24 फरवरी, 2026: भारतीय सर्राफा बाजार (Bullion Market) में एक ऐसा भूचाल आया है जिसने निवेशकों और आम खरीदारों दोनों के होश उड़ा दिए हैं। ‘पीली धातु’ यानी सोने (Gold) ने अपने पिछले सभी रिकॉर्ड ध्वस्त करते हुए एक नया और ऐतिहासिक मुकाम हासिल कर लिया है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के खुदरा बाजार में 24 कैरेट (24K) शुद्ध सोने की कीमत ₹1,61,000 (एक लाख इकसठ हजार रुपये) प्रति 10 ग्राम के जादुई और मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गई है।
यह कोई सामान्य तेजी नहीं है; यह वैश्विक अर्थव्यवस्था, भू-राजनीतिक तनाव और निवेशकों के बदलते भरोसे का एक स्पष्ट संकेत है। जहां एक तरफ शेयर बाजारों (Stock Markets) में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ सोना ‘सुरक्षित निवेश’ (Safe Haven) के रूप में अपनी चमक लगातार बिखेर रहा है।
1. दिल्ली से लेकर देश भर में सोने की कीमतों का ताज़ा गणित (The Current Price Dynamics)
फरवरी 2026 के अंतिम सप्ताह में बाजारों के खुलते ही सोने की कीमतों में जो उछाल दर्ज किया गया, वह अभूतपूर्व था। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अप्रैल डिलीवरी वाले सोने के वायदा भाव (Future contracts) ने भी नया शिखर छुआ। आइए खुदरा बाजार के आंकड़ों पर एक नज़र डालते हैं:
24 कैरेट सोना (24K Gold)
- दिल्ली: ₹1,61,250 प्रति 10 ग्राम
- मुंबई: ₹1,61,100 प्रति 10 ग्राम
- अहमदाबाद/राजकोट: ₹1,61,150 प्रति 10 ग्राम (गुजरात के प्रमुख बुलियन मार्केट्स में भी भारी मांग)
- चेन्नई: ₹1,61,800 प्रति 10 ग्राम (स्थानीय करों के कारण थोड़ा अधिक)
22 कैरेट सोना (22K Gold – आभूषणों के लिए प्रयुक्त)
ज्वेलरी बनाने के लिए आमतौर पर 22 कैरेट सोने का इस्तेमाल होता है। इसकी कीमत भी दिल्ली में ₹1,47,800 प्रति 10 ग्राम के स्तर को पार कर गई है। अगर इसमें 3% जीएसटी (GST) और 10-15% मेकिंग चार्ज (Making Charges) जोड़ दिया जाए, तो आम ग्राहक को 10 ग्राम का एक साधारण आभूषण लगभग ₹1,70,000 से ₹1,75,000 के बीच पड़ रहा है।
चांदी (Silver) ने भी पकड़ी रफ्तार
सोने के इस रिकॉर्ड-तोड़ प्रदर्शन के पीछे-पीछे चांदी ने भी अपनी चाल तेज कर दी है। औद्योगिक मांग (Industrial Demand) और ग्रीन एनर्जी सेक्टर (Green Energy Sector) में इसके बढ़ते उपयोग के कारण, दिल्ली में चांदी की कीमत ₹1,25,000 प्रति किलोग्राम के स्तर को छू रही है।
2. सोने की कीमतों में आग लगाने वाले 5 प्रमुख वैश्विक कारण (Global Factors Driving the Surge)
सोने की कीमत केवल घरेलू मांग से तय नहीं होती; यह पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय कारकों पर निर्भर करती है। 2026 में इस ऐतिहासिक उछाल के पीछे मुख्य रूप से पांच ‘मैक्रो-इकोनॉमिक’ (Macro-economic) कारण जिम्मेदार हैं:
क. अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियां (US Federal Reserve Pivot)
सबसे बड़ा कारण अमेरिकी केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में लगातार की जा रही कटौती है। 2025 के अंत और 2026 की शुरुआत में, अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मंदी की चिंताओं को देखते हुए फेड ने ब्याज दरों में आक्रामक रूप से कटौती की है। जब ब्याज दरें गिरती हैं, तो डॉलर कमजोर होता है और बॉन्ड यील्ड (Bond Yields) घट जाती है। ऐसी स्थिति में निवेशक फिक्स्ड डिपॉजिट या बॉन्ड से पैसा निकालकर सोने जैसे सुरक्षित विकल्पों में निवेश करते हैं, जिससे सोने की मांग और कीमत दोनों बढ़ जाती हैं।

ख. ग्लोबल डी-डॉलराइजेशन (De-Dollarization) और केंद्रीय बैंकों की रिकॉर्ड खरीदारी
दुनिया भर के केंद्रीय बैंक (Central Banks) अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता कम कर रहे हैं। इस ट्रेंड को ‘डी-डॉलराइजेशन’ कहा जाता है। चीन (PBOC), रूस, और यहां तक कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी पिछले तीन सालों से लगातार अपने विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। जब दुनिया के सबसे बड़े बैंक टन के हिसाब से सोना खरीदेंगे, तो खुले बाजार में सप्लाई कम होगी और कीमतें आसमान छुएंगी ही।
