अपराध की दुनिया अब केवल अंधेरी गलियों और खूंखार चेहरों तक सीमित नहीं रही है। आज के डिजिटल और आधुनिक युग में, अपराध ने एक नया, ग्लैमरस और बेहद भ्रामक मुखौटा पहन लिया है। भारत में जब भी संगठित अपराध (Organized Crime) की बात होती है, तो ‘लॉरेंस बिश्नोई गैंग’ (Lawrence Bishnoi Gang) का नाम सबसे ऊपर आता है। लेकिन हाल ही में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल (Delhi Police Special Cell) ने जो खुलासा किया है, उसने पुलिस विभाग से लेकर आम जनता तक सबको चौंका दिया है।
लॉरेंस बिश्नोई गैंग के ड्रग्स और हथियारों के नेटवर्क को संचालित करने वाली एक महिला को गिरफ्तार किया गया है, जिसे अंडरवर्ल्ड में ‘मैडम ज़हर’ (Madam Zehar) के नाम से जाना जाता है। एक तरफ सोशल मीडिया पर हजारों फॉलोअर्स वाली ब्यूटी पार्लर की मालकिन, और दूसरी तरफ एक खूंखार इंटरनेशनल गैंग की मुख्य हैंडलर—यह कहानी किसी हॉलीवुड या बॉलीवुड की क्राइम थ्रिलर फिल्म से कम नहीं है।
1. कौन है ‘मैडम ज़हर’? एक मेकअप आर्टिस्ट से लेडी डॉन तक का सफर
अपराध की दुनिया में हर नाम के पीछे एक कहानी होती है। खुशनुमा अंसारी उर्फ़ नेहा (Khushnuma Ansari alias Neha), एक ऐसी महिला जो दिन के उजाले में महिलाओं को खूबसूरत बनाने का काम करती थी, लेकिन रात के अंधेरे में समाज में ड्रग्स का ज़हर घोलती थी। इसी कारण उसे जुर्म की दुनिया ने नाम दिया—‘मैडम ज़हर’।
दोहरी ज़िंदगी का ताना-बाना:
- फ्रंट प्रोफाइल (The Facade): खुशनुमा अंसारी उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सीलमपुर इलाके में ‘मेकओवर नेहा’ (Makeover Neha) के नाम से एक आलीशान ब्यूटी पार्लर चलाती थी। इंस्टाग्राम पर उसके 18,000 से अधिक फॉलोअर्स थे। वह रोज़ाना नए मेकअप लुक्स, हेयरस्टाइल और रील्स पोस्ट करती थी। आम लोगों के लिए वह एक सफल और स्वतंत्र महिला उद्यमी (Entrepreneur) थी।
- डार्क प्रोफाइल (The Reality): इस ब्यूटी पार्लर का इस्तेमाल दरअसल लॉरेंस बिश्नोई और हाशिम बाबा गैंग की आपराधिक गतिविधियों के लिए एक ‘फ्रंट’ (आड़) के रूप में किया जाता था। यहां से ड्रग्स (Narcotics) के कंसाइनमेंट स्टोर किए जाते थे और गैंग के गुर्गों तक हथियारों और पैसों की सप्लाई की जाती थी।

2. ‘बॉबी कबूतर’: हथियारों का सौदागर और ‘मैडम ज़हर’ का मेंटर
‘मैडम ज़हर’ की कहानी महफूज़ उर्फ़ ‘बॉबी कबूतर’ (Mahfooz alias Bobby Kabootar) के बिना अधूरी है। खुशनुमा पिछले 7 सालों से बॉबी कबूतर के साथ रिलेशनशिप में थी और उसी ने खुशनुमा को अपराध के इस दलदल में उतारा और सिंडिकेट का बॉस बनाया।
बॉबी कबूतर कौन है? बॉबी कबूतर लॉरेंस बिश्नोई गैंग का एक कुख्यात गुर्गा और मुख्य गन सप्लायर (Key Arms Supplier) है। स्थानीय लोग उसे ‘बॉबी कबूतर’ कहते थे और यही नाम पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज हो गया। पिछले एक दशक से वह दिल्ली पुलिस की मोस्ट वांटेड लिस्ट में था।
बॉबी कबूतर का खौफनाक आपराधिक इतिहास
