Robotic Eye Surgery Technology

चिकित्सा विज्ञान के इतिहास में कुछ क्षण ऐसे होते हैं जो भविष्य की दिशा को पूरी तरह से बदल देते हैं। पेनिसिलिन की खोज से लेकर एमआरआई मशीन के आविष्कार तक, तकनीक ने हमेशा मानव जीवन को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज, हम एक ऐसे ही ऐतिहासिक मोड़ पर खड़े हैं। नेत्र विज्ञान (Ophthalmology) की दुनिया में एक ऐसी क्रांति हुई है जिसकी कल्पना अब तक केवल साइंस फिक्शन फिल्मों में की जाती थी।

ताजा ब्रेकिंग न्यूज़ चीन से आ रही है, जहां वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की एक टीम ने आंखों की सर्जरी के लिए एक अल्ट्रा-प्रिसिशन रोबोटिक सिस्टम (Ultra-Precision Robotic System) विकसित किया है। यह सिस्टम माइक्रोन-लेवल (बाल की मोटाई से भी कम) सटीकता के साथ ऑपरेशन करने में सक्षम है। यह तकनीक उन जटिल रेटिनल और कॉर्नियल सर्जरी को संभव बनाएगी जो मानव हाथों की प्राकृतिक सीमाओं के कारण अब तक या तो असंभव थीं या अत्यधिक जोखिम भरी मानी जाती थीं।

भाग 1: मानव सीमाएं और नेत्र शल्य चिकित्सा की चुनौती

आंख मानव शरीर का सबसे नाजुक और जटिल अंग है। एक अंगूर के छिलके पर सर्जरी करने की कल्पना करें, बिना गूदे को नुकसान पहुंचाए – आंखों की सर्जरी, विशेषकर रेटिना की सर्जरी, इससे भी कहीं अधिक कठिन है।

हाथों का कंपन (Physiological Tremor) दुनिया का सबसे बेहतरीन सर्जन भी पूरी तरह से स्थिर नहीं हो सकता। मानव हाथों में एक प्राकृतिक कंपन (Tremor) होता है। जब कोई सर्जन माइक्रोस्कोप के नीचे काम करता है, तो उसके हाथ लगभग 100 माइक्रोन (0.1 मिलीमीटर) तक हिल सकते हैं। हालांकि यह सुनने में बहुत कम लगता है, लेकिन रेटिना की रक्त वाहिकाओं का व्यास इससे भी कम होता है। रेटिना की सबसे महत्वपूर्ण परतें कागज के एक पन्ने से भी पतली होती हैं। ऐसे में, सर्जन का हल्का सा कंपन मरीज की रोशनी हमेशा के लिए छीन सकता है।

थकान और मानसिक दबाव आंखों की सर्जरी, जैसे कि विट्रोरेटिनल सर्जरी (Vitreoretinal Surgery), घंटों तक चल सकती है। इस दौरान सर्जन को अत्यधिक एकाग्रता बनाए रखनी होती है। समय के साथ शारीरिक थकान और मानसिक तनाव बढ़ता है, जिससे गलती होने की संभावना बढ़ जाती है। एक छोटी सी चूक ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचा सकती है।

यही कारण है कि पिछले कई दशकों से वैज्ञानिक एक ऐसे समाधान की तलाश में थे जो मानव स्पर्श की समझ को मशीनी स्थिरता के साथ जोड़ सके। और अब, चीनी वैज्ञानिकों ने Robotic Eye Surgery के क्षेत्र में वह समाधान ढूंढ लिया है।

भाग 2: चीन का ‘माइक्रो-हैंड’ – तकनीकी चमत्कार

चीन की प्रमुख अनुसंधान संस्थाओं और अस्पतालों के सहयोग से विकसित यह नया रोबोटिक सिस्टम केवल एक मशीन नहीं, बल्कि एक ‘सुपर-सर्जन’ का विस्तार है। इसका नाम अभी तकनीकी हलकों में ‘ओप्थाल्मिक माइक्रो-सर्जिकल रोबोट’ (Ophthalmic Micro-Surgical Robot) दिया गया है।

