बजट के बाद सबसे बड़ा सवाल – ‘थाली’ सस्ती हुई या महंगी?
1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में मोदी सरकार 3.0 का एक और ऐतिहासिक बजट पेश किया। टीवी डिबेट्स में जीडीपी (GDP), राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) और कैपेक्स जैसे भारी-भरकम शब्दों पर चर्चा हो रही है। शेयर बाजार ने भी इस बजट को सलामी दी है। लेकिन, एक आम आदमी और विशेषकर घर का बजट संभालने वाली गृहिणियों के मन में सिर्फ एक ही सवाल गूंज रहा है – “मेरी रसोई का क्या?”
क्या दाल-रोटी सस्ती हुई? क्या खाने के तेल की कीमतों में लगी आग बुझेगी? क्या बाहर खाना (Dining Out) महंगा पड़ेगा?
बजट 2026-27 में सरकार ने कृषि और खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing) सेक्टर के लिए कई बड़े एलान किए हैं। कस्टम ड्यूटी (सीमा शुल्क) में बदलाव से लेकर कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर सेस तक, कई ऐसे फैसले लिए गए हैं जिनका सीधा असर आपकी जेब और डाइनिंग टेबल पर पड़ने वाला है।
भाग 1: ‘सस्ता’ (Cheaper) – राहत की सांस कहाँ मिली?
वित्त मंत्री ने इस बार महंगाई (Inflation) को काबू में रखने के लिए आयात शुल्क (Import Duty) में कई कटौतियां की हैं। इसका सीधा फायदा उन चीजों में मिलेगा जो हम विदेश से मंगाते हैं या जिनके रॉ मटीरियल बाहर से आते हैं।
1. खाने का तेल (Edible Oils): बड़ी राहत
भारतीय रसोई का सबसे अहम हिस्सा है तेल। पिछले कुछ समय से पाम ऑयल और सूरजमुखी तेल की कीमतें आम आदमी को रुला रही थीं।
- बजट घोषणा: सरकार ने क्रूड पाम ऑयल, सोयाबीन ऑयल और सनफ्लावर ऑयल पर लगने वाले ‘एग्री इंफ्रा सेस’ को घटा दिया है।
- असर: इससे ब्रांडेड और खुले दोनों तरह के तेल की कीमतों में 5 से 7 रुपये प्रति लीटर तक की गिरावट आ सकती है। त्योहारों से पहले यह एक बड़ी राहत है।

2. समुद्री भोजन (Seafood & Shrimp): नॉन-वेज लवर्स के लिए खुशी
अगर आप सी-फूड के शौकीन हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है।
- बजट घोषणा: झींगा (Shrimp) और मछली के चारे (Fish Feed) को बनाने में इस्तेमाल होने वाले कुछ अवयवों पर कस्टम ड्यूटी 5% से घटाकर शून्य या न्यूनतम कर दी गई है।
- असर: इससे झींगा उत्पादन की लागत कम होगी। घरेलू बाजार में फ्रोजन झींगा और मछली के दाम कम हो सकते हैं। रेस्टोरेंट्स में सी-फूड प्लैटर थोड़ा सस्ता हो सकता है।
3. विदेशी ड्राई फ्रूट्स (Selected Dry Fruits)
हेल्थ फ्रीक्स के लिए एक मिश्रित खबर है, लेकिन कुछ मामलों में राहत है।
- बजट घोषणा: कुछ विशिष्ट प्रकार के नट्स (जैसे पेकन नट्स) और बेरीज (जैसे ब्लूबेरीज और क्रैनबेरीज) पर आयात शुल्क में मामूली कटौती की गई है।
- असर: इम्युनिटी बढ़ाने के लिए खाए जाने वाले ये प्रीमियम ड्राई फ्रूट्स अब थोड़े सस्ते होंगे। हालांकि, काजू-बादाम पर स्थिति जस की तस है।
4. लैब-ग्रोन मीट और वीगन फूड (Future Food)
भविष्य की तकनीक को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने प्लांट-बेस्ड प्रोटीन और लैब-ग्रोन मीट के रिसर्च इक्विपमेंट्स पर टैक्स छूट दी है।
- असर: भले ही आज असर न दिखे, लेकिन आने वाले महीनों में ‘सोया चाप’, ‘वीगन बर्गर’ और अन्य प्लांट-बेस्ड मीट प्रोडक्ट्स सस्ते हो सकते हैं।
भाग 2: ‘महंगा’ (Costlier) – कहाँ बढ़ेगा खर्च?
