दिल्ली-पंजाब में पारा हाई

24 फरवरी, 2026: भारतीय उपमहाद्वीप में मौसम का मिजाज अब पारंपरिक कैलेंडर के हिसाब से नहीं चलता। एक समय था जब फरवरी का महीना ‘वसंत’ (Spring) की सुहानी हवाओं, सरसों के पीले खेतों और हल्की गुलाबी ठंड के लिए जाना जाता था। लेकिन साल 2026 में मौसम ने एक ऐसा करवट लिया है जिसने मौसम विज्ञानियों (Meteorologists), किसानों और आम जनता सभी को चिंता में डाल दिया है। उत्तर भारत—विशेषकर दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश—में समय से पहले ही भयंकर गर्मी ने दस्तक दे दी है। फरवरी के अंतिम सप्ताह में ही पारा 32 से 34 डिग्री सेल्सियस के बीच झूल रहा है, जो सामान्य से 5-7 डिग्री अधिक है।

हर कोई यही सोच रहा है कि अगर फरवरी में ही चिलचिलाती धूप का यह हाल है, तो मई-जून की गर्मियां कैसी होंगी? हालांकि, मौसम विभाग (IMD) के नवीनतम पूर्वानुमानों के अनुसार, मार्च के पहले सप्ताह में पड़ने वाले होली के त्योहार के आस-पास मौसम में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

1. 2026 में वसंत का गायब होना: मौसम का बदलता स्वरूप

भारतीय ऋतुचक्र में वसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा (Rituraj) कहा जाता है। यह वह समय होता है जब सर्दियां विदा ले रही होती हैं और गर्मियां शुरू होने वाली होती हैं। लेकिन 2026 के फरवरी महीने ने साबित कर दिया है कि जलवायु परिवर्तन (Climate Change) अब भविष्य की चेतावनी नहीं, बल्कि वर्तमान की कठोर सच्चाई है।

तापमान के टूटते रिकॉर्ड

फरवरी 2026 के आंकड़े स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) और पंजाब के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान ने पिछले एक दशक के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। जहां आमतौर पर फरवरी के अंत में दिन का तापमान 24-25 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता है, वहीं इस साल यह 30 डिग्री का आंकड़ा बहुत पहले ही पार कर चुका है। रातों का न्यूनतम तापमान भी तेजी से बढ़ा है, जिससे घरों में पंखे और एसी (AC) समय से पहले ही चालू हो गए हैं।

‘शॉर्ट स्प्रिंग’ (Short Spring) की घटना

मौसम विशेषज्ञों ने इस नई परिघटना को ‘शॉर्ट स्प्रिंग’ या वसंत का सिकुड़ना नाम दिया है। सर्दियों के ठीक बाद सीधे चिलचिलाती गर्मी का आना न केवल मानव शरीर के लिए झटके जैसा है, बल्कि यह पूरे पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को असंतुलित कर रहा है। पेड़ों पर समय से पहले फूल आ रहे हैं और मुड़झा रहे हैं, जो एक गंभीर पर्यावरणीय संकेत है।

दिल्ली-पंजाब में पारा हाई

2. आखिर क्यों फरवरी में ही आग उगल रहा है सूरज? (Meteorological Reasons)

दिल्ली, पंजाब और पूरे उत्तर-पश्चिम भारत में समय से पहले पारा हाई होने के पीछे कोई एक कारण नहीं है, बल्कि कई मौसम संबंधी घटनाओं का एक जटिल कॉकटेल है। आइए इसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझते हैं:

क. पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) की कमी

उत्तर भारत में सर्दियों और वसंत की शुरुआत में होने वाली बारिश मुख्य रूप से ‘पश्चिमी विक्षोभ’ के कारण होती है। ये भूमध्य सागर (Mediterranean Sea) से उठने वाले तूफान हैं जो भारत के उत्तरी हिस्सों में नमी और बारिश लाते हैं। 2026 के जनवरी और फरवरी महीने में कोई भी ‘सक्रिय’ (Active) पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत के मैदानी इलाकों से नहीं टकराया। बारिश न होने के कारण हवा में नमी खत्म हो गई और शुष्क, गर्म हवाओं ने तापमान बढ़ा दिया।

