बुलियन मार्केट में भूचाल – रिकॉर्ड हाई से रिकॉर्ड गिरावट
शेयर बाजार की तरह अब कमोडिटी बाजार (Commodity Market) में भी ऐसा भूचाल आया है जिसने निवेशकों और आम खरीदारों की नींद उड़ा दी है। पिछले कुछ हफ्तों से रॉकेट की रफ़्तार से भाग रहे सोने और चांदी के भाव अचानक जमीन पर आ गिरे हैं।
शुक्रवार, 30 जनवरी 2026 का दिन सराफा बाजार के इतिहास में ‘ब्लैक फ्राइडे’ (Black Friday) के रूप में याद किया जाएगा। खबरों के मुताबिक, चांदी की कीमतों में एक ही दिन में ₹1 Lakh प्रति किलोग्राम तक की ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई, जबकि सोना भी अपने ऊपरी स्तर से करीब ₹33,000 प्रति 10 ग्राम तक फिसल गया।
यह गिरावट इतनी तेज और भयानक थी कि मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर लोअर सर्किट (Lower Circuit) लगने की नौबत आ गई। जो चांदी कल तक 4 लाख रुपये के पार जा रही थी, वह अचानक 3 लाख की रेंज में आ गई।
भाग 1: महा-गिरावट के आंकड़े – क्या हुआ उस दिन? (The Crash Numbers)
इस गिरावट को समझने के लिए हमें आंकड़ों पर नजर डालनी होगी। यह सामान्य गिरावट नहीं थी, बल्कि एक ‘फ्री फॉल’ (Free Fall) था।
चांदी का हाल (Silver Price Crash):
- Peak: चांदी ने हाल ही में MCX पर ₹4,20,000 प्रति किलो का ऑल-टाइम हाई (All-Time High) बनाया था।
- The Crash: शुक्रवार को इंट्रा-डे ट्रेडिंग में चांदी मार्च वायदा (March Futures) करीब ₹1,00,000 टूटकर ₹3 लाख के करीब आ गई।
- प्रतिशत में: यह एक ही दिन में लगभग 15-20% की गिरावट थी, जो दशकों में नहीं देखी गई।
सोने का हाल (Gold Price Crash):
- Peak: सोना भी ₹1,80,000 प्रति 10 ग्राम के ऐतिहासिक स्तर को छू चुका था।
- The Crash: गिरावट के दौर में सोने ने ऊपरी स्तरों से ₹33,000 (कुल करेक्शन) का गोता लगाया और ₹1,50,000 के आसपास कारोबार करता दिखा।
- वजह: निवेशकों ने ऊंचे भाव पर जमकर बिकवाली की।
भाग 2: गिरावट के 5 बड़े कारण (5 Reasons Behind the Crash)
बाजार में यह सुनामी बिना कारण नहीं आई। इसके पीछे ग्लोबल और डोमेस्टिक (घरेलू) दोनों कारण जिम्मेदार हैं।
1. आक्रामक मुनाफावसूली (Aggressive Profit Booking)
सोना और चांदी पिछले एक महीने से लगातार भाग रहे थे। जनवरी 2026 में ही चांदी ने 50% से ज्यादा रिटर्न दिया था।
- जब कीमतें इतनी तेजी से बढ़ती हैं, तो बड़े निवेशक (FIIs और स्मार्ट इन्वेस्टर्स) अपना पैसा निकालने लगते हैं। इसे Profit Booking कहते हैं। बाजार का यह नियम है—”जो तेजी से ऊपर जाता है, वह तेजी से नीचे भी आता है।”
2. अमेरिकी डॉलर की मजबूती (Strong US Dollar Index)
सोने-चांदी का दुश्मन ‘डॉलर’ है। शुक्रवार को डॉलर इंडेक्स (Dollar Index) में अचानक रिकवरी देखी गई।
- जब डॉलर मजबूत होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी (Gold-Silver) की कीमतें गिर जाती हैं क्योंकि दूसरी करेंसी वालों के लिए इसे खरीदना महंगा हो जाता है।

3. डोनाल्ड ट्रंप का बयान और फेड चेयरमैन (Trump Factor)
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और मौजूदा राजनीतिक हलचल के केंद्र Donald Trump के एक बयान ने आग में घी का काम किया।
- ट्रंप ने फेडरल रिजर्व (US Fed) की नीतियों की आलोचना की और नए चेयरमैन को लेकर संकेत दिए।
- बाजार को डर है कि अगर फेड का नया चेयरमैन ब्याज दरें (Interest Rates) नहीं घटाता, तो सोने में निवेश करने का कोई फायदा नहीं होगा।
4. मार्जिन बढ़ाना (CME Margin Hike)
ग्लोबल मार्केट में ट्रेडिंग को कंट्रोल करने के लिए CME Group (दुनिया का सबसे बड़ा डेरिवेटिव एक्सचेंज) ने चांदी के कॉन्ट्रैक्ट्स पर ‘मार्जिन’ (Margin Requirement) बढ़ा दिया।
- इसका मतलब यह हुआ कि ट्रेडर्स को अब सौदा करने के लिए ज्यादा पैसा जमा करना होगा। जिनके पास पैसा नहीं था, उन्हें मजबूरी में अपनी चांदी बेचनी पड़ी, जिससे पैनिक सेलिंग (Panic Selling) शुरू हो गई।
5. तकनीकी करेक्शन (Technical Correction)
तकनीकी चार्ट्स पर सोना और चांदी ‘ओवरबॉट’ (Overbought) जोन में थे। यानी इनकी कीमतें उनकी औकात से ज्यादा हो गई थीं। एक करेक्शन (सुधार) बहुत जरूरी था और वही हुआ।
भाग 3: आम आदमी पर असर – क्या गहने सस्ते होंगे? (Impact on Common Man)
इस खबर को सुनकर आम आदमी के मन में लड्डू फूट रहे हैं कि अब शादी-ब्याह के लिए गहने सस्ते मिलेंगे। लेकिन रुकिए, तस्वीर इतनी साफ नहीं है।
ज्वेलरी शॉप्स का हाल:
- MCX vs Retail: वायदा बाजार (MCX) में भाव टूटे हैं, लेकिन सर्राफा बाजार (Retail Market) में ज्वैलर्स तुरंत भाव कम नहीं करते।
- गैप: हो सकता है आपको ₹33,000 की पूरी राहत न मिले, लेकिन हां, सोने के भाव ₹1.8 लाख से घटकर ₹1.6 लाख या ₹1.5 लाख की रेंज में आ सकते हैं।
- चांदी: चांदी के बर्तन या पायल खरीदने वालों के लिए यह लॉटरी जैसा है। ₹1 लाख की गिरावट का मतलब है सीधी बचत
भाग 4: निवेशकों के लिए सलाह – खरीदें या बेचें? (Investment Strategy)
अब सबसे बड़ा सवाल—क्या यह ‘गिरते हुए चाकू’ (Falling Knife) को पकड़ने का समय है या दूर रहने का?
