हुआ? 18 फरवरी 2026 को हरियाणा सरकार के एक विभाग ने बैंक से अपना खाता बंद करने और सारा फंड दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने का अनुरोध किया। जब बैंक ने सिस्टम में मौजूद बैलेंस और सरकार द्वारा बताए गए बैलेंस का मिलान किया, तो एक भारी विसंगति (Discrepancy) सामने आई। इसके बाद हरियाणा सरकार के अन्य विभागों ने भी अपने खाते चेक किए, और पता चला कि कुल मिलाकर लगभग ₹590 करोड़ की रकम सिस्टम से गायब है या उसमें हेरफेर की गई है।

2. शेयर बाजार में भूचाल: निवेशकों की दौलत राख में तब्दील (The Market Crash)

शेयर बाजार अनिश्चितता को कभी बर्दाश्त नहीं करता। ₹590 करोड़ की रकम कोई छोटी-मोटी रकम नहीं है। इस खबर ने दलाल स्ट्रीट (Dalal Street) पर खलबली मचा दी।

आंकड़ों में समझें तबाही का मंजर:

शेयर का विवरण (Stock Details)आंकड़े (Data)
शुक्रवार की क्लोजिंग (Friday Close)₹83.56
सोमवार का निचला स्तर (Intraday Low)₹66.80 (20% लोअर सर्किट)
सोमवार की क्लोजिंग (Monday Close)₹70.09 (लगभग 16.18% की गिरावट)
निवेशकों का नुकसान (Wealth Wiped Out)₹14,000 करोड़ से अधिक
प्रभावित बड़े निवेशकभारत सरकार (₹1100 करोड़ का नुकसान), LIC (₹340 करोड़ का नुकसान)

सोमवार सुबह BSE पर IDFC First Bank के शेयरों को बेचने के लिए लगभग 1.94 करोड़ पेंडिंग सेल ऑर्डर (Sell orders) लगे हुए थे, लेकिन कोई खरीदार (Buyer) नहीं था। यह मार्च 2020 (कोविड क्रैश) के बाद से इस शेयर में आई एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट है।

3. बैंक प्रबंधन और सरकार का तत्काल एक्शन (Damage Control)

घोटाला सामने आने के बाद बैंक और सरकारी एजेंसियों ने डैमेज कंट्रोल (Damage Control) के लिए युद्ध-स्तर पर कदम उठाए हैं:

  • अधिकारियों का निलंबन: बैंक ने चंडीगढ़ ब्रांच के उन 4 संदिग्ध अधिकारियों को तुरंत सस्पेंड कर दिया है जो इन खातों का प्रबंधन कर रहे थे।
  • फोरेंसिक ऑडिट: अंतरराष्ट्रीय स्तर की ऑडिटिंग फर्म KPMG को इस पूरे मामले की स्वतंत्र फोरेंसिक जांच (Forensic Audit) के लिए नियुक्त किया गया है।
  • कानूनी कार्रवाई: बैंक ने स्थानीय पुलिस में FIR दर्ज करा दी है और मामले की जांच जारी है।
  • फंड रिकवरी का प्रयास: बैंक ने अन्य लाभार्थी बैंकों (Beneficiary Banks) को अलर्ट भेज दिया है ताकि संदिग्ध खातों में ट्रांसफर किए गए पैसों पर ‘लियन’ (Lien/प्रतिबंध) लगाया जा सके और रकम की वसूली हो सके।
  • हरियाणा सरकार का बड़ा कदम: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस मामले में एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) को जांच सौंप दी है। साथ ही, हरियाणा सरकार ने IDFC First Bank और AU Small Finance Bank को सरकारी लेनदेन के पैनल से तत्काल प्रभाव से बाहर (De-empanel) कर दिया है।
IDFC First Bank Scam

4. बैंक की वित्तीय सेहत पर असर: क्या IDFC First Bank डूब जाएगा?

रिटेल निवेशकों और ग्राहकों के मन में सबसे बड़ा डर यही है कि क्या यह बैंक ‘YES Bank’ या ‘PMC Bank’ की राह पर तो नहीं जा रहा?

तथ्यात्मक विश्लेषण (Financial Reality Check):

  • तिमाही मुनाफे से बड़ा घोटाला: बैंक का वित्त वर्ष 2024-25 की तीसरी तिमाही (Q3) का कुल शुद्ध मुनाफा (Net Profit) ₹503 करोड़ था। यानी यह ₹590 करोड़ का घोटाला बैंक के पूरे एक तिमाही के मुनाफे को खा गया है।
  • ब्रोकरेज फर्म्स की रिपोर्ट: ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म ‘UBS’ के अनुसार, यह रकम IDFC First Bank के वित्त वर्ष 2026 के अनुमानित मुनाफे का लगभग 22% है।
  • नेटवर्थ पर प्रभाव: हालांकि यह रकम मुनाफे के लिहाज से बड़ी है, लेकिन बैंक की कुल ‘नेटवर्थ’ (Net Worth) के मुकाबले यह केवल 1% है। मॉर्गन स्टेनली (Morgan Stanley) और जेफरीज (Jefferies) का भी मानना है कि इस घोटाले से बैंक की ‘कैपिटल पोज़िशन’ (पूंजी की स्थिति) को कोई संरचनात्मक खतरा नहीं है।

