दिल्ली-NCR में पाइप्ड कुकिंग गैस की कीमतों में कटौती, प्रति यूनिट 70 पैसे सस्ती

नए साल 2026 की पूर्व संध्या पर दिल्ली-NCR के निवासियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी आई है। इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने घरेलू पाइप वाली रसोई गैस (PNG) की कीमतों में 70 पैसे प्रति यूनिट (SCM) की कटौती का ऐलान किया है।

यह नई दरें 1 जनवरी, 2026 से लागू हो गई हैं। आइए इस कटौती और इसके असर को विस्तार से समझते हैं।

दिल्ली-NCR में PNG की नई दरें

IGL द्वारा की गई इस कटौती के बाद अलग-अलग शहरों में अब गैस की कीमतें इस प्रकार होंगी:

शहरपुरानी कीमत (प्रति SCM)नई कीमत (प्रति SCM)कटौती
दिल्ली₹48.59₹47.8970 पैसे
गुरुग्राम₹47.40₹46.7070 पैसे
नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद₹48.46₹47.7670 पैसे

कीमतों में कटौती की मुख्य वजह

गैस की कीमतों में इस कमी के पीछे मुख्य रूप से पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) के नीतिगत बदलाव हैं:

दिल्ली-NCR में पाइप्ड कुकिंग गैस की कीमतों में कटौती, प्रति यूनिट 70 पैसे सस्ती
  • पाइपलाइन टैरिफ में सुधार: PNGRB ने हाल ही में गैस पाइपलाइन शुल्क (Unified Tariff) की समीक्षा की है, जिससे गैस को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने की लागत कम हुई है।
  • तर्कसंगत ढांचा: नियामक ने दूरी के आधार पर लगने वाले शुल्क को सरल बनाया है, जिसका सीधा लाभ अब आम उपभोक्ताओं को मिल रहा है।
  • स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा: सरकार और गैस कंपनियां 2026 में कदम रखते हुए प्राकृतिक गैस को अधिक किफायती बनाकर इसके उपयोग को प्रोत्साहित करना चाहती हैं।

आम जनता पर इसका क्या असर होगा?

इस फैसले से दिल्ली-NCR के लगभग 25 लाख परिवारों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

  • मासिक बजट में बचत: हालांकि 70 पैसे की कटौती छोटी लग सकती है, लेकिन महीने भर के कुल उपभोग पर यह मध्यमवर्गीय परिवारों के रसोई बजट में एक सुखद राहत लेकर आएगी।
  • नए साल का तोहफा: त्योहारों और कड़ाके की ठंड के बीच गैस की कीमतों में कमी को जनता ‘न्यू ईयर गिफ्ट’ के तौर पर देख रही है।
  • अन्य कंपनियों पर असर: IGL के बाद ‘थिंक गैस’ जैसी अन्य कंपनियों ने भी कई राज्यों में अपनी दरों में कटौती की घोषणा की है, जिससे बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।

गैस की कीमतों में कटौती: कुछ और अनसुने और गहरे पहलू

प्राकृतिक गैस की ओर बढ़ता झुकाव (PNG vs LPG)

इस कटौती का एक बड़ा उद्देश्य उपभोक्ताओं को पारंपरिक LPG सिलेंडरों से हटाकर पाइप वाली गैस (PNG) की ओर आकर्षित करना है।

  • सुविधा और सुरक्षा: PNG में सिलेंडर खत्म होने या बुकिंग करने का झंझट नहीं होता। यह निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करती है।
  • लागत का अंतर: 70 पैसे की कटौती के बाद, PNG अब औसत LPG सिलेंडर के मुकाबले 15-20% तक सस्ती पड़ रही है। यह उन परिवारों के लिए बड़ा प्रोत्साहन है जो अभी भी सिलेंडर का उपयोग कर रहे हैं।

एकीकृत टैरिफ (Unified Tariff) का बड़ा बदलाव

कीमतों में इस कमी का एक तकनीकी कारण सरकार द्वारा लागू किया गया ‘यूनिफाइड टैरिफ’ मॉडल है।

  • एक देश, एक टैरिफ: पहले गैस की कीमतें इस बात पर निर्भर करती थीं कि आप गैस पाइपलाइन के मुख्य स्रोत से कितनी दूर हैं। दूरदराज के इलाकों में गैस महंगी मिलती थी।
  • समानता: नए नियमों के तहत पाइपलाइन शुल्क को पूरे नेटवर्क के लिए औसत कर दिया गया है, जिससे दिल्ली जैसे महानगरों में लागत कम करने में मदद मिली है।

रेस्टोरेंट और फूड इंडस्ट्री पर सकारात्मक असर

दिल्ली-NCR में हजारों छोटे-बड़े रेस्टोरेंट और ढाबे PNG का उपयोग करते हैं।

  • लागत में कमी: व्यावसायिक स्तर पर गैस का भारी उपभोग होता है। प्रति यूनिट 70 पैसे की बचत बड़े होटलों और कैंटीन के लिए महीने के अंत में हजारों रुपयों की बचत में बदल जाती है।
  • खाने की कीमतों पर प्रभाव: हालांकि यह कटौती बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन इससे परिचालन लागत (Operating Cost) कम होगी, जिससे आने वाले समय में बाहर खाने की कीमतों में स्थिरता आ सकती है।
दिल्ली-NCR में पाइप्ड कुकिंग गैस की कीमतों में कटौती, प्रति यूनिट 70 पैसे सस्ती

पर्यावरण और ‘नेट जीरो’ लक्ष्य की ओर कदम

भारत ने 2070 तक ‘नेट जीरो’ उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है। 2026 की शुरुआत में इस तरह की कटौती स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने की एक रणनीतिक चाल है।

  • प्रदूषण में कमी: दिल्ली जैसे प्रदूषित क्षेत्र में PNG का बढ़ता उपयोग कोयले या लकड़ी जैसे ईंधन की तुलना में वायु गुणवत्ता में सुधार लाने में सहायक होता है।
  • CNG पर संभावित असर: आमतौर पर जब PNG के दाम कम होते हैं, तो उम्मीद की जाती है कि आने वाले समय में CNG (वाहनों के लिए गैस) की कीमतों में भी इसी तरह की राहत देखने को मिल सकती है।

तुलनात्मक चार्ट: बचत का गणित (मासिक आधार पर)

विवरणLPG सिलेंडर (औसत)PNG (पुरानी दरें)PNG (नई दरें – 2026)
औसत मासिक खर्च₹800 – ₹950₹650 – ₹750₹630 – ₹720
सुविधाबुकिंग/डिलीवरी का झंझटऑटोमेटिक सप्लाईऑटोमेटिक सप्लाई + सस्ती
सुरक्षामध्यम (सिलेंडर ब्लास्ट रिस्क)उच्च (हवा से हल्की गैस)उच्च

निष्कर्ष: क्या यह राहत लंबी टिकेगी?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतें स्थिर रहती हैं, तो यह कटौती केवल शुरुआत हो सकती है। सरकार का लक्ष्य अपनी ऊर्जा टोकरी (Energy Basket) में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी को 6% से बढ़ाकर 15% करना है, जिसके लिए भविष्य में और भी आकर्षक योजनाओं की उम्मीद की जा सकती है।

By Meera Shah

मीरा तेज खबरी (Tez Khabri) के साथ जुड़ी एक समाचार लेखिका हैं। वे सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, महिला संबंधित विषयों और जनहित से जुड़ी खबरों पर लेखन करती हैं। मीरा का उद्देश्य पाठकों तक सरल भाषा में सत्यापित, उपयोगी और भरोसेमंद जानकारी पहुंचाना है।

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