Chandra Grahan 2026

वर्ष 2026 खगोलीय और ज्योतिषीय दोनों ही दृष्टियों से बेहद खास और उथल-पुथल भरा रहने वाला है। अंतरिक्ष में घटने वाली घटनाओं का सीधा असर मानव जीवन, प्रकृति और हमारे तीज-त्यौहारों पर पड़ता है। साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) एक ऐसे दिन लगने जा रहा है, जिसका हर भारतीय को बेसब्री से इंतजार रहता है—रंगों और उल्लास का महापर्व ‘होली’। 3 मार्च 2026 को फाल्गुन मास की पूर्णिमा के दिन खण्ड ग्रस्तोदित चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है।

होली जैसे शुभ और मांगलिक पर्व पर ग्रहण का साया होने के कारण पूरे देश में इसके सूतक काल, होलिका दहन के शुभ मुहूर्त और पूजा-पाठ के नियमों को लेकर कई तरह के संशय बने हुए हैं। सनातन धर्म में ग्रहण को केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक और ऊर्जात्मक परिवर्तन का समय माना जाता है।

इस विस्तृत और व्यापक मेटा ब्लॉग में हम 3 मार्च 2026 को लगने वाले इस पूर्ण चंद्र ग्रहण की वैज्ञानिक पृष्ठभूमि, भारत और विश्व में इसकी दृश्यता, सटीक समय, सूतक काल के नियम, होलिका दहन पर इसके प्रभाव और सभी 12 राशियों (मेष से लेकर मीन तक) पर पड़ने वाले इसके शुभ-अशुभ प्रभावों का गहराई से विश्लेषण करेंगे।Total Lunar Eclipse blood moon, AI generated

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चंद्र ग्रहण 2026: तिथि और सटीक समय (भारतीय समयानुसार)

भारतीय पंचांग और खगोल विज्ञान (Astronomy) के सटीक आंकड़ों के अनुसार, साल 2026 का यह पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026, दिन मंगलवार को फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर लगेगा। यह एक खण्ड ग्रस्तोदित (आंशिक से पूर्ण की ओर) चंद्र ग्रहण होगा, जो पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र और सिंह राशि में घटित होगा।

चूंकि यह ग्रहण भारत में भी दिखाई देगा, इसलिए इसका धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व अत्यधिक बढ़ जाता है। आइए जानते हैं भारतीय समयानुसार (IST) इस ग्रहण के विभिन्न चरणों का सटीक समय:

  • उपच्छाया (Penumbral) ग्रहण का आरंभ: दोपहर 02 बजकर 14 मिनट पर
  • आंशिक (Partial) ग्रहण का आरंभ: दोपहर 03 बजकर 20 मिनट पर
  • परमग्रास (Maximum Eclipse – चरम बिंदु): शाम 05 बजकर 04 मिनट पर
  • आंशिक ग्रहण की समाप्ति (मोक्ष काल): शाम 06 बजकर 47 मिनट पर
  • उपच्छाया ग्रहण की पूर्ण समाप्ति: रात 07 बजकर 53 मिनट पर

महत्वपूर्ण खगोलीय तथ्य: इस ग्रहण की कुल अवधि (उपच्छाया से लेकर समाप्ति तक) लगभग 5 घंटे 39 मिनट की होगी, जबकि मुख्य आंशिक ग्रहण की अवधि 3 घंटे 27 मिनट की रहेगी। भारत के अधिकांश हिस्सों में चंद्रमा जब क्षितिज से उदित होगा (Moonrise), तब वह पहले से ही ग्रहण के साये में होगा। इसलिए इसे ‘ग्रस्तोदित’ (ग्रहण लगा हुआ उदय) चंद्र ग्रहण कहा जा रहा है।

क्या भारत में दिखाई देगा यह चंद्र ग्रहण? (दृश्यता का विस्तृत विवरण)

3 मार्च 2026 का चंद्र ग्रहण वैश्विक स्तर पर एक ‘पूर्ण चंद्र ग्रहण’ (Total Lunar Eclipse – Blood Moon) होगा, लेकिन भारत की भौगोलिक स्थिति के कारण यह यहाँ आंशिक और उपच्छाया चंद्र ग्रहण के रूप में ही दिखाई देगा।

