आज का दिन इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया है। पूरे शहर के लिए आज गर्व और गौरव का क्षण था, जब सेक्टर-21 के मुख्य चौराहे पर हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक, अदम्य साहसी और कुशल रणनीतिकार छत्रपति शिवाजी महाराज की 20 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा का अनावरण किया गया।
शिवाजी महाराज की जयंती (शिवजयंती) से ठीक दो दिन पहले आयोजित इस अनावरण समारोह ने पूरे क्षेत्र को ‘शिवमय’ कर दिया। भगवा ध्वजों की लहर, ढोल-ताशों की गूंज और “जय भवानी, जय शिवाजी” के गगनभेदी नारों के बीच जब प्रतिमा से पर्दा हटा, तो वहां मौजूद हजारों लोगों की आंखें श्रद्धा और उत्साह से भर गईं।
1. भव्यता का प्रतीक: प्रतिमा की मुख्य विशेषताएं
सेक्टर-21 में स्थापित यह प्रतिमा न केवल शहर की सबसे ऊंची प्रतिमाओं में से एक है, बल्कि यह कला और शिल्प कौशल का एक अद्भुत नमूना भी है।
- ऊंचाई और आधार: प्रतिमा की कुल ऊंचाई 20 फीट है। इसे लगभग 10 फीट ऊंचे एक मजबूत ग्रेनाइट के चबूतरे (Pedestal) पर स्थापित किया गया है, जिससे इसकी कुल ऊंचाई जमीन से 30 फीट हो जाती है।
- धातु और निर्माण: इस प्रतिमा का निर्माण उच्च गुणवत्ता वाले कांस्य (Bronze) से किया गया है। इसे बनाने में देश के प्रसिद्ध मूर्तिकारों ने लगभग 8 महीने तक दिन-रात मेहनत की है।
- अश्वारूढ़ मुद्रा: महाराज को उनके प्रिय अश्व (घोड़े) पर सवार दिखाया गया है। घोड़े के आगे के दो पैर हवा में हैं, जो गति, साहस और विजय का प्रतीक हैं। महाराज के एक हाथ में तलवार है और उनकी दृष्टि दूर क्षितिज पर टिकी है, जो उनके ‘स्वराज्य’ के विजन को दर्शाती है।
- बारीकियां: प्रतिमा में शिवाजी महाराज के राजसी वस्त्रों, उनकी ढाल, तलवार की मूठ और उनके चेहरे के भावों को इतनी बारीकी से उकेरा गया है कि ऐसा प्रतीत होता है मानो महाराज अभी बोल उठेंगे।

2. अनावरण समारोह: एक उत्सव जैसा माहौल
अनावरण कार्यक्रम किसी उत्सव से कम नहीं था। सुबह से ही सेक्टर-21 में लोगों का हुजूम जुटने लगा था।
- पारंपरिक स्वागत: कार्यक्रम की शुरुआत महाराष्ट्र के प्रसिद्ध ढोल-ताशा पथक के प्रदर्शन से हुई। तालबद्ध गूंज ने उपस्थित जनसमूह में जबरदस्त ऊर्जा भर दी।
- वीआईपी और अतिथि: अनावरण समारोह में शहर के गणमान्य नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और इतिहास प्रेमियों ने शिरकत की। मुख्य अतिथि ने रिमोट का बटन दबाकर और प्रतिमा पर पुष्पवर्षा करके इसका अनावरण किया।
- आतिशबाजी और लेजर शो: शाम के समय प्रतिमा के आसपास विशेष लाइट एंड साउंड शो का आयोजन किया गया, जिसमें शिवाजी महाराज के जीवन के प्रमुख प्रसंगों (जैसे अफजल खान वध, आगरा से मुक्ति और राज्याभिषेक) को डिजिटल माध्यम से दिखाया गया।
3. सेक्टर-21 ही क्यों? स्थान का महत्व
सेक्टर-21 शहर का एक प्रमुख केंद्र है। यहां इस प्रतिमा को स्थापित करने के पीछे एक विशेष उद्देश्य है:
- प्रेरणा का केंद्र: यहां से रोजाना हजारों छात्र और युवा गुजरते हैं। यह प्रतिमा उन्हें महाराज के साहस और नैतिकता की याद दिलाती रहेगी।
- सांस्कृतिक पहचान: यह स्थान अब शहर की नई सांस्कृतिक पहचान बन गया है। अब से सभी महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और सांस्कृतिक पर्वों पर यहां सार्वजनिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा सकेगा।
- सुंदरीकरण: प्रतिमा के चारों ओर एक सुंदर बगीचा और बैठने की जगह विकसित की गई है, जिससे यह स्थान पर्यटकों और नागरिकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है।

4. छत्रपति शिवाजी महाराज: आज के युवाओं के लिए रोल मॉडल
शिवाजी महाराज सिर्फ एक योद्धा नहीं थे, वे एक महान प्रशासक और दूरदर्शी नेता थे। उनकी प्रतिमा का अनावरण हमें उनके इन गुणों को आत्मसात करने की याद दिलाता है:
- प्रबंधन कौशल (Management Skills): महाराज ने शून्य से स्वराज्य का निर्माण किया। उनके पास सीमित संसाधन थे, लेकिन उनका प्रबंधन और नियोजन (Planning) इतना सटीक था कि उन्होंने उस समय की बड़ी-बड़ी सत्ताओं को चुनौती दी।
- नौसेना के जनक (Father of Indian Navy): उन्होंने भविष्य की चुनौतियों को पहचाना और भारतीय तटों की रक्षा के लिए एक मजबूत नौसेना का गठन किया।
- महिला सम्मान: उनके शासन में महिलाओं का सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता थी। दुश्मन की महिलाओं को भी उन्होंने माता के समान सम्मान देकर सुरक्षित विदा किया।
- छापामार युद्ध (Guerrilla Warfare): उन्होंने भूगोल का उपयोग अपनी ताकत के रूप में किया और ‘गनिमी कावा’ तकनीक से बड़ी सेनाओं को मात दी।
5. सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया: #ShivajiMaharajStatue ट्रेंडिंग
जैसे ही प्रतिमा के अनावरण की तस्वीरें इंटरनेट पर आईं, हैशटैग #ShivajiMaharaj और #Sector21 सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा।
- एक यूजर ने लिखा: “आज हमारे सेक्टर का मान बढ़ गया। महाराज की यह प्रतिमा हमें अन्याय के खिलाफ लड़ने की प्रेरणा देगी।”
- दूसरे यूजर का कहना था: “20 फीट की यह प्रतिमा शहर की भव्यता में चार चांद लगा रही है। लाइटिंग के बाद रात का नजारा और भी अद्भुत है।”
6. निष्कर्ष: विरासत को जीवित रखना
सेक्टर-21 में स्थापित छत्रपति शिवाजी महाराज की यह भव्य प्रतिमा केवल पत्थर या धातु की संरचना नहीं है। यह हमारे आत्म-सम्मान, शौर्य और न्यायप्रियता का प्रतीक है। यह हमें याद दिलाती है कि एक व्यक्ति अपने दृढ़ संकल्प से इतिहास की धारा बदल सकता है।
प्रशासन और स्थानीय नागरिकों की यह जिम्मेदारी है कि वे इस प्रतिमा और इसके आसपास के परिसर की पवित्रता और स्वच्छता बनाए रखें। आने वाली पीढ़ियां जब इस प्रतिमा को देखेंगी, तो वे निश्चित रूप से अपने गौरवशाली अतीत पर गर्व करेंगी।
निश्चयाचा महामेरू | बहुत जनांसी आधारू | अखंडस्थितीचा निर्धारू | श्रीमंत योगी ||
