नई दिल्ली, 3 मार्च 2026: अंतरिक्ष की गहराइयों में आज एक बेहद अद्भुत और दुर्लभ खगोलीय घटना आकार लेने जा रही है। आज यानी 3 मार्च 2026 को इस वर्ष का पहला और सबसे भव्य पूर्ण चंद्र ग्रहण (Total Lunar Eclipse) लगने जा रहा है। पूरी दुनिया के खगोलविदों, वैज्ञानिकों और ज्योतिषियों की नजरें आज आसमान पर टिकी हैं। भारत में इस चंद्र ग्रहण का विशेष धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व है क्योंकि यह फाल्गुन पूर्णिमा यानी रंगों के पावन पर्व होली के ठीक आस-पास घटित हो रहा है।
हर न्यूज़ चैनल, सोशल मीडिया और आम जनमानस के बीच इस समय बस एक ही चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है— Chandra Grahan 2026: आज भारत में पहला चंद्र ग्रहण, 3:20 से 6:46 बजे तक रहेगा। भारत के कई हिस्सों में इस अद्भुत ‘ब्लड मून’ (Blood Moon) के नज़ारे को देखा जा सकेगा। यह घटना न केवल विज्ञान के नजरिए से रोमांचक है, बल्कि भारतीय संस्कृति और ज्योतिष शास्त्र में भी इसका गहरा प्रभाव माना जाता है।
1. चंद्र ग्रहण 2026: आज आसमान में क्या होने वाला है? (Overview of the Celestial Event)
सबसे पहले यह जानना आवश्यक है कि आखिर आज आसमान में क्या होने वाला है। जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीधी रेखा में आ जाते हैं, और पृथ्वी पूरी तरह से सूर्य के प्रकाश को चंद्रमा तक पहुंचने से रोक देती है, तब ‘पूर्ण चंद्र ग्रहण’ (Total Lunar Eclipse) की स्थिति बनती है। पृथ्वी की घनी छाया जब चंद्रमा पर पड़ती है, तो चंद्रमा पूरी तरह से छिपने के बजाय एक गहरे लाल या तांबे के रंग में चमकने लगता है। इसी खगोलीय घटना को आम बोलचाल की भाषा में ‘ब्लड मून’ (Blood Moon) कहा जाता है।
यह साल 2026 का पहला ग्रहण है। आज का यह ग्रहण इसलिए भी खास है क्योंकि चंद्रमा आज पृथ्वी के काफी करीब होगा, जिससे यह सामान्य से थोड़ा बड़ा और अधिक चमकदार दिखाई देगा। यह खगोलीय घटना न केवल भारत, बल्कि पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर और अमेरिका के कई हिस्सों में भी दिखाई देगी।
भारत के संदर्भ में, यह एक “चंद्रोदय ग्रहण” (Moonrise Eclipse) होगा। इसका मतलब यह है कि जब भारत के अधिकांश शहरों में चंद्रमा उदित होगा, तब तक ग्रहण अपने चरम पर पहुंच चुका होगा या समाप्ति की ओर होगा।
2. भारत में चंद्र ग्रहण का सटीक समय और विभिन्न चरण (Timings & Phases in India)
अगर आप इस बात को लेकर भ्रम में हैं कि ग्रहण कब शुरू होगा और कब खत्म होगा, तो हम आपको स्पष्ट कर दें कि Chandra Grahan 2026: आज भारत में पहला चंद्र ग्रहण, 3:20 से 6:46 बजे तक अपनी मुख्य अवधि में रहेगा। हालांकि, खगोलीय गणनाओं के अनुसार इसके कई अलग-अलग चरण (Phases) होते हैं:
- उपच्छाया (Penumbral) ग्रहण की शुरुआत: दोपहर 2:14 बजे (इस समय चंद्रमा पृथ्वी की हल्की बाहरी छाया में प्रवेश करता है। यह नंगी आंखों से साफ नहीं दिखता)।
- आंशिक (Partial) ग्रहण की शुरुआत: दोपहर 3:20 बजे (यहां से चंद्रमा के आकार में कटान दिखना शुरू होता है)।
- पूर्ण (Total) चंद्र ग्रहण का आरंभ: शाम 4:34 बजे (इस समय चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की गहरी छाया में आ जाता है और लाल रंग का होने लगता है)।
- ग्रहण का चरम (Maximum Eclipse): शाम 5:04 बजे (यह वह समय है जब ब्लड मून सबसे गहरा और सबसे स्पष्ट होता है)।