Robotic Eye Surgery Technology

यह कैसे काम करता है? यह सिस्टम “मास्टर-स्लेव” (Master-Slave) आर्किटेक्चर पर आधारित है।

  1. मास्टर कंसोल: सर्जन मरीज के पास नहीं खड़ा होता, बल्कि एक कंसोल पर बैठता है। वह जॉयस्टिक या विशेष हैंडल के माध्यम से अपने हाथों को हिलाता है।
  2. स्लेव रोबोट: मरीज की आंख के ऊपर रोबोटिक हथियार (Robotic Arms) लगे होते हैं। ये हथियार सर्जन के हाथों की हर हरकत को कॉपी करते हैं, लेकिन एक बड़े अंतर के साथ।
  3. मोशन स्केलिंग (Motion Scaling): यह इस सिस्टम का दिल है। यदि सर्जन अपना हाथ 1 सेंटीमीटर हिलाता है, तो रोबोट की सुई केवल 1 मिलीमीटर (या उससे भी कम) हिलती है। यह तकनीक सर्जन की बड़ी हरकतों को सूक्ष्म, सटीक गतिविधियों में बदल देती है।
  4. ट्रेमर फिल्ट्रेशन (Tremor Filtration): रोबोट का सॉफ्टवेयर सर्जन के हाथों के प्राकृतिक कंपन को पहचानता है और उसे फ़िल्टर कर देता है। यानी रोबोट की सुई बिल्कुल स्थिर रहती है, चाहे सर्जन का हाथ थोड़ा कांप ही क्यों न रहा हो।

सटीकता का स्तर दावा किया जा रहा है कि इस चीनी रोबोट की सटीकता 5 माइक्रोन से भी कम है। संदर्भ के लिए, एक मानव लाल रक्त कोशिका (RBC) का आकार लगभग 8 माइक्रोन होता है। इसका मतलब है कि यह रोबोट एक कोशिका के स्तर पर जाकर सर्जरी कर सकता है। यह Breaking Medical Tech की दुनिया में एक अभूतपूर्व उपलब्धि है।

भाग 3: रेटिनल सर्जरी में गेम-चेंजर

इस रोबोट का सबसे बड़ा प्रभाव रेटिना (दृष्टिपटल) की बीमारियों के इलाज में देखा जा रहा है। रेटिना आंख का पिछला पर्दा होता है जो छवियों को कैप्चर करता है।

1. रेटिनल वेन कैन्युलेशन (Retinal Vein Cannulation) रेटिनल वेन ऑक्लूजन (RVO) एक ऐसी स्थिति है जिसमें रेटिना की नसों में थक्का जम जाता है, जिससे अंधापन हो सकता है। इसका इलाज करने के लिए, दवा को सीधे उस नस में डालना पड़ता है जो बाल से भी पतली होती है। मानव हाथों से यह लगभग असंभव है क्योंकि नस इतनी पतली और नाजुक होती है। चीनी रोबोटिक सिस्टम ने क्लिनिकल ट्रायल में यह साबित किया है कि वह सुई को नसों के अंदर स्थिर रख सकता है और दवा इंजेक्ट कर सकता है। यह तकनीक लाखों लोगों की रोशनी बचा सकती है।

2. इंटरनल लिमिटिंग मेम्ब्रेन पीलिंग (ILM Peeling) मैक्यूलर होल (Macular Hole) जैसी स्थितियों में, सर्जनों को रेटिना की सबसे ऊपरी परत (ILM) को छीलना पड़ता है। यह परत बेहद पतली होती है। अगर गलती से नीचे की परत छिल गई, तो स्थायी अंधापन हो सकता है। रोबोट की स्थिरता और उच्च-रिज़ॉल्यूशन विज़ुअलाइज़ेशन (High-Resolution Visualization) के साथ, सर्जन इस झिल्ली को सुरक्षित रूप से हटा सकते हैं।

भाग 4: 5G और टेली-सर्जरी – दूरदराज के मरीजों के लिए वरदान

चीन 5G तकनीक के मामले में विश्व में अग्रणी है, और इस रोबोटिक सिस्टम में 5G का एकीकरण इसे क्रांतिकारी बनाता है। इसे Remote Robotic Eye Surgery कहा जाता है।