ख. एंटी-साइक्लोनिक सर्कुलेशन (Anti-Cyclonic Circulation)

राजस्थान और गुजरात के ऊपर एक मजबूत ‘एंटी-साइक्लोनिक सर्कुलेशन’ बना हुआ है। इसके कारण हवाएं ऊपर से नीचे की ओर बैठ रही हैं (Subsidence of air)। जब हवा नीचे की ओर आती है, तो वह संकुचित (Compress) होती है और गर्म हो जाती है। यही गर्म हवाएं जब राजस्थान से होते हुए दिल्ली, पंजाब और हरियाणा की ओर बढ़ती हैं, तो पूरा इलाका भट्टी की तरह तपने लगता है।

ग. अल नीनो (El Niño) का दूरगामी प्रभाव

यूं तो 2026 में वैश्विक मौसम चक्र बदल रहा है, लेकिन प्रशांत महासागर में हुए पिछले वर्षों के अल नीनो प्रभाव के अवशेष अभी भी वायुमंडल में मौजूद हैं, जो वैश्विक तापमान (Global Warming) को बढ़ा रहे हैं। इसके साथ ही, स्थानीय स्तर पर प्रदूषण और कंक्रीट के जंगलों (Urban Heat Island Effect) ने शहरों को ‘हीट ट्रैप’ बना दिया है।

3. दिल्ली-एनसीआर का हाल: प्रदूषण और गर्मी का ‘डबल अटैक’

देश की राजधानी दिल्ली के लिए मौसम का यह बदलाव किसी दोहरे झटके से कम नहीं है। सर्दियां खत्म होते ही जहां लोगों को स्मॉग (Smog) से राहत मिलने की उम्मीद थी, वहीं अब गर्मी और धूल ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है।

  • अर्बन हीट आइलैंड (Urban Heat Island): दिल्ली में बेतहाशा निर्माण, पेड़ों की कटाई और कंक्रीट की संरचनाओं के कारण शहर एक ‘हीट आइलैंड’ में तब्दील हो गया है। दिनभर इमारतें और सड़कें सूरज की गर्मी सोखती हैं और रात में उसे छोड़ती हैं, जिससे रात का तापमान भी कम नहीं हो पाता।
  • बढ़ता पावर लोड: फरवरी के अंतिम सप्ताह में ही दिल्ली का पावर ग्रिड भारी डिमांड का सामना कर रहा है। कार्यालयों और घरों में एयर कंडीशनर (AC) फुल स्पीड पर चल रहे हैं। ऊर्जा विभाग के अनुसार, 2026 के फरवरी में बिजली की मांग ने पिछले 5 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।
  • धूल भरी आंधियां: शुष्क मौसम के कारण राजस्थान की ओर से आने वाली हवाएं अपने साथ भारी मात्रा में धूल ला रही हैं, जिससे दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) फिर से ‘खराब’ या ‘बहुत खराब’ श्रेणी में पहुंच गया है।

4. पंजाब और हरियाणा में ‘कृषि संकट’: किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें

भारत का पेट भरने वाले राज्य—पंजाब और हरियाणा—में यह अगेती गर्मी सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरी है। यह समय रबी की फसल (Rabi Crop), विशेषकर गेहूं (Wheat), के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है।

‘टर्मिनल हीट स्ट्रेस’ (Terminal Heat Stress) का खतरा

गेहूं की फसल को पकने और दाने में दूध भरने (Grain filling stage) के लिए एक आदर्श और ठंडे तापमान की आवश्यकता होती है। जब फरवरी-मार्च में तापमान अचानक 32-35 डिग्री तक पहुंच जाता है, तो फसल ‘टर्मिनल हीट स्ट्रेस’ का शिकार हो जाती है। इससे गेहूं का दाना सिकुड़ जाता है, उसका वजन कम हो जाता है और अंततः प्रति एकड़ पैदावार (Yield) में भारी गिरावट आती है।