- पूर्ण ग्रहण की समाप्ति: शाम 5:33 बजे (चंद्रमा धीरे-धीरे पृथ्वी की गहरी छाया से बाहर आने लगता है)।
- आंशिक ग्रहण का मोक्ष (समाप्ति): शाम 6:46 से 6:47 बजे के बीच (ग्रहण का मुख्य प्रभाव समाप्त हो जाता है)।
- उपच्छाया ग्रहण की पूर्ण समाप्ति: रात 7:53 बजे (आसमान पूरी तरह से सामान्य हो जाता है)।
चूंकि भारत में चंद्रमा शाम 6:20 से 6:30 बजे के आसपास उदित होगा, इसलिए देश के अधिकांश लोग ग्रहण के अंतिम चरण (आंशिक अवस्था) को ही देख पाएंगे।
3. सूतक काल: नियम, समय और धार्मिक मान्यताएं (Sutak Kaal Details)
हिंदू धर्म और वैदिक ज्योतिष में ग्रहण को केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक और ऊर्जावान समय माना जाता है। चंद्र ग्रहण के दौरान ‘सूतक काल’ (Sutak Kaal) का विशेष विचार किया जाता है। सूतक वह समय है जब वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है, इसलिए इस दौरान कई शुभ कार्यों को वर्जित माना गया है।
- सूतक काल का समय: चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण शुरू होने से ठीक 9 घंटे पहले लग जाता है। आज के ग्रहण के लिए सूतक काल सुबह 6:20 से 6:23 बजे के बीच शुरू हो चुका है और यह शाम 6:46 बजे ग्रहण की समाप्ति (मोक्ष) के साथ ही खत्म होगा।
- मंदिरों के कपाट बंद: सूतक काल शुरू होते ही देशभर के प्रमुख मंदिरों (जैसे तिरुपति बालाजी, काशी विश्वनाथ, बद्रीनाथ, और स्थानीय मंदिर) के कपाट दर्शन के लिए बंद कर दिए गए हैं। ग्रहण खत्म होने के बाद मंदिर परिसरों का गंगाजल से शुद्धिकरण किया जाएगा और उसके बाद ही भगवान की आरती और दर्शन पुनः शुरू होंगे।

सूतक काल के दौरान क्या न करें:
- मूर्ति स्पर्श: इस दौरान घर के पूजा घर में भी भगवान की मूर्तियों को स्पर्श नहीं करना चाहिए। पूजा स्थल पर पर्दा डाल देना चाहिए।
- भोजन बनाना और खाना: शास्त्रों के अनुसार सूतक काल और ग्रहण के दौरान भोजन पकाने और खाने की मनाही होती है। हालांकि, बीमार लोगों, वृद्धों, और छोटे बच्चों के लिए यह नियम लागू नहीं होता।
- शुभ कार्य: किसी भी नए काम की शुरुआत, सगाई, गृह प्रवेश या किसी महत्वपूर्ण सौदे को इस दौरान टाल देना चाहिए।
- सोना वर्जित: स्वस्थ व्यक्ति को ग्रहण काल के दौरान सोना नहीं चाहिए। इस समय को ईश्वर के ध्यान में बिताना चाहिए।
4. होली और चंद्र ग्रहण: 100 साल बाद अद्भुत महासंयोग
इस बार का चंद्र ग्रहण सबसे ज्यादा चर्चा में इसलिए है क्योंकि यह हिंदू धर्म के सबसे बड़े त्योहारों में से एक ‘होली’ (Holi) के साथ मेल खा रहा है। फाल्गुन पूर्णिमा के दिन होलिका दहन किया जाता है। शास्त्रों के जानकारों के अनुसार, ऐसा संयोग कई दशकों बाद बना है जब होली के दिन ही पूर्ण चंद्र ग्रहण लग रहा हो।
होलिका दहन पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा? चूंकि आज 3 मार्च को पूरा दिन सूतक काल रहेगा और शाम तक ग्रहण चलेगा, इसलिए धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल या सूतक काल में होलिका दहन नहीं किया जा सकता। धर्मसिंधु और पंचांगों के अनुसार, शाम 6:47 बजे जब ग्रहण का मोक्ष हो जाएगा, उसके बाद पूरे विधि-विधान से स्नान और दान कर के ही होलिका दहन का कार्यक्रम संपन्न किया जाना चाहिए। इसके अगले दिन रंगों वाली होली (धुलेंडी) पूरे हर्षोल्लास के साथ खेली जा सकती है।