समस्या: चीन (और भारत जैसे देशों) में, विशेषज्ञ नेत्र सर्जन केवल बड़े शहरों (बीजिंग, शंघाई, मुंबई, दिल्ली) में उपलब्ध हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों को जटिल सर्जरी के लिए हजारों किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती है। कई बार इलाज में देरी से रोशनी चली जाती है।

समाधान: इस रोबोट के साथ, एक शीर्ष सर्जन शंघाई में बैठकर तिब्बत या झिंजियांग के किसी सुदूर गांव में मरीज का ऑपरेशन कर सकता है।

  • मरीज के पास केवल रोबोट और नर्सिंग स्टाफ होता है।
  • 5G नेटवर्क के माध्यम से, सर्जन के कंसोल से सिग्नल रीयल-टाइम में (बिना किसी देरी के) रोबोट तक पहुंचते हैं।
  • हाई-डेफिनिशन 3D कैमरे सर्जन को मरीज की आंख का लाइव दृश्य दिखाते हैं।

हाल ही में किए गए प्रदर्शनों में, चीन ने दिखाया है कि 5G के जरिए हजारों किलोमीटर दूर से भी जानवरों की आंखों पर सफल सर्जरी की गई है। देरी (Latency) इतनी कम थी कि सर्जन को लगा ही नहीं कि वह दूसरे शहर में है। यह Breaking Medical Tech ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा के ढांचे को पूरी तरह बदल सकता है।

भाग 5: हैप्टिक फीडबैक – रोबोट को ‘महसूस’ कराने की तकनीक

सर्जरी केवल देखने का नाम नहीं है, यह ‘महसूस’ करने का भी नाम है। जब एक सर्जन ऊतक (Tissue) को काटता है या सुई चुभाता है, तो उसे एक प्रतिरोध (Resistance) महसूस होता है। इसे ‘टैक्टाइल’ या ‘हैप्टिक’ फीडबैक कहते हैं।

पारंपरिक रोबोट्स में सबसे बड़ी कमी यही थी कि सर्जन को पता नहीं चलता था कि वह कितनी जोर से दबा रहा है। लेकिन इस नए चीनी सिस्टम में उन्नत Haptic Feedback Sensors लगे हैं।

  • जब रोबोट की सुई आंख की सतह को छूती है, तो सर्जन के हाथों में स्थित जॉयस्टिक में हल्का कंपन या दबाव महसूस होता है।
  • यह सर्जन को बताता है कि वह ऊतक के कितना करीब है या उसने कितना बल लगाया है।
  • रेटिना जैसे नाजुक अंग के लिए, यह फीडबैक सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत है। यदि बल एक निश्चित सीमा से अधिक हो जाता है, तो सिस्टम स्वचालित रूप से रुक जाता है, जिससे चोट लगने का खतरा खत्म हो जाता है।

भाग 6: वैश्विक प्रतिस्पर्धा और चीन का उदय

मेडिकल रोबोटिक्स के क्षेत्र में अब तक अमेरिका और यूरोप का दबदबा था। ‘दा विंची’ (Da Vinci) सर्जिकल सिस्टम पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है, लेकिन वह मुख्य रूप से पेट और छाती की सर्जरी के लिए है, आंखों के लिए नहीं। आंखों के लिए ‘Preceyes’ (नीदरलैंड) जैसी कंपनियों ने काम किया है, लेकिन चीन का यह नया सिस्टम लागत और तकनीक दोनों में कड़ी टक्कर दे रहा है।

मेड इन चाइना 2025 यह उपलब्धि चीन की “मेड इन चाइना 2025” नीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य हाई-टेक उद्योगों में आत्मनिर्भर बनना और वैश्विक नेतृत्व करना है। चीन सरकार ने मेडिकल रोबोटिक्स और एआई (AI) में अरबों डॉलर का निवेश किया है। इसका असर यह होगा कि भविष्य में सर्जिकल रोबोट सस्ते और सुलभ हो सकते हैं। पश्चिमी देशों की तकनीक अक्सर बहुत महंगी होती है, जिससे विकासशील देशों के लिए उसे खरीदना मुश्किल होता है। चीन का लक्ष्य उच्च गुणवत्ता वाले लेकिन किफायती रोबोट बनाना है, जो एशिया और अफ्रीका के बाजारों में गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं।

