भारत में मीडिया और मनोरंजन उद्योग तेजी से विकसित हो रहा है। डिजिटल युग में, टीवी चैनल, वेब सीरीज, और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट की प्रतिस्पर्धा बहुत तीव्र हो गई है। इसी संदर्भ में, हाल ही में आयोजित “Ideas of India Summit” में बॉलीवुड अभिनेता और निर्माता सुनील शेट्टी ने टीवी इंडस्ट्री और ट्रेंडिंग कंटेंट के बारे में एक विवादित बयान दिया, जिसमें उन्होंने कहा, “गाली से मिलती है TRP”। इस बयान ने मीडिया और दर्शकों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है।
Ideas of India Summit: एक परिचय
“Ideas of India Summit” भारत की प्रमुख विचार मंचों में से एक है, जहां देश के विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ, कलाकार, और उद्यमी अपने विचार और अनुभव साझा करते हैं। इस साल का सम्मेलन भी मीडिया, मनोरंजन, और डिजिटल कंटेंट के भविष्य पर केंद्रित था।
सुनील शेट्टी, जो एक जाने-माने अभिनेता होने के साथ-साथ एक सफल निर्माता भी हैं, ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया और टीवी की लोकप्रियता के पीछे के कारणों पर खुलकर बात की। उनके बयान ने मीडिया इंडस्ट्री में एक नई बहस को जन्म दिया।
सुनील शेट्टी का बयान: “गाली से मिलती है TRP”
सुनील शेट्टी ने कहा कि आज के दौर में टीवी चैनल और मनोरंजन कंटेंट की सफलता ट्रैक करने के लिए TRP (टेलीविजन रेटिंग पॉइंट) का आंकड़ा सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि अभी के समय में TRP पाने के लिए कंटेंट में गाली-गलौज और विवादित विषयों को प्रमुखता दी जा रही है, क्योंकि यह दर्शकों का ध्यान आकर्षित करता है।
उनका कहना था:
“आज की टीवी इंडस्ट्री में जब कंटेंट में गाली-गलौज आती है, तो TRP अपने आप बढ़ जाती है। दर्शक ऐसे शो को ज्यादा देखना पसंद करते हैं जहां विवाद और गाली-गलौज होती हो।”
यह बयान कई लोगों के लिए चौंकाने वाला था, क्योंकि यह सीधे तौर पर उन कंटेंट की आलोचना करता था जो केवल TRP के लिए बनाए जाते हैं, बिना गुणवत्ता और नैतिकता को ध्यान में रखे।

मीडिया इंडस्ट्री में TRP का महत्व
TRP, या टेलीविजन रेटिंग पॉइंट, किसी भी टीवी शो या चैनल की लोकप्रियता का मुख्य पैमाना होता है। विज्ञापनदाता और चैनल TRP की मदद से तय करते हैं कि कौन सी प्रोग्रामिंग ज्यादा व्यूअर्स को आकर्षित कर रही है। इससे उन्हें विज्ञापन की कीमतें तय करने में मदद मिलती है।
इसलिए, TRP बढ़ाने के लिए कई बार कंटेंट में विवाद, ड्रामा, और यहां तक कि गाली-गलौज को भी शामिल किया जाता है। यह दर्शकों को बांधे रखने का एक तरीका बन जाता है, खासकर तब जब दर्शक संवेदनशील या विवादास्पद विषयों के प्रति आकर्षित होते हैं।
क्या गाली-गलौज TRP बढ़ाने का सही तरीका है?
सुनील शेट्टी के बयान ने एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया है: क्या गाली-गलौज और विवाद ही TRP बढ़ाने का एकमात्र तरीका है? मीडिया विशेषज्ञों और दर्शकों की राय इस विषय पर विभाजित है।
समर्थक क्या कहते हैं?
कुछ मीडिया विशेषज्ञ मानते हैं कि विवादित कंटेंट दर्शकों की जिज्ञासा बढ़ाता है और इससे चैनल की व्यूअरशिप बढ़ती है। वे कहते हैं कि यह एक मार्केटिंग रणनीति है जो दर्शकों की रुचि को पकड़ने में मदद करती है।
विरोधी क्या कहते हैं?
वहीं, कई लोग इस पर आपत्ति जताते हैं और कहते हैं कि इस तरह का कंटेंट समाज में नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। वे कहते हैं कि गाली-गलौज और अशिष्ट भाषा का प्रचार सांस्कृतिक और नैतिक पतन को बढ़ावा देता है।
दर्शकों की प्रतिक्रिया
सुनील शेट्टी के बयान पर सोशल मीडिया पर भी व्यापक चर्चा हुई। कुछ दर्शकों ने उनकी बातों को सही ठहराया, जबकि अन्य ने इसे आलोचना की नजर से देखा।

कुछ दर्शक मानते हैं कि आज के मनोरंजन के लिए “शॉर्टकट” की जरूरत होती है, इसलिए विवाद और गाली-गलौज का सहारा लिया जाता है। कई लोग इस बात पर जोर देते हैं कि कंटेंट की गुणवत्ता और नैतिकता का ध्यान रखा जाना चाहिए और केवल TRP के लिए ऐसा नहीं करना चाहिए।
बॉलीवुड और टीवी इंडस्ट्री में बदलाव की जरूरत
सुनील शेट्टी के बयान ने मीडिया और मनोरंजन उद्योग में बदलाव की आवश्यकता को रेखांकित किया है। वर्तमान में, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के आने से कंटेंट का स्वरूप भी बदल रहा है। दर्शक अब ऐसे कंटेंट की मांग कर रहे हैं जो न केवल मनोरंजक हो बल्कि सामाजिक और नैतिक दायरे में भी हो।
गुणवत्ता और नैतिकता पर जोर
अनुभवी निर्माता और कलाकार इस बात पर सहमत हैं कि कंटेंट की गुणवत्ता और नैतिकता पर भी ध्यान देना जरूरी है। केवल TRP बढ़ाने के लिए विवादित और गाली-गलौज वाले शो बनाना लंबे समय में उद्योग के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
सकारात्मक बदलाव के संकेत
आधुनिक OTT प्लैटफॉर्म्स पर कई ऐसे शो और फिल्में आ रही हैं जो संवेदनशील विषयों को सम्मानपूर्वक प्रस्तुत करती हैं और दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती हैं। यह दर्शाता है कि दर्शक अब गुणवत्ता और नैतिकता को भी महत्व देने लगे हैं।
“Ideas of India Summit” में सुनील शेट्टी का बयान “गाली से मिलती है TRP” एक सच्चाई को उजागर करता है जो भारतीय मीडिया इंडस्ट्री में मौजूदा समय में व्याप्त है। यह बयान न केवल टीवी इंडस्ट्री की वर्तमान स्थिति पर सवाल उठाता है, बल्कि गुणवत्ता, नैतिकता, और दर्शकों की जिम्मेदारी पर भी विचार करने को प्रेरित करता है।
मीडिया और मनोरंजन उद्योग के लिए यह एक चुनौती है कि वे ऐसे कंटेंट का निर्माण करें जो दर्शकों को बांधे रखने के साथ-साथ सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों का भी सम्मान करे। दर्शकों की बदलती पसंद और डिजिटल युग की मांगों को ध्यान में रखते हुए, कंटेंट की गुणवत्ता और नैतिकता दोनों को संतुलित करना आवश्यक है।