5. भारत में दृश्यता: कहाँ-कहाँ दिखेगा आज का ‘ब्लड मून’? (City-wise Visibility in India)
जैसा कि हमने बताया, Chandra Grahan 2026: आज भारत में पहला चंद्र ग्रहण, 3:20 से 6:46 बजे तक चलेगा। भारत के भौगोलिक स्थान के कारण, देश के विभिन्न हिस्सों में इसकी दृश्यता अलग-अलग होगी।
भारत के लिए यह एक ‘मूनराइज़ एक्लिप्स’ (Moonrise Eclipse) है। इसका अर्थ है कि चंद्रमा जब आसमान में उदित होगा, तब वह पहले से ही ग्रहण के साये में होगा।
- पूर्वोत्तर भारत (सबसे बेहतरीन नज़ारा): भारत में यदि कहीं पूर्ण चंद्र ग्रहण और ब्लड मून का सबसे शानदार नज़ारा देखने को मिलेगा, तो वह पूर्वोत्तर के राज्य हैं। असम (गुवाहाटी, डिब्रूगढ़), अरुणाचल प्रदेश (ईटानगर), मेघालय (शिलांग), मिजोरम, नागालैंड और पश्चिम बंगाल (कोलकाता, दार्जिलिंग) में चंद्रमा जल्दी उदित होता है। यहां के लोग चंद्रमा को गहरे लाल रंग में रंगे हुए देख सकेंगे और पूर्ण ग्रहण के अंतिम क्षणों के गवाह बनेंगे।
- उत्तर और मध्य भारत: दिल्ली, चंडीगढ़, जयपुर, लखनऊ और भोपाल जैसे शहरों में चंद्रमा शाम लगभग 6:20 से 6:30 बजे के बीच उदित होगा। इन शहरों के लोग केवल अंतिम 15 से 20 मिनट के लिए ही आंशिक चंद्र ग्रहण देख पाएंगे। चंद्रमा उदित होते समय नीचे से कटा हुआ या धुंधला दिखाई देगा।
- पश्चिम और दक्षिण भारत: मुंबई, अहमदाबाद, बेंगलुरु, और चेन्नई में चंद्रमा सबसे देरी से उदित होगा। जब तक इन शहरों में चंद्रमा आसमान में थोड़ा ऊपर आएगा, तब तक ग्रहण का मुख्य चरण (शाम 6:47 बजे) समाप्त हो चुका होगा। इन क्षेत्रों के निवासियों को केवल उपच्छाया (Penumbral) चरण ही दिखेगा, जिसमें चंद्रमा की चमक थोड़ी फीकी लगती है, लेकिन कोई बड़ा कटान नहीं दिखता।
6. ब्लड मून (Blood Moon) क्या है? विज्ञान की नजर से (The Science Behind It)
धार्मिक मान्यताओं से परे, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह ब्रह्मांड का एक बेहद खूबसूरत और प्राकृतिक नृत्य है। खगोलविदों के अनुसार, चंद्र ग्रहण पूरी तरह से एक सुरक्षित और प्राकृतिक घटना है।
लेकिन सवाल यह है कि चंद्रमा लाल क्यों हो जाता है? जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आती है, तो वह सूर्य की सीधी रोशनी को चंद्रमा तक पहुंचने से रोक देती है। इस दौरान पृथ्वी के वायुमंडल (Atmosphere) से होकर गुजरने वाली सूर्य की किरणें छनकर चंद्रमा तक पहुंचती हैं। पृथ्वी के वायुमंडल में मौजूद धूल के कण और गैसें नीले और बैंगनी रंग की छोटी तरंग दैर्ध्य (Short wavelengths) वाली प्रकाश किरणों को बिखेर (Scatter) देती हैं। इसे विज्ञान में ‘रेले स्कैटरिंग’ (Rayleigh Scattering) कहा जाता है। इसके विपरीत, लाल और नारंगी रंग की किरणें (Long wavelengths) वायुमंडल को पार कर जाती हैं और मुड़कर चंद्रमा की सतह पर पड़ती हैं। इसी रिफ्रैक्टेड (Refracted) रोशनी के कारण चंद्रमा हमें खूनी लाल या तांबे के रंग का दिखाई देता है।
क्या नंगी आंखों से देखना सुरक्षित है? सूर्य ग्रहण के विपरीत, चंद्र ग्रहण को नंगी आंखों से देखना पूरी तरह से सुरक्षित है। इसके लिए आपको किसी विशेष चश्मे (Solar glasses) या फिल्टर की आवश्यकता नहीं होती। यह चंद्रमा से परावर्तित (Reflect) होने वाली एक हानिरहित रोशनी है।
7. गर्भवती महिलाओं के लिए क्या हैं विशेष मान्यताएं और सावधानियां? (Rules for Pregnant Women)