ग. अभूतपूर्व भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions)
2026 की दुनिया राजनीतिक रूप से बेहद अस्थिर है। मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहे लंबे संघर्ष, ताइवान जलडमरूमध्य (Taiwan Strait) में बढ़ता तनाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं (Supply Chains) में लगातार आ रही बाधाओं ने एक ‘फियर फैक्टर’ (Fear Factor) पैदा कर दिया है। युद्ध और संकट के समय में सोना ही एकमात्र ऐसी ‘यूनिवर्सल करेंसी’ (Universal Currency) है जो कभी डिफ़ॉल्ट नहीं होती।
घ. मुद्रास्फीति (Inflation) की वापसी का डर
भले ही दुनिया के कई देशों ने महंगाई पर कुछ हद तक काबू पा लिया हो, लेकिन ऊर्जा और कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण ‘सेकंड वेव ऑफ इन्फ्लेशन’ (Second wave of inflation) का डर बना हुआ है। सोना पारंपरिक रूप से महंगाई के खिलाफ सबसे बेहतरीन हेज (Hedge against inflation) माना जाता है। जब कागजी मुद्रा (Fiat Currency) की क्रय शक्ति घटती है, तो सोने का मूल्य बढ़ता है।
ड़. वैश्विक शेयर बाजारों में भारी अस्थिरता (Stock Market Volatility)
2026 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और टेक स्टॉक्स में आए ‘करेक्शन’ (Correction) के कारण ग्लोबल शेयर मार्केट हिचकोले खा रहे हैं। बड़े संस्थागत निवेशक (Institutional Investors) अपने पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई (Diversify) करने और जोखिम कम करने के लिए सोने की ओर भाग रहे हैं।
3. भारतीय बाजार और आम उपभोक्ता पर इस उछाल का प्रभाव (Impact on the Domestic Market)
भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है। यहां सोना केवल एक धातु नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और स्त्रीधन (Stridhan) का प्रतीक है। ₹1.61 लाख के इस आंकड़े ने भारतीय आभूषण बाजार के समीकरणों को पूरी तरह से बदल दिया है।
शादियों के सीज़न (Wedding Season) पर असर
भारत में शादियों का सीज़न सोने की सबसे बड़ी मांग पैदा करता है। लेकिन अब, जब 10 ग्राम सोने की कीमत एक मध्यमवर्गीय परिवार की कई महीनों की आय के बराबर हो गई है, तो ‘वेडिंग बजट’ पूरी तरह से चरमरा गया है।
- बजट में कटौती: जो परिवार पहले शादी में 10-15 तोले (100-150 ग्राम) सोना देने की योजना बनाते थे, वे अब अपने बजट को सीमित करते हुए 5-7 तोले पर आ गए हैं।
- हल्के आभूषणों (Lightweight Jewelry) की मांग: 2026 में 14 कैरेट और 18 कैरेट सोने के आभूषणों की मांग में भारी उछाल आया है। ज्वैलर्स भी अब ‘मिनिमलिस्टिक डिज़ाइन’ (Minimalistic Design) वाले ऐसे आभूषण बना रहे हैं जो दिखने में भारी लगें लेकिन उनका वजन और कीमत कम हो।
पुरानी सोने की रीसाइक्लिंग (Gold Recycling) में तेजी
कीमतों के आसमान छूने का एक बड़ा प्रभाव यह हुआ है कि ‘गोल्ड रीसाइक्लिंग’ (Gold Recycling) या पुराना सोना बेचकर नया बनवाने का चलन अपने चरम पर है। कई परिवार अपनी पुरानी और भारी ज्वेलरी को पिघलवाकर आधुनिक और हल्के आभूषण बनवा रहे हैं, ताकि उन्हें अपनी जेब से अतिरिक्त नकद (Cash) न देना पड़े।

ज्वैलरी इंडस्ट्री के सामने अस्तित्व का संकट
जहां एक ओर सोने का मूल्य बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर वॉल्यूम (Volume) के हिसाब से आभूषणों की बिक्री में भारी गिरावट आई है। छोटे और मंझोले ज्वैलर्स (SME Jewelers) के लिए अपनी दुकानों का खर्च निकालना मुश्किल हो रहा है क्योंकि ‘वॉक-इन कस्टमर्स’ (Walk-in customers) की संख्या आधी रह गई है। केवल बड़े कॉर्पोरेट ब्रांड्स ही इस झटके को सह पा रहे हैं।
4. क्या यह निवेश का सही समय है? (Investment Perspective: Should You Buy Now?)
₹1.61 लाख प्रति 10 ग्राम की कीमत देखकर हर निवेशक के मन में यह सवाल उठना लाजमी है— क्या अब सोना खरीदना घाटे का सौदा तो नहीं? क्या यह अपने पीक (Peak) पर पहुंच चुका है?