- सिद्धू मूसेवाला मर्डर केस लिंक: जांच एजेंसियों के अनुसार, पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला (Sidhu Moosewala) की हत्या में इस्तेमाल किए गए अत्याधुनिक हथियारों की व्यवस्था और रेकी (Reconnaissance) में बॉबी कबूतर का अहम रोल होने का शक है।
- हाई-प्रोफाइल वारदातों में शामिल: बॉलीवुड अभिनेत्री दिशा पाटनी के घर के बाहर हुई फायरिंग, दिल्ली में नादिर शाह (Nadir Shah) हत्याकांड और सीलमपुर डबल मर्डर केस में हथियारों की सप्लाई बॉबी ने ही की थी।
- हत्या के 6 से अधिक मामले: बॉबी पर हत्या, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट के दर्जनों मामले दर्ज हैं।
- इंटरनेशनल कनेक्शन: बॉबी कबूतर के तार एशिया के सबसे बड़े अवैध हथियार तस्कर सलीम ‘पिस्टल’ (Salim Pistol) से जुड़े थे। सलीम को कुछ समय पहले भारत-नेपाल सीमा से गिरफ्तार किया गया था और उसके संबंध पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ‘ISI’ से भी बताए जाते हैं।
3. ‘ऑपरेशन महिपालपुर’: कैसे बिछा दिल्ली पुलिस का जाल?
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल (Special Cell) कई महीनों से बॉबी कबूतर और उसके सिंडिकेट को ट्रैक कर रही थी। आरोपी टेक्निकल सर्विलांस (Technical Surveillance) से बचने के लिए लगातार अपनी पहचान और ठिकाने बदल रहे थे। लेकिन पुलिस के खुफिया इनपुट ने इस खेल का अंत कर दिया।
गिरफ्तारी का घटनाक्रम:
- लोकेशन ट्रैकिंग: खुफिया जानकारी मिली कि बॉबी कबूतर, मैडम ज़हर और उनके कुछ साथी एक SUV गाड़ी में महरौली-महिपालपुर (Mahipalpur) की तरफ आ रहे हैं।
- द ट्रैप (The Trap): मंगलवार की रात, महिपालपुर फ्लाईओवर के पास स्पेशल सेल ने पूरी घेराबंदी कर ली।
- गिरफ्तारी: पुलिस ने गाड़ी को इंटरसेप्ट किया और बॉबी कबूतर, मैडम ज़हर (खुशनुमा) और उनके दो अन्य सहयोगियों मोहम्मद राज़ी खान और शाहबाज़ खान को गिरफ्तार कर लिया।
- बरामदगी: इस ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से ड्रग्स (Narcotics) और कुछ अन्य संदिग्ध सामान बरामद किए हैं।
4. लॉरेंस बिश्नोई और हाशिम बाबा का नापाक गठजोड़
इस गिरफ्तारी ने एक और बड़े खतरे की ओर इशारा किया है—विभिन्न गैंग्स के बीच बढ़ता ‘सिंडिकेट’ (Syndicate)।
लॉरेंस बिश्नोई इस समय गुजरात की साबरमती जेल में बंद है, और गैंगस्टर हाशिम बाबा (Hashim Baba) भी जेल की सलाखों के पीछे है। लेकिन ये दोनों गैंग अब एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
- ऑपरेशंस का बंटवारा: जहाँ हाशिम बाबा का नेटवर्क दिल्ली के लोकल इलाकों (जैसे सीलमपुर, जाफराबाद) में फिरौती और ड्रग्स का काम देखता है, वहीं लॉरेंस बिश्नोई का गैंग उन्हें विदेशी हथियार, शूटर्स और इंटरनेशनल लॉजिस्टिक सपोर्ट देता है।
- ड्रग्स और आर्म्स का कॉकटेल: मैडम ज़हर इस गठजोड़ की अहम कड़ी थी। वह ड्रग्स की सप्लाई से आने वाले पैसे (Narco-terrorism fund) का इस्तेमाल अवैध हथियारों की खरीद-फरोख्त के लिए करती थी।

