दुबई :चमक-दमक, गगनचुंबी इमारतें, बुर्ज खलीफा की शान और दुनिया भर के पर्यटकों के लिए ‘सपनों का शहर’ कहा जाने वाला दुबई आज एक अजीब सी खामोशी और खौफ के साए में है। मध्य पूर्व (Middle East) में भड़की युद्ध की आग अब केवल ईरान और इजरायल की सीमाओं तक सीमित नहीं रही है, बल्कि इसकी आंच पूरे खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) को झुलसा रही है। आसमान में उड़ते लड़ाकू विमान, रद्द होती सैकड़ों उड़ानें और अनिश्चितता के माहौल ने यहां रहने वाले और ट्रांजिट कर रहे लाखों भारतीयों की नींद उड़ा दी है।
इस समय सोशल मीडिया से लेकर न्यूज़ चैनल्स तक सिर्फ एक ही आवाज गूंज रही है— ‘दुबई में डर लग रहा है’, मिसाइल हमलों के बीच फंसे भारतीयों का दर्द बयां करते वीडियो और संदेश लगातार सामने आ रहे हैं।
गूगल न्यूज़ (Google News) के इस एक्सक्लूसिव और बेहद विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट ब्लॉग में, हम आपको दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट (DXB) के अंदर का हाल, वहां फंसे भारतीय छात्रों, कामगारों और पर्यटकों की आंखों देखी दास्तान, एयरलाइंस की बेबसी और भारत सरकार (PM Modi) के रेस्क्यू प्लान की पूरी इनसाइड स्टोरी बताएंगे। यह लॉन्ग-फॉर्म आर्टिकल कूटनीति और मानवीय संवेदनाओं का एक ऐसा दस्तावेज है, जो युद्ध की विभीषिका के बीच आम आदमी की बेबसी को गहराई से उजागर करता है।
1. दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट (DXB): दुनिया का सबसे व्यस्त एयरपोर्ट बना ‘विशाल वेटिंग रूम’
दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जो कभी 24 घंटे यात्रियों की चहल-पहल, ड्यूटी-फ्री शॉपिंग और लग्जरी लाउंज के लिए जाना जाता था, आज एक विशालकाय शरणार्थी शिविर (Refugee Camp) जैसा नजर आ रहा है। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद ईरान द्वारा किए जा रहे भीषण पलटवार (मिसाइल हमलों) के कारण खाड़ी देशों का एयरस्पेस अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया गया है।
एयरपोर्ट के अंदर के खौफनाक हालात:
- फर्श पर सोते हजारों यात्री: भारत से यूरोप या अमेरिका जाने वाले हजारों यात्री, जिनका दुबई में लेओवर (Layover) था, वे यहीं फंस गए हैं। कुर्सियां भर चुकी हैं और लोग अपने बच्चों के साथ ठंडे फर्श पर सोने को मजबूर हैं।
- भोजन और पानी की किल्लत: एयरपोर्ट के अंदर मौजूद रेस्टोरेंट्स और वेंडिंग मशीनों में खाना खत्म हो रहा है। एयरलाइंस द्वारा दिए जाने वाले फूड वाउचर्स भी इस भारी भीड़ के सामने नाकाफी साबित हो रहे हैं।
- सूचना का अभाव (Lack of Information): हर 15 मिनट में फ्लाइट कैंसिल होने की अनाउंसमेंट हो रही है। एयरलाइंस के काउंटर पर यात्रियों की भारी भीड़ है, लेकिन स्टाफ के पास भी यह जवाब नहीं है कि अगली उड़ान कब संभव हो पाएगी।
