पीली धातु की चमक पड़ी फीकी, निवेशकों में हड़कंप
नमस्कार निवेशक मित्रों और आभूषण प्रेमियों! आज तारीख १३ फरवरी २०२६, शुक्रवार है। वेलेंटाइन डे की पूर्व संध्या पर जहां बाजारों में रौनक होनी चाहिए थी, वहीं कमोडिटी और बुलियन मार्केट में आज ‘ब्लडबाथ’ (भारी गिरावट) का मंजर देखने को मिला है। सोना, जिसे हम सुरक्षित निवेश या ‘सेफ हेवन’ मानते हैं, और चांदी, जिसे ‘आम आदमी का सोना’ कहा जाता है, दोनों ही आज औंधे मुंह गिर पड़े हैं।
अमेरिका (US) से कल रात जो आर्थिक संकेत मिले, उन्होंने आज भारतीय बाजारों में सुनामी ला दी है। एमसीएक्स (MCX) पर सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। पालनपुर, अहमदाबाद और मुंबई के जवेरी बाजार तक, हर जगह सराफा व्यापारियों और निवेशकों के चेहरे पर चिंता की लકીरें साफ देखी जा सकती हैं।
यह गिरावट कोई सामान्य करेक्शन नहीं है। इसके पीछे वैश्विक आर्थिक ताकतें यानी Global Economic Forces काम कर रही हैं। अमेरिका में महंगाई के आंकड़े (Inflation Data) और फेडरल रिजर्व (Fed) की ब्याज दरों को लेकर जो अनिश्चितता २०२६ की शुरुआत से बनी हुई थी, उसने आज अपना असर दिखा दिया है। डॉलर इंडेक्स (Dollar Index) की मजबूती ने सोने की चमक छीन ली है और चांदी तो जैसे ताश के पत्तों की तरह बिखर गई है।
भाग १: आज का मंजर – बाज़ार में कोहराम (The Crash Scenario)
१३ फरवरी २०२६ की सुबह जब भारतीय कमोडिटी बाजार (MCX) खुला, तो संकेतों से ही लग रहा था कि आज का दिन भारी रहने वाला है।
कीमतों में भारी कटौती:
- सोना (Gold): एमसीएक्स पर सोना अपने उच्च स्तर से २% से ३% तक टूट गया। प्रति १० ग्राम की कीमत में हजारों रुपये की गिरावट देखने को मिली। जो सोना कल तक नई ऊंचाई छूने को बेताब था, आज वह सपोर्ट लेवल तोड़ने पर आमादा है।
- चांदी (Silver): चांदी की हालत तो और भी खस्ता है। औद्योगिक मांग (Industrial Demand) में कमी और वैश्विक मंदी के डर ने चांदी को ५% तक तोड़ दिया है। प्रति किलो चांदी के भाव में भारी गिरावट ने सट्टेबाजों (Speculators) की कमर तोड़ दी है।
स्पॉट मार्केट (Spot Market) का हाल:
हाजिर बाजार यानी सराफा बाजार में भी सन्नाटा पसर गया है। पालनपुर और अहमदाबाद के ज्वैलर्स का कहना है कि ग्राहक अभी “वेट एंड वॉच” (Wait and Watch) की मुद्रा में हैं। जब कीमतें इतनी तेजी से गिरती हैं, तो खरीदार और गिरने का इंतजार करते हैं, जिससे बाजार में लिक्विडिटी सूख जाती है।
भाग २: अमेरिका (US) कनेक्शन – गिरावट की जड़ (The Root Cause)
इस पूरी गिरावट की पटकथा वाशिंगटन और न्यूयॉर्क में लिखी गई है। भारतीय बाजार तो बस उन Global Forces पर प्रतिक्रिया दे रहा है।
१. अमेरिकी सीपीआई डेटा (US CPI Data):
फरवरी २०२६ में आए अमेरिका के महंगाई (Consumer Price Index) के आंकड़े उम्मीद से ज्यादा ‘गर्म’ (Hot) रहे हैं। विश्लेषकों का अनुमान था कि महंगाई कम होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
- महंगाई बढ़ने का सीधा मतलब है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक (Federal Reserve) ब्याज दरों में कटौती (Rate Cut) नहीं करेगा, या हो सकता है कि ब्याज दरें और बढ़ा दे।
- जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं, तो सोने जैसे ‘नॉन-यील्डिंग एसेट’ (जिसपर कोई ब्याज नहीं मिलता) की चमक फीकी पड़ जाती है।

२. डॉलर इंडेक्स (DXY) की दहाड़:
डॉलर और सोने का “३६ का आंकड़ा” होता है।
- कल रात डॉलर इंडेक्स १०४-१०५ के स्तर को पार कर गया।
- जब डॉलर मजबूत होता है, तो अन्य मुद्राओं (जैसे रुपया) धारकों के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय मांग घटती है। ये Currency Forces सोने की कीमतों को नीचे धकेलने में सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं।