5. अंडरवर्ल्ड का बदलता ट्रेंड: ‘लेडी डॉन’ का बढ़ता वर्चस्व
मैडम ज़हर की गिरफ्तारी से भारतीय अपराध जगत के एक नए और खतरनाक ट्रेंड का पर्दाफाश हुआ है—गैंग्स में महिलाओं की लीडरशिप रोल में एंट्री।
पहले महिलाएं केवल गैंगस्टर्स की प्रेमिका या पत्नी के रूप में जानी जाती थीं, जो अक्सर पुलिस से भागने में उनकी मदद करती थीं। लेकिन अब वे फ्रंटलाइन पर आकर सिंडिकेट चला रही हैं।
- पुलिस की नज़रों से बचना: महिलाओं पर पुलिस कम शक करती है। एक ब्यूटी पार्लर चलाने वाली महिला की गाड़ी को पुलिस के नाकों पर कम ही रोका जाता है। इसी ‘सहानुभूति’ का फायदा उठाकर ये महिलाएं ड्रग्स और हथियारों की तस्करी करती हैं।
- ज़ोया का उदाहरण: मैडम ज़हर से पहले, पुलिस ने गैंगस्टर हाशिम बाबा की पत्नी ज़ोया (Zoya) को भी गिरफ्तार किया था। जेल में बंद हाशिम बाबा के सारे ऑपरेशंस, पैसों का लेन-देन और शूटर्स को टारगेट असाइन करने का काम ज़ोया ही कर रही थी।
- दीपा और जया खान: चंडीगढ़ और अन्य इलाकों में भी दीपा और जया खान जैसी ‘लेडी डॉन’ लॉरेंस बिश्नोई गैंग के लिए काम करती पाई गई हैं।
6. आगे की जांच और क्या खुल सकते हैं राज़?
मैडम ज़हर और बॉबी कबूतर की गिरफ्तारी दिल्ली पुलिस के लिए एक बहुत बड़ी सफलता है, लेकिन यह जांच का अंत नहीं बल्कि एक नई शुरुआत है। स्पेशल सेल अब इन दोनों से कड़ी पूछताछ कर रही है, जिससे कई बड़े खुलासे होने की उम्मीद है:
- स्लीपर सेल्स (Sleeper Cells) की जानकारी: लॉरेंस गैंग के वो कौन से नए और अनजान चेहरे (विशेषकर महिलाएं) हैं जो समाज में सफेदपोश बनकर रह रहे हैं और गैंग को सपोर्ट कर रहे हैं?
- इंटरनेशनल हवाला नेटवर्क: ड्रग्स की बिक्री से मिलने वाला पैसा भारत से कनाडा, अमेरिका या दुबई कैसे भेजा जा रहा है?
- मूसेवाला और नादिर शाह मर्डर: बॉबी कबूतर से इन दोनों हाई-प्रोफाइल मर्डर केस में इस्तेमाल हुए हथियारों के असली स्रोत (Origin) का पता लगाया जा रहा है।
- हथियारों का जखीरा: दिल्ली और एनसीआर में गैंग ने अपने अवैध हथियार कहाँ छुपा कर रखे हैं?
अपराध का अंत हमेशा सलाखों के पीछे
‘मैडम ज़हर’ और ‘बॉबी कबूतर’ की कहानी इस बात का प्रमाण है कि अपराध का रास्ता चाहे कितना भी ग्लैमरस और सुरक्षित क्यों न लगे, उसका अंतिम पड़ाव पुलिस की गिरफ्त ही होता है। लॉरेंस बिश्नोई गैंग द्वारा महिलाओं को अपने नेटवर्क में शामिल करके पुलिस को चकमा देने की यह चाल भले ही कुछ समय के लिए कामयाब रही हो, लेकिन कानून की लंबी भुजाओं ने अंततः उन तक पहुँच ही बना ली।
यह गिरफ्तारी समाज के लिए एक चेतावनी भी है कि हमें अपने आस-पास चलने वाली गतिविधियों के प्रति जागरूक रहना चाहिए। एक साधारण सा दिखने वाला ब्यूटी पार्लर या कोई व्यवसाय, किसी बड़े इंटरनेशनल क्राइम सिंडिकेट का फ्रंट भी हो सकता है। दिल्ली पुलिस की यह कार्रवाई निश्चित तौर पर लॉरेंस बिश्नोई और हाशिम बाबा के नेटवर्क की कमर तोड़ने में एक मील का पत्थर साबित होगी।
लॉरेंस बिश्नोई गैंग की ‘मैडम ज़हर’ की गिरफ्तारी पर न्यूज़ रिपोर्ट
