भारत का 77वां गणतंत्र दिवस अब महज 12 दिन दूर है। पूरा देश जश्न की तैयारियों में डूबा है, लेकिन इस उत्साह के बीच एक गंभीर खबर ने सुरक्षा प्रतिष्ठानों की नींद उड़ा दी है। आज, 14 जनवरी 2026 को भारतीय खुफिया तंत्र और आतंकवाद विरोधी दस्तों ने एक संयुक्त रिपोर्ट साझा की है। इस रिपोर्ट के आधार पर गृह मंत्रालय ने देश भर में, विशेषकर नई दिल्ली और सीमावर्ती राज्यों में ‘हाई अलर्ट’ घोषित कर दिया है।
सुरक्षा एजेंसियों की नई चेतावनी सामान्य नहीं है। यह चेतावनी 2026 के बदलते तकनीकी परिदृश्य को दर्शाती है। अब खतरा केवल बंदूक या आरडीएक्स (RDX) तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डीपफेक तकनीक और स्वार्म ड्रोन (Swarm Drones) तक फैल चुका है। खुफिया इनपुट बताते हैं कि सीमा पार बैठे भारत विरोधी तत्व इस बार कुछ ऐसा करने की फिराक में हैं जो डिजिटल और भौतिक दोनों दुनिया में अफरा-तफरी मचा सके।
1. 14 जनवरी 2026: अलर्ट का संदर्भ और गंभीरता
आज सुबह जारी की गई सुरक्षा एजेंसियों की नई चेतावनी में स्पष्ट कहा गया है कि 15 जनवरी से 30 जनवरी के बीच का समय भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए बेहद संवेदनशील है। इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) द्वारा इंटरसेप्ट किए गए संदेशों से पता चलता है कि आतंकी संगठन अपनी रणनीति बदल रहे हैं।
पारंपरिक रूप से, गणतंत्र दिवस के आसपास हमेशा सुरक्षा बढ़ाई जाती है। लेकिन इस साल का इनपुट ‘मल्टी-वेक्टर अटैक’ (Multi-Vector Attack) की ओर इशारा करता है। इसका अर्थ है कि दुश्मन एक साथ कई मोर्चों पर हमला करने की योजना बना रहे हैं—जिसमें साइबर स्पेस, आर्थिक संस्थान और भीड़भाड़ वाले इलाके शामिल हैं। गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों (DGP) को तत्काल प्रभाव से गश्त बढ़ाने और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा ऑडिट करने का निर्देश दिया है।

2. खतरे का नया चेहरा: 2026 की तकनीक और चुनौतियां
वर्ष 2026 में आतंकवाद और सुरक्षा चुनौतियां अब पुराने ढर्रे पर नहीं चल रही हैं। सुरक्षा एजेंसियों की नई चेतावनी में जिन तीन प्रमुख खतरों का उल्लेख किया गया है, वे आधुनिक तकनीक से जुड़े हैं।
ए. स्वार्म ड्रोन का खतरा (Swarm Drone Threat): पिछले कुछ वर्षों में हमने देखा है कि कैसे ड्रोन तकनीक सस्ती और सुलभ हो गई है। सुरक्षा एजेंसियों को डर है कि आतंकी समूह छोटे, कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन्स के झुंड (Swarm) का इस्तेमाल कर सकते हैं। ये ड्रोन रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आते। इनका उपयोग न केवल विस्फोटक गिराने के लिए, बल्कि महत्वपूर्ण वीआईपी (VIP) क्षेत्रों की रेकी करने के लिए भी किया जा सकता है। दिल्ली पुलिस ने इसके जवाब में ‘एंटी-ड्रोन गन’ और ‘जैमर्स’ की एक अभेद्य दीवार खड़ी कर दी है।
