नए साल 2026 की शुरुआत खगोलीय घटनाओं के लिहाज से बहुत खास होने वाली है। साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण मार्च महीने की पूर्णिमा तिथि पर लगने जा रहा है। हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में ग्रहण को एक महत्वपूर्ण घटना माना जाता है, जिसका सीधा असर मानव जीवन और राशियों पर पड़ता है।
यहाँ जानिए साल 2026 के पहले चंद्र ग्रहण की तारीख, समय और सूतक काल के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में पूरी जानकारी:

1. चंद्र ग्रहण 2026 की तारीख और समय
साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026 को लगने वाला है। यह एक पूर्ण चंद्र ग्रहण (Total Lunar Eclipse) होगा।
- तिथि: फाल्गुन पूर्णिमा (होली के आसपास)।
- दृश्यता: यह ग्रहण अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका और एशिया के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा। भारत में इसकी दृश्यता के आधार पर ही सूतक काल मान्य होगा।
2. सूतक काल का समय
शास्त्रों के अनुसार, चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है।
- चूँकि यह पूर्ण चंद्र ग्रहण है, इसलिए जिन स्थानों पर यह दिखाई देगा, वहां मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे और पूजा-पाठ वर्जित होगा।
- गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के लिए सूतक के नियम थोड़े लचीले होते हैं।
3. सूतक काल में भूलकर भी न करें ये 5 काम
मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के समय वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है, इसलिए निम्नलिखित कार्यों से बचना चाहिए:
- भोजन करना और बनाना: सूतक काल शुरू होने के बाद खाना बनाना और खाना अशुभ माना जाता है। ग्रहण से पहले ही पके हुए भोजन में तुलसी के पत्ते डाल देने चाहिए ताकि वह शुद्ध रहे।
- पूजा-पाठ और मूर्ति स्पर्श: ग्रहण के दौरान भगवान की मूर्तियों को स्पर्श नहीं करना चाहिए। मंदिरों के पट बंद कर दिए जाते हैं। इस दौरान केवल मन ही मन इष्ट देव का ध्यान या मंत्र जप करना चाहिए।
- धारदार वस्तुओं का प्रयोग: विशेषकर गर्भवती महिलाओं को सुई, कैंची, चाकू जैसी नुकीली या धारदार वस्तुओं का उपयोग नहीं करना चाहिए। माना जाता है कि इसका असर गर्भस्थ शिशु पर पड़ सकता है।
- सोने से बचें: शास्त्रों के अनुसार ग्रहण काल में सोना नहीं चाहिए (बीमारों और वृद्धों को छोड़कर)। इस समय को मंत्र सिद्धि या ईश्वर भक्ति के लिए उत्तम माना गया है।
- नए कार्य की शुरुआत: ग्रहण के समय कोई भी मांगलिक कार्य या नया व्यापार शुरू करना वर्जित है, क्योंकि इसका परिणाम अशुभ हो सकता है।
4. ग्रहण के बाद क्या करें?
ग्रहण समाप्त होने के बाद शुद्धि अत्यंत आवश्यक है:

- स्नान: ग्रहण खत्म होते ही पूरे घर में गंगाजल छिड़कें और स्वयं भी स्नान करें।
- दान: अपनी सामर्थ्य के अनुसार सफेद वस्तुओं (जैसे चावल, दूध, चीनी या चांदी) का दान करें। इससे ग्रहण के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं।
- तुलसी का पौधा: ग्रहण के बाद तुलसी के पौधे पर गंगाजल छिड़ककर उसे शुद्ध करें।
5. राशियों पर प्रभाव
ज्योतिषियों के अनुसार, मार्च 2026 का यह चंद्र ग्रहण सिंह और कन्या राशि में गोचर करेगा। इसलिए इन राशि के जातकों को स्वास्थ्य और धन के मामले में थोड़ी सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
निष्कर्ष: खगोलीय दृष्टि से यह एक सुंदर नजारा होगा, लेकिन धार्मिक मान्यताओं को मानने वाले लोगों के लिए यह संयम और साधना का समय है।