३. बॉन्ड यील्ड में उछाल:
अमेरिका के १०-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड (US Treasury Yields) में अचानक उछाल आया है। निवेशक अब सोने की बजाय अमेरिकी बॉन्ड में पैसा लगाना सुरक्षित और फायदेमंद मान रहे हैं क्योंकि वहां उन्हें निश्चित रिटर्न मिल रहा है।
भाग ३: Market Forces का खेल – मांग और आपूर्ति का बिगड़ता समीकरण
बाजार कभी भी एक दिशा में नहीं चलता। इसमें कई अदृश्य ताकतें या Forces काम करती हैं। आज की गिरावट में इन Forces का बड़ा हाथ है।
Selling Forces (बिकवाली का दबाव):
- प्रॉफिट बुकिंग: पिछले कुछ महीनों में सोने ने शानदार रिटर्न दिया था। १३ फरवरी को बाजार खुलते ही बड़े फंड हाउस और ईटीएफ (ETF) ने मुनाफावसूली (Profit Booking) शुरू कर दी। जब ‘बड़े खिलाड़ी’ अपना माल बेचते हैं, तो Selling Forces हावी हो जाते हैं और छोटे निवेशक घबराकर बेचने लगते हैं।
- टेक्निकल ब्रेकडाउन: चार्ट पर सोने ने अपना महत्वपूर्ण मूविंग एवरेज (DMA) तोड़ दिया। इसके बाद एल्गोरिथम ट्रेडिंग (Algo Trading) सिस्टम ने अपने आप ‘सेल’ (Sell) के ऑर्डर पंच कर दिए, जिससे गिरावट और तेज हो गई।
External Forces (बाहरी दबाव):
- भू-राजनीतिक तनाव में कमी: २०२६ की शुरुआत में मध्य-पूर्व (Middle East) या रूस-यूक्रेन मोर्चे पर थोड़ी शांति की खबरें आईं हैं। जब युद्ध का डर कम होता है, तो सोने की ‘सेफ हेवन’ (Safe Haven) वाली मांग घट जाती है। जियो-पॉलिटिकल Forces का ठंडा पड़ना सोने के लिए नकारात्मक साबित हुआ।
भाग ४: चांदी क्यों बिखर गई? – हाई बीटा एसेट का जोखिम
सोने के मुकाबले चांदी में गिरावट हमेशा ज्यादा तेज क्यों होती है? आज भी चांदी ५% तक क्यों टूटी?
१. औद्योगिक धातु (Industrial Metal):
चांदी केवल कीमती धातु नहीं है, यह एक औद्योगिक धातु भी है। इसका ५०% से अधिक उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और ईवी (EV) बैटरियों में होता है।
- अमेरिका और चीन से आ रही आर्थिक सुस्ती की खबरों ने औद्योगिक मांग को झटका दिया है।
- मंदी के डर (Recession Fears) ने Industrial Forces को कमजोर कर दिया है, जिसका सीधा असर चांदी की कीमतों पर पड़ा है।
२. हाई वोलैटिलिटी (High Volatility):
चांदी को ‘हाई बीटा’ एसेट माना जाता है। इसका मतलब है कि अगर सोना १% गिरेगा, तो चांदी २% या ३% गिरेगी। सट्टेबाजों ने चांदी में भारी लेवरेज (उधारी) पोजीशन बना रखी थी, जो कीमतें गिरते ही ‘मार्जिन कॉल’ (Margin Call) की वजह से कटनी शुरू हो गई, जिससे गिरावट को और बल मिला।

भाग ५: भारतीय बाजार पर असर – पालनपुर से मुंबई तक
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोने का उपभोक्ता है। अमेरिका में मची हलचल का सीधा असर हमारे स्थानीय बाजारों पर पड़ता है।
रुपये की कमजोरी ने बचाया?
आम तौर पर जब अंतरराष्ट्रीय बाजार (COMEX) में सोना गिरता है, तो भारत में भी गिरता है। लेकिन यहाँ Currency Forces ने थोड़ी राहत दी है।
- डॉलर मजबूत होने से भारतीय रुपया (INR) थोड़ा कमजोर हुआ है।
- चूंकि हम सोना डॉलर में खरीदते हैं, इसलिए रुपये की कमजोरी ने गिरावट को थोड़ा कम (Cushion) किया है। अगर रुपया मजबूत होता, तो सोने के भाव और भी नीचे जा सकते थे।
शादियों का सीजन:
फरवरी भारत में शादियों का पीक सीजन होता है।
- इस गिरावट से उन परिवारों को बड़ी राहत मिली है जिनके घरों में शादियाँ हैं।
- पालनपुर के ज्वैलर्स का कहना है कि सुबह से पूछताछ (Enquiries) बढ़ गई है, लेकिन लोग अभी भी भाव के और टूटने का इंतजार कर रहे हैं।
भाग ६: तकनीकी विश्लेषण (Technical Analysis) – चार्ट क्या कहते हैं?