वित्तीय सलाहकारों (Financial Advisors) और कमोडिटी एक्सपर्ट्स की राय इस पर स्पष्ट है:
लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए (For Long-Term Investors)
एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोने में निवेश को कभी भी ‘शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग’ के नज़रिए से नहीं देखना चाहिए। यदि आपका नज़रिया 5 से 10 साल का है, तो सोने में अभी भी निवेश किया जा सकता है। पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन के नियम के अनुसार, आपके कुल निवेश का 10% से 15% हिस्सा सोने में होना चाहिए। जब भी बाजार में थोड़ा करेक्शन (Correction) आए या कीमतें 2-4% गिरें, वह खरीदारी का ‘गोल्डन चांस’ होता है।
फिजिकल गोल्ड के बजाय ‘स्मार्ट गोल्ड’ (Smart Gold Options)
2026 में निवेश के लिए भौतिक सोना (Physical Gold – गहने, सिक्के, बिस्कुट) खरीदना सबसे कम समझदारी वाला विकल्प माना जा रहा है। इसके रखरखाव का जोखिम और मेकिंग चार्ज/जीएसटी का नुकसान होता है। इसके बजाय, स्मार्ट निवेशक इन विकल्पों की ओर जा रहे हैं:
- सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (Sovereign Gold Bonds – SGB): यह भारत सरकार (RBI) द्वारा जारी किया जाता है। इसमें न केवल सोने की कीमतों में वृद्धि का फायदा मिलता है, बल्कि आपके निवेश पर हर साल 2.5% का निश्चित ब्याज (Interest) भी मिलता है। साथ ही, मैच्योरिटी (Maturity) पर कैपिटल गेन टैक्स (Capital Gain Tax) से भी पूरी छूट होती है।
- गोल्ड ईटीएफ (Gold ETFs) और म्यूचुअल फंड: शेयर बाजार के माध्यम से सोने में निवेश करने का यह सबसे आसान तरीका है। आप इसे 1 ग्राम के मूल्य के बराबर यूनिट्स में खरीद और बेच सकते हैं। इसमें तरलता (Liquidity) बहुत अधिक होती है।
- डिजिटल गोल्ड (Digital Gold): यूपीआई ऐप्स और वेल्थ मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म्स के जरिए आप ₹10 से भी सोना खरीदना शुरू कर सकते हैं। यह युवा निवेशकों (Gen Z and Millennials) के बीच सबसे ज्यादा लोकप्रिय हो रहा है।
5. भविष्य का अनुमान: 2026-2027 में सोने की चाल (Future Predictions and Road Ahead)
अब सवाल यह है कि सोने का अगला पड़ाव क्या होगा? क्या यह रैली रुकेगी या सोना ₹1.75 लाख या ₹2 लाख का जादुई आंकड़ा भी छुएगा?
अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों (जैसे Goldman Sachs, J.P. Morgan) और घरेलू कमोडिटी रिसर्च एजेंसियों की 2026-2027 की भविष्यवाणियां कुछ इस प्रकार हैं:
- बुल केस (Bull Case – तेजी का परिदृश्य): यदि अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती का चक्र आक्रामक रूप से जारी रहता है और भू-राजनीतिक मोर्चे पर कोई बड़ा युद्ध छिड़ता है (विशेषकर एशिया या मध्य पूर्व में), तो 2026 के अंत तक या 2027 की शुरुआत में दिल्ली के सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोना ₹1,75,000 से ₹1,80,000 प्रति 10 ग्राम के स्तर को आसानी से छू सकता है।
- बेस केस (Base Case – सामान्य परिदृश्य): यदि वैश्विक अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे पटरी पर लौटती है और मंदी का टल जाती है, तो सोने की कीमतों में एक ‘कंसोलिडेशन’ (Consolidation) देखने को मिल सकता है। इसका मतलब है कि कीमतें ₹1,55,000 से ₹1,65,000 के दायरे (Range) में कुछ समय तक घूमती रहेंगी और मुनाफ़ावसूली (Profit booking) के कारण मामूली गिरावट भी आ सकती है।
‘सोना’ ही है असली खरा सोना
सोने का ₹1.61 लाख के पार जाना एक ऐतिहासिक आर्थिक घटना है। यह हमें याद दिलाता है कि चाहे तकनीक कितनी भी उन्नत क्यों न हो जाए, चाहे हम क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) और डिजिटल एसेट्स की दुनिया में कितने भी आगे बढ़ जाएं, संकट के समय में इंसान का सबसे बड़ा आर्थिक सहारा ‘सोना’ ही होता है।
हजारों सालों से सोना धन के संरक्षण (Preservation of Wealth) का सबसे प्रामाणिक माध्यम रहा है और 2026 के ये आंकड़े इस बात पर एक बार फिर मुहर लगा रहे हैं। आम उपभोक्ता के लिए आभूषण खरीदना भले ही एक महंगा सपना बनता जा रहा हो, लेकिन एक निवेशक के नजरिए से सोना अभी भी अपनी चमक से पोर्टफोलियो को रोशन कर रहा है।
