Donald Trump and PM Modi Controversy: राजनीति में बयानों की मर्यादा अक्सर चर्चा का विषय रहती है, लेकिन हाल ही में एक कांग्रेस नेता द्वारा दिया गया बयान न केवल विवादित है, बल्कि बेहद सनसनीखेज भी माना जा रहा है। वेनेजुएला में अमेरिकी दखलंदाजी का उदाहरण देते हुए नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के संबंधों पर एक ऐसा सवाल खड़ा किया है, जिससे सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
क्या है पूरा मामला? (The Controversy Explained)
हाल ही में एक सार्वजनिक मंच/प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की विदेश नीति पर चर्चा करते हुए वेनेजुएला के घटनाक्रम का जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस तरह अमेरिका ने वेनेजुएला के शासन और नेताओं के खिलाफ सख्त रुख अपनाया और वहां हस्तक्षेप किया, क्या उसी तरह का व्यवहार भविष्य में भारत के साथ भी हो सकता है?

कांग्रेस नेता ने सीधे तौर पर कहा, “क्या ट्रंप वेनेजुएला की तरह हमारे पीएम को भी उठा लेंगे?” इस बयान का आशय ट्रंप की उस छवि की ओर इशारा करना था जिसमें वे दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में सख्त निर्णय लेने के लिए जाने जाते हैं।
वेनेजुएला का संदर्भ क्यों दिया गया? (Why Venezuela?)
वेनेजुएला और अमेरिका के संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं। अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की सरकार पर कई कड़े प्रतिबंध लगाए हैं और वहां के शासन को अस्थिर करने के आरोप भी अमेरिका पर लगते रहे हैं। कांग्रेस नेता ने इसी ‘हस्तक्षेप’ वाली नीति को आधार बनाकर भारत के परिप्रेक्ष्य में यह टिप्पणी की।
सत्ता पक्ष (BJP) की तीखी प्रतिक्रिया
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस बयान को ‘अमर्यादित’ और ‘देश का अपमान’ बताया है। बीजेपी प्रवक्ताओं का कहना है कि:
- भारत और अमेरिका की तुलना गलत: भारत एक संप्रभु और दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, उसकी तुलना वेनेजुएला जैसे अस्थिर देश से करना तर्कहीन है।
- मोदी-ट्रंप की दोस्ती: पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच व्यक्तिगत संबंध बहुत मजबूत रहे हैं, जो ‘हाउडी मोदी’ और ‘नमस्ते ट्रंप’ जैसे आयोजनों में स्पष्ट रूप से दिखे हैं।
- देश की छवि को नुकसान: विपक्षी नेताओं द्वारा विदेशी नेताओं का नाम लेकर प्रधानमंत्री के खिलाफ इस तरह की भाषा का प्रयोग करना वैश्विक मंच पर भारत की छवि को धूमिल करता है।
क्या भारत-अमेरिका संबंधों पर पड़ेगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप की वापसी के बाद भारत के साथ संबंध व्यापार (Trade) और रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) पर केंद्रित रहेंगे। ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति और पीएम मोदी की ‘मेक इन इंडिया’ नीति के बीच सामंजस्य बिठाना दोनों देशों की प्राथमिकता है। ऐसे में ‘वेनेजुएला स्टाइल हस्तक्षेप’ की बात करना केवल एक राजनीतिक बयानबाजी से ज्यादा कुछ नहीं लगता।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ बयान
जैसे ही यह बयान मीडिया में आया, सोशल मीडिया पर #CongressVsBJP और #ModiTrump ट्रेंड करने लगा। यूजर्स दो गुटों में बंट गए हैं:
- एक वर्ग इसे विपक्ष की ‘डर की राजनीति’ बता रहा है।
- दूसरा वर्ग इसे अभिव्यक्ति की आजादी और अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के प्रति ‘चेतावनी’ के रूप में देख रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष अब ट्रंप की वापसी को घरेलू राजनीति में एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, कूटनीतिक स्तर पर भारत की स्थिति इतनी मजबूत है कि किसी भी देश के लिए इस तरह का ‘हस्तक्षेप’ करना असंभव है। इस तरह के बयान केवल चुनावी माहौल को गरमाने का काम करते हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
लोकतंत्र में सवाल पूछने का अधिकार सबको है, लेकिन जब बात देश के प्रधानमंत्री और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों की हो, तो भाषा की गरिमा अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। कांग्रेस नेता का यह सवाल कि ‘क्या ट्रंप वेनेजुएला की तरह हमारे पीएम को उठा लेंगे?’ भविष्य में राजनीतिक रैलियों में बड़ा मुद्दा बन सकता है।