भारत के विभिन्न राज्यों में दृश्यता: भारत के पूर्वी राज्यों—जैसे असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, नगालैंड, मिजोरम, मणिपुर और पश्चिम बंगाल—में चंद्रोदय (Moonrise) जल्दी होता है। इसलिए इन पूर्वोत्तर राज्यों में ग्रहण का आंशिक और चरम रूप स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा। वहीं दूसरी ओर, भारत के मध्य, उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों (जैसे दिल्ली, उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक आदि) में चंद्रमा शाम 6 बजकर 20 मिनट से 6 बजकर 40 मिनट के बीच उदित होगा। इन क्षेत्रों में लोगों को क्षितिज (Horizon) पर ग्रहण के अंतिम चरण (शाम 6:47 बजे तक) ही देखने को मिलेंगे। पश्चिमी भारत में यह मुख्य रूप से एक उपच्छाया ग्रहण के रूप में समाप्त होता हुआ प्रतीत होगा।

वैश्विक दृश्यता: भारत के अलावा यह चंद्र ग्रहण उत्तर और दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों, प्रशांत महासागर, ऑस्ट्रेलिया, पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी एशिया, और अंटार्कटिका में पूर्ण रूप से दिखाई देगा। यूरोप और अफ्रीका महाद्वीप के लोग इस खगोलीय घटना से वंचित रहेंगे।

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विज्ञान के नजरिए से चंद्र ग्रहण: पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा का अद्भुत खेल

विज्ञान के अनुसार, चंद्र ग्रहण कोई रहस्यमयी या डरावनी घटना नहीं है, बल्कि यह हमारे सौर मंडल की एक अद्भुत ज्यामितीय (Geometric) प्रक्रिया है।

चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा एक सीधी रेखा में (Syzygy) आ जाते हैं, और पृथ्वी ठीक सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है। इस स्थिति में पृथ्वी की विशाल परछाई चंद्रमा पर पड़ती है, जिससे चंद्रमा पर सूर्य का प्रकाश नहीं पहुंच पाता। पृथ्वी की इस परछाई के दो मुख्य भाग होते हैं:

  1. उपच्छाया (Penumbra): यह परछाई का बाहरी और हल्का हिस्सा होता है। जब चंद्रमा इस हिस्से से गुजरता है, तो उसकी चमक केवल थोड़ी सी मद्धम होती है। इसे नंगी आंखों से पहचानना थोड़ा मुश्किल होता है।
  2. प्रच्छाया (Umbra): यह परछाई का सबसे गहरा और घना भीतरी हिस्सा होता है। जब चंद्रमा पूरी तरह से इस उम्ब्रा (Umbra) क्षेत्र में प्रवेश कर जाता है, तो पूर्ण चंद्र ग्रहण लगता है।

ब्लड मून (Blood Moon) का रहस्य: पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा पूरी तरह से काला होने के बजाय गहरा लाल या तांबे के रंग का दिखाई देता है। इसे ‘ब्लड मून’ कहते हैं। ऐसा ‘रेले स्कैटरिंग’ (Rayleigh Scattering) नामक वैज्ञानिक प्रक्रिया के कारण होता है। जब सूर्य की किरणें पृथ्वी के वायुमंडल से होकर गुजरती हैं, तो वायुमंडल नीले और हरे रंग के प्रकाश (जिसकी तरंग दैर्ध्य कम होती है) को बिखेर देता है। लेकिन लाल और नारंगी रंग का प्रकाश (जिसकी तरंग दैर्ध्य अधिक होती है) वायुमंडल को पार करके चंद्रमा की सतह तक पहुंच जाता है, जिससे चंद्रमा लाल रंग का चमकता हुआ दिखाई देता है।

होली 2026 और चंद्र ग्रहण का महासंयोग: होलिका दहन का सही मुहूर्त

सनातन धर्म में त्यौहारों का सीधा संबंध पंचांग, चंद्रमा की कलाओं और ग्रहों की स्थिति से होता है। होली का पावन पर्व फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में 3 मार्च को फाल्गुन पूर्णिमा पड़ रही है और इसी दिन खण्ड ग्रस्तोदित चंद्र ग्रहण भी है।