सरकार का मंत्र है ‘वोकल फॉर लोकल’ (Vocal for Local)। इसलिए, जो चीजें भारत में बन सकती हैं या उगाई जा सकती हैं, उनके आयात को हतोत्साहित करने के लिए टैक्स बढ़ाया गया है। इससे कुछ प्रीमियम चीजें महंगी होंगी।
1. विदेशी चॉकलेट और चीज (Imported Chocolates & Cheese)
अगर आपको स्विट्जरलैंड की चॉकलेट या इटली का चीज पसंद है, तो जेब ढीली करने के लिए तैयार हो जाइए।
- बजट घोषणा: हाई-एंड प्रोसेस्ड फूड आइटम्स के आयात पर बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) बढ़ा दी गई है।
- असर: इम्पोर्टेड गॉरमेट फूड, फैंसी बिस्किट्स और विदेशी पनीर 10-15% तक महंगे हो सकते हैं। यह कदम अमूल और ब्रिटानिया जैसे घरेलू ब्रांड्स को मदद करने के लिए है।
2. सिगरेट और तंबाकू (Sin Goods)
हर बजट की तरह, इस बार भी ‘पाप कर’ (Sin Tax) में बढ़ोतरी हुई है।
- बजट घोषणा: सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर नेशनल कैलामिटी कंटिंजेंट ड्यूटी (NCCD) में 16% की वृद्धि की गई है।
- असर: सिगरेट का पैकेट और गुटखा महंगा होगा। हालांकि यह खाने की चीज नहीं है, लेकिन कई परिवारों के मासिक बजट पर इसका असर पड़ता है।
3. प्लास्टिक पैकेजिंग वाला खाना (Packaged Food)
पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के विकल्पों को बढ़ावा देने की बात कही है।
- असर: जो कंपनियां प्लास्टिक पैकेजिंग का इस्तेमाल करती हैं, उन पर इनडायरेक्ट कॉस्ट बढ़ सकती है, जिसका भार अंततः उपभोक्ता पर डाला जाएगा। चिप्स, बिस्किट और नमकीन के पैकेट में मामूली (50 पैसे से 1 रुपये) की बढ़ोतरी देखी जा सकती है या पैकेट का वजन (Grammage) कम किया जा सकता है।

4. विदेशी शराब (Imported Liquor)
पार्टी करने वालों के लिए बुरी खबर है। विदेशी स्कॉच और वाइन पर कस्टम ड्यूटी के नियमों को सख्त किया गया है, जिससे इनकी कीमतें बढ़ सकती हैं।
भाग 3: फलों और सब्जियों का क्या? (Vegetables & Fruits Inflation)
सब्जियों के दाम बजट से सीधे तय नहीं होते, वे मौसम और सप्लाई चेन पर निर्भर करते हैं। लेकिन बजट में एक बड़ी घोषणा हुई है – ‘Operation Green 2.0’।
- घोषणा: सरकार ने टमाटर, प्याज और आलू (TOP crops) के भंडारण और सप्लाई चेन के लिए 500 करोड़ का अतिरिक्त फंड दिया है।
- लॉन्ग टर्म असर: इसका असर तुरंत नहीं दिखेगा, लेकिन इसका मकसद यह है कि जब बारिश या गर्मी के कारण फसल खराब हो, तो कोल्ड स्टोरेज से सब्जियां निकालकर दाम नियंत्रित किए जा सकें। यानी, आने वाले समय में प्याज के दाम जो हर साल 100 रुपये पार करते हैं, उस पर लगाम लग सकती है।
भाग 4: दाल और अनाज – ‘भारत की थाली’ (Pulses & Grains)
शाकाहारी परिवारों के लिए दाल प्रोटीन का मुख्य स्रोत है।
- बजट घोषणा: सरकार ने ‘आत्मनिर्भर तिलहन और दलहन अभियान’ (Atmanirbhar Oilseeds and Pulses Mission) की घोषणा की है।
- एमएसपी (MSP): दालों की एमएसपी बढ़ाने के संकेत दिए गए हैं ताकि किसान ज्यादा दाल उगाएं।
- असर: आयातित दाल (जैसे मसूर) पर ड्यूटी कम रखने से दाम स्थिर रहेंगे। लेकिन चूंकि सरकार किसानों को अच्छे दाम देना चाहती है, इसलिए चणा और तुअर दाल के दाम में बहुत बड़ी गिरावट की उम्मीद न करें। यह ‘स्थिर’ (Stable) रहेंगे।
भाग 5: डाइनिंग आउट और ऑनलाइन फूड डिलीवरी (Restaurant & Zomato/Swiggy)
क्या बजट 2026 ने वीकेंड पर बाहर खाना महंगा कर दिया है?
