रावलपिंडी में खलबली, दिल्ली में जश्न
आज, ८ फरवरी २०२६ का दिन भारतीय रक्षा इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों में दर्ज होने जा रहा है। जब पूरी दुनिया अपनी-अपनी समस्याओं में उलझी हुई है, तब नई दिल्ली के साउथ ब्लॉक और पेरिस के एलिसी पैलेस के बीच एक ऐसी Defense Deal (रक्षा सौदे) की नींव रखी जा रही है, जिसकी गूंज इस्लामाबाद और रावलपिंडी (पाकिस्तानी सेना मुख्यालय) में साफ सुनी जा सकती है।
भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी कोई नई बात नहीं है, लेकिन आज जिस स्तर की बातचीत चल रही है, वह अभूतपूर्व है। हम बात कर रहे हैं उन घातक मिसाइलों की, उन अत्याधुनिक हथियारों की, जो न केवल दुश्मन के रडार को चकमा देने में सक्षम हैं, बल्कि दुश्मन की सोच से भी तेज हमला कर सकती हैं। यह बातचीत सिर्फ हथियारों की खरीद-फरोख्त तक सीमित नहीं है; यह Technology Transfer और ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारत को एक महाशक्ति बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
सूत्रों के मुताबिक, भारत और फ्रांस के बीच लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों (Meteor Missile के उन्नत संस्करण) और डीप स्ट्राइक क्रूज मिसाइलों (SCALP Missile) की नई खेप को लेकर एक मेगा एग्रीमेंट फाइनल होने के कगार पर है। जैसे ही यह खबर बाहर आई, सीमा पार पाकिस्तान के रक्षा हलकों में हड़कंप मच गया है। वजह साफ है – पाकिस्तान के पास फिलहाल इन मिसाइलों का कोई तोड़ नहीं है। उसका पूरा एयर डिफेंस सिस्टम इन फ्रांसीसी “ब्रह्मास्त्रों” के सामने बौना साबित हो सकता है।
भाग 1: भारत-फ्रांस दोस्ती – भरोसे का दूसरा नाम (The Strategic Partnership)
रक्षा सौदों की दुनिया में भरोसा (Trust) सबसे बड़ी करेंसी होती है। पैसा तो कई देशों के पास है, लेकिन सही समय पर सही हथियार देना हर किसी के बस की बात नहीं होती। १९९८ में जब भारत ने परमाणु परीक्षण किया था और पूरी दुनिया ने हम पर प्रतिबंध लगा दिए थे, तब भी फ्रांस भारत के साथ चट्टान की तरह खड़ा था।
मिराज से राफेल तक का सफर:
कारगिल युद्ध (१९९९) में जब भारतीय वायुसेना ने Mirage 2000 का इस्तेमाल करके टाइगर हिल पर बमबारी की थी, तब पाकिस्तानी घुसपैठियों को दिन में तारे नजर आ गए थे। वह मिराज विमान फ्रांस का ही था। फिर २०१९ में बालाकोट एयरस्ट्राइक हुई, उसमें भी मिराज ने ही जलवा दिखाया। और अब, २०२० के दशक में Rafale Fighter Jet ने भारतीय वायुसेना की रीढ़ को मजबूत किया है। २०२६ में हम देख रहे हैं कि भारत और फ्रांस का यह रिश्ता सिर्फ खरीदार और विक्रेता का नहीं रहा, बल्कि यह एक Strategic Partnership (रणनीतिक साझेदारी) में बदल चुका है।
आज की बातचीत का मुख्य एजेंडा सिर्फ विमान खरीदना नहीं, बल्कि उन विमानों को “अजेय” बनाने वाली मिसाइलें और सेंसर तकनीक हासिल करना है। फ्रांस जानता है कि दक्षिण एशिया में चीन और पाकिस्तान के गठजोड़ को रोकने के लिए एक मजबूत भारत का होना जरूरी है। इसीलिए, वह अपनी सबसे संवेदनशील तकनीक भी भारत के साथ साझा करने को तैयार है, जो शायद वह नाटो (NATO) के अपने सहयोगियों को भी नहीं देता।