होली का त्यौहार मुख्य रूप से दो दिन का होता है—पहला दिन ‘होलिका दहन’ (बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक) और दूसरा दिन ‘रंगवाली होली’ (धुलेंडी)।

होलिका दहन के समय में परिवर्तन: शास्त्रों के अनुसार, होलिका दहन भद्रा काल और सूतक काल में करना पूर्णतः वर्जित माना गया है। 3 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण का आंशिक चरण शाम 6 बजकर 47 मिनट पर समाप्त हो रहा है। ग्रहण के दौरान और उसके सूतक काल में किसी भी प्रकार की पूजा, अग्नि प्रज्वलित करना या मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं।

इसलिए, 3 मार्च को होलिका दहन चंद्र ग्रहण की पूर्ण समाप्ति और मोक्ष (शाम 6:47 बजे) के बाद ही किया जाएगा। ग्रहण के बाद सबसे पहले घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई की जाएगी, गंगाजल छिड़क कर शुद्धिकरण किया जाएगा, और उसके बाद ही होलिका दहन का शुभ मुहूर्त प्रारंभ होगा। जो लोग होलिका की पूजा करने जाते हैं, उन्हें शाम 7 बजे के बाद ही पूजा करनी चाहिए। रंगों का त्यौहार (धुलेंडी) अगले दिन यानी 4 मार्च 2026 को पूरे हर्षोल्लास के साथ खेला जाएगा। ग्रहण का साया रंगों के खेलने पर नहीं पड़ेगा।

सूतक काल: नियम, सही समय और आध्यात्मिक सावधानियां

हिंदू धर्मग्रंथों और वैदिक ज्योतिष के अनुसार, चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से ठीक 3 प्रहर (लगभग 9 घंटे) पहले शुरू हो जाता है। सूतक काल को प्रकृति और वातावरण में नकारात्मक ऊर्जाओं (Negative Energies) के संचरण का समय माना जाता है, इसलिए इस दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

भारत में सूतक काल का सटीक समय: चूंकि 3 मार्च 2026 को भारत में चंद्र ग्रहण का मुख्य (आंशिक) स्पर्श दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर हो रहा है, इसलिए इसके ठीक 9 घंटे पहले यानी 3 मार्च की सुबह 6 बजकर 20 मिनट से सूतक काल प्रारंभ हो जाएगा। यह सूतक काल शाम 6 बजकर 47 मिनट पर ग्रहण के मोक्ष (समाप्ति) तक प्रभावी रहेगा।

सूतक काल और ग्रहण के दौरान क्या न करें:

  • भोजन पकाना और ग्रहण करना: सूतक काल शुरू होने के बाद से ग्रहण समाप्त होने तक भोजन पकाना, खाना और जल पीना वर्जित माना जाता है। (हालांकि बीमार, बुजुर्ग और बच्चों के लिए यह नियम शिथिल है, वे आवश्यकतानुसार सात्विक आहार ले सकते हैं)।
  • मूर्ति स्पर्श और पूजा: इस दौरान घर के मंदिर के कपाट बंद कर देने चाहिए या पर्दे डाल देने चाहिए। भगवान की मूर्तियों और तुलसी के पौधे को छूना सख्त मना है।
  • नया कार्य: किसी भी नए, शुभ या मांगलिक कार्य (जैसे विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नई वस्तु की खरीदारी) की शुरुआत सूतक काल में नहीं करनी चाहिए।
  • शारीरिक संबंध: सूतक और ग्रहण के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। इस अवधि में शारीरिक संबंध बनाना शास्त्रों में वर्जित बताया गया है।
  • शयन (सोना): स्वस्थ व्यक्तियों को ग्रहण के दौरान सोना नहीं चाहिए। इस समय को ईश्वर के ध्यान और मंत्र जाप में व्यतीत करना चाहिए।

गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष सावधानियां (वैज्ञानिक और धार्मिक आधार)