- GST: ध्यान रहे कि GST की दरें बजट में तय नहीं होतीं, वे GST काउंसिल तय करती है। इसलिए रेस्टोरेंट के बिल पर लगने वाले 5% GST में कोई बदलाव नहीं है।
- इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC): रेस्टोरेंट इंडस्ट्री लंबे समय से ITC की मांग कर रही थी, जो इस बजट में भी पूरी नहीं हुई।
- निष्कर्ष: जोमैटो (Zomato) या स्विगी (Swiggy) से खाना मंगाना या रेस्टोरेंट में जाना न तो सस्ता हुआ है और न ही महंगा। यह जस का तस रहेगा।
भाग 6: किचन गैजेट्स – कुकर, मिक्सी और ओवन (Kitchen Appliances)
खाना बनाने के लिए सिर्फ सब्जी नहीं, बर्तन और गैजेट्स भी चाहिए।
- इलेक्ट्रॉनिक्स: मोबाइल और चार्जर के पार्ट्स पर ड्यूटी कम हुई है, लेकिन किचन अप्लायंसेज (ओवन, एयर फ्रायर) के कुछ इम्पोर्टेड कंपोनेंट्स (जैसे हीटिंग कॉइल) पर ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने के लिए टैक्स लग सकता है।
- असर: हाई-एंड इम्पोर्टेड किचन गैजेट्स महंगे हो सकते हैं, लेकिन ‘मेड इन इंडिया’ मिक्सर-ग्राइंडर और इंडक्शन कुकटॉप के दाम स्थिर रहेंगे।

भाग 7: मिडिल क्लास की ‘थाली’ का अर्थशास्त्र (Thali Economics)
आइए, एक मध्यम वर्गीय परिवार (4 सदस्य) की ‘थाली’ पर इस बजट के असर का गणित समझते हैं।
परिदृश्य (Scenario): मान लीजिए आपका मासिक राशन का खर्च ₹10,000 है।
बचत (Savings):
- तेल: अगर आप महीने में 5 लीटर तेल खाते हैं, और तेल 10 रुपये सस्ता होता है, तो ₹50 की बचत।
- टैक्स: अगर आप इनकम टैक्स के नए स्लैब (7 लाख तक कोई टैक्स नहीं) में आते हैं, तो आपके हाथ में खर्च करने के लिए ज्यादा पैसा (Disposable Income) बचेगा। मान लीजिए महीने के ₹1000-₹2000 एक्स्ट्रा बचे।
खर्च (Expenses):
- पैकेज्ड फूड: अगर आप बिस्किट, मैगी, सॉस ज्यादा खाते हैं, तो वहां ₹50-₹100 का खर्च बढ़ सकता है।
नेट रिजल्ट (Net Result): इस बजट ने खाने-पीने की चीजों में कोई ‘क्रांतिकारी’ सस्तापन नहीं दिया है, लेकिन सबसे अच्छी बात यह है कि महंगाई को बढ़ने से रोका है। तेल का सस्ता होना एक बड़ी राहत है। कुल मिलाकर, आपकी थाली का बजट ‘न्यूट्रल से पॉजिटिव’ (Neutral to Positive) रहेगा।
भाग 8: कृषि सेक्टर के लिए घोषणाएं – भविष्य का भोजन (Agriculture Push)
हमें यह भी समझना होगा कि आज जो खेत में बोया जाएगा, वही कल हमारी प्लेट में आएगा।
- Nano DAP: सरकार ने नैनो यूरिया के बाद नैनो डीएपी के विस्तार की घोषणा की है। इससे खेती की लागत (Input Cost) कम होगी, जो भविष्य में अनाज सस्ता करने में मदद करेगी।
- डिजिटल एग्री-स्टैक: किसानों का डिजिटल डेटाबेस बनेगा। इससे उन्हें सही समय पर खाद-बीज मिलेगा और फसल बर्बाद कम होगी।
- मोटे अनाज (Millets): ‘श्री अन्न’ (Jowar, Bajra, Ragi) के लिए विशेष पैकेज जारी रहेगा। अगर आप हेल्थ कॉन्शियस हैं, तो बाज़रा बिस्किट्स और रागी कुकीज़ की वैरायटी बाज़ार में बढ़ेगी और शायद दाम भी कम होंगे।
भाग 9: विशेषज्ञों की राय (Expert Opinion)
बाजार के दिग्गज और अर्थशास्त्री इस ‘फूड बजट’ को कैसे देखते हैं?