भारतीय समाज में ग्रहण को लेकर गर्भवती महिलाओं (Pregnant Women) के लिए विशेष चिंता और मान्यताएं होती हैं। हालांकि विज्ञान इसका समर्थन नहीं करता, लेकिन सदियों पुरानी परंपराओं और बड़े-बुजुर्गों की सलाह के अनुसार कुछ सावधानियां बरती जाती हैं:

8. 12 राशियों पर चंद्र ग्रहण 2026 का व्यापक प्रभाव (Astrological Impact on Zodiac Signs)
ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन, माता, जल और भावनाओं का कारक माना गया है। जब चंद्रमा ग्रसित होता है, तो उसका सीधा असर पृथ्वी पर रहने वाले प्राणियों के मन और मस्तिष्क पर पड़ता है। यह चंद्र ग्रहण कन्या राशि और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में लग रहा है। आइए विस्तार से जानते हैं कि Chandra Grahan 2026: आज भारत में पहला चंद्र ग्रहण, 3:20 से 6:46 बजे तक होने के कारण सभी 12 राशियों के जातकों पर इसका क्या प्रभाव पड़ने वाला है:
1. मेष (Aries): मेष राशि वालों के लिए यह ग्रहण मिले-जुले परिणाम लेकर आएगा। आपके छठे भाव में ग्रहण लगने के कारण आपको अपने गुप्त शत्रुओं से सावधान रहना होगा। स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें, खासकर पेट और पाचन संबंधी समस्याएं उभर सकती हैं। कोर्ट-कचहरी के मामलों में संयम से काम लें। धन खर्च बढ़ सकता है।
2. वृषभ (Taurus): आपके पांचवें भाव में यह ग्रहण लग रहा है। वृषभ राशि के जातकों को अपनी संतान के स्वास्थ्य और उनकी शिक्षा को लेकर कुछ चिंताएं रह सकती हैं। प्रेम संबंधों में भी गलतफहमियां पैदा हो सकती हैं। शेयर बाजार या सट्टेबाजी में कोई भी बड़ा निवेश करने से इस दौरान बचें।
3. मिथुन (Gemini): चतुर्थ भाव में ग्रहण के प्रभाव से पारिवारिक शांति थोड़ी भंग हो सकती है। माता के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें। प्रॉपर्टी या जमीन-जायदाद से जुड़े विवाद उभर सकते हैं। कार्यस्थल पर अत्यधिक काम का तनाव आपके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। ध्यान और योग का सहारा लें।
4. कर्क (Cancer): चंद्रमा आपकी राशि का स्वामी है, इसलिए आप पर इसका सबसे अधिक मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ेगा। आपके तीसरे भाव में ग्रहण होने से भाई-बहनों के साथ वाद-विवाद से बचें। हालांकि, आपके साहस और पराक्रम में वृद्धि होगी। छोटी यात्राएं टालना बेहतर रहेगा। मन में किसी बात को लेकर अज्ञात भय रह सकता है।
5. सिंह (Leo): दूसरे भाव (धन भाव) में लगने वाला यह ग्रहण सिंह राशि वालों की आर्थिक स्थिति पर असर डालेगा। अपनी वाणी पर कठोर नियंत्रण रखें, अन्यथा परिवार के सदस्यों या कार्यस्थल पर किसी से संबंध बिगड़ सकते हैं। पैसों के लेन-देन या उधार देने में बहुत सावधानी बरतें। गले और दांतों से जुड़ी समस्या हो सकती है।
6. कन्या (Virgo): यह ग्रहण आपकी ही राशि (लग्न भाव) में लग रहा है, इसलिए आपको सबसे अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। मानसिक तनाव, चिड़चिड़ापन और शारीरिक थकान महसूस हो सकती है। कोई भी बड़ा निर्णय जल्दबाजी में न लें। अपनी छवि को लेकर सतर्क रहें और किसी भी तरह के विवाद से खुद को दूर रखें।