सूर्य और चंद्र ग्रहण के दौरान सबसे अधिक सावधानी गर्भवती महिलाओं को बरतने की सलाह दी जाती है। ऐसा माना जाता है कि ग्रहण के दौरान उत्सर्जित होने वाली हानिकारक पराबैंगनी (UV) और गामा किरणें गर्भ में पल रहे शिशु के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं।

  1. घर से बाहर न निकलें: गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान घर की चारदीवारी के भीतर ही रहना चाहिए ताकि ग्रहण की कोई भी दूषित किरण उन पर न पड़े। खिडकियों और दरवाजों पर मोटे पर्दे डाल देने चाहिए।
  2. धारदार हथियारों का प्रयोग वर्जित: ग्रहण की अवधि में गर्भवती महिलाओं को सुई, कैंची, चाकू, ब्लेड या किसी भी नुकीली वस्तु का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से शिशु के अंगों में विकृति आ सकती है।
  3. सिलाई-बुनाई से बचें: इस दौरान सिलाई करना, कपड़े काटना, या सब्जी काटना जैसे कार्य नहीं करने चाहिए।
  4. मानसिक शांति: गर्भवती महिलाओं को इस दौरान मानसिक रूप से शांत रहना चाहिए। डर, क्रोध या तनाव से बचना चाहिए। उन्हें एक स्थान पर बैठकर अपने इष्ट देव का स्मरण, हनुमान चालीसा, या ‘ओम नमः शिवाय’ का मानसिक जाप करना चाहिए।
  5. गेरू का लेप: पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, गर्भवती महिलाएं अपने पेट पर थोड़ा सा गेरू (लाल मिट्टी) का लेप लगा सकती हैं, जिसे सुरक्षा कवच माना जाता है।

पौराणिक कथा: क्यों लगता है चंद्रमा को ग्रहण? राहु और केतु का रहस्य

हिंदू पौराणिक कथाओं (विष्णु पुराण और श्रीमद्भागवत पुराण) में ग्रहण का वर्णन समुद्र मंथन की प्रसिद्ध कथा से जुड़ा हुआ है।

जब देवताओं और असुरों ने मिलकर अमृत प्राप्ति के लिए क्षीर सागर का मंथन किया, तो उसमें से अमृत कलश निकला। असुर अमृत पीकर अमर होना चाहते थे, जिससे सृष्टि का संतुलन बिगड़ जाता। तब भगवान विष्णु ने ‘मोहिनी’ नामक अत्यंत सुंदर स्त्री का रूप धारण किया और असुरों को मोहपाश में बांधकर देवताओं को अमृत पिलाना शुरू किया।

इसी बीच ‘स्वरभानु’ नामक एक मायावी असुर ने रूप बदलकर देवताओं की पंक्ति में बैठकर अमृत की कुछ बूंदें पी लीं। सूर्य देव और चंद्र देव ने उसे पहचान लिया और तुरंत मोहिनी (भगवान विष्णु) को सतर्क कर दिया। भगवान विष्णु ने क्रोधित होकर अपने सुदर्शन चक्र से स्वरभानु का सिर धड़ से अलग कर दिया।

चूंकि स्वरभानु अमृत पी चुका था, इसलिए वह मरा नहीं। उसका सिर वाला हिस्सा ‘राहु’ कहलाया और धड़ वाला हिस्सा ‘केतु’ के नाम से जाना गया। राहु और केतु सूर्य और चंद्रमा से इस बात का प्रतिशोध (बदला) लेते हैं। पूर्णिमा के दिन राहु चंद्रमा को ग्रसने (निगलने) का प्रयास करता है, और इसी घटना को हम ‘चंद्र ग्रहण’ कहते हैं। चूंकि राहु का धड़ नहीं है, इसलिए चंद्रमा कुछ समय बाद उसके गले से निकलकर वापस आकाश में चमकने लगता है।

ग्रहण के दौरान और बाद में किए जाने वाले अचूक ज्योतिषीय उपाय

ग्रहण काल को सिद्धियों की प्राप्ति और नकारात्मकता को दूर करने के लिए सर्वोत्तम समय माना गया है। इस दौरान किए गए दान-पुण्य और मंत्र जाप का फल कई गुना अधिक मिलता है।

