देवभूमि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून, जिसे ‘स्कूल कैपिटल ऑफ इंडिया’ भी कहा जाता है, आज एक शर्मनाक वजह से सुर्खियों में है। चिकित्सा शिक्षा (Medical Education) के मंदिर कहे जाने वाले दून मेडिकल कॉलेज (Government Doon Medical College – GDMC) में रैगिंग का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सिस्टम की नींद उड़ा दी है। लेकिन इस बार खबर सिर्फ रैगिंग की नहीं है, बल्कि उस ‘त्वरित और कठोर कार्रवाई’ की है जो कॉलेज प्रशासन ने नजीर (Example) के तौर पर पेश की है।
ताजा ब्रेकिंग न्यूज़ के अनुसार, दून मेडिकल कॉलेज की एंटी-रैगिंग कमेटी ने सख्त कदम उठाते हुए MBBS के 9 सीनियर छात्रों को दोषी पाया है और उन पर निलंबन (Suspension) से लेकर भारी जुर्माने तक की गाज गिरा दी है। यह कार्रवाई उन सभी सीनियर छात्रों के लिए एक चेतावनी है जो ‘इंट्रोडक्शन’ (Introduction) के नाम पर जूनियर्स का मानसिक और शारीरिक शोषण करते हैं।
भाग 1: घटनाक्रम – आखिर हॉस्टल की चारदीवारी में क्या हुआ?
मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग एक ऐसा नासूर है जो तमाम कानूनों के बावजूद पूरी तरह खत्म नहीं हो पा रहा है। दून मेडिकल कॉलेज में हुई यह घटना 2023 बैच (सैटर्न बैच) और 2024 बैच (फ्रेशर्स) के बीच की बताई जा रही है।
‘इंट्रो’ के नाम पर शोषण
सूत्रों और शिकायत के अनुसार, घटना कुछ दिन पुरानी है। एमबीबीएस प्रथम वर्ष (First Year) के छात्रों को उनके सीनियर छात्रों ने हॉस्टल के एक कमरे में बुलाया था। इसे ‘फॉर्मल इंट्रोडक्शन’ का नाम दिया गया था। लेकिन जो हुआ, वह इंट्रोडक्शन नहीं बल्कि ‘इंटराोगेशन’ और ‘ह्यूमिलिएशन’ (अपमान) था।
- सिर झुकाकर खड़े रहना: जूनियर्स को घंटों तक सिर नीचे करके खड़े रहने को मजबूर किया गया।
- अजीबोगरीब हरकतें: उनसे ऐसी हरकतें करवाई गईं जो मानवीय गरिमा के खिलाफ थीं।
- मानसिक दबाव: जब किसी जूनियर ने मना करने की कोशिश की, तो उसे सीनियर होने का रौब दिखाया गया और भविष्य में ‘देख लेने’ की धमकी दी गई।

शिकायत और एक्शन
गनीमत यह रही कि इस बार जूनियर्स चुप नहीं बैठे। पीड़ित छात्रों ने साहस दिखाया और नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) की एंटी-रैगिंग हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। NMC ने तुरंत कॉलेज प्रशासन को नोटिस भेजा, जिसके बाद कॉलेज की डिस्पिप्लिनरी कमेटी और एंटी-रैगिंग स्क्वाड हरकत में आया।
भाग 2: प्रशासन का हंटर – 9 छात्रों पर क्या कार्रवाई हुई?
दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य (Principal) और एंटी-रैगिंग कमेटी ने जांच में पाया कि शिकायत सही थी। सीसीटीवी फुटेज और बयानों के आधार पर 2023 बैच के 9 छात्रों को दोषी माना गया।
सजा इतनी सख्त दी गई है ताकि भविष्य में कोई छात्र ऐसी गलती करने की हिम्मत न करे:
- अकादमिक निलंबन (Academic Suspension): इन छात्रों को कक्षाओं (Classes) से सस्पेंड कर दिया गया है। इसका मतलब है कि उनकी अटेंडेंस कम होगी, और वे आगामी परीक्षाओं में बैठने से वंचित रह सकते हैं। एमबीबीएस में 75% अटेंडेंस अनिवार्य होती है, ऐसे में इनका 6 महीने या 1 साल बर्बाद होना तय है।
- हॉस्टल से निष्कासन (Hostel Expulsion): इन छात्रों को तुरंत प्रभाव से हॉस्टल खाली करने का आदेश दिया गया है। अब उन्हें कॉलेज के बाहर रहने का इंतजाम करना होगा, जो आर्थिक और मानसिक रूप से परेशानी भरा होगा।
- आर्थिक जुर्माना (Heavy Fine): प्रत्येक छात्र पर 25,000 रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक का जुर्माना (जुर्माने की राशि पुष्टि के अधीन) लगाया गया है।
- परमानेंट रिकॉर्ड: सबसे बड़ा नुकसान यह है कि इनके चरित्र प्रमाण पत्र (Character Certificate) पर ‘रैगिंग में संलिप्त’ होने की टिप्पणी दर्ज की जा सकती है। एक डॉक्टर के करियर के लिए यह ‘ब्लैक मार्क’ किसी आपदा से कम नहीं है।
भाग 3: रैगिंग – एक मनोवैज्ञानिक बीमारी (Why does it happen?)
सवाल यह उठता है कि जो छात्र NEET जैसी कठिन परीक्षा पास करके डॉक्टर बनने आते हैं, वे ऐसी हरकतें क्यों करते हैं? मनोवैज्ञानिक इसे ‘साइकिल ऑफ अब्यूज’ (Cycle of Abuse) कहते हैं।
- बदले की भावना: अक्सर सीनियर छात्र यह सोचते हैं कि “जब हम जूनियर थे, तो हमारे साथ भी रैगिंग हुई थी, अब हमारी बारी है।” यह परंपरा (Tradition) के नाम पर चलने वाला शोषण है।
- पावर ट्रिप (Power Trip): 18-19 साल की उम्र में जब छात्रों को लगता है कि वे किसी से ‘सीनियर’ हैं, तो वे अपनी सत्ता (Authority) स्थापित करने के लिए रैगिंग का सहारा लेते हैं।
- गलतफहमी: कई छात्र इसे ‘आइस-ब्रेकिंग’ या दोस्ती करने का तरीका मानते हैं। लेकिन जब सहमति (Consent) न हो और डर का माहौल हो, तो वह दोस्ती नहीं, अपराध है।
भाग 4: NMC और सुप्रीम कोर्ट के कड़े नियम
भारत में रैगिंग अब केवल कॉलेज का अनुशासनिक मुद्दा नहीं है, बल्कि एक फौजदारी अपराध (Criminal Offence) है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और राघवन समिति की सिफारिशों के बाद नियम बेहद सख्त हो गए हैं।
नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) की गाइडलाइन्स:
NMC ने “Prevention and Prohibition of Ragging in Medical Colleges/Institutions Regulations, 2021” लागू किया है। इसके तहत:

- जीरो टॉलरेंस: रैगिंग की छोटी सी घटना पर भी सख्त एक्शन अनिवार्य है।
- संस्था की जिम्मेदारी: अगर कॉलेज प्रशासन कार्रवाई नहीं करता है, तो कॉलेज की मान्यता (Recognition) रद्द की जा सकती है और सीटों में कटौती की जा सकती है।
- FIR दर्ज करना: गंभीर मामलों में कॉलेज को पुलिस में FIR दर्ज करवानी ही पड़ती है।
दून मेडिकल कॉलेज ने NMC की इन्हीं गाइडलाइन्स का पालन करते हुए अपनी साख बचाने और अनुशासन बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया है।
भाग 5: छात्रों के करियर पर क्या असर होगा?