  • 2022 की यादें ताज़ा: किसानों को 2022 का वह साल याद आ रहा है जब मार्च में अचानक आई हीटवेव (Heatwave) ने गेहूं की फसल को तबाह कर दिया था और भारत को गेहूं के निर्यात पर रोक लगानी पड़ी थी। 2026 में भी ठीक वैसा ही पैटर्न बनता दिख रहा है।
  • सरसों और सब्जियों पर असर: केवल गेहूं ही नहीं, सरसों (Mustard) और जल्दी बोई गई सब्जियों की फसलों पर भी इस बेमौसम गर्मी का नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। कीड़ों (Pests) और फंगल इन्फेक्शन का खतरा बढ़ गया है क्योंकि गर्म और शुष्क मौसम हानिकारक कीटों के पनपने के लिए अनुकूल होता है।
दिल्ली-पंजाब में पारा हाई

कृषि वैज्ञानिकों की सलाह

लुधियाना स्थित पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) और करनाल के अनुसंधान केंद्रों ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे अपनी फसलों में हल्की सिंचाई (Light Irrigation) करें ताकि खेत का सूक्ष्म-तापमान (Micro-climate) थोड़ा कम रहे और फसल को लू के थपेड़ों से बचाया जा सके। पोटाश (Potash) का छिड़काव भी फसल को गर्मी के तनाव से बचाने में मदद कर सकता है।

5. स्वास्थ्य पर बेमौसम गर्मी का प्रहार (Health Impacts)

मौसम में यह अचानक आया बदलाव मानव शरीर के लिए अनुकूल नहीं है। अस्पतालों और क्लीनिकों में मरीजों की संख्या अचानक बढ़ गई है। सुबह और शाम हल्की ठंड, लेकिन दिन में तेज धूप के कारण शरीर का तापमान नियंत्रण तंत्र (Thermoregulation) भ्रमित हो जाता है।

  • वायरल फीवर और फ्लू: दिन और रात के तापमान में 15 से 18 डिग्री का भारी अंतर (Diurnal Temperature Variation) वायरस और बैक्टीरिया के पनपने के लिए सबसे मुफीद होता है। दिल्ली और पंजाब में वायरल फीवर, सर्दी-खांसी और गले के संक्रमण के मामले तेजी से बढ़े हैं।
  • डिहाइड्रेशन (Dehydration): लोग अभी भी सर्दियों की मानसिकता में हैं और पर्याप्त पानी नहीं पी रहे हैं, जबकि शरीर को दिन की गर्मी में अधिक तरल पदार्थ की आवश्यकता होती है। इससे डिहाइड्रेशन, सिरदर्द और थकान की समस्या आम हो गई है।
  • स्किन एलर्जी: तेज धूप और हवा में धूल के कणों के कारण त्वचा पर चकत्ते (Rashes) और एलर्जी के मामले सामने आ रहे हैं।

डॉक्टरों की सलाह: स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सूती (Cotton) और ढीले कपड़े पहनें, दिन भर में कम से कम 3-4 लीटर पानी पिएं, और सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच सीधे धूप में निकलने से बचें।

6. आर्थिक प्रभाव: बाजारों में ‘समर इकॉनमी’ (Summer Economy) की जल्दी शुरुआत

मौसम का सीधा असर अर्थव्यवस्था और बाजार के रुझानों पर पड़ता है। 2026 में गर्मी जल्दी आने के कारण बाजारों का परिदृश्य पूरी तरह से बदल गया है।