बी. साइबर युद्ध और एआई (Cyber Warfare & AI): सुरक्षा एजेंसियों की नई चेतावनी का सबसे चिंताजनक पहलू ‘डिजिटल स्ट्राइक’ है। हैकर्स के समूह भारत के पावर ग्रिड, बैंकिंग सिस्टम या रेलवे के सर्वर को निशाना बना सकते हैं। इसके अलावा, एआई-जनरेटेड ‘डीपफेक’ (Deepfake) वीडियो का इस्तेमाल करके सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने और दंगे भड़काने की साजिश रची जा सकती है। 26 जनवरी के लाइव प्रसारण में व्यवधान डालने की कोशिश भी इस साजिश का हिस्सा हो सकती है।
सी. लोन वुल्फ अटैक (Lone Wolf Attack): किसी बड़े संगठन के बिना, अकेले व्यक्ति द्वारा भीड़भाड़ वाले इलाके में हमला करना ‘लोन वुल्फ अटैक’ कहलाता है। कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित युवाओं का इस्तेमाल इस तरह के हमलों के लिए किया जा सकता है। एजेंसियों ने डार्क वेब और एन्क्रिप्टेड चैट ऐप्स पर निगरानी बढ़ा दी है ताकि ऐसे किसी भी प्रयास को समय रहते विफल किया जा सके।
3. राजधानी दिल्ली: अभेद्य किले में तब्दील
गणतंत्र दिवस समारोह का केंद्र नई दिल्ली होती है, इसलिए सबसे अधिक खतरा भी यहीं होता है। सुरक्षा एजेंसियों की नई चेतावनी के बाद दिल्ली पुलिस ने राजधानी को एक अभेद्य किले में बदल दिया है।
5-स्तरीय सुरक्षा घेरा: कर्तव्य पथ (राजपथ) और लाल किले के आसपास 5-स्तरीय सुरक्षा घेरा (5-Layer Security Grid) बनाया गया है।
- आंतरिक घेरा: एसपीजी (SPG) और एनएसजी (NSG) कमांडो जो वीआईपी और मुख्य मंच की सुरक्षा करेंगे।
- मध्य घेरा: अर्धसैनिक बल (Paramilitary Forces) जो दर्शकों और परेड रूट की निगरानी करेंगे।
- बाहरी घेरा: दिल्ली पुलिस और स्वैट (SWAT) टीमें जो रणनीतिक स्थानों पर तैनात रहेंगी।
- हवाई सुरक्षा: एंटी-एयरक्राफ्ट गन और रडार सिस्टम जो किसी भी हवाई खतरे को रोकने के लिए तैनात हैं।
- सीमावर्ती सुरक्षा: दिल्ली की सीमाओं पर नाकाबंदी ताकि कोई संदिग्ध वाहन शहर में प्रवेश न कर सके।
फेस रिकॉग्निशन सिस्टम: 2026 में दिल्ली पुलिस ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कैमरों का जाल बिछाया है। ये कैमरे भीड़ में मौजूद किसी भी संदिग्ध व्यक्ति के चेहरे को डेटाबेस से मैच कर सकते हैं। यदि कोई वांछित अपराधी या आतंकी संदिग्ध परेड देखने आता है, तो कैमरा तुरंत कंट्रोल रूम को अलर्ट भेज देगा। सुरक्षा एजेंसियों की नई चेतावनी के मद्देनजर ऐसे 5000 से अधिक अतिरिक्त कैमरे लगाए गए हैं।
4. जम्मू-कश्मीर और सीमावर्ती राज्य: बर्फ के बीच आग की साजिश
जैसे ही दिल्ली में गणतंत्र दिवस की तैयारियां तेज होती हैं, सीमा पार से घुसपैठ की कोशिशें भी बढ़ जाती हैं। जनवरी का महीना है, कश्मीर में भारी बर्फबारी हो रही है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों की नई चेतावनी बताती है कि लॉन्च पैड्स पर आतंकी पूरी तरह सक्रिय हैं।
घुसपैठ के नए रास्ते: बर्फबारी के कारण पारंपरिक घुसपैठ के रास्ते बंद हो जाते हैं, लेकिन आतंकी अब सुरंगों (Tunnels) और नदी नालों का इस्तेमाल कर रहे हैं। बीएसएफ (BSF) और सेना ने नियंत्रण रेखा (LoC) और अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) पर ‘ऑपरेशन अलर्ट’ शुरू कर दिया है। थर्मल इमेजिंग कैमरे और मोशन सेंसर का उपयोग किया जा रहा है ताकि घने कोहरे और अंधेरे में भी दुश्मन की हरकत पकड़ी जा सके।