7. तुला (Libra): आपके बारहवें (व्यय) भाव में ग्रहण लग रहा है। खर्चों में अचानक वृद्धि हो सकती है, जिससे आपका बजट बिगड़ सकता है। आंखों से जुड़ी कोई परेशानी या अनिद्रा की समस्या हो सकती है। विदेशी व्यापार या विदेश यात्रा से जुड़े कार्यों में रुकावटें आ सकती हैं। योग और आध्यात्म से आपको शांति मिलेगी।
8. वृश्चिक (Scorpio): वृश्चिक राशि वालों के लिए यह ग्रहण शुभ परिणाम लेकर आ सकता है। एकादश (लाभ) भाव में ग्रहण के कारण अचानक धन प्राप्ति के योग बन सकते हैं। रुके हुए कार्य पूरे होंगे और आय के नए स्रोत खुल सकते हैं। हालांकि, बड़े भाई-बहनों या मित्रों के साथ किसी बात पर मतभेद हो सकता है।
9. धनु (Sagittarius): दशम (कर्म) भाव में चंद्र ग्रहण का प्रभाव कार्यक्षेत्र में बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है। नौकरीपेशा लोगों को अपने अधिकारियों के साथ संबंध मधुर रखने होंगे। ट्रांसफर या नौकरी में परिवर्तन की संभावना बन सकती है। पिता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। अपनी जिम्मेदारियों से न भागें।
10. मकर (Capricorn): नवम (भाग्य) भाव में ग्रहण होने से आपको भाग्य का साथ कुछ कम मिलेगा। बनते हुए काम ऐन वक्त पर अटक सकते हैं। लंबी धार्मिक यात्राओं में विघ्न आ सकता है। गुरुओं या पिता तुल्य व्यक्तियों का सम्मान करें और उनसे बहस न करें। कड़ी मेहनत ही इस समय आपको सफलता दिलाएगी।
11. कुंभ (Aquarius): अष्टम (आयु और मृत्यु) भाव में ग्रहण का होना कुंभ राशि वालों के लिए एक चेतावनी है। वाहन बहुत सावधानी से चलाएं और दुर्घटनाओं से बचें। स्वास्थ्य संबंधी पुरानी बीमारियां वापस उभर सकती हैं। किसी भी प्रकार के अनैतिक या गैर-कानूनी कार्यों से दूर रहें। शिव आराधना करना आपके लिए सबसे उत्तम रहेगा।
12. मीन (Pisces): आपके सप्तम भाव (दांपत्य और साझेदारी) में ग्रहण लग रहा है। जीवनसाथी के साथ संबंधों में खटास आ सकती है या उनका स्वास्थ्य बिगड़ सकता है। व्यापारिक साझेदारों के साथ पैसों को लेकर पारदर्शिता बनाए रखें। नए व्यापारिक अनुबंधों (Contracts) पर हस्ताक्षर करने के लिए यह समय अनुकूल नहीं है।
9. ग्रहण के दौरान और बाद में क्या करें और क्या न करें? (Dos and Don’ts)
वैदिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के दुष्प्रभाव से बचने के लिए कुछ विशेष नियम बताए गए हैं:
क्या करें (Dos):
- तुलसी के पत्तों का प्रयोग: ग्रहण और सूतक काल शुरू होने से पहले ही घर में रखे पके हुए भोजन, दूध, दही, घी, और पीने के पानी में तुलसी के पत्ते (Basil leaves) डाल दें। विज्ञान भी मानता है कि तुलसी में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं जो चीजों को दूषित होने से बचाते हैं।
- मंत्र जाप और ध्यान: ग्रहण का समय ईश्वर के समीप जाने का समय है। इस दौरान किया गया मंत्र जाप आम दिनों की तुलना में कई गुना अधिक फलदायी होता है।
- स्नान और दान: शाम 6:47 बजे जब Chandra Grahan 2026: आज भारत में पहला चंद्र ग्रहण, 3:20 से 6:46 बजे तक समाप्त हो जाएगा, तब घर में गंगाजल का छिड़काव करें। स्वयं शुद्ध जल से स्नान करें (हो सके तो पानी में थोड़ा नमक या गंगाजल मिला लें)। स्नान के बाद सफेद वस्तुएं जैसे चावल, चीनी, दूध या सफेद वस्त्रों का दान किसी जरूरतमंद को करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
क्या न करें (Don’ts):
- इस दौरान बाल काटना, नाखून काटना, या दाढ़ी बनाना अशुभ माना जाता है।
- ग्रहण के समय मल-मूत्र विसर्जन से भी यथासंभव बचना चाहिए।