एक यात्री ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा, “हम पिछले 36 घंटों से टर्मिनल 3 पर फंसे हैं। बाहर मिसाइलों का डर है और अंदर अनिश्चितता का। ‘दुबई में डर लग रहा है’, मिसाइल हमलों के बीच फंसे भारतीयों का दर्द कोई नहीं समझ सकता जब तक वह खुद इस हालात से न गुजरे।”

2. ‘दुबई में डर लग रहा है’, मिसाइल हमलों के बीच फंसे भारतीयों का दर्द: कुछ सच्ची कहानियां
जब हम आंकड़ों से परे हटकर इंसानी चेहरों को देखते हैं, तो युद्ध की असली कीमत समझ में आती है। दुबई में इस समय लगभग 35 लाख (3.5 Million) भारतीय रहते हैं। आइए जानते हैं कुछ ऐसे ही भारतीयों की दर्दनाक आपबीती, जो इस समय खौफ के साए में जी रहे हैं।
केस 1: रमेश पिल्लई (केरल के एक ब्लू-कॉलर वर्कर)
केरल के रहने वाले 45 वर्षीय रमेश पिछले 10 सालों से दुबई में एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम कर रहे हैं। अपनी बेटी की शादी के लिए उन्होंने 2 मार्च की फ्लाइट बुक की थी। वे रुंधे गले से बताते हैं, “मेरी बेटी की 5 मार्च को शादी है। मैंने सालों से इसके लिए पैसे जोड़े थे। मेरी फ्लाइट कैंसिल हो गई है और नया टिकट 80,000 रुपये का मिल रहा है, जो मेरी पहुंच से बाहर है। कंपनी के लेबर कैंप में भी अजीब सा डर है। रात को जब सायरन जैसी आवाज आती है, तो हम सब सहम जाते हैं। अब तो बस यही दुआ है कि मैं अपनी बेटी को विदा करने पहुंच सकूं।”
केस 2: रिया शर्मा (दिल्ली की एक मेडिकल स्टूडेंट, जो ट्रांजिट में फंसी हैं)
जॉर्जिया से मेडिकल की पढ़ाई कर रही रिया छुट्टियां बिताने भारत लौट रही थीं। उनकी कनेक्टिंग फ्लाइट दुबई से थी। रिया फोन पर रोते हुए बताती हैं, “मेरा फोन डिस्चार्ज होने वाला है। मेरे पास दुबई का वीजा नहीं है, इसलिए मैं एयरपोर्ट से बाहर नहीं जा सकती। यहां होटल के कमरे नहीं बचे हैं। मेरे माता-पिता टीवी पर युद्ध की खबरें देखकर लगातार रो रहे हैं। मैंने कभी नहीं सोचा था कि ‘दुबई में डर लग रहा है’, मिसाइल हमलों के बीच फंसे भारतीयों का दर्द मेरे लिए एक हकीकत बन जाएगा। मैं बस किसी भी तरह अपने घर दिल्ली पहुंचना चाहती हूं।”
केस 3: मेहता परिवार (अहमदाबाद के टूरिस्ट्स)
गुजरात से 15 लोगों का एक परिवार दुबई घूमने आया था। उनका टूर पैकेज खत्म हो चुका है, लेकिन फ्लाइट्स रद्द होने के कारण वे वापस नहीं जा पा रहे हैं। सुरेश मेहता कहते हैं, “हमारे साथ छोटे बच्चे और बुजुर्ग हैं। होटलों ने किराया तीन गुना बढ़ा दिया है। हमारे पास जितने पैसे थे, वे खत्म होने की कगार पर हैं। हमने इंडियन एंबेसी (भारतीय दूतावास) के हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क किया है, उम्मीद है वहां से कोई मदद मिलेगी। बाहर निकलने में डर लगता है, क्योंकि न्यूज़ में लगातार मिसाइल हमलों की खबरें आ रही हैं।”
3. मिसाइल हमलों का खौफ: खाड़ी देशों (Gulf Region) में क्यों है इतनी दहशत?
