Celina Jaitly Case: क्या है पूरा मामला और क्यों फंसे विक्रांत?
यह मामला साल 2025 के मध्य में शुरू हुआ था, जब सेलिना जेटली के भाई विक्रांत जेटली, जो कि भारतीय सेना के एक पूर्व अधिकारी (Ex-Army Officer) रह चुके हैं, को संयुक्त अरब अमीरात के अधिकारियों द्वारा हिरासत में ले लिया गया था। विक्रांत वहां एक निजी कंपनी में सुरक्षा सलाहकार के रूप में कार्यरत थे।
हिरासत के पीछे के कारण
हालांकि शुरुआत में हिरासत के कारणों को लेकर काफी गोपनीयता बरती गई थी, लेकिन बाद में सामने आया कि उन पर कुछ व्यावसायिक विवादों (Commercial Disputes) और डेटा सुरक्षा से संबंधित उल्लंघन के आरोप लगाए गए थे। Celina Jaitly Case में अभिनेत्री का शुरू से ही यह दावा रहा है कि उनके भाई को बलि का बकरा बनाया गया है और उन पर लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद हैं।
एक सेना परिवार का संघर्ष
जेटली परिवार का सैन्य पृष्ठभूमि (Military Background) से गहरा नाता है। सेलिना के पिता स्वर्गीय कर्नल वी.के. जेटली ने लंबे समय तक देश की सेवा की थी। सेलिना ने बार-बार सोशल मीडिया पर यह साझा किया है कि एक देशभक्त सेना अधिकारी का बेटा और खुद एक पूर्व सैन्य अधिकारी इस तरह के फर्जी आरोपों में किसी विदेशी जेल में बंद रहने के लायक नहीं है।

दिल्ली हाई कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश: विदेश मंत्रालय को फटकार
सेलिना जेटली और उनके परिवार ने हार मान लेने के बजाय कानूनी रास्ता चुना। उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) इस मामले में अपेक्षित तत्परता नहीं दिखा रहा है।
कोर्ट में हुई सुनवाई का मुख्य अंश
7 फरवरी 2026 को हुई सुनवाई के दौरान, दिल्ली हाई कोर्ट की खंडपीठ ने केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय के ढुलमुल रवैये पर नाराजगी जाहिर की। अदालत ने कहा कि जब भी कोई भारतीय नागरिक, विशेष रूप से वह जिसने सशस्त्र बलों में देश की सेवा की हो, विदेश में संकट में होता है, तो सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह सक्रिय रूप से कार्य करे।
अदालत के प्रमुख निर्देश:
- कानूनी प्रतिनिधित्व (Legal Representation): विदेश मंत्रालय यह सुनिश्चित करे कि विक्रांत जेटली को UAE के कानूनों के अनुसार सर्वश्रेष्ठ कानूनी बचाव उपलब्ध हो।
- दूतावास पहुंच (Consular Access): भारतीय दूतावास के अधिकारियों को विक्रांत से नियमित रूप से मिलने और उनकी स्थिति की रिपोर्ट परिवार को देने का आदेश दिया गया है।
- राजनयिक स्तर पर बातचीत: कोर्ट ने MEA को निर्देश दिया कि वे UAE के अधिकारियों के साथ राजनयिक चैनलों (Diplomatic Channels) के माध्यम से इस मामले को उठाएं ताकि मामले का निष्पक्ष और त्वरित ट्रायल हो सके।
सेलिना जेटली की भावनात्मक अपील: “वह केवल मेरा भाई नहीं, एक योद्धा है”
इस अदालती आदेश के बाद सेलिना जेटली ने अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए भावुक संदेश जारी किया है। उन्होंने पिछले कुछ महीनों के अपने संघर्ष को “नरक जैसा अनुभव” बताया।
सोशल मीडिया पर जंग
सेलिना पिछले कई महीनों से ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) और इंस्टाग्राम पर लगातार अभियान चला रही थीं। उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को टैग करते हुए बार-बार मदद की गुहार लगाई थी। Celina Jaitly Case में अभिनेत्री का कहना है कि उनके भाई की मानसिक और शारीरिक स्थिति खराब हो रही है और उन्हें उचित चिकित्सा सहायता भी नहीं मिल रही है।