तुलसी के पत्तों का प्रयोग: सूतक काल शुरू होने से पहले ही पके हुए भोजन, पीने के पानी, दूध, दही, और अचार आदि में तुलसी के पत्ते (कुशा) डाल देने चाहिए। तुलसी में एंटी-बैक्टीरियल और रेडिएशन को नष्ट करने के गुण होते हैं। ग्रहण के बाद यह तुलसी मिला हुआ अन्न दूषित नहीं माना जाता।

ग्रहण काल के दौरान मंत्र जाप: इस समय मानसिक जाप (बिना होंठ हिलाए मन ही मन मंत्र पढ़ना) का विशेष महत्व है।

  • चंद्र बीज मंत्र: ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः।
  • महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
  • जिन लोगों की कुंडली में चंद्र दोष, मानसिक तनाव या राहु की महादशा चल रही हो, उन्हें भगवान शिव की आराधना अवश्य करनी चाहिए।

ग्रहण समाप्ति के बाद (मोक्ष काल के कार्य):

  1. शाम 6:47 बजे जब ग्रहण समाप्त हो जाए, तो सबसे पहले स्नान करना चाहिए। स्नान के जल में थोड़ा सा गंगाजल मिला लेना उत्तम रहता है।
  2. घर के मंदिर की सफाई करें, भगवान की मूर्तियों को गंगाजल से स्नान कराएं और नए वस्त्र पहनाएं।
  3. पूरे घर में नमक के पानी का पोछा लगाएं या गोमूत्र का छिड़काव करें, ताकि नकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाए।
  4. दान (Daan): ग्रहण के बाद दान का सर्वाधिक महत्व है। चंद्रमा से संबंधित सफेद वस्तुओं जैसे—चावल, दूध, चीनी, सफेद वस्त्र, चांदी, शंख, और कपूर का दान किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को करना चाहिए। इससे कुंडली में चंद्रमा मजबूत होता है।

ज्योतिषीय प्रभाव: 12 राशियों पर 3 मार्च 2026 के चंद्र ग्रहण का महा-प्रभाव

ज्योतिष शास्त्र (Vedic Astrology) के अनुसार, जब भी कोई ग्रहण लगता है, तो उसका प्रभाव पृथ्वी के हर जीव पर पड़ता है। 3 मार्च 2026 का चंद्र ग्रहण पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र और सिंह (Leo) राशि में लग रहा है। सिंह राशि अग्नि तत्व की राशि है और इसके स्वामी सूर्य हैं। सूर्य और चंद्रमा के इस टकराव और राहु की दृष्टि के कारण यह ग्रहण कुछ राशियों के लिए अप्रत्याशित सफलता लेकर आएगा, तो कुछ के लिए संघर्ष बढ़ा सकता है।Hindu astrology zodiac chart, AI generated

आइए विस्तार से जानते हैं कि मेष से लेकर मीन राशि तक के जातकों के जीवन पर इस चंद्र ग्रहण का क्या असर होने वाला है:

1. मेष राशि (Aries): मेष राशि वाले जातकों के लिए यह चंद्र ग्रहण उनके पंचम भाव (संतान, शिक्षा, और प्रेम) में लग रहा है। इस दौरान छात्रों को अपनी पढ़ाई में एकाग्रता बनाए रखने में कठिनाई हो सकती है। प्रेम संबंधों में गलतफहमियां पैदा होने की संभावना है, इसलिए अपने पार्टनर से बातचीत में स्पष्टता रखें। गर्भवती महिलाओं को अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना होगा। शेयर बाजार या सट्टेबाजी में धन निवेश करने से बचें, अन्यथा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उपाय: ग्रहण के बाद गुड़ और लाल मसूर की दाल का दान करें।

2. वृषभ राशि (Taurus): वृषभ राशि वालों के चतुर्थ भाव (माता, सुख, संपत्ति और वाहन) में यह ग्रहण घटित होगा। इस दौरान आपकी माता के स्वास्थ्य में अचानक गिरावट आ सकती है, इसलिए उनका पूरा ध्यान रखें। पारिवारिक जीवन में कलह या संपत्ति को लेकर विवाद उभर सकते हैं। मानसिक शांति भंग हो सकती है और आपको लगेगा कि आपके अपने ही आपके खिलाफ हैं। वाहन चलाते समय अत्यधिक सावधानी बरतें, दुर्घटना की आशंका है। उपाय: भगवान शिव का दूध से अभिषेक करें और सफेद वस्त्र का दान करें।