यह सजा उन 9 छात्रों के लिए जीवन भर का सबक है। एमबीबीएस की पढ़ाई अपने आप में बेहद तनावपूर्ण और कठिन होती है।
- परीक्षा से वंचित: सस्पेंशन के कारण अगर वे इंटर्नसल्स या यूनिवर्सिटी एग्जाम नहीं दे पाए, तो उनका बैचमेट्स से 6 महीने पीछे होना तय है। इसे मेडिकल भाषा में ‘सप्लीमेंट्री’ या ‘इयर बैक’ कहा जाता है।
- मानसिक तनाव: अब इन छात्रों को बदनामी और परिवार के गुस्से का सामना करना पड़ेगा।
- भविष्य की नौकरी: सरकारी नौकरी या विदेश में पढ़ाई के लिए आवेदन करते समय ‘पुलिस वेरिफिकेशन’ या ‘कैरेक्टर सर्टिफिकेट’ की जरूरत होती है। रैगिंग का दाग उन्हें कई अवसरों से वंचित कर सकता है।
भाग 6: माता-पिता और समाज की भूमिका
जब ऐसी खबरें आती हैं, तो सबसे बड़ा झटका माता-पिता को लगता है। वे अपने बच्चे को डॉक्टर (हीलर) बनने भेजते हैं, न कि गुंडा।
- संस्कार और संवाद: माता-पिता को अपने बच्चों को समझाना चाहिए कि सीनियर होने का मतलब ‘बड़ा भाई’ बनकर मार्गदर्शन करना है, न कि रैगिंग करना।
- पीड़ितों का साथ: समाज को उन छात्रों (फ्रेशर्स) का समर्थन करना चाहिए जो रैगिंग के खिलाफ आवाज उठाते हैं। अक्सर ‘चुगलखोर’ (Snitch) कहकर उन्हें चुप करा दिया जाता है, जो गलत है। दून मेडिकल कॉलेज के फ्रेशर्स ने शिकायत करके बहुत बहादुर काम किया है।
भाग 7: रैगिंग मुक्त कैंपस कैसे बनाएं?
दून मेडिकल कॉलेज की घटना एक ‘वेक-अप कॉल’ है। सिर्फ सजा देना काफी नहीं है, निवारण (Prevention) जरूरी है।
- मेंटोरशिप प्रोग्राम: हर फ्रेशर के साथ एक समझदार सीनियर या फैकल्टी को मेंटर के रूप में जोड़ा जाए।
- CCTV निगरानी: हॉस्टल के गलियारों और मेस में कैमरों की संख्या बढ़ाई जाए।
- सरप्राइज विजिट: वार्डन और एंटी-रैगिंग स्क्वाड को रात के समय औचक निरीक्षण (Surprise Checks) करने चाहिए।
- काउंसलिंग: सीनियर्स की काउंसलिंग होनी चाहिए कि ‘हेल्दी इंटरैक्शन’ क्या होता है।
डॉक्टर बनने से पहले इंसान बनें
दून मेडिकल कॉलेज के 9 छात्रों पर हुई कार्रवाई ने एक स्पष्ट संदेश दिया है – कानून के हाथ लंबे हैं और कॉलेज प्रशासन अब मूकदर्शक नहीं रहेगा।
रैगिंग एक अपराध है जो किसी का आत्मविश्वास तोड़ सकती है, किसी को डिप्रेशन में धकेल सकती है और (अतीत में हुए अमन काचरू जैसे मामलों में) किसी की जान भी ले सकती है।
हम उन 9 छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं, लेकिन यह सजा उन्हें यह सिखाने के लिए जरूरी थी कि स्टेथोस्कोप गले में लटकाने से पहले दिल में करुणा होना जरूरी है।
फ्रेशर्स के लिए संदेश: डरो मत। अगर आपके साथ गलत हो रहा है, तो आवाज उठाओ। सिस्टम आपके साथ है। सीनियर्स के लिए संदेश: अपनी विरासत (Legacy) प्यार और सम्मान से बनाएं, डर से नहीं।
