लखनऊ (4 मार्च 2026): भारत में त्योहारों की बात हो और उत्तर प्रदेश का जिक्र न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता। फाल्गुन मास की पूर्णिमा के साथ ही आज पूरा उत्तर प्रदेश होली सैलिब्रेशन (Holi Celebration) के रंग में सराबोर है। इस साल की होली इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से यूपी पर्यटन और आस्था के चरम पर है।
Divine Holi in Ayodhya: रामलला के दरबार में भव्य होली सैलिब्रेशन
अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के बाद से ही यहां हर त्योहार का उल्लास कई गुना बढ़ गया है। रामनगरी अयोध्या इस बार भी होली सैलिब्रेशन का एक प्रमुख केंद्र बनी हुई है। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु अपने आराध्य प्रभु श्री राम के साथ होली खेलने के लिए अयोध्या पहुंचे हुए हैं।
- रामलला को अर्पित हुआ पहला गुलाल (First Colors to Ram Lalla): सुबह की मंगल आरती के साथ ही सबसे पहले रामलला को प्राकृतिक फूलों से बना विशेष हर्बल गुलाल अर्पित किया गया। पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान श्री राम को अबीर और गुलाल लगाया।
- फूलों की होली (Phoolon Ki Holi in Ayodhya): राम जन्मभूमि परिसर और हनुमान गढ़ी में भक्तों के बीच क्विंटलों गेंदे और गुलाब के फूलों की बारिश की गई। राम पथ, भक्ति पथ और जन्मभूमि पथ पर नाचते-गाते श्रद्धालुओं की भीड़ ने पूरी अयोध्या को त्रेतायुग की याद दिला दी है।
- सरयू घाट का नजारा: सरयू नदी के तट पर भी विशेष होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया है, जहां संत-महंत और आम नागरिक एक साथ मिलकर इस पावन पर्व को मना रहे हैं। अयोध्या की यह आध्यात्मिक होली काशी से अयोध्या तक फैले उल्लास का एक प्रमुख हिस्सा है।

Mystical Colors of Kashi: मसान की राख और शिव की नगरी में रंगों में डूबा पूरा यूपी
जब बात होली की हो, तो भगवान शिव की नगरी काशी (Varanasi) का नाम सबसे ऊपर आता है। वाराणसी की होली दुनिया भर में अपनी अनूठी परंपराओं के लिए जानी जाती है। यहाँ रंग एकादशी (Rangbhari Ekadashi) से ही होली का पर्व शुरू हो जाता है।
मसान की होली (Masan Holi at Manikarnika Ghat)
काशी की सबसे रहस्यमयी और अद्भुत परंपरा है ‘मसान की होली’।
- चिताओं की भस्म से होली: मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर जलती चिताओं के बीच साधु, संन्यासी और आम भक्त डमरू की थाप पर चिता की भस्म (राख) से होली खेलते हैं। मान्यता है कि भगवान शिव स्वयं अपने गणों (भूत-पिशाचों) के साथ श्मशान में होली खेलने आते हैं।
- काशी विश्वनाथ धाम (Kashi Vishwanath Corridor): श्री काशी विश्वनाथ धाम परिसर में भक्तों का भारी हुजूम उमड़ा हुआ है। बाबा विश्वनाथ को अबीर-गुलाल चढ़ाने के बाद, धाम के प्रांगण में श्रद्धालुओं ने जमकर होली खेली। हर-हर महादेव के नारों और उड़ते हुए लाल-गुलाबी गुलाल ने यह साबित कर दिया कि रंगों में डूबा पूरा यूपी शिव की भक्ति में भी उतना ही लीन है।
The Traditional Braj Holi: मथुरा और वृंदावन का विश्व प्रसिद्ध Holi Celebration
उत्तर प्रदेश की होली का जिक्र हो और ब्रज (Braj) का नाम न आए, ऐसा असंभव है। मथुरा, वृंदावन, गोकुल, नंदगांव और बरसाना की होली दुनिया भर के पर्यटकों और फोटोग्राफर्स के लिए सबसे बड़ा आकर्षण होती है। यहाँ होली केवल एक दिन नहीं, बल्कि पूरे 40 दिनों तक मनाई जाती है।