3. मिथुन राशि (Gemini): आपके लिए यह ग्रहण तृतीय भाव (पराक्रम, भाई-बहन और साहस) में लग रहा है। मिथुन राशि वालों के लिए यह ग्रहण शुभ परिणाम लेकर आएगा। आपके साहस और आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। आप जो भी नया जोखिम लेंगे, उसमें सफलता मिलने के प्रबल योग हैं। रुके हुए कार्य गति पकड़ेंगे। हालांकि, छोटे भाई-बहनों के साथ वाद-विवाद से बचें। संचार (Communication) क्षेत्र से जुड़े लोगों को कोई बड़ी खुशखबरी मिल सकती है। उपाय: ग्रहण काल में ‘ॐ नमः शिवाय’ का निरंतर जाप करें और गाय को हरा चारा खिलाएं।

4. कर्क राशि (Cancer): कर्क राशि के स्वामी स्वयं चंद्रमा हैं, और जब चंद्रमा पीड़ित होगा, तो सबसे अधिक प्रभाव आप पर ही पड़ेगा। यह ग्रहण आपके द्वितीय भाव (धन, वाणी और कुटुंब) में लग रहा है। आपको अपनी वाणी पर सख्त नियंत्रण रखना होगा; आपके द्वारा बोले गए कटु शब्द वर्षों पुराने रिश्ते तोड़ सकते हैं। आर्थिक मामलों में सतर्क रहें, अचानक से खर्चों में वृद्धि हो सकती है या दिया हुआ पैसा फंस सकता है। गले या आंखों से संबंधित स्वास्थ्य समस्याएं परेशान कर सकती हैं। उपाय: चांदी के गिलास में पानी पीने की आदत डालें और ग्रहण के बाद चावल का दान करें।

5. सिंह राशि (Leo): यह चंद्र ग्रहण सिंह राशि और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में ही लग रहा है (लग्न भाव में)। इसलिए सबसे अधिक शारीरिक और मानसिक प्रभाव आप पर ही रहेगा। इस दौरान आपको अज्ञात भय, मानसिक अवसाद, तनाव और सिरदर्द जैसी समस्याएं घेर सकती हैं। आपके वैवाहिक जीवन में जीवनसाथी के साथ अहम (Ego) का टकराव हो सकता है। कोई भी बड़ा निर्णय (चाहे वह करियर से जुड़ा हो या व्यक्तिगत जीवन से) इस सप्ताह टाल देना ही बेहतर रहेगा। स्वास्थ्य के प्रति जरा भी लापरवाही न बरतें। उपाय: आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें और तांबे के बर्तन में गेहूं भरकर दान करें।

6. कन्या राशि (Virgo): कन्या राशि वालों के लिए यह ग्रहण उनके द्वादश भाव (व्यय, विदेश यात्रा और हानि) में लग रहा है। यह समय आपके लिए आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। बेवजह के खर्चों से बजट बिगड़ सकता है। गुप्त शत्रु सक्रिय हो सकते हैं जो आपकी छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास करेंगे। यदि आप विदेश यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो उसमें कुछ बाधाएं आ सकती हैं। कानूनी विवादों से खुद को दूर रखें और किसी भी दस्तावेज पर बिना पढ़े हस्ताक्षर न करें। नींद न आने (Insomnia) की समस्या भी सता सकती है। उपाय: पक्षियों को सात प्रकार का अनाज (सतनाजा) खिलाएं और हरी मूंग की दाल का दान करें।