भाग 2: क्या है वह ‘हथियार’ जिससे पाकिस्तान डरता है? (The Missiles)
इस Defense Deal की जान वे मिसाइलें हैं, जो राफेल या तेजस में लगने के बाद उसे “स्काई प्रीडेटर” (आकाश का शिकारी) बना देती हैं। आइए इन मिसाइलों का तकनीकी विश्लेषण करें।
1. मेटिअर मिसाइल (Meteor Missile) – ‘नो एस्केप जोन’ का बादशाह:
पाकिस्तान के पास एफ-16 (F-16) विमान हैं, जिन पर वह बहुत इतराता है। उनके पास अमेरिका की एमरैम (AMRAAM) मिसाइलें हैं। लेकिन Meteor Missile एक अलग ही लीग की चीज है।
- रेंज: इसकी मारक क्षमता १५० किलोमीटर से भी अधिक है। यानी भारतीय पायलट सीमा के इस पार रहकर ही लाहौर के ऊपर उड़ रहे पाकिस्तानी विमान को गिरा सकता है।
- रैमजेट इंजन: सामान्य मिसाइलें कुछ सेकंड जलने के बाद अपनी गति खो देती हैं, लेकिन मेटिअर में डक्टेड रैमजेट इंजन लगा है। इसका मतलब है कि यह अपने लक्ष्य तक पहुँचने तक अपनी गति बढ़ाती रहती है।
- नो एस्केप जोन (No Escape Zone): मेटिअर का ‘नो एस्केप जोन’ (वह क्षेत्र जहाँ से बचना नामुमकिन है) दुनिया की किसी भी अन्य मिसाइल से तीन गुना बड़ा है। यही वह मिसाइल है जिसने २०१९ के बाद से पाकिस्तान एयरफोर्स (PAF) को भारतीय सीमा के पास आने से पहले सौ बार सोचने पर मजबूर कर दिया है। और अब २०२६ की इस डील में मेटिअर के और भी उन्नत संस्करण (Next Gen Meteor) की बात हो रही है।

2. स्कैल्प मिसाइल (SCALP Missile) – पिनपॉइंट एक्यूरेसी:
अगर बालाकोट एयरस्ट्राइक के समय भारत के पास SCALP Missile होती, तो हमारे विमानों को सीमा पार करने की भी जरूरत नहीं पड़ती।
- डीप स्ट्राइक: यह एक क्रूज मिसाइल है जो ५०० किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक मार कर सकती है।
- बंकर बस्टर: यह दुश्मन के बेहद सुरक्षित बंकरों, रडार स्टेशनों या आतंकवादी शिविरों को तबाह करने में माहिर है।
- स्टील्थ: यह नीची उड़ान भरती है और पहाड़ियों की आड़ लेकर दुश्मन के रडार को चकमा देती है। आज की बातचीत में इन मिसाइलों की संख्या बढ़ाने और इन्हें भारत में ही बनाने (Make in India) पर जोर दिया जा रहा है।
भाग 3: ‘मेक इन इंडिया’ और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (Technology Transfer)
२०२६ का भारत वह भारत नहीं है जो सिर्फ हथियार खरीदता था। अब भारत हथियार बनाना भी चाहता है। इस Defense Deal का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है – Technology Transfer (तकनीक का हस्तांतरण)।
DRDO और MBDA का गठजोड़:
यूरोप की मिसाइल निर्माता कंपनी MBDA (जो मेटिअर और स्कैल्प बनाती है) और भारत की DRDO (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) के बीच गहरा सहयोग चल रहा है। भारत चाहता है कि इन मिसाइलों के कलपुर्जे, गाइडेंस सिस्टम और वॉरहेड भारत में ही बनें। इससे दो फायदे होंगे:
- लागत में कमी: मिसाइलें सस्ती पड़ेंगी।
- आत्मनिर्भरता: युद्ध के समय हमें किसी दूसरे देश पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
कावेरी इंजन और सफरान (Safran):