संक्षेप में: यह बैंक के लिए एक बड़ा वित्तीय और प्रतिष्ठा का झटका (Reputational damage) जरूर है, लेकिन इससे बैंक के दिवालिया होने या डूबने का कोई खतरा नहीं है। बैंक के पास इस नुकसान को सहने के लिए पर्याप्त पूंजी मौजूद है।

5. RBI गवर्नर और CEO का रुख: पैनिक को शांत करने की कोशिश

जब अफवाहें बाजार में हावी होने लगीं, तो शीर्ष नेतृत्व को सामने आना पड़ा।

RBI गवर्नर श्री शक्तिकांत दास/संजय मल्होत्रा का बयान:

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इस पूरे मामले पर पैनी नजर बनाए हुए है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि, “हम घटनाक्रम पर नजर रख रहे हैं, यह कोई ‘सिस्टेमिक इश्यू’ (Systemic issue – यानी पूरे बैंकिंग तंत्र की विफलता) नहीं है।”

CEO वी. वैद्यनाथन (V. Vaidyanathan) की सफाई:

बैंक के MD और CEO ने निवेशकों को आश्वस्त करते हुए कहा कि यह घटना एक विशेष ब्रांच तक सीमित है और इसे कुछ भ्रष्ट कर्मचारियों की मिलीभगत से अंजाम दिया गया है। बैंक के चेक-एंड-बैलेंस सिस्टम मौजूद हैं और पिछले 10 वर्षों में उनके 1000 से अधिक ब्रांच नेटवर्क में ऐसा कभी नहीं हुआ। बैंक पूरी तरह से कैपिटलाइज्ड (पूंजीकृत) है।

6. आम ग्राहकों के लिए सबक: क्या आपका पैसा सुरक्षित है?

यदि आपका सेविंग्स अकाउंट (Savings Account) या फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) IDFC First Bank में है, तो आपको घबराने की बिलकुल आवश्यकता नहीं है।

  1. यह घोटाला आप से जुड़ा नहीं है: बैंक ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया है कि यह धोखाधड़ी केवल हरियाणा सरकार से जुड़े कुछ विशिष्ट खातों तक सीमित है। चंडीगढ़ ब्रांच या देश के किसी भी अन्य हिस्से में मौजूद आम ग्राहकों के खाते पूरी तरह से सुरक्षित हैं।
  2. DICGC का सुरक्षा कवच: भारत में रिज़र्व बैंक की संस्था DICGC (Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation) के नियमों के तहत हर बैंक ग्राहक का अधिकतम ₹5 लाख तक का डिपॉजिट (मूलधन और ब्याज सहित) पूरी तरह से बीमित (Insured) होता है।

आगे की राह और बाजार का नज़रिया

IDFC First Bank में हुआ ₹590 करोड़ का यह घोटाला बैंकिंग सेक्टर के लिए एक बड़ी ‘वेक-अप कॉल’ (Wake-up call) है। यह दर्शाता है कि आप चाहे कितनी भी आधुनिक तकनीक और साइबर सुरक्षा अपना लें, अगर सिस्टम के भीतर बैठे इंसान (Employees) ही भ्रष्ट हो जाएं, तो धोखाधड़ी को रोकना मुश्किल हो जाता है।

निवेशकों के लिए यह समय पैनिक में आकर घाटे में शेयर बेचने का नहीं, बल्कि स्थिति के स्पष्ट होने का इंतज़ार करने का है। बैंक की कोर अर्निंग्स (Core earnings) और रिटेल डिपॉजिट बेस अभी भी मजबूत है। हालांकि, अगले कुछ हफ्तों तक जब तक फोरेंसिक ऑडिट (Forensic Audit) की अंतिम रिपोर्ट नहीं आ जाती और फंड रिकवरी की स्थिति साफ नहीं हो जाती, तब तक शेयर की कीमत पर दबाव (Pressure) बना रह सकता है। बैंक के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती बाजार में अपना खोया हुआ ‘भरोसा’ वापस जीतना होगी।

By Vivan Verma

विवान तेज खबरी (Tez Khabri) के समाचार रिपोर्टर हैं, जो ब्रेकिंग न्यूज़ और राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को कवर करते हैं। विवान तथ्यात्मक रिपोर्टिंग और तेज अपडेट के लिए जाने जाते हैं और प्रशासनिक व जनहित से जुड़े मामलों पर नियमित लेखन करते हैं।

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