7. तुला राशि (Libra): तुला राशि वालों के लिए यह चंद्र ग्रहण एक वरदान साबित होने वाला है। यह आपके एकादश भाव (आय, लाभ और इच्छा पूर्ति) में लग रहा है। आर्थिक दृष्टिकोण से यह ग्रहण आपको अप्रत्याशित धन लाभ करा सकता है। आय के नए स्रोत उत्पन्न होंगे। व्यापार में फंसा हुआ धन वापस मिलने के योग हैं। सामाजिक दायरे में वृद्धि होगी और बड़े अधिकारियों या प्रभावशाली लोगों से संपर्क बनेंगे जो भविष्य में लाभदायक होंगे। प्रेम संबंधों में भी प्रगाढ़ता आएगी। उपाय: ग्रहण के मोक्ष के बाद किसी छोटी कन्या को सफेद मिठाई खिलाएं और खीर का दान करें।

8. वृश्चिक राशि (Scorpio): आपके लिए यह ग्रहण दशम भाव (कर्म, पिता और कार्यक्षेत्र) में लग रहा है। कार्यस्थल पर आपको सावधान रहने की आवश्यकता है। आपके उच्च अधिकारियों (Boss) के साथ संबंधों में खटास आ सकती है। ऑफिस की राजनीति का शिकार होने से बचें। जो लोग नौकरी बदलने का विचार कर रहे हैं, उन्हें अभी जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। व्यापारिक लेन-देन में पारदर्शिता रखें। पिता के स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं। अत्यधिक काम के बोझ के कारण थकान महसूस करेंगे। उपाय: हनुमान बाहुक का पाठ करें और लाल फलों का दान करें।

9. धनु राशि (Sagittarius): धनु राशि वालों के नवम भाव (भाग्य, धर्म और लंबी यात्रा) में यह ग्रहण घटित हो रहा है। इस दौरान आपका भाग्य थोड़ा कमजोर रह सकता है, इसलिए केवल किस्मत के भरोसे बैठकर कोई कार्य न करें। धार्मिक कार्यों में मन कम लगेगा या मन में नास्तिकता के विचार आ सकते हैं। लंबी यात्राओं में कष्ट या सामान चोरी होने का भय है, इसलिए यदि आवश्यक न हो तो यात्रा टाल दें। गुरु या पिता समान व्यक्ति के साथ मतभेद हो सकते हैं। उपाय: ग्रहण काल में विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें और पीले चने की दाल और हल्दी का दान करें।

10. मकर राशि (Capricorn): यह चंद्र ग्रहण मकर राशि के अष्टम भाव (आयु, रहस्य और अचानक दुर्घटना) में लग रहा है, जिसे ज्योतिष में शुभ नहीं माना जाता। आपके लिए यह समय अत्यधिक सतर्कता बरतने का है। वाहन अत्यंत सावधानी से चलाएं, क्योंकि दुर्घटना के प्रबल योग बन रहे हैं। पुरानी बीमारियां अचानक से उभर सकती हैं, खासकर पेट या त्वचा से संबंधित। ससुराल पक्ष के साथ संबंधों में तनाव आ सकता है। कोई भी अनैतिक कार्य न करें, अन्यथा कानूनी पचड़े में फंस सकते हैं। रिसर्च या रहस्यमयी विद्याओं से जुड़े लोगों के लिए यह समय अच्छा रह सकता है। उपाय: सरसों के तेल में अपना चेहरा देखकर छाया दान करें और शनि देव के मंत्रों का जाप करें।

11. कुंभ राशि (Aquarius): कुंभ राशि वालों के सप्तम भाव (विवाह, पार्टनरशिप और दैनिक आय) में ग्रहण का प्रभाव रहेगा। वैवाहिक जीवन में जीवनसाथी के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ सकती है। दोनों के बीच गलतफहमियां पनप सकती हैं, इसलिए धैर्य से काम लें। यदि आप व्यापार में किसी के साथ पार्टनरशिप (साझेदारी) में हैं, तो पैसों के लेन-देन को लेकर विवाद हो सकता है। नए व्यापारिक समझौते (Contracts) अभी कुछ समय के लिए टाल दें। सार्वजनिक जीवन में आपकी छवि को धूमिल करने का प्रयास किया जा सकता है। उपाय: हनुमान चालीसा का पाठ करें और काले तिल का दान करें।

