पाकिस्तान के इतिहास का सबसे रक्तरंजित दिन?
2 फरवरी 2026 की सुबह पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों और रावलपिंडी स्थित GHQ (जनरल हेडक्वार्टर) के लिए एक बुरे सपने की तरह आई। खबरों के मुताबिक, पाकिस्तान के सबसे अशांत प्रांत Balochistan में विद्रोहियों ने अब तक का सबसे बड़ा और समन्वित हमला (Coordinated Attack) बोला है। यह कोई सामान्य हिट-एंड-रन (Hit-and-Run) ऑपरेशन नहीं था, बल्कि एक सोची-समझी Full-Scale War थी।
बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) और उनकी सबसे घातक विंग ‘मजीद ब्रिगेड’ (Majeed Brigade) ने दावा किया है कि उनके ‘ऑपरेशन दरा-ए-बोलान’ (Operation Dara-e-Bolan) के तहत उन्होंने पाकिस्तानी सेना के कई शिविरों पर कब्जा कर लिया है। सबसे चौंकाने वाला और दिल दहला देने वाला दावा यह है कि इस हमले में 200 Pakistani Soldiers (200 पाकिस्तानी सैनिक) मारे गए हैं।
इस हमले की सबसे खतरनाक बात इसमें इस्तेमाल की गई रणनीति है। एक तरफ पहाड़ों में बिछाए गए Improvised Explosive Devices (IEDs) के जाल ने सेना के काफिलों को उड़ा दिया, तो दूसरी तरफ Female Fidayeen (महिला आत्मघाती हमलावरों) ने सैन्य ठिकानों के अंदर घुसकर तबाही मचाई।
क्या बलूचिस्तान अब पाकिस्तान के हाथ से निकल रहा है? क्या यह 1971 के बाद पाकिस्तान का सबसे बड़ा Civil War (गृहयुद्ध) बनने जा रहा है? और चीन के ड्रीम प्रोजेक्ट CPEC का अब क्या होगा?
भाग 1: ‘ऑपरेशन दरा-ए-बोलान’ – वो रात जब माच और बोलान जल उठे
हमले की शुरुआत 1 फरवरी की देर रात हुई, जब पूरा बलूचिस्तान गहरे अंधेरे में डूबा हुआ था। BLA ने अपनी रणनीति बदलते हुए इस बार सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि एक साथ कई शहरों—माच (Mach), बोलान (Bolan), ग्वादर (Gwadar) और तुरबत (Turbat)—को निशाना बनाया।
हमले का ब्लूप्रिंट (Attack Blueprint):
- सप्लाई लाइन काटना: सबसे पहले विद्रोहियों ने क्वेटा को बाकी पाकिस्तान से जोड़ने वाले मुख्य हाईवे और रेलवे ट्रैक को IED Blasts से उड़ा दिया। इससे सेना की रसद (Reinforcement) रुक गई।
- माच शहर पर कब्जा: रिपोर्ट्स के मुताबिक, सैकड़ों हथियारबंद विद्रोहियों ने माच शहर को चारों तरफ से घेर लिया। उन्होंने पुलिस स्टेशनों और पैरामिलिट्री पोस्ट्स (FC Posts) पर रॉकेट लॉन्चर (RPGs) से हमला किया।
- जाल (Trap): जब पाकिस्तानी सेना की क्विक रिएक्शन टीम (QRF) मदद के लिए निकली, तो रास्तों में पहले से बिछाए गए लैंडमाइंस ने उनके वाहनों को उड़ा दिया।
यह हमला इतना भीषण था कि स्थानीय प्रशासन ने घंटों तक चुप्पी साधे रखी। पाकिस्तानी मीडिया (Pakistani Media) पर सेंसरशिप लगा दी गई, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियोज में जलते हुए सैन्य वाहन और भागते हुए सैनिक देखे जा सकते थे।

भाग 2: मजीद ब्रिगेड और ‘महिला फिदायीन’ की वापसी (Rise of Female Fidayeen)
इस हमले का सबसे भयावह पहलू था Female Suicide Bombers का इस्तेमाल। BLA की सुसाइड विंग ‘मजीद ब्रिगेड’ ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उनकी विचारधारा अब बलूच समाज की महिलाओं के अंदर भी गहराई तक उतर चुकी है।
कौन थीं ये महिलाएं? दावा किया जा रहा है कि हमले में शामिल ‘फिदायीन यूनिट’ का नेतृत्व शिक्षित बलूच महिलाओं ने किया।
- 2022 में कराची यूनिवर्सिटी में चीनी नागरिकों पर हमला करने वाली Shari Baloch (शारी बलूच) के बाद, यह ट्रेंड तेजी से बढ़ा है।
- इस हमले में, एक महिला फिदायीन ने कथित तौर पर एक सैन्य छावनी के मुख्य द्वार पर विस्फोटकों से भरी गाड़ी टकरा दी, जिससे भारी तबाही हुई और बाकी विद्रोहियों को अंदर घुसने का रास्ता मिल गया।
मनोवैज्ञानिक युद्ध (Psychological Warfare): पाकिस्तान जैसी रूढ़िवादी सोसायटी में, जहाँ महिलाओं की तलाशी लेना या उन पर शक करना मुश्किल होता है, BLA ने इसे अपनी सबसे बड़ी ताकत (Strategic Asset) बना लिया है।