  • विंटर वियर (Winter Wear) बाजार धड़ाम: जो व्यापारी जनवरी-फरवरी में स्वेटर, जैकेट और ऊनी कपड़ों की सेल लगाकर मुनाफा कमाने की उम्मीद कर रहे थे, उन्हें भारी नुकसान हुआ है। लोग अब ऊनी कपड़ों की तरफ देख भी नहीं रहे हैं।
  • कूलिंग अप्लायंसेज की बंपर सेल: दूसरी ओर, इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में बहार आ गई है। AC, कूलर, पंखे और रेफ्रिजरेटर की बिक्री में फरवरी महीने में ही उछाल आ गया है। कंपनियां जो मार्च के मध्य में अपने समर कैंपेन (Summer Campaigns) लॉन्च करती थीं, उन्होंने फरवरी में ही अपने विज्ञापन शुरू कर दिए हैं।
  • कोल्ड बेवरेज और आइसक्रीम इंडस्ट्री: कोल्ड ड्रिंक्स, आइसक्रीम, छाछ, लस्सी और बोतलबंद पानी की मांग भी बाजार में तेजी से बढ़ गई है।

7. होली पर क्या बदलेगा मौसम का मिजाज? (The Holi Forecast 2026)

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह गर्मी ऐसे ही लगातार बढ़ती रहेगी या कोई राहत मिलने की उम्मीद है? रंगों का त्योहार होली 2026 में मार्च के पहले सप्ताह (3-4 मार्च) में मनाया जाना है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और निजी मौसम एजेंसियों (जैसे Skymet) के पूर्वानुमान मॉडल एक राहत भरी खबर दे रहे हैं।

दिल्ली-पंजाब में पारा हाई

एक नए पश्चिमी विक्षोभ की आहट

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, 28 फरवरी से 2 मार्च के बीच एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) हिमालयी क्षेत्रों में दस्तक दे सकता है।

  • पहाड़ों पर बर्फबारी: इस सिस्टम के प्रभाव से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचे इलाकों में बारिश और ताज़ा बर्फबारी होने की संभावना है।
  • मैदानों में बारिश और आंधी: जब पहाड़ों पर बर्फबारी होगी, तो उसका सीधा असर मैदानी इलाकों पर पड़ेगा। पूर्वानुमान है कि होली के ठीक आसपास (2 से 4 मार्च के बीच) पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गरज-चमक (Thunderstorm) के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।
  • तापमान में गिरावट: बारिश और तेज हवाओं (Gusty winds) के कारण अचानक बढ़ा हुआ तापमान 4 से 6 डिग्री तक नीचे आ सकता है। इससे होली के त्योहार पर मौसम सुहावना हो जाएगा और लोगों को इस चिलचिलाती अगेती गर्मी से बड़ी राहत मिलेगी।

किसानों के लिए दोधारी तलवार

हालांकि आम जनता के लिए बारिश राहत की खबर है, लेकिन किसानों के लिए यह ‘दोधारी तलवार’ (Double-edged sword) साबित हो सकती है। अगर बारिश हल्की होती है, तो यह गर्मी से झुलस रही गेहूं की फसल के लिए ‘अमृत’ का काम करेगी। लेकिन अगर बारिश के साथ ओलावृष्टि (Hailstorm) या तेज हवाएं चलती हैं, तो पकी हुई फसल खेतों में बिछ सकती है (Lodging of crop), जिससे भारी नुकसान होगा।

8. जलवायु परिवर्तन: ‘द एलीफेंट इन द रूम’ (Climate Change Reality)

हमें इस बात को समझना होगा कि 2026 का यह मौसम कोई एक साल का अपवाद (Anomaly) नहीं है। यह एक बड़े वैश्विक पैटर्न का हिस्सा है।

पिछले कुछ दशकों के डेटा का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि भारत में वसंत ऋतु की अवधि लगातार कम हो रही है। संयुक्त राष्ट्र के जलवायु पैनल (IPCC) की रिपोर्ट भी यही चेतावनी देती है कि दक्षिण एशिया में ‘एक्सट्रीम वेदर इवेंट्स’ (Extreme Weather Events) की आवृत्ति बढ़ेगी।

  • ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन: जीवाश्म ईंधन (Fossil fuels) के अंधाधुंध उपयोग और वनों की कटाई के कारण वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर खतरे के निशान से ऊपर है।
  • नीतिगत बदलाव की आवश्यकता: अब समय आ गया है कि सरकारें और आम नागरिक केवल ‘हीटवेव अलर्ट’ जारी करने तक सीमित न रहें। शहरी नियोजन (Urban Planning) में बदलाव, ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाना, जल संचयन (Water Harvesting) और रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) को अपनाना अब कोई विकल्प नहीं, बल्कि मजबूरी बन गया है।

9. नागरिकों के लिए एक्शन प्लान: गर्मी को कैसे मात दें?

2026 की इस बदलती जलवायु में, हमें अपनी जीवनशैली को भी उसी के अनुसार ढालना होगा। यहाँ कुछ व्यावहारिक उपाय दिए गए हैं:

  1. हाइड्रेशन को प्राथमिकता दें: घर से बाहर निकलते समय पानी की बोतल हमेशा साथ रखें। नींबू पानी, नारियल पानी और ताजे फलों के रस का सेवन बढ़ाएं।
  2. पर्यावरण के अनुकूल कूलिंग: एयर कंडीशनर का तापमान 24 डिग्री पर सेट करें। यह न केवल बिजली बचाता है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बेहतर है।
  3. पौधरोपण: अपने घर के आसपास, बालकनी में या छत पर पौधे लगाएं। पौधे वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) के माध्यम से आसपास के तापमान को ठंडा रखते हैं।
  4. पक्षियों के लिए पानी: अपनी छत या बालकनी में पक्षियों और बेजुबान जानवरों के लिए मिट्टी के बर्तन में पानी जरूर रखें। यह बेमौसम गर्मी उनके लिए भी उतनी ही जानलेवा है।
  5. किसानों का समर्थन: बाजार से स्थानीय और मौसमी फल-सब्जियां ही खरीदें ताकि जलवायु की मार झेल रहे स्थानीय किसानों को आर्थिक संबल मिल सके।

2026 के मौसम का सबक

समय से पहले आई यह गर्मी हमें एक स्पष्ट संदेश दे रही है—प्रकृति अपने नियम बदल रही है क्योंकि हमने उसके नियमों के साथ खिलवाड़ किया है। दिल्ली की तपती सड़कें और पंजाब के झुलसते खेत सिर्फ हेडलाइंस नहीं हैं, बल्कि यह हमारे भविष्य की एक डरावनी झलक है।

हालांकि 2026 की होली पर पश्चिमी विक्षोभ के कारण मौसम बदलने और बारिश होने की पूरी उम्मीद है, जो इस ‘मिनी हीटवेव’ से फौरी राहत दिलाएगी। लेकिन यह राहत अस्थायी होगी। असली चुनौती अप्रैल, मई और जून की भीषण गर्मी से निपटने की है, जिसके लिए प्रशासनिक मशीनरी, स्वास्थ्य विभाग और आम जनता को अभी से कमर कस लेनी चाहिए।

यह प्रकृति का अलार्म बेल है। अगर हम अब भी नहीं जागे, तो आने वाले वर्षों में ‘वसंत’ केवल इतिहास की किताबों और कविताओं में ही सिमट कर रह जाएगा।

By Vivan Verma

विवान तेज खबरी (Tez Khabri) के समाचार रिपोर्टर हैं, जो ब्रेकिंग न्यूज़ और राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को कवर करते हैं। विवान तथ्यात्मक रिपोर्टिंग और तेज अपडेट के लिए जाने जाते हैं और प्रशासनिक व जनहित से जुड़े मामलों पर नियमित लेखन करते हैं।

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