Robotic Eye Surgery Technology

भाग 7: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का एकीकरण

यह रोबोट केवल सर्जन के इशारों पर नाचने वाली कठपुतली नहीं है; यह ‘बुद्धिमान’ भी है। सिस्टम में AI-Assisted Navigation को एकीकृत किया गया है।

1. वास्तविक समय में मार्गदर्शन: ऑपरेशन के दौरान, AI एल्गोरिदम ओसीटी (OCT – Optical Coherence Tomography) स्कैन का विश्लेषण करता है। यह सर्जन को स्क्रीन पर ‘ऑगमेंटेड रियलिटी’ (Augmented Reality) के जरिए दिखाता है कि नसों और संवेदनशील क्षेत्रों की गहराई कितनी है। यह एक जीपीएस (GPS) की तरह काम करता है, जो सर्जन को बताता है कि “यहाँ मत काटो” या “यहाँ सुई डालो”।

2. स्वचालित चरण: भविष्य के अपडेट्स में, कुछ रूटीन कार्य (जैसे चीरा लगाना या टांका लगाना) पूरी तरह से स्वचालित (Automated) हो सकते हैं। सर्जन केवल निगरानी करेगा और रोबोट अपना काम करेगा। हालांकि, पूर्ण स्वचालन (Full Automation) में अभी समय है, लेकिन हम उस दिशा में बढ़ रहे हैं।

भाग 8: मरीजों के लिए क्या लाभ हैं?

तकनीक कितनी भी उन्नत क्यों न हो, अंततः मायने यह रखता है कि मरीज को क्या फायदा मिल रहा है।

  1. सुरक्षा: रोबोटिक सर्जरी में मानवीय भूल की संभावना न्यूनतम हो जाती है। अनैच्छिक हाथ हिलना या थकान के कारण होने वाली गलतियां खत्म हो जाती हैं।
  2. बेहतर परिणाम: चूंकि सर्जरी अधिक सटीक होती है, ऊतकों को कम नुकसान पहुंचता है (Minimally Invasive)।
  3. तेजी से रिकवरी: कम चीर-फाड़ और सटीक ऑपरेशन का मतलब है कि आंख जल्दी ठीक होती है। मरीज को अस्पताल में कम समय बिताना पड़ता है।
  4. असंभव सर्जरी अब संभव: जैसा कि पहले बताया गया है, नसों में इंजेक्शन जैसी प्रक्रियाएं जो पहले बहुत जोखिम भरी थीं, अब एक नियमित प्रक्रिया बन सकती हैं। इससे उन लाखों लोगों को रोशनी मिल सकती है जिन्हें पहले “लाइलाज” घोषित कर दिया गया था।

भाग 9: चुनौतियां और नैतिक प्रश्न

हर नई तकनीक अपने साथ चुनौतियां लेकर आती है, और यह रोबोटिक सिस्टम भी अपवाद नहीं है।

लागत का मुद्दा भले ही चीन किफायती मॉडल बनाने की कोशिश कर रहा है, फिर भी एक रोबोटिक सिस्टम की कीमत करोड़ों में होती है। क्या भारत या अन्य विकासशील देशों के सरकारी अस्पताल इसे वहन कर पाएंगे? क्या इससे इलाज का खर्च इतना बढ़ जाएगा कि आम आदमी की पहुंच से बाहर हो जाए? यह एक बड़ा आर्थिक सवाल है।

Robotic Eye Surgery Technology

प्रशिक्षण (Training) नेत्र सर्जनों को इस रोबोट को चलाने के लिए नए सिरे से प्रशिक्षण लेना होगा। यह पारंपरिक सर्जरी से बिल्कुल अलग है। यह एक वीडियो गेम खेलने जैसा कौशल मांगता है। मेडिकल कॉलेजों के पाठ्यक्रम में बदलाव करने होंगे।

विश्वास और जिम्मेदारी अगर सर्जरी के दौरान रोबोट में कोई तकनीकी खराबी आ जाए या इंटरनेट कनेक्शन टूट जाए (टेली-सर्जरी के मामले में), तो जिम्मेदार कौन होगा? सर्जन, रोबोट निर्माता, या टेलीकॉम कंपनी? कानूनी ढांचे को इन नई वास्तविकताओं के साथ तालमेल बिठाना होगा। इसके अलावा, क्या मरीज एक मशीन पर भरोसा करेंगे कि वह उनकी आंखों में सुई चुभाए?