जो लोग ट्रेडिंग करते हैं, उनके लिए चार्ट्स को समझना जरूरी है। १३ फरवरी २०२६ के चार्ट्स पर स्थिति ‘बैरिश’ (Bearish – मंदी वाली) नजर आ रही है।
- RSI (रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स): सोने का RSI अब ‘ओवरसोल्ड’ (Oversold) जोन की तरफ बढ़ रहा है। इसका मतलब है कि बहुत ज्यादा बिकवाली हो चुकी है और एक छोटा ‘बाउंस बैक’ (उछाल) आ सकता है।
- सपोर्ट लेवल: एमसीएक्स पर सोने के लिए अगला बड़ा सपोर्ट ₹XX,XXX (काल्पनिक स्तर) के आसपास है। अगर यह स्तर टूटा, तो हम और ₹२०००-३००० की गिरावट देख सकते हैं।
- डेथ क्रॉस: कुछ समय सीमा (Time frames) पर मूविंग एवरेज का ‘डेथ क्रॉस’ बन रहा है, जो लंबी मंदी का संकेत देता है।
Technical Forces अभी पूरी तरह से मंदड़ियों (Bears) के पक्ष में हैं। खरीदारों (Bulls) को बाजार में वापस आने के लिए किसी बड़े ट्रिगर की जरूरत होगी।

भाग ७: विशेषज्ञों की राय – क्या यह बुलबुला फूट गया?
बाजार के दिग्गज इस गिरावट को कैसे देख रहे हैं? क्या २०२६ में सोने की तेजी खत्म हो गई है?
- बुलियन एक्सपर्ट्स: उनका मानना है कि यह एक स्वस्थ सुधार (Healthy Correction) है। सोना पिछले ६ महीनों से लगातार बढ़ रहा था। बाजार को सांस लेने के लिए इस गिरावट की जरूरत थी।
- फंड मैनेजर्स: उनका कहना है कि लंबी अवधि के Forces अभी भी सोने के पक्ष में हैं। दुनिया भर के केंद्रीय बैंक (Central Banks) अभी भी सोना खरीद रहे हैं। चीन और रूस अपनी डॉलर निर्भरता कम करने के लिए सोना जमा कर रहे हैं। इसलिए, यह गिरावट अस्थायी है।
विशेषज्ञों का एक ही मंत्र है: “पैनिक में न बेचें” (Don’t Panic Sell)।
भाग ८: निवेशक क्या करें? – रणनीति (Strategy for Investors)
इस गिरावट के माहौल में एक आम निवेशक को क्या करना चाहिए? क्या गिरते हुए चाकू को पकड़ना (Catching a falling knife) सही है?
१. आभूषण खरीदारों के लिए:
अगर आपको शादी-ब्याह के लिए गहने खरीदने हैं, तो यह एक सुनहरा मौका है। आप अपनी खरीदारी को टुकड़ों में कर सकते हैं। ३०% खरीदारी आज करें, और बाकी अगर भाव और गिरते हैं तब करें। ‘एवरेजिंग’ (Averaging) करने से आपको सबसे अच्छा भाव मिलेगा।
२. लंबी अवधि के निवेशकों के लिए:
जिन्होंने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) या डिजिटल गोल्ड में निवेश किया है, उन्हें घबराना नहीं चाहिए। इतिहास गवाह है कि सोना हमेशा महंगाई को मात देता है (Inflation Hedge)। Economic Forces लंबी अवधि में सोने की कीमतों को ऊपर ही ले जाएंगी। गिरावट पर एसआईपी (SIP) की तरह खरीदारी करें।

३. ट्रेडर्स के लिए:
इंट्राडे ट्रेडर्स को बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। बाजार में वोलैटिलिटी (उतार-चढ़ाव) बहुत ज्यादा है। स्टॉप-लॉस के बिना काम करना आज के दिन आत्महत्या करने जैसा है। “शॉर्ट सेलिंग” (Short Selling) में पैसा बन सकता है, लेकिन ट्रेंड पलटने का जोखिम भी है।
भाग ९: आयात शुल्क (Import Duty) और तस्करी का कोण
भारत में सोने की कीमतों पर सरकार की नीतियों का भी बड़ा असर होता है।
- अगर सरकार बजट के बाद आयात शुल्क में कोई बदलाव करती है (जैसा कि २०२६ के अंतरिम बजट में अटकलें थीं), तो उसका असर भी कीमतों पर दिखेगा।
- जब सोने के भाव गिरते हैं, तो तस्करी (Smuggling) के लिए प्रोत्साहन कम हो जाता है। लीगल मार्केट के लिए यह अच्छी खबर है। Regulatory Forces भी बाजार की दिशा तय करने में भूमिका निभाते हैं।
भाग १०: चांदी का भविष्य – क्या यह फिर चमकेगी?