एक्सपर्ट्स की राय: बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि यह गिरावट एक Buying Opportunity (खरीदारी का मौका) है, लेकिन सावधानी के साथ।
- SIP करें: सारा पैसा एक साथ न लगाएं। हर 5-10 हजार की गिरावट पर थोड़ा-थोड़ा सोना खरीदें।
- लॉन्ग टर्म व्यू: 2026 के अंत तक सोने के भाव फिर से ₹2 लाख के पार जा सकते हैं। भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tension) अभी खत्म नहीं हुआ है।
- स्टॉप लॉस: अगर आप ट्रेडर हैं, तो बिना स्टॉप लॉस के काम न करें, क्योंकि बाजार अभी बेहद अस्थिर (Volatile) है।

भाग 5: ETF और डिजिटल गोल्ड का क्या हुआ?
सिर्फ फिजिकल गोल्ड ही नहीं, बल्कि Gold ETFs और सिल्वर ईटीएफ में भी भारी गिरावट आई है।
- शुक्रवार को गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ 15% से 20% तक टूट गए।
- जो लोग डिजिटल गोल्ड (Digital Gold) में निवेश करते हैं, उनके पोर्टफोलियो में लाल निशान दिख रहा होगा। लेकिन घबराएं नहीं, गोल्ड हमेशा लंबी अवधि में रिकवर कर जाता है।
भाग 6: इतिहास के पन्नों से – क्या पहले भी ऐसा हुआ है?
यह पहली बार नहीं है। 2013 और 2020 में भी सोने-चांदी में ऐसी ही बड़ी गिरावट देखी गई थी।
- सीख: हर बड़ी गिरावट के बाद सोना नई ऊंचाई पर पहुंचा है।
- सिल्वर का स्वभाव: चांदी को ‘गरीबों का सोना’ कहा जाता है, लेकिन यह सोने से ज्यादा चंचल (Volatile) होती है। ₹1 लाख गिरना और फिर ₹50,000 चढ़ना इसके लिए आम बात है।
निष्कर्ष: पैनिक न करें, मौके का फायदा उठाएं
अंत में, Gold-Silver Crash की यह खबर डरावनी लग सकती है, लेकिन समझदार निवेशक के लिए यह एक अवसर है। ₹1 लाख की गिरावट ने बाजार की हवा निकाल दी है और अब कीमतें वाजिब स्तर पर आ रही हैं।
अगर आपके घर में शादी है या आप निवेश करना चाहते हैं, तो अगले कुछ दिनों तक बाजार पर नजर रखें। जैसे ही भाव स्थिर (Stabilize) हों, खरीदारी शुरू करें। याद रखें, “डर के आगे जीत है, और गिरावट के आगे प्रॉफिट है।”
आपकी इस क्रैश पर क्या राय है? क्या आप सोना खरीदने जा रहे हैं? कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।
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FAQs:
इसके मुख्य कारण हैं—निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली (Profit Booking), डॉलर का मजबूत होना और ग्लोबल मार्केट में मार्जिन (Margin) का बढ़ना।
बाजार के जानकारों के मुताबिक, थोड़ी और गिरावट संभव है, लेकिन ₹1.45 लाख – ₹1.50 लाख के आसपास सोने को मजबूत सपोर्ट (Support) मिलेगा। वहां से भाव फिर चढ़ सकते हैं।
इसका मतलब है कि एमसीएक्स पर चांदी का भाव अपने उच्चतम स्तर (जो करीब 4 लाख था) से गिरकर 3 लाख के आसपास आ गया। यह वायदा बाजार की गिरावट है।
आप थोड़ा इंतजार कर सकते हैं ताकि बाजार स्थिर हो जाए। लेकिन अगर भाव आपकी रेंज में आ गए हैं, तो टुकड़ों में खरीदारी (Staggered Buying) शुरू करना समझदारी होगी।
लॉन्ग टर्म ट्रेंड अभी भी पॉजिटिव है। 2026 के अंत तक वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए सोना ₹2 लाख का स्तर छू सकता है।