12. मीन राशि (Pisces): मीन राशि वाले जातकों के लिए यह ग्रहण उनके षष्ठम भाव (रोग, ऋण और शत्रु) में लग रहा है। यह आपके लिए मिलाजुला परिणाम देने वाला रहेगा। अच्छी बात यह है कि आपके शत्रु परास्त होंगे और यदि कोई पुराना कोर्ट-कचहरी का मामला चल रहा है, तो उसमें सफलता मिल सकती है। प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए समय अनुकूल है। हालांकि, स्वास्थ्य के मोर्चे पर सावधानी जरूरी है। मौसमी बीमारियां या ब्लड प्रेशर से जुड़ी समस्या परेशान कर सकती है। किसी को भी उधार पैसा न दें, अन्यथा वह पैसा डूब सकता है। उपाय: ग्रहण के पश्चात शिव चालीसा का पाठ करें और किसी जरूरतमंद को दवाइयों या अन्न का दान करें।

वैश्विक प्रभाव: देश और दुनिया पर चंद्र ग्रहण 2026 का असर

मेदिनी ज्योतिष (Mundane Astrology) के अनुसार, ग्रहण का प्रभाव पूरे विश्व की राजनीति, अर्थव्यवस्था और प्रकृति पर भी पड़ता है। सिंह राशि में चंद्र ग्रहण और सूर्य-राहु के संयोग के कारण विश्व स्तर पर सत्ता संघर्ष बढ़ सकता है।

  1. राजनीतिक अस्थिरता: कई बड़े देशों में सरकार और जनता के बीच टकराव देखने को मिल सकता है। शीर्ष नेताओं के लिए यह समय कड़े फैसले लेने का होगा।
  2. प्राकृतिक आपदाएं: ग्रहण का प्रभाव जल और अग्नि तत्व पर पड़ता है। 3 मार्च 2026 के आस-पास विश्व के कुछ हिस्सों में भूकंप, सुनामी या बेमौसम भारी बारिश जैसी प्राकृतिक आपदाएं आने की आशंका है।
  3. अर्थव्यवस्था: वैश्विक शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव (Volatility) देखने को मिल सकता है। सोने (Gold) और चांदी (Silver) की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की जा सकती है।

ग्रहण के भय से मुक्ति और आत्म-कल्याण का मार्ग

3 मार्च 2026 का चंद्र ग्रहण एक महत्वपूर्ण खगोलीय और आध्यात्मिक घटना है। होली जैसे पावन पर्व के साथ इसका संयोग इसे और भी अधिक प्रासंगिक बना देता है।

अक्सर लोग ग्रहण के नाम से डर जाते हैं, लेकिन सनातन धर्म हमें डराता नहीं है, बल्कि सावधान करता है। ग्रहण का समय आत्म-निरीक्षण (Introspection), ध्यान, योग और मंत्र सिद्धि के लिए पूरे वर्ष का सबसे उत्तम समय होता है। सूतक काल के नियमों का पालन अंधविश्वास नहीं, बल्कि सूक्ष्म जीवाणुओं और लौकिक विकिरणों (Cosmic Radiations) से बचाव का एक वैज्ञानिक तरीका है।

इस होली पर, रंगों के साथ-साथ अपने भीतर के आध्यात्मिक रंगों को भी निखारें। होलिका दहन के साथ अपने मन की बुराइयों, ईर्ष्या और अज्ञानता को जला दें। 3 मार्च 2026 को जब आकाश में चंद्रमा ग्रहण के साये से बाहर निकलेगा, तो आप भी एक नई ऊर्जा, सकारात्मकता और संकल्प के साथ अपने जीवन की नई शुरुआत करें।

ईश्वर का स्मरण करें, दान-पुण्य करें और प्रकृति के इस अद्भुत खगोलीय खेल को शांत मन से महसूस करें। आप सभी को होली और फाल्गुन पूर्णिमा की अग्रिम शुभकामनाएं!

By Vivan Verma

विवान तेज खबरी (Tez Khabri) के समाचार रिपोर्टर हैं, जो ब्रेकिंग न्यूज़ और राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को कवर करते हैं। विवान तथ्यात्मक रिपोर्टिंग और तेज अपडेट के लिए जाने जाते हैं और प्रशासनिक व जनहित से जुड़े मामलों पर नियमित लेखन करते हैं।

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