“यह एक संतुलित बजट है। वित्त मंत्री ने लोकलुभावन वादों के बजाय सप्लाई साइड (Supply Side) को सुधारने पर जोर दिया है। तेल की कीमतों में कटौती तुरंत राहत देगी, लेकिन सब्जियों की महंगाई के लिए हमें ‘ऑपरेशन ग्रीन’ के नतीजों का इंतजार करना होगा। मिडिल क्लास के लिए यह बजट ‘नो प्रॉफिट, नो लॉस’ जैसा है।” – आलोक जोशी, आर्थिक विश्लेषक
“FMCG सेक्टर (डाबर, नेस्ले, एचयूएल) के लिए ग्रामीण मांग बढ़ना एक अच्छा संकेत है। अगर ग्रामीण भारत के पास पैसा आएगा, तो वे बिस्किट और तेल ज्यादा खरीदेंगे, जिससे वॉल्यूम ग्रोथ होगी और कंपनियां दाम नहीं बढ़ाएंगी।” – संजीव भसीन, मार्केट एक्सपर्ट
भाग 10: क्या आपको अब राशन स्टॉक करना चाहिए? (Should You Stock Up?)
बजट के बाद अक्सर लोग डर जाते हैं और राशन भरने लगते हैं।
- सलाह: पैनिक बाइंग (Panic Buying) की कोई जरूरत नहीं है।
- तेल के दाम कम होने वाले हैं, इसलिए अभी बहुत ज्यादा तेल स्टॉक न करें। नए स्टॉक का इंतजार करें।
- इम्पोर्टेड आइटम (कॉफी, चॉकलेट) अगर आप रोज यूज़ करते हैं, तो शायद एक-दो पैकेट एक्स्ट्रा ले सकते हैं क्योंकि पुराने स्टॉक के बाद नया स्टॉक महंगी ड्यूटी के साथ आएगा।
रसोई का बजट ‘संतुलित’
अंत में, Budget 2026-27 आपकी रसोई में कोई भूचाल नहीं ला रहा है। यह एक अच्छी खबर है। अक्सर बजट में चीजें महंगी होती हैं, लेकिन इस बार सरकार ने महंगाई को ‘होल्ड’ पर रखने की कोशिश की है।
- सबसे अच्छी खबर: खाने का तेल सस्ता होना।
- सबसे बुरी खबर: इम्पोर्टेड गुडीज़ (चॉकलेट/चीज) का महंगा होना।
- आम आदमी के लिए: टैक्स स्लैब में बदलाव से जो पैसा बचेगा, वही आपकी असली राहत है। उस पैसे से आप अपनी थाली में एक एक्स्ट्रा मिठाई या फल जोड़ सकते हैं।
तो, आज रात जब आप डिनर टेबल पर बैठें, तो चिंता मुक्त होकर खाएं। सरकार ने आपकी थाली से निवाला नहीं छीना है, बल्कि उसमें थोड़ा और ‘तेल’ डालने की गुंजाइश दी है!
आपको यह बजट विश्लेषण कैसा लगा? क्या आप तेल के दाम कम होने से खुश हैं? या आपको उम्मीद थी कि पेट्रोल-डीजल को जीएसटी में लाया जाएगा? (जो अभी नहीं हुआ)। कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर लिखें।
खाते रहें, स्वस्थ रहें!