पंजाब और ड्रोन ड्रॉपिंग: पंजाब सीमा पर पाकिस्तान द्वारा ड्रोन के माध्यम से हथियार और नशीले पदार्थ (Drugs) गिराने की घटनाएं बढ़ी हैं। सुरक्षा एजेंसियों की नई चेतावनी में कहा गया है कि गणतंत्र दिवस से पहले इन हथियारों को स्लीपर सेल्स तक पहुंचाने की कोशिश की जा सकती है। पंजाब पुलिस और बीएसएफ ने सीमावर्ती गांवों में तलाशी अभियान तेज कर दिया है।
5. स्लीपर सेल्स और अर्बन नक्सल पर प्रहार
आतंकवाद का खतरा केवल सीमा पार से नहीं, बल्कि देश के भीतर छिपे गद्दारों से भी है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने सुरक्षा एजेंसियों की नई चेतावनी मिलने के बाद पिछले 48 घंटों में कई राज्यों में छापेमारी की है।
ये छापे उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और बिहार में मारे गए हैं। एजेंसियों को शक है कि आईएसआईएस (ISIS) और अल-कायदा से प्रेरित कुछ मॉड्यूल सक्रिय होने की कोशिश कर रहे हैं। ये ‘स्लीपर सेल्स’ (Sleeper Cells) आम नागरिकों की तरह समाज में घुले-मिले रहते हैं और आदेश मिलने पर हमला करते हैं। एनआईए ने कई संदिग्धों को हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ जारी है। इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और आपत्तिजनक साहित्य बरामद किया गया है।
6. रेलवे और मेट्रो: आसान लक्ष्य पर कड़ी नजर
आतंकवादी अक्सर उन जगहों को निशाना बनाते हैं जहां भीड़ ज्यादा होती है और सुरक्षा जांच हवाई अड्डों की तुलना में थोड़ी कम होती है। रेलवे स्टेशन और मेट्रो सिस्टम हमेशा सॉफ्ट टारगेट रहे हैं।
सुरक्षा एजेंसियों की नई चेतावनी के बाद रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और जीआरपी (GRP) ने ट्रेनों और प्लेटफार्मों पर गश्त बढ़ा दी है। डॉग स्क्वॉड और बम निरोधक दस्तों को स्टैंडबाय पर रखा गया है।
- नई दिल्ली, मुंबई सेंट्रल और हावड़ा जैसे बड़े स्टेशनों पर बैगेज स्कैनर अनिवार्य कर दिए गए हैं।
- पार्सल सेवाओं पर विशेष निगरानी रखी जा रही है, क्योंकि विस्फोटकों को पार्सल के रूप में भेजने का खतरा बना रहता है।
- दिल्ली मेट्रो में भी सीआईएसएफ (CISF) ने सुरक्षा जांच को और कड़ा कर दिया है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे थोड़ा अतिरिक्त समय लेकर यात्रा करें क्योंकि चेकिंग में समय लग सकता है।
7. साइबर स्पेस: अदृश्य युद्ध का मैदान
जैसा कि हमने पहले चर्चा की, 2026 में युद्ध केवल जमीन पर नहीं, इंटरनेट पर भी लड़ा जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों की नई चेतावनी में विशेष रूप से ‘हैक्टिविस्ट’ (Hacktivists) समूहों का उल्लेख किया गया है जो पाकिस्तान और चीन से संचालित होते हैं।
सरकारी वेबसाइट्स पर खतरा: सरकारी मंत्रालयों, रक्षा विभाग और प्रमुख बैंकों की वेबसाइट्स हैकर्स के निशाने पर हैं। ‘डिस्ट्रीब्यूटेड डिनायल ऑफ सर्विस’ (DDoS) हमलों के जरिए सर्वर को क्रैश करने की कोशिश की जा सकती है। भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In (Computer Emergency Response Team) ने सभी सरकारी विभागों को अपने फायरवॉल अपडेट करने और संदिग्ध ईमेल को न खोलने की सलाह दी है।