फ्रांस की इंजन निर्माता कंपनी ‘सफरान’ (Safran) के साथ भी भारत के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के इंजन को लेकर बातचीत अंतिम चरण में है। अगर यह डील पक्की होती है, तो भारत ५वीं और ६ठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान बनाने वाले चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा। यह Pakistan’s Fear (पाकिस्तान के डर) का सबसे बड़ा कारण है – भारत का तकनीकी रूप से उनसे दशकों आगे निकल जाना।
भाग 4: राफेल मरीन – समंदर का सिकंदर (Naval Power)
बातचीत सिर्फ हवा तक सीमित नहीं है। हिंद महासागर में चीन की बढ़ती दादागिरी और पाकिस्तान की नेवी को काउंटर करने के लिए भारतीय नौसेना को एक मजबूत लड़ाकू विमान की जरूरत थी। २०२६ में INS Vikrant (भारत का स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर) पूरी तरह से ऑपरेशनल है और उसके डेक पर तैनात होने के लिए Rafale Marine (राफेल-एम) का चयन पहले ही हो चुका है।
आज की बैठक में Rafale Marine की डिलीवरी को तेज करने और उसके साथ लगने वाली एंटी-शिप मिसाइलों (Exocet) पर चर्चा हो रही है।
- राफेल-एम अपने साथ परमाणु हथियार ले जाने में भी सक्षम है।
- यह पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट और कराची हार्बर के लिए एक सीधा खतरा बन सकता है।
- इसके रडार सिस्टम इतने शक्तिशाली हैं कि वे सैकड़ों किलोमीटर दूर से दुश्मन के जहाजों को ट्रैक कर सकते हैं।
फ्रांस के साथ यह Defense Deal भारत को ‘ब्लू वॉटर नेवी’ (गहरे समुद्र में लड़ने वाली नौसेना) बनने में मदद कर रही है।
भाग 5: पाकिस्तान की प्रतिक्रिया और लाचारी (Pakistan’s Reaction)
जब भी भारत कोई बड़ा हथियार खरीदता है, पाकिस्तान में एक अजीब सी बेचैनी (Paranoia) छा जाती है। पाकिस्तानी मीडिया में आज सुबह से ही इस Defense Deal को लेकर बहस छिड़ी हुई है। वहां के रक्षा विशेषज्ञ इसे “दक्षिण एशिया में हथियारों की होड़” (Arms Race) बता रहे हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि यह होड़ एकतरफा है।

आर्थिक बदहाली:
२०२६ में पाकिस्तान अपनी आर्थिक समस्याओं से जूझ रहा है। उसके पास अपने एफ-16 विमानों के स्पेयर पार्ट्स खरीदने के पैसे भी मुश्किल से जुट रहे हैं। ऐसे में वह भारत की Rafale और Meteor Missile का मुकाबला कैसे करेगा? चीन ने पाकिस्तान को जे-10सी (J-10C) विमान दिए हैं, लेकिन दुनिया जानती है कि चीनी माल की विश्वसनीयता (Reliability) क्या है। एक फ्रांसीसी राफेल के सामने चीनी विमान का टिकना मुश्किल है।
रणनीतिक असंतुलन:
पाकिस्तान की पूरी रक्षा रणनीति “भारत को डराने” (Deterrence) पर टिकी थी। लेकिन भारत के पास S-400 (रूस से) और अब फ्रांस से आक्रामक मिसाइलें होने के बाद, पाकिस्तान की यह रणनीति फेल हो रही है। रावलपिंडी में बैठे जनरलों को पता है कि अब भारत के पास ऐसी क्षमता है कि वह बिना बॉर्डर क्रॉस किए पाकिस्तान के किसी भी कोने को निशाना बना सकता है।
भाग 6: भू-राजनीति – अमेरिका और रूस के बीच फ्रांस का विकल्प (Geopolitics)
भारत ने फ्रांस को ही क्यों चुना? यह सवाल बहुत गहरा है।
