जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला पर बुधवार (11 मार्च 2026) की रात जम्मू में एक जानलेवा हमला हुआ। यह हमला उस समय हुआ जब वह जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में स्थित रॉयल पार्क (Royal Park) में एक शादी समारोह में शामिल होने के बाद बाहर निकल रहे थे। फारूक अब्दुल्ला पर जानलेवा हमला की इस खबर ने न केवल प्रदेश बल्कि पूरे देश में सनसनी फैला दी है।
अंधाधुंध फायरिंग की कोशिश के दौरान हमलावर डॉ. अब्दुल्ला के बिल्कुल करीब पहुँच गया था, लेकिन उनकी सुरक्षा में तैनात NSG (National Security Guard) के जवानों की मुस्तैदी ने एक बड़ी त्रासदी को टाल दिया।
1. फारूक अब्दुल्ला पर जानलेवा हमला: आखिर उस रात क्या हुआ?
11 मार्च 2026 की रात लगभग 10:30 बजे, डॉ. फारूक अब्दुल्ला पार्टी के एक नेता के बेटे के विवाह समारोह से विदा ले रहे थे। उनके साथ जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी और मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी भी मौजूद थे।
हमले का आंखों देखा हाल: जैसे ही डॉ. अब्दुल्ला मैरिज हॉल के मंडप से बाहर निकले, भीड़ में छिपा एक व्यक्ति अचानक उनके पीछे आया। उसने अपनी कमर से .32 बोर की लाइसेंसी रिवॉल्वर निकाली और डॉ. अब्दुल्ला की गर्दन के पीछे सटाकर ट्रिगर दबाने की कोशिश की। इससे पहले कि वह कामयाब होता, उनके निजी सुरक्षा दल (NSG क्लोज प्रोटेक्शन टीम) ने हमलावर का हाथ ऊपर की तरफ धकेल दिया। गोली चली, लेकिन वह डॉ. अब्दुल्ला के सिर के पास से निकल गई। तुरंत बाद, सुरक्षाकर्मियों और वहां मौजूद लोगों ने हमलावर को दबोच लिया।

2. “20 साल से कर रहा था इंतजार”: हमलावर का चौंकाने वाला खुलासा
सुरक्षा बलों ने हमलावर को मौके से गिरफ्तार कर गंग्याल थाने (Gangyal Police Station) पहुँचाया। पूछताछ के दौरान उसने जो खुलासे किए, वे बेहद डराने वाले हैं।
हमलावर की पहचान और कबूलनामा:
- नाम: कमल सिंह जमवाल (63 वर्ष), निवासी- पुरानी मंडी, जम्मू।
- पेशेवर पृष्ठभूमि: वह एक स्थानीय व्यवसायी है और खुद को ‘जागरण मंच’ नामक एक अल्पज्ञात संगठन का अध्यक्ष बताता है।
- मकसद: उसने पुलिस को दिए बयान में कहा, “मैं पिछले 20 साल से फारूक अब्दुल्ला को मारने की कोशिश कर रहा था। यह मेरा व्यक्तिगत एजेंडा था। आज मुझे मौका मिला, लेकिन वह बच गए।”
पुलिस के अनुसार, हमलावर हमले के समय नशे की हालत में था, लेकिन उसका बयान उसकी सोची-समझी साजिश (Premeditation) की ओर इशारा करता है।
3. सुरक्षा में महाचूक: Z+ सुरक्षा के बावजूद हमला कैसे हुआ?
एक सुरक्षा विशेषज्ञ के नजरिए से (EEAT Analysis), यह घटना जम्मू-कश्मीर प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है। डॉ. फारूक अब्दुल्ला को भारत में उपलब्ध सर्वोच्च Z+ श्रेणी की NSG सुरक्षा प्राप्त है।
क्रिटिकल कंटेंट विश्लेषण (Critical Content Analysis):
- पॉइंट-ब्लैंक रेंज: मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ‘एक्स’ (X) पर सवाल उठाया कि “एक व्यक्ति लोडेड पिस्टल के साथ Z+ सुरक्षा वाले पूर्व मुख्यमंत्री के इतने करीब (Point-blank range) कैसे पहुँच गया?” यह एक गंभीर ‘प्रॉक्सिमिटी ब्रीच’ (Proximity Breach) है।
- लाइसेंसी हथियार: एक व्यक्ति शादी समारोह में लाइसेंसी हथियार लेकर कैसे प्रवेश कर गया? क्या शादी समारोह में सुरक्षा जांच (Frisking) नहीं हो रही थी?
- हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम: समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री, वर्तमान उपमुख्यमंत्री और सलाहकार मौजूद थे। ऐसे में वेन्यू पर त्रिस्तरीय सुरक्षा (Three-tier security) होनी चाहिए थी, जो स्पष्ट रूप से विफल रही।
4. राजनीतिक प्रतिक्रिया: केंद्र बनाम राज्य
फारूक अब्दुल्ला पर जानलेवा हमला के बाद जम्मू-कश्मीर की राजनीति गरमा गई है। नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस ने इस घटना के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) और उपराज्यपाल (LG) प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है।
- उमर अब्दुल्ला: उन्होंने इसे ‘अल्लाह का करम’ बताया कि उनके पिता सुरक्षित हैं, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए।
- महबूबा मुफ्ती: उन्होंने हमले की कड़ी निंदा करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
- पुलिस प्रशासन: जम्मू के पुलिस महानिरीक्षक (IGP) ने बताया कि धारा 109 (हत्या का प्रयास) और आर्म्स एक्ट के तहत FIR दर्ज कर ली गई है और मामले की गहनता से जांच की जा रही है कि क्या इसमें कोई बड़ा षड्यंत्र शामिल है।

5. जम्मू-कश्मीर में बदलता सुरक्षा परिदृश्य
यह हमला उस समय हुआ है जब केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में ‘सामान्य स्थिति’ (Normalcy) का दावा कर रही है। हालांकि पुलिस ने प्रारंभिक तौर पर किसी ‘आतंकी एंगल’ (Terror Angle) से इनकार किया है, लेकिन एक राजनेता को निजी रंजिश में निशाना बनाया जाना भी कानून-व्यवस्था की बदहाली का संकेत है।
आगे की राह: इस घटना के बाद, राज्य में सभी हाई-प्रोफाइल नेताओं की सुरक्षा की समीक्षा (Security Review) शुरू कर दी गई है। भविष्य में सार्वजनिक और निजी कार्यक्रमों में हथियारों के प्रवेश को लेकर और भी सख्त नियम बनाए जाने की संभावना है।
निष्कर्षतः, फारूक अब्दुल्ला पर जानलेवा हमला एक ऐसी त्रासदी थी जो बस एक पल की मुस्तैदी से टल गई। 88 वर्षीय डॉ. फारूक अब्दुल्ला सुरक्षित हैं, लेकिन कमल सिंह जमवाल के ’20 साल पुराने मिशन’ ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। यह हमला केवल एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और सुरक्षा तंत्र पर प्रहार है। प्रशासन को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी चूक दोबारा न हो, ताकि राज्य के नेता और जनता खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें।

अंकिता गौतम एक अभिनेत्री, मॉडल और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं। Tez Khabri पर वे मनोरंजन जगत (Entertainment), बॉलीवुड और लाइफस्टाइल से जुड़ी हर छोटी-बड़ी अपडेट साझा करती हैं। अपनी रचनात्मक शैली और सोशल मीडिया पर मजबूत पकड़ के कारण, वे युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।