दुबई एक बेहद सुरक्षित शहर माना जाता है, लेकिन वर्तमान भू-राजनीतिक (Geopolitical) हालात ने इस सुरक्षा चक्र को चुनौती दी है।

ईरान ने इजरायल और अमेरिका से बदला लेने के लिए ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 2’ (Operation True Promise 2) जैसी धमकियां दी हैं।
- अमेरिकी सैन्य ठिकाने (US Military Bases): मध्य पूर्व में कतर (अल उदीद एयर बेस), बहरीन, कुवैत और यूएई में अमेरिका के कई सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह इजरायल का साथ देने वाले किसी भी देश या बेस को नहीं बख्शेगा।
- होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर तनाव: ईरान ने ओमान के पास एक तेल टैंकर पर हमला किया है। यह जगह यूएई की समुद्री सीमाओं के बहुत करीब है।
- ईरान के प्रॉक्सी गुट (Proxy Groups): यमन के हूती विद्रोही (Houthis) पहले भी अबु धाबी और दुबई पर ड्रोन हमले करने का प्रयास कर चुके हैं। इस युद्ध के माहौल में ‘स्लीपर सेल्स’ और ड्रोन्स के जरिए रिहायशी या कमर्शियल इलाकों को निशाना बनाए जाने की अफवाहों ने दुबई में दहशत फैला दी है।
यही वह भौगोलिक वास्तविकता है जिसने यह कहने पर मजबूर कर दिया है कि ‘दुबई में डर लग रहा है’, मिसाइल हमलों के बीच फंसे भारतीयों का दर्द कोई कोरी कल्पना नहीं, बल्कि एक डरावना सच है।
4. एयरलाइंस का सरेंडर: टिकटों की ‘ब्लैक-मार्केटिंग’ और आसमान छूते दाम
इस पूरे संकट में एविएशन सेक्टर (विमानन क्षेत्र) लगभग पंगु हो गया है। भारत से जुड़ी 350 से अधिक अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द हो चुकी हैं।
- एमिरेट्स और इंडिगो की बेबसी: दुबई की अपनी होम एयरलाइन ‘एमिरेट्स’ (Emirates) ने भारत, यूरोप और अमेरिका जाने वाली अपनी अधिकांश उड़ानों को रोक दिया है। एयर इंडिया (Air India) और इंडिगो (IndiGo) भी सुरक्षा कारणों से दुबई के लिए उड़ानें नहीं भर रहे हैं।
- डायनेमिक प्राइसिंग की लूट: जो एकाध एयरलाइंस लंबे और घुमावदार रास्तों (सऊदी अरब और मिस्र के ऊपर से) से उड़ान भर रही हैं, उन्होंने अपने किराए में बेतहाशा वृद्धि कर दी है। दुबई से मुंबई या दिल्ली की जो वन-वे (One-way) टिकट आम दिनों में ₹12,000 से ₹15,000 में मिलती थी, वह अब ₹60,000 से ₹1,00,000 तक पहुंच गई है।
- ट्रैवल एजेंट्स परेशान: ट्रैवल एजेंट्स का कहना है कि उनके फोन की घंटियां बजना बंद नहीं हो रही हैं। लोग किसी भी कीमत पर टिकट खरीदने को तैयार हैं, लेकिन सिस्टम में कोई भी सीट उपलब्ध नहीं दिखा रही है।
5. भारतीय समुदाय और गुरुद्वारों ने खोले मदद के द्वार
जब भी दुनिया के किसी कोने में भारतीय संकट में फंसते हैं, तो भारतीय समुदाय की एकता और सेवा भाव हमेशा सामने आता है। दुबई में भी यही देखने को मिल रहा है।
जब यह खबर फैली कि ‘दुबई में डर लग रहा है’, मिसाइल हमलों के बीच फंसे भारतीयों का दर्द असहनीय हो रहा है, तब दुबई स्थित कई सामाजिक संगठनों और गुरुद्वारों ने मदद के हाथ बढ़ाए हैं:
- गुरु नानक दरबार (जेबेल अली): दुबई के इस प्रसिद्ध गुरुद्वारे ने फंसे हुए भारतीयों के लिए लंगर (मुफ्त भोजन) की व्यवस्था तेज कर दी है। जो लोग एयरपोर्ट से बाहर आ सकते हैं, उन्हें यहां आश्रय दिया जा रहा है।
- केरल मुस्लिम कल्चरल सेंटर (KMCC) और अन्य NGO: ये संगठन लेबर कैंप्स में जाकर कामगारों को राशन और जरूरी दवाइयां मुहैया करा रहे हैं, साथ ही उन्हें पैनिक (Panic) न करने की काउंसलिंग भी दे रहे हैं।
- व्हाट्सएप ग्रुप्स (WhatsApp Groups): दुबई में रहने वाले संपन्न भारतीय परिवारों ने सोशल मीडिया पर ग्रुप्स बनाए हैं, जहां वे फंसे हुए छात्रों और पर्यटकों को अपने घरों में पेइंग गेस्ट या मुफ्त में ठहराने की पेशकश कर रहे हैं।

6. भारत सरकार का एक्शन प्लान: CCS की बैठक और ‘ऑपरेशन इवैक्यूएशन’ की तैयारी
इस पूरे संकट पर भारत सरकार मूकदर्शक नहीं बैठी है। 1 मार्च 2026 की रात को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की एक आपातकालीन बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक का मुख्य एजेंडा ही मध्य पूर्व (विशेषकर यूएई, सऊदी और ईरान) में फंसे 1 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा था।
भारतीय दूतावास (Indian Embassy) की एडवाइजरी:
अबू धाबी स्थित भारतीय दूतावास और दुबई स्थित वाणिज्य दूतावास (Consulate General of India) ने 24×7 हेल्पलाइन नंबर्स जारी किए हैं।
- एडवाइजरी: दूतावास ने सभी भारतीयों से अपील की है कि वे शांत रहें, अफवाहों पर ध्यान न दें और यूएई सरकार (UAE Government) द्वारा जारी किए गए सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।
- रजिस्ट्रेशन: जो भारतीय वहां फंसे हैं और भारत लौटना चाहते हैं, उनसे दूतावास के ऑनलाइन पोर्टल पर खुद को रजिस्टर करने को कहा गया है।
क्या लॉन्च होगा कोई नया रेस्क्यू ऑपरेशन?