- रूस: हमारा पुराना दोस्त है, लेकिन यूक्रेन युद्ध के बाद उसकी सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। साथ ही, रूस अब चीन के ज्यादा करीब जा रहा है।
- अमेरिका: अमेरिका की तकनीक बेहतरीन है, लेकिन उसकी शर्तें (Conditions) बहुत होती हैं। वह कब प्रतिबंध लगा दे, भरोसा नहीं। पाकिस्तान को एफ-16 के पैकेजेस देना भी भारत को पसंद नहीं आया।
ऐसे में, France एक “सदाबहार मित्र” (All-weather Friend) बनकर उभरा है। फ्रांस ने कभी भारत के आंतरिक मामलों (जैसे कश्मीर या सीएए) में दखल नहीं दिया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भी फ्रांस हमेशा भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन करता है। यह Defense Deal सिर्फ हथियारों की नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र विदेश नीति (Independent Foreign Policy) की जीत है।
भाग 7: भारतीय वायुसेना की बढ़ती ताकत (IAF Modernization)
२०२६ में भारतीय वायुसेना (IAF) एक बड़े परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। पुराने मिग-21 (Mig-21) पूरी तरह रिटायर हो चुके हैं। उनकी जगह स्वदेशी तेजस मार्क-1A और मार्क-2 ले रहे हैं। और ‘हाई-एंड’ (High-end) ऑपरेशन्स के लिए Rafale मौजूद है।
इस नई Defense Deal के तहत फ्रांस से ३६ और राफेल विमानों की खरीद की भी अटकलें तेज हैं। अगर ऐसा होता है, तो भारत के पास राफेल के ४-५ स्क्वाड्रन हो जाएंगे।
- नेटवर्क सेंट्रिक वॉरफेयर: ये सभी विमान आपस में डेटालिंक के जरिए जुड़े होंगे। एक राफेल जो देखेगा, वह जानकारी तुरंत सुखोई-30 या तेजस को मिल जाएगी।
- इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW): फ्रांस के स्पेक्ट्रा (SPECTRA) सिस्टम ने भारतीय वायुसेना को इलेक्ट्रॉनिक युद्ध में भी बढ़त दिला दी है। यह सिस्टम दुश्मन के रडार को जाम कर सकता है।]

भाग 8: सबमरीन डील – पानी के नीचे की जंग (Project-75 & 75)
हवा के साथ-साथ पानी के नीचे भी भारत-फ्रांस सहयोग गहरा है। मुंबई के मझगांव डॉकयार्ड में फ्रांस की मदद से स्कॉर्पीन (Scorpene) क्लास की सबमरीन बनाई गई हैं। आज की बातचीत में तीन और अतिरिक्त स्कॉर्पीन सबमरीन या फिर परमाणु हमलावर पनडुब्बी (Nuclear Attack Submarine) के प्रोजेक्ट पर चर्चा हो सकती है।
पाकिस्तान के पास चीन की दी हुई कुछ पनडुब्बियां हैं, लेकिन फ्रांस की तकनीक ‘साइलेंट किलर’ मानी जाती है। भारतीय नौसेना का लक्ष्य हिंद महासागर में चीन की पीएलए नेवी (PLA Navy) को काउंटर करना है, और इसमें फ्रांस एक प्रमुख साझेदार है।
भाग 9: आर्थिक पहलू – भारत में रोजगार (Economic Impact)
रक्षा सौदों की आलोचना अक्सर यह कहकर की जाती है कि “गरीब देश हथियार क्यों खरीद रहा है?” लेकिन २०२६ में हम देख रहे हैं कि यह Defense Deal भारत की अर्थव्यवस्था को भी गति दे रही है।
- डिफेंस कॉरिडोर: उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में बने डिफेंस कॉरिडोर में फ्रांस की कंपनियां (जैसे Safran, Dassault, Thales) अपनी फैक्ट्रियां लगा रही हैं।
- रोजगार: इससे हजारों भारतीय इंजीनियरों और तकनीशियनों को रोजगार मिल रहा है।
