बोर्ड परीक्षाओं में 'दो बार परीक्षा'

शिक्षा मंत्रालय और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF) द्वारा बोर्ड परीक्षाओं में किए गए इस क्रांतिकारी बदलाव का उद्देश्य छात्रों पर से मानसिक तनाव कम करना और रट्टा मारकर पढ़ने की संस्कृति को खत्म करना है।

बोर्ड परीक्षाओं में ‘दो बार परीक्षा’

1. ‘दो बार बोर्ड परीक्षा’ का विकल्प क्या है?

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत अब कक्षा 10वीं और 12वीं के छात्रों को एक ही शैक्षणिक वर्ष में दो बार बोर्ड परीक्षा में बैठने का अवसर दिया जा रहा है।

बोर्ड परीक्षाओं में 'दो बार परीक्षा'
  • विकल्प की स्वतंत्रता: यह छात्र पर निर्भर करता है कि वह पहली परीक्षा में बैठना चाहता है, दूसरी में या दोनों में। यह अनिवार्य (Compulsory) नहीं है कि आपको दोनों ही बार परीक्षा देनी ही होगी।
  • बेस्ट स्कोर (Best Score): यदि कोई छात्र दोनों परीक्षाओं में बैठता है, तो जिस परीक्षा में उसके ज्यादा अंक (Marks) आएंगे, उसे ही अंतिम परिणाम (Final Result) के लिए चुना जाएगा।

2. यह व्यवस्था क्यों लागू की गई? (प्रमुख उद्देश्य)

  • तनाव में कमी: अक्सर छात्र एक ही परीक्षा के दबाव में प्रदर्शन नहीं कर पाते। दूसरा मौका मिलने से “साल बर्बाद होने” का डर खत्म हो जाता है।
  • सुधार का अवसर: अगर किसी छात्र की तैयारी पहली परीक्षा के समय पूरी नहीं है या वह बीमार पड़ जाता है, तो वह दूसरी परीक्षा में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकता है।
  • कोचिंग कल्चर पर लगाम: रट्टा मारकर एक बार परीक्षा देने के बजाय, छात्र अब अपनी समझ और वैचारिक स्पष्टता (Conceptual Clarity) पर ध्यान दे सकेंगे।

3. परीक्षा का समय और कैलेंडर

शिक्षा मंत्रालय के रोडमैप के अनुसार, परीक्षाओं का आयोजन कुछ इस प्रकार हो सकता है:

  1. पहली परीक्षा: नवंबर-दिसंबर के आसपास।
  2. दूसरी परीक्षा: फरवरी-मार्च के आसपास।

इससे छात्रों को पहली परीक्षा के बाद अपनी कमियों को पहचानने और उन्हें सुधारने के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा।

बोर्ड परीक्षाओं में 'दो बार परीक्षा'

4. शिक्षकों और स्कूलों के लिए बदलाव

  • सिलेबस पूरा करना: स्कूलों को अब समय पर सिलेबस पूरा करने की चुनौती होगी ताकि छात्र पहली परीक्षा के लिए तैयार हो सकें।
  • ऑन-डिमांड परीक्षा की ओर कदम: यह व्यवस्था भविष्य में “ऑन-डिमांड” परीक्षा (जब छात्र तैयार हो, तब परीक्षा दे) की दिशा में पहला कदम है।

5. छात्रों के लिए इसके क्या फायदे हैं?

विशेषतालाभ
कोई जोखिम नहींएक बार परीक्षा खराब होने पर भी साल खराब नहीं होगा।
बेहतर अंकछात्रों के पास अपने स्कोर को बेहतर बनाने का वास्तविक मौका होगा।
प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ तालमेलछात्र JEE या NEET जैसी परीक्षाओं के साथ अपनी बोर्ड परीक्षाओं को बेहतर तरीके से मैनेज कर पाएंगे।
लचीलापनछात्र अपनी तैयारी के स्तर के अनुसार तय कर सकते हैं कि उन्हें कब परीक्षा देनी है।

6. वर्तमान स्थिति (2026 अपडेट)

CBSE और कई राज्य बोर्डों ने इस पैटर्न को अपनाना शुरू कर दिया है। 2026 के सत्र से इसे पूर्ण रूप से लागू किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि भविष्य में छात्र अपनी पसंद के विषयों की परीक्षा अलग-अलग समय पर भी दे सकें।

निष्कर्ष: यह कदम भारतीय शिक्षा प्रणाली को वैश्विक मानकों के करीब ले जाता है, जहाँ मूल्यांकन केवल ‘एक दिन’ के प्रदर्शन पर नहीं, बल्कि छात्र की निरंतर सीखने की क्षमता पर आधारित होता है।

By Isha Patel

Isha Patel Tez Khabri के साथ जुड़ी एक समाचार रिपोर्टर हैं। वे भारत और राज्यों से जुड़ी ताज़ा, ब्रेकिंग और जनहित से संबंधित खबरों को कवर करती हैं। Isha Patel शिक्षा, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर सत्यापित व तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करती हैं।

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