चांदी भले ही आज ५% टूटी हो, लेकिन इसका भविष्य उज्ज्वल माना जा रहा है।
- ग्रीन एनर्जी रिवॉल्यूशन: पूरी दुनिया सौर ऊर्जा (Solar Energy) की तरफ बढ़ रही है। सोलर पैनल में चांदी का कोई विकल्प नहीं है।
- ५जी और ६जी टेक्नोलॉजी: जैसे-जैसे २०२६ में टेक्नोलॉजी अपग्रेड हो रही है, चांदी की औद्योगिक मांग बढ़ेगी।
- इसलिए, चांदी में आई यह गिरावट उन लोगों के लिए जैकपॉट हो सकती है जो २-३ साल का नजरिया रखते हैं। Industrial Forces चांदी को वापस ऊपर खींच लाएंगे।
भाग ११: ईटीएफ (ETF) से निकासी – एक चिंताजनक संकेत
एक और डेटा जो चिंता बढ़ा रहा है, वह है गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) से होने वाली निकासी।
- दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड ईटीएफ (SPDR Gold Trust) से निवेशकों ने पिछले एक हफ्ते में भारी निकासी की है।
- यह दर्शाता है कि पश्चिमी देशों (Western World) के संस्थागत निवेशकों का भरोसा सोने से डगमगाया है। जब तक इन्वेस्टमेंट डिमांड वापस नहीं आती, कीमतों में बड़ी तेजी मुश्किल है। Investment Forces अभी नकारात्मक हैं।
भाग १२: वैश्विक मंदी (Global Recession) का डर
क्या २०२६ में मंदी आएगी?
- अगर अमेरिका में मंदी आती है, तो शुरुआत में कमोडिटी की कीमतें गिरती हैं (जैसा अभी हो रहा है)।
- लेकिन जब मंदी की पुष्टि हो जाती है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरें घटाना शुरू कर देते हैं और नोट छापना शुरू कर देते हैं (Quantitative Easing)।
- उस समय सोना फिर से रॉकेट बन जाता है। इसलिए, वर्तमान Economic Forces मंदी का संकेत दे रहे हैं, जो अंततः सोने के लिए अच्छा ही होगा।
भाग १३: भौतिक सोना बनाम डिजिटल सोना (Physical vs Digital)
इस गिरावट में खरीदारी कैसे करें?
- भौतिक सोना: इसमें मेकिंग चार्ज और जीएसटी लगता है। साथ ही चोरी का डर भी रहता है।
- डिजिटल/ईटीएफ: गिरावट का फायदा उठाने के लिए ईटीएफ सबसे अच्छा विकल्प है। आप १ ग्राम से भी कम सोना खरीद सकते हैं और उसे तुरंत बेच भी सकते हैं। बाजार के Market Forces का फायदा उठाने के लिए यह सबसे लिक्विड (Liquid) तरीका है।
भाग १४: निष्कर्ष – संयम ही सबसे बड़ी शक्ति है
अंत में, १३ फरवरी २०२६ की यह घटना हमें यह सिखाती है कि बाजार अनिश्चितताओं से भरा है।
अमेरिका में एक छींक आती है और भारत के सराफा बाजार को जुकाम हो जाता है—यही वैश्वीकरण (Globalization) है। आज की गिरावट उन लोगों के लिए डर का कारण है जिन्होंने बिना सोचे-समझे उच्च स्तर पर खरीदारी की थी। लेकिन समझदार निवेशक के लिए यह एक अवसर है।
Global Forces, Economic Forces, और Market Forces का यह चक्र चलता रहता है। सोना और चांदी हजारों सालों से मूल्य का भंडार (Store of Value) रहे हैं। कागज की मुद्राएं आईं और गईं, शेयर बाजार बने और बिगड़े, लेकिन सोना आज भी अपनी जगह कायम है।
इसलिए, इस ‘क्रैश’ को अंत नहीं, बल्कि एक नए चक्र की शुरुआत मानें। अपने पोर्टफोलियो में विविधता (Diversification) रखें। १०% से १५% हिस्सा सोने में रखना हमेशा एक समझदारी भरा निर्णय होता है। आज की गिरावट कल के मुनाफे की नींव बन सकती है।
बाजार पर नजर बनाए रखें, और अफवाहों पर ध्यान न दें। सही जानकारी और धैर्य ही शेयर बाजार और कमोडिटी बाजार में आपकी सबसे बड़ी ताकत है।