- पति-पत्नी को इस दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
- घर से बाहर जाने या खुली आंखों से ग्रहण देखने (धार्मिक मान्यतानुसार) से बचना चाहिए, हालांकि वैज्ञानिक इसे सुरक्षित मानते हैं।
10. ग्रहण के समय जपने वाले शक्तिशाली मंत्र (Powerful Mantras to Chant)
ग्रहण के समय मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने के लिए इन मंत्रों का जाप करना चाहिए। (नोट: सूतक काल में भगवान की मूर्तियों को छुए बिना मानसिक रूप से जाप करें।)
- चंद्रमा का बीज मंत्र: ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चंद्रमसे नम: (इस मंत्र के जाप से मानसिक तनाव दूर होता है और चंद्र देव की कृपा प्राप्त होती है।)
- महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥ (यह मंत्र भय, बीमारी और नकारात्मकता को नष्ट करने के लिए अमोघ अस्त्र है।)
- भगवान शिव का पंचाक्षरी मंत्र: ॐ नमः शिवाय (यह सबसे सरल और सबसे शक्तिशाली मंत्र है जो मन को स्थिर रखता है।)
- विष्णु मंत्र: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय (इस मंत्र का निरंतर जाप घर में शांति और समृद्धि बनाए रखता है।)
11. दुनिया भर में कैसा दिखेगा चंद्र ग्रहण? (Global Visibility of the Eclipse)
केवल भारत ही नहीं, पूरी दुनिया इस खगोलीय घटना को देखने के लिए उत्सुक है। यह पूर्ण चंद्र ग्रहण मुख्य रूप से प्रशांत महासागर के क्षेत्रों में अपने सबसे भव्य रूप में दिखेगा।
- अमेरिका और कनाडा: उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका में यह ग्रहण बहुत स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। लॉस एंजिल्स, न्यूयॉर्क, शिकागो और वाशिंगटन डीसी जैसे शहरों में लोग इसे मध्यरात्रि या तड़के देख सकेंगे।
- ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड: यहां के लोगों को पूर्ण चंद्र ग्रहण का पूरा 3 घंटे 27 मिनट का नज़ारा साफ-साफ देखने को मिलेगा।
- एशिया: जापान, चीन, दक्षिण कोरिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में ग्रहण का उत्कृष्ट नजारा दिखाई देगा।
12. फोटोग्राफी और स्काईवाचिंग के बेहतरीन टिप्स (How to Watch & Photography Tips)
यदि आप खगोल विज्ञान में रुचि रखते हैं और इस ब्लड मून को अपने कैमरे या स्मार्टफोन में कैद करना चाहते हैं, तो इन टिप्स को फॉलो करें:
ब्रह्मांड अपनी रहस्यमयी और खूबसूरत घटनाओं से हमें हमेशा अचंभित करता है। आज का यह दिन विज्ञान और अध्यात्म दोनों के नजरिए से बेहद खास है।
Chandra Grahan 2026: आज भारत में पहला चंद्र ग्रहण, 3:20 से 6:46 बजे तक अपनी पूरी भव्यता के साथ आसमान में घटित होगा। जहां वैज्ञानिक इसे सौरमंडल के अद्भुत गणित के रूप में देखते हैं, वहीं भारतीय संस्कृति में इसे आत्म-मंथन, प्रार्थना और शुद्धि के अवसर के रूप में देखा जाता है। आप चाहे इसे छत पर खड़े होकर अपने कैमरे में कैद करें, या फिर घर के भीतर बैठकर ईश्वर का ध्यान करें, यह घटना निश्चित रूप से याद रखने लायक होगी।
हमेशा याद रखें, खगोलीय घटनाएं प्रकृति का नियम हैं। इनसे डरने के बजाय, इनके पीछे के विज्ञान को समझें और अपनी मान्यताओं का सम्मान करते हुए इस दिन को शांति से व्यतीत करें। ग्रहण के समाप्त होने के बाद दान अवश्य करें और रंगों के पर्व होली की खुशियों में शामिल हों।