पारिवारिक एकजुटता
सेलिना ने बताया कि उनके भाई विक्रांत ने सेना में रहते हुए कई दुर्गम क्षेत्रों में काम किया है। उन्होंने कहा, “विक्रांत एक फाइटर है। उसने देश के लिए अपनी जवानी कुर्बान कर दी, और आज वह एक ऐसी गलती के लिए सलाखों के पीछे है जो उसने कभी की ही नहीं।”
UAE में कानूनी चुनौतियां और भारतीय नागरिकों की स्थिति
यह मामला एक बार फिर उन चुनौतियों को उजागर करता है जिनका सामना भारतीय नागरिक खाड़ी देशों (Gulf Countries) में करते हैं। UAE में कानूनी प्रक्रिया भारत से काफी भिन्न और सख्त है।
डेटा और सुरक्षा कानून
UAE में डेटा सुरक्षा और साइबर अपराधों को लेकर कानून अत्यंत कठोर हैं। वहां अक्सर प्रशासनिक हिरासत (Administrative Detention) लंबी खिंच सकती है। सेलिना के वकील ने तर्क दिया कि विक्रांत को बिना किसी औपचारिक आरोप पत्र (Charge Sheet) के लंबे समय तक रखा गया, जो अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों का उल्लंघन है।
भारत-UAE संबंध और राजनयिक दबाव
भारत और UAE के बीच वर्तमान में बहुत मजबूत रणनीतिक संबंध हैं। यही कारण है कि दिल्ली हाई कोर्ट ने विदेश मंत्रालय को आदेश दिया है कि वे इन मजबूत संबंधों का उपयोग अपने नागरिक के मानवाधिकारों की रक्षा के लिए करें। अक्सर ‘बैक-चैनल डिप्लोमेसी’ ऐसे मामलों में बहुत प्रभावी साबित होती है।
अगले कदम: क्या विक्रांत जल्द वापस आएंगे?
दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब गेंद विदेश मंत्रालय के पाले में है। 15 फरवरी 2026 तक MEA को कोर्ट में एक ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ (Status Report) दाखिल करनी है।

संभावित परिणाम:
- जमानत की कोशिश: सरकार के हस्तक्षेप के बाद, UAE की अदालतों में विक्रांत की जमानत (Bail) के लिए मजबूत दलीलें दी जा सकती हैं।
- स्वदेश वापसी का समझौता: भारत और UAE के बीच कैदियों के स्थानांतरण (Transfer of Sentenced Persons) को लेकर संधि है, हालांकि यह मामला अभी ट्रायल के अधीन है, इसलिए प्रत्यावर्तन (Repatriation) में समय लग सकता है।
- मुकदमे की निष्पक्षता: राजनयिक निगरानी होने से यह सुनिश्चित होगा कि स्थानीय अधिकारी मामले में कोई पक्षपात न करें
न्याय की उम्मीद और एक बहन का साहस
Celina Jaitly Case केवल एक सेलिब्रिटी के भाई का मामला नहीं है, बल्कि यह उन हजारों भारतीयों की आवाज है जो विदेशों में कानूनी उलझनों में फंसे हुए हैं और अपनी सरकार की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। सेलिना जेटली ने अपनी प्रसिद्धि का उपयोग केवल अपने स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि एक सेना परिवार के सम्मान की रक्षा के लिए किया है।
दिल्ली हाई कोर्ट का यह आदेश भारत सरकार को यह याद दिलाने के लिए पर्याप्त है कि हर पासपोर्ट धारक की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। अब सभी की निगाहें विदेश मंत्रालय की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