सोशल मीडिया प्रोपेगेंडा: 26 जनवरी के आसपास सोशल मीडिया पर फर्जी खबरें (Fake News) फैलाने का अभियान चलाया जा सकता है। इसका उद्देश्य लोगों में डर पैदा करना और सरकार के खिलाफ अविश्वास फैलाना होता है। गृह मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स को भी सतर्क रहने और भड़काऊ सामग्री को तुरंत हटाने का निर्देश दिया है।
8. 22 जनवरी और 26 जनवरी: दोहरी चुनौती
जनवरी का महीना सुरक्षा बलों के लिए दोहरी चुनौती लेकर आता है। 22 जनवरी को अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा की वर्षगांठ भी होती है, और उसके तुरंत बाद 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस।
सुरक्षा एजेंसियों की नई चेतावनी में अयोध्या, वाराणसी और मथुरा जैसे धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर भी इनपुट साझा किए गए हैं। इन स्थानों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ होती है, जो इसे आतंकियों के लिए आकर्षक लक्ष्य बनाती है। उत्तर प्रदेश एटीएस (ATS) ने इन शहरों में विशेष कमांडो तैनात किए हैं। खुफिया एजेंसियों का मानना है कि आतंकी किसी प्रतीकात्मक (Symbolic) स्थान को निशाना बनाकर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियां बटोरना चाहते हैं।
9. आम नागरिक की भूमिका: आंखें और कान बनें
देश की सुरक्षा केवल वर्दीधारी जवानों की जिम्मेदारी नहीं है। एक सतर्क नागरिक के रूप में हमारी भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। सुरक्षा एजेंसियों की नई चेतावनी के बाद पुलिस ने जनता से ‘आंखें और कान’ (Eyes and Ears) बनने की अपील की है।
आपको क्या करना चाहिए?
- संदिग्ध वस्तु: अगर आपको बस, ट्रेन, पार्क या बाजार में कोई लावारिस बैग, टिफिन या खिलौना दिखे, तो उसे न छुएं। तुरंत पुलिस को सूचित करें।
- किरायेदार सत्यापन: अगर आपने हाल ही में अपना मकान किराए पर दिया है, तो पुलिस सत्यापन (Police Verification) अवश्य करवाएं। आतंकी अक्सर बिना सत्यापन वाले मकानों में शरण लेते हैं।
- अफवाहों से बचें: सोशल मीडिया पर आने वाले किसी भी भड़काऊ संदेश को बिना जांचे फॉरवर्ड न करें।
- सहयोग: सुरक्षा जांच के दौरान पुलिस और सुरक्षा कर्मियों का सहयोग करें। यह आपकी सुरक्षा के लिए ही है।
10. पिछले हमलों का इतिहास और सबक
इतिहास गवाह है कि भारत के राष्ट्रीय त्योहारों पर हमेशा बुरी नजर रही है। चाहे वह 2001 का संसद हमला हो (जो दिसंबर में हुआ था लेकिन गणतंत्र दिवस के करीब सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा गया था) या 2016 का पठानकोट हमला जो नए साल की शुरुआत में हुआ था।
सुरक्षा एजेंसियों की नई चेतावनी पिछले अनुभवों से सीख लेकर तैयार की गई है। 2026 में हमारी तैयारी ‘प्रतिक्रियाशील’ (Reactive) नहीं, बल्कि ‘सक्रिय’ (Proactive) है। अब हम हमले का इंतजार नहीं करते, बल्कि उसे होने से पहले ही रोकने के लिए ‘प्री-एम्पटिव स्ट्राइक’ (Pre-emptive Action) या खुफिया ऑपरेशन चलाते हैं।
पुलवामा हमले के बाद से सुरक्षा बलों ने काफिलों (Convoy) की आवाजाही के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब नागरिक यातायात को रोककर सेना के काफिले निकाले जाते हैं, और हर रास्ते की सैनिटाइजेशन (जांच) की जाती है।