सूत्रों के अनुसार, यदि अगले 48 घंटों में एयरस्पेस नहीं खुलता है और मिसाइल हमलों का खतरा बढ़ता है, तो भारत सरकार ‘ऑपरेशन अजय’ (Operation Ajay) या ‘ऑपरेशन गंगा’ की तर्ज पर भारतीय वायुसेना (IAF) के C-17 ग्लोबमास्टर विमानों और भारतीय नौसेना (Indian Navy) के जंगी जहाजों को इवैक्यूएशन (Evacuation) के लिए ओमान या सुरक्षित बंदरगाहों पर भेज सकती है।
हालांकि, राजनयिक (Diplomatic) स्तर पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर लगातार यूएई और ओमान के अपने समकक्षों के साथ संपर्क में हैं ताकि कमर्शियल उड़ानों के लिए कोई ‘सुरक्षित कॉरिडोर’ (Safe Corridor) तैयार किया जा सके।
7. मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) पर युद्ध का असर
गोली और मिसाइलें केवल इमारतों को नहीं गिरातीं, वे इंसानों के दिमाग पर भी गहरा घाव छोड़ती हैं। ‘दुबई में डर लग रहा है’, मिसाइल हमलों के बीच फंसे भारतीयों का दर्द केवल शारीरिक असुविधा का नहीं है; यह मानसिक प्रताड़ना (Psychological Trauma) का भी है।
लगातार फोन स्क्रीन पर युद्ध की खौफनाक तस्वीरें देखना, अपने देश में बैठे चिंतित परिवार वालों के रोते हुए फोन कॉल्स उठाना और यह न जानना कि कल क्या होगा—यह स्थिति लोगों को डिप्रेशन और पैनिक अटैक (Panic Attacks) की ओर धकेल रही है। मनोवैज्ञानिकों की सलाह है कि इस कठिन समय में डिजिटल डिटॉक्स (Digital Detox) बहुत जरूरी है। लोगों को हर मिनट न्यूज़ चेक करने के बजाय एक-दूसरे का मनोबल बढ़ाना चाहिए।
अंधेरे के बाद उम्मीद की किरण
दुबई का यह वर्तमान संकट हमें सिखाता है कि युद्ध कहीं भी हो, उसकी कीमत हमेशा आम इंसान को ही चुकानी पड़ती है। जो शहर कल तक दुनिया का सबसे बड़ा पर्यटन और व्यापार केंद्र था, वह आज कूटनीतिक विफलताओं का खामियाजा भुगत रहा है।
‘दुबई में डर लग रहा है’, मिसाइल हमलों के बीच फंसे भारतीयों का दर्द इस समय हर भारतीय की सामूहिक चिंता का विषय है। लेकिन इतिहास गवाह है कि भारतीय डायस्पोरा (Indian Diaspora) ने कुवैत युद्ध (1990) से लेकर यमन संकट और यूक्रेन युद्ध तक हर मुश्किल का डटकर सामना किया है। भारत सरकार की कूटनीतिक ताकत और दुबई में बसे भारतीयों की आपसी एकजुटता इस संकट से भी हमें बाहर निकाल लाएगी।
हम बस यही प्रार्थना कर सकते हैं कि मध्य पूर्व के आसमान से जल्द ही मिसाइलों के ये काले बादल छटें और दुबई की उड़ानें फिर से अपने पुराने और सुरक्षित रास्तों पर लौट आएं।