भाग 10: भारत के लिए निहितार्थ

भारत, जो दुनिया की सबसे बड़ी नेत्रहीन आबादी वाले देशों में से एक है, के लिए यह Breaking Medical Tech बहुत महत्वपूर्ण है। भारत में मोतियाबिंद और डायबिटिक रेटिनोपैथी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

हालांकि भारत में भी एम्स (AIIMS) और आईआईटी (IIT) जैसे संस्थानों में सर्जिकल रोबोटिक्स पर काम हो रहा है, लेकिन अभी हम पूर्ण रूप से विकसित कमर्शियल सिस्टम से दूर हैं। चीन की यह सफलता भारत के लिए एक प्रेरणा और चेतावनी दोनों है। हमें अपने आर-एंड-डी (R&D) में निवेश बढ़ाना होगा। साथ ही, भारत इस तकनीक का एक बड़ा बाजार बन सकता है। भारतीय डॉक्टर, जो अपनी कुशलता के लिए जाने जाते हैं, अगर इस तकनीक को अपनाते हैं, तो मेडिकल टूरिज्म (Medical Tourism) को भारी बढ़ावा मिल सकता है।

भाग 11: भविष्य का रोडमैप

नेत्र शल्य चिकित्सा का भविष्य अब मानव हाथों तक सीमित नहीं है। हम एक ऐसे युग में प्रवेश कर रहे हैं जहां “मैन और मशीन” (Man and Machine) का सहयोग चमत्कार करेगा।

अगले 5 से 10 वर्षों में हम देख सकते हैं:

  • नैनो-रोबोट्स (Nano-robots): ऐसे सूक्ष्म रोबोट जो इंजेक्शन के जरिए आंख में छोड़े जाएंगे और अंदर जाकर दवा छोड़ेंगे या मरम्मत करेंगे।
  • पूरी तरह स्वायत्त सर्जरी: मोतियाबिंद जैसी सर्जरी, जो बहुत ही मानकीकृत (Standardized) है, पूरी तरह रोबोट द्वारा की जा सकेगी, जिससे सर्जन जटिल मामलों पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।
  • स्मार्ट इम्प्लांट्स: रोबोटिक सर्जरी का उपयोग करके रेटिना में इलेक्ट्रॉनिक चिप्स (Bionic Eyes) लगाना आसान हो जाएगा, जिससे पूर्ण अंधापन वाले लोग भी देख सकेंगे।

दृष्टि का नया सवेरा

चीन द्वारा विकसित यह अल्ट्रा-प्रिसिशन रोबोटिक सिस्टम चिकित्सा विज्ञान में एक बड़ी छलांग है। यह तकनीक आशा की एक नई किरण है उन लाखों लोगों के लिए जो अंधेरे में जी रहे हैं। यह हमें याद दिलाता है कि तकनीक का सही उपयोग पीड़ा को कम करने और मानव जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाने में कितना शक्तिशाली हो सकता है।

जैसे-जैसे यह तकनीक परिपक्व होगी और दुनिया भर के अस्पतालों में पहुंचेगी, हम देखेंगे कि “असंभव” शब्द चिकित्सा शब्दकोश से धीरे-धीरे मिटता जा रहा है। आंखों की सर्जरी अब केवल डॉक्टर के स्थिर हाथों पर निर्भर नहीं रहेगी, बल्कि यह गणितीय सटीकता और रोबोटिक स्थिरता का एक अद्भुत संगम होगी।

यह Breaking Medical Tech सिर्फ एक खबर नहीं है; यह एक वादा है—एक उज्ज्वल, स्पष्ट और दृष्टि-युक्त भविष्य का। हमें इसका स्वागत खुली बांहों और सतर्क आशावाद के साथ करना चाहिए।