11. अंतरराष्ट्रीय सहयोग और कूटनीति
आतंकवाद एक वैश्विक समस्या है, और इसका मुकाबला अकेले नहीं किया जा सकता। सुरक्षा एजेंसियों की नई चेतावनी के बाद भारत ने अपने मित्र देशों (जैसे अमेरिका, इज़राइल, फ्रांस) की खुफिया एजेंसियों के साथ भी इनपुट साझा किए हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकी फंडिंग (Terror Funding) को रोकने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) के नियमों का पालन करते हुए संदिग्ध लेनदेन पर नजर रखी जा रही है। भारत ने पड़ोसी देशों (नेपाल, बांग्लादेश) से भी अपनी सीमाओं पर चौकसी बढ़ाने का अनुरोध किया है ताकि आतंकी इन रास्तों का इस्तेमाल न कर सकें।
12. वीआईपी सुरक्षा और प्रोटोकॉल
गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष का आगमन होता है। 2026 में भी एक प्रमुख वैश्विक नेता मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हो रहे हैं (काल्पनिक संदर्भ)। विदेशी मेहमान की सुरक्षा एक कूटनीतिक प्रतिष्ठा का प्रश्न होता है।
सुरक्षा एजेंसियों की नई चेतावनी को देखते हुए वीआईपी रूट को पूरी तरह से सैनिटाइज किया गया है। जिस होटल में विदेशी मेहमान रुकेंगे, उसे छावनी में तब्दील कर दिया गया है। एनएसजी के स्नाइपर्स ऊंची इमारतों पर तैनात हैं। खाद्य सुरक्षा से लेकर चिकित्सा आपातकालीन योजनाओं तक, हर छोटी डिटेल पर काम किया गया है।
13. तटीय सुरक्षा: समुद्र के रास्ते खतरा
26/11 मुंबई हमले ने हमें सिखाया कि समुद्र के रास्ते भी खतरा आ सकता है। सुरक्षा एजेंसियों की नई चेतावनी में भारत की 7500 किलोमीटर लंबी तटीय रेखा की सुरक्षा का भी उल्लेख है।
भारतीय नौसेना (Indian Navy) और तटरक्षक बल (Coast Guard) अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में गश्त कर रहे हैं। मछुआरों को ‘सागर मित्र’ बनाया गया है ताकि वे समुद्र में किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी दे सकें। गुजरात और महाराष्ट्र के तटीय इलाकों में रडार नेटवर्क को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
14. डरना नहीं, सतर्क रहना है
अंत में, सुरक्षा एजेंसियों की नई चेतावनी का उद्देश्य जनता में पैनिक या डर फैलाना नहीं है, बल्कि हमें सतर्क करना है। भारत की सुरक्षा एजेंसियां—चाहे वह आईबी हो, रॉ हो, एनएसजी हो या हमारी सेना—दुनिया की बेहतरीन एजेंसियों में से एक हैं। वे दिन-रात हमारी सुरक्षा के लिए जाग रहे हैं ताकि हम चैन की नींद सो सकें।
14 जनवरी 2026 की यह सुबह हमें याद दिलाती है कि आजादी की कीमत निरंतर सतर्कता है। दुश्मन चाहे कितना भी चालाक हो, हमारी एकता और हमारे सुरक्षा बलों के हौसले के आगे वह कभी टिक नहीं पाएगा। गणतंत्र दिवस हमारा राष्ट्रीय पर्व है, और हमें इसे पूरे उत्साह और गर्व के साथ मनाना चाहिए, लेकिन साथ ही एक जिम्मेदार नागरिक होने का फर्ज भी निभाना चाहिए।
आने वाले 12 दिन महत्वपूर्ण हैं। अगर हम और आप मिलकर अपनी आंखें खुली रखें, तो कोई भी ‘नापाक मंसूबा’ कामयाब नहीं हो सकता। आइए, हम अपनी सुरक्षा एजेंसियों पर भरोसा रखें और उनके हाथ मजबूत करें।
जय हिन्द! जय भारत!