- MSME: छोटी भारतीय कंपनियां अब इन बड़ी फ्रांसीसी कंपनियों को पुर्जे सप्लाई कर रही हैं।
- MRO हब: नागपुर में डसॉल्ट एविएशन का मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) हब बन रहा है, जिससे पूरे एशिया के राफेल विमानों की सर्विसिंग भारत में हो सकेगी।
यानी, जो पैसा हम खर्च कर रहे हैं, उसका एक बड़ा हिस्सा निवेश के रूप में वापस भारत आ रहा है।
भाग 10: चीन फैक्टर – असली निशाना बीजिंग, पाकिस्तान तो बहाना है
भले ही हेडलाइन में हम Pakistan की बात कर रहे हों, लेकिन रणनीतिकार जानते हैं कि भारत की असली तैयारी चीन (China) के खिलाफ है। हिमालय की ऊंचाइयों पर लद्दाख और अरुणाचल में लड़ने के लिए भारत को हल्के और ताकतवर विमानों की जरूरत है।
- SCALP Missile की रेंज तिब्बत में बने चीनी एयरबेस को निशाना बनाने में सक्षम है।
- Meteor Missile की रेंज चीनी विमानों को भारतीय सीमा से दूर रखने में सक्षम है।
पाकिस्तान इस समीकरण में केवल एक छोटा प्यादा है। भारत अपनी क्षमताओं को इस स्तर पर ले जा रहा है कि उसे ‘टू-फ्रंट वॉर’ (Two-Front War) यानी एक साथ चीन और पाकिस्तान से लड़ने में दिक्कत न हो। फ्रांस इस बात को समझता है और इसीलिए वह भारत को एशिया में चीन के खिलाफ एक संतुलनकारी शक्ति (Balancing Power) के रूप में देखता है।
भाग 11: भविष्य की राह – हाइपरसोनिक मिसाइलें?
क्या यह डील यहीं रुक जाएगी? नहीं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और फ्रांस अब Hypersonic Missile टेक्नोलॉजी पर भी साथ काम करने पर विचार कर रहे हैं। ऐसी मिसाइलें जो ध्वनि की गति से ५ गुना तेज (Mach 5+) चलें और जिन्हें कोई एयर डिफेंस सिस्टम न रोक सके। अगर भारत २०२६-२०३० के बीच यह तकनीक हासिल कर लेता है, तो यह दक्षिण एशिया में ‘गेम ओवर’ स्थिति होगी। पाकिस्तान तो क्या, कोई भी देश भारत की तरफ आंख उठाने की हिम्मत नहीं करेगा।
भाग 12:–सुरक्षित भारत, विकसित भारत
अंत में, ८ फरवरी २०२६ को हो रही यह India-France Defense Deal कोई सामान्य घटना नहीं है। यह नए भारत की हुंकार है। एक ऐसा भारत जो अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। एक ऐसा भारत जो अब ‘रक्षात्मक’ नहीं, बल्कि ‘आक्रामक रक्षा’ (Offensive Defense) की नीति पर चलता है।
ये मिसाइलें, ये विमान, ये पनडुब्बियां – ये सब युद्ध लड़ने के लिए नहीं, बल्कि युद्ध को रोकने के लिए हैं। इसे ही ‘शक्ति द्वारा शांति’ (Peace through Strength) कहते हैं। जब आपके तरकश में Meteor और SCALP जैसे तीर होते हैं, तो दुश्मन अपनी हद में रहता है।
पाकिस्तान का डरना स्वाभाविक है। उसे डरना भी चाहिए। क्योंकि आतंक की फैक्ट्रियां चलाने वाले मुल्क को यह पता होना चाहिए कि अगर उसने हद पार की, तो जवाब देने के लिए राफेल तैयार खड़ा है, और उसके पंखों के नीचे कयामत (मिसाइलें) लदी हुई है।
फ्रांस के साथ यह दोस्ती आने वाले दशकों तक भारत की सुरक्षा की गारंटी बनी रहेगी। आज हर भारतीय को अपनी वायुसेना और अपने वैज्ञानिकों पर गर्व होना चाहिए।
डिफेंस और जियो-पॉलिटिक्स की ऐसी ही गहराई से विश्लेषण वाली रिपोर्ट्स के लिए हमारे ब्लॉग के साथ जुड़े रहें। जय हिन्द, जय भारत!