(यह ब्लॉग पोस्ट वर्तमान तकनीकी रुझानों और रोबोटिक सर्जरी में हो रहे शोध पर आधारित एक विस्तृत विश्लेषण है। इसका उद्देश्य पाठकों को चिकित्सा तकनीक के भविष्य से अवगत कराना है।)

अतिरिक्त तकनीकी विश्लेषण: सेंसर और एक्चुएटर्स की भूमिका

इस रोबोटिक सिस्टम की सफलता के पीछे सबसे बड़ा हाथ Piezoelectric Actuators का है। पारंपरिक इलेक्ट्रिक मोटर्स गियर्स का उपयोग करते हैं, जिनमें थोड़ा ‘प्ले’ या ढीलापन (Backlash) होता है। माइक्रोन स्तर पर यह ढीलापन स्वीकार्य नहीं है। पीजोइलेक्ट्रिक मोटर्स विद्युत संकेतों के जवाब में सामग्री के विस्तार और संकुचन का उपयोग करते हैं। यह बिना किसी गियर के, परमाणु स्तर पर सटीक गति प्रदान करता है। यही वह तकनीक है जो इस चीनी रोबोट को दुनिया के अन्य प्रणालियों से अलग और बेहतर बनाती है।

इसके अलावा, Micro-stereopsis तकनीक का उपयोग किया गया है। यह रोबोट को गहराई (Depth) का सटीक अनुमान लगाने में मदद करता है। मानव आंख दो अलग-अलग कोणों से देखकर गहराई का पता लगाती है। रोबोटिक सिस्टम में लगे माइक्रो-कैमरे यही काम करते हैं, लेकिन बहुत अधिक आवर्धन (Magnification) के साथ। यह सर्जन को एक 3D दुनिया में ले जाता है जहां रेटिना की सतह पहाड़ों और घाटियों जैसी दिखती है, जिससे नेविगेशन आसान हो जाता है।

आर्थिक प्रभाव और चिकित्सा पर्यटन

इस तकनीक का आर्थिक पहलू भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उच्च-सटीक सर्जरी का मतलब है कम जटिलताएं। रेटिनल सर्जरी के बाद की जटिलताएं (Post-operative complications) इलाज की लागत को कई गुना बढ़ा देती हैं। यदि रोबोटिक सर्जरी पहले प्रयास में ही 100% सफलता सुनिश्चित करती है, तो लंबे समय में यह स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के लिए सस्ता साबित होगी।

चीन का इरादा स्पष्ट रूप से वैश्विक चिकित्सा उपकरण बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का है। वे इसे यूरोप और अमेरिका के महंगे विकल्पों के मुकाबले एक लागत-प्रभावी विकल्प के रूप में पेश करेंगे। यह एशिया प्रशांत क्षेत्र में चिकित्सा पर्यटन की गतिशीलता को बदल सकता है, जहां मरीज उन्नत रोबोटिक सर्जरी के लिए चीन या उन देशों की यात्रा कर सकते हैं जो इस तकनीक को अपनाएंगे।

अंतिम विचार

“यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:” – यह कहावत यहाँ तकनीक के संदर्भ में बदली जा सकती है: “जहाँ विज्ञान और करुणा का मिलन होता है, वहीं चमत्कार होते हैं।” यह रोबोटिक सिस्टम विज्ञान का चमत्कार है, लेकिन इसके मूल में करुणा है – दृष्टिहीनता को समाप्त करने की मानवीय इच्छा। जैसे-जैसे हम 2026 और उससे आगे बढ़ते हैं, यह देखना रोमांचक होगा कि यह Ultra-Precision Robotic System कैसे लाखों जिंदगियों को रोशन करता है।

By Meera Shah

मीरा तेज खबरी (Tez Khabri) के साथ जुड़ी एक समाचार लेखिका हैं। वे सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, महिला संबंधित विषयों और जनहित से जुड़ी खबरों पर लेखन करती हैं। मीरा का उद्देश्य पाठकों तक सरल भाषा में सत्यापित, उपयोगी और भरोसेमंद जानकारी पहुंचाना है।

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