- बरसाना की लठमार होली (Lathmar Holi): इस पारंपरिक होली में नंदगांव के पुरुष (हुरियारे) बरसाना की महिलाओं (हुरियारिनों) के साथ होली खेलने आते हैं, और महिलाएं प्रेम से उन पर लाठियां बरसाती हैं। यह राधा-कृष्ण के प्रेम का एक अनूठा प्रतीक है।
- बांके बिहारी मंदिर की भीड़ (Banke Bihari Temple): वृंदावन के ऐतिहासिक बांके बिहारी मंदिर में आज सुबह से ही तिल रखने की जगह नहीं है। मंदिर के कपाट खुलते ही पुजारियों ने टेसू के फूलों से बना रंग और केसरिया जल भक्तों पर छिड़का। ‘राधे-राधे’ की गूंज के साथ विदेशी सैलानी भी इस होली सैलिब्रेशन में पूरी तरह रंगे हुए नजर आ रहे हैं।

Nawabi Style Holi in Awadh: लखनऊ की गंगा-जमुनी तहजीब और रंगों का त्योहार
काशी से अयोध्या तक आध्यात्मिक होली के बाद, राजधानी लखनऊ की ओर रुख करें तो यहाँ की होली में नवाबियत और गंगा-जमुनी तहजीब (Ganga-Jamuni Tehzeeb) की झलक साफ दिखाई देती है।
- होली बारात और चौक की होली (Chowk Ki Holi): पुराने लखनऊ के चौक इलाके में ऐतिहासिक ‘होली की बारात’ निकाली गई। यह परंपरा दशकों पुरानी है, जहां ऊंटों और घोड़ों पर सवार होकर लोग रंग उड़ाते हुए निकलते हैं।
- सांस्कृतिक आयोजन: लखनऊ के विभिन्न क्लबों और पार्कों में मुशायरे, कवि सम्मेलन और ‘ठुमरी’ गायन के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग एक-दूसरे को गले लगाकर गुजिया और ठंडाई खिलाते हुए नजर आ रहे हैं, जो इस बात का गवाह है कि रंगों में डूबा पूरा यूपी आपसी भाईचारे का भी सबसे बड़ा उदाहरण है।
Eco-Friendly & Safe Holi: यूपी प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था (Security & Guidelines)
इतने बड़े स्तर पर होली सैलिब्रेशन को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार और यूपी पुलिस (UP Police) ने बेहद सख्त और चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था की है।
- ड्रोन से निगरानी (Drone Surveillance): संवेदनशील इलाकों और भीड़भाड़ वाले घाटों (जैसे वाराणसी के घाट और अयोध्या के मंदिर परिसर) पर पुलिस ड्रोन के जरिए चप्पे-चप्पे की निगरानी कर रही है।
- एंटी-रोमियो स्क्वाड (Anti-Romeo Squads): महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी और महिला पुलिस की टीमें तैनात हैं। हुड़दंगियों और नशे में गाड़ी चलाने वालों (Drunk and Drive) पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
- इको-फ्रेंडली होली (Eco-Friendly Approach): प्रशासन द्वारा इस साल रासायनिक (Chemical) रंगों के उपयोग को हतोत्साहित किया गया है। बाजारों में केवल हर्बल गुलाल, टेसू के फूल और जैविक रंगों की ही बिक्री की अनुमति दी गई है, जिसका आम जनता ने भी खुलकर समर्थन किया है।
संस्कृति और उमंग का महापर्व
वर्ष 2026 की यह होली उत्तर प्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मील का पत्थर है। काशी से अयोध्या तक और मथुरा से लेकर गोरखपुर तक, जिस तरह से लोगों ने इस त्योहार को मनाया है, उसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। रंगों में डूबा पूरा यूपी न केवल बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मना रहा है, बल्कि यह दिखा रहा है कि नए और आधुनिक भारत में भी हमारी प्राचीन परंपराएं कितनी सुरक्षित और जीवंत हैं।
चाहे वह रामलला के दरबार में उड़ता हुआ केसरिया गुलाल हो, या मणिकर्णिका घाट पर उड़ती हुई भस्म, इस होली सैलिब्रेशन ने हर भारतीय के हृदय में एक नई ऊर्जा और शांति का संचार किया है। आप सभी को इस रंगों के महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएं!