- ये महिलाएं अनपढ़ नहीं हैं; वे डॉक्टर्स, टीचर्स और यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स हैं, जो मानती हैं कि पाकिस्तानी राज्य ने उनके संसाधनों और सम्मान को लूटा है।
- उनका नारा है—“बलूचिस्तान की आजादी के लिए जान देना गर्व है।”
भाग 3: IEDs का जाल और 200 जवानों की मौत का दावा
BLA के प्रवक्ता ‘जीयन बलूच’ (Jeeyand Baloch) ने एक ऑडियो संदेश जारी कर दावा किया कि उन्होंने 200 से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया है। हालांकि, पाकिस्तानी सेना की मीडिया विंग ISPR ने अभी तक हताहतों की सही संख्या की पुष्टि नहीं की है और इसे हमेशा की तरह कम करके दिखा रही है।
मौतों का कारण:
- Ambush (घात लगाकर हमला): बलूच विद्रोही पहाड़ों के भूगोल से वाकिफ हैं। उन्होंने सेना के काफिलों को पहाड़ी दर्रों (Passes) में फंसाया और ऊपर से गोलियां बरसाईं।
- Sophisticated IEDs: इस बार इस्तेमाल किए गए IEDs बहुत ही उन्नत (Advanced) थे, जिन्हें रिमोट से कंट्रोल किया जा रहा था। बख्तरबंद गाड़ियां भी इनके सामने टिक नहीं पाईं।
- नाइट विजन का अभाव: रिपोर्ट्स बताती हैं कि विद्रोहियों के पास आधुनिक Night Vision Goggles और स्नाइपर राइफल्स थीं, जबकि स्थानीय फ्रंटियर कॉर्प्स (FC) के जवानों के पास पुराने हथियार थे।
यह संख्या (200) अगर सच है, तो यह कारगिल युद्ध के बाद पाकिस्तानी सेना को एक दिन में हुआ सबसे बड़ा नुकसान है।
भाग 4: बलूचिस्तान क्यों जल रहा है? (Root Cause of Conflict)
इस हिंसा को समझने के लिए हमें इतिहास और वर्तमान के शोषण को समझना होगा। बलूचिस्तान क्षेत्रफल के हिसाब से पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, लेकिन जनसंख्या में सबसे छोटा।
विद्रोह के 3 मुख्य कारण:
- प्राकृतिक संसाधनों की लूट (Resource Exploitation): बलूचिस्तान में सोने, तांबे और गैस के असीमित भंडार हैं (जैसे रेको डिक खदान और सुई गैस फील्ड)। बलूच लोगों का आरोप है कि पाकिस्तान सरकार (जिसे वे ‘पंजाबियों की सरकार’ कहते हैं) और चीन मिलकर उनके खजाने को लूट रहे हैं, जबकि स्थानीय लोग पीने के पानी तक को तरस रहे हैं।
- जबरन गुमशुदगी (Enforced Disappearances): पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI और सेना पर आरोप है कि उन्होंने हजारों बलूच युवाओं, छात्रों और एक्टिविस्ट्स को अगवा किया है। इनकी ‘म्यूटिलेटेड बॉडीज’ (क्षत-विक्षत शव) अक्सर सड़कों किनारे मिलती हैं। यह गुस्सा अब प्रतिशोध की आग बन चुका है।
- CPEC और चीन का दखल: चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) बलूचिस्तान के ग्वादर पोर्ट से होकर गुजरता है। बलूच इसे ‘कब्जा’ मानते हैं। उनका कहना है कि यह विकास नहीं, बल्कि बलूच डेमोग्राफी (जनसांख्यिकी) को बदलने की साजिश है।
भाग 5: पाकिस्तानी सेना की विफलता – Intelligence Failure?
2026 में, जब टेक्नोलॉजी इतनी आगे बढ़ चुकी है, तब इतना बड़ा हमला कैसे हो गया? यह पाकिस्तानी सेना और ISI के मुंह पर एक तमाचा है।

सवाल जो पूछे जा रहे हैं:
- सर्विलांस कहाँ था? बलूचिस्तान में हज़ारों चेकपोस्ट और ड्रोन सर्विलांस होने के बावजूद, सैकड़ों विद्रोही शहरों में कैसे घुस गए?
- स्थानीय समर्थन: यह स्पष्ट है कि विद्रोहियों को स्थानीय आबादी का भारी समर्थन (Local Support) मिल रहा है। बिना स्थानीय लोगों की मदद के इतना बड़ा ऑपरेशन और हथियारों की तस्करी संभव नहीं है।
- सेना का मनोबल: राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान में, सैनिकों का मनोबल (Morale) गिर चुका है। उन्हें अपने ही लोगों से लड़ना पड़ रहा है।
भाग 6: चीन की नींद हराम – CPEC पर संकट (China’s Nightmare)
इस हमले का सबसे बड़ा असर बीजिंग में महसूस किया जा रहा है। चीन ने CPEC में 60 बिलियन डॉलर से ज्यादा का निवेश किया है।
- ग्वादर पोर्ट सुरक्षित नहीं: ग्वादर, जो CPEC का मुकुट है, अब युद्ध क्षेत्र बन गया है। BLA ने बार-बार चेतावनी दी है कि वे चीन के किसी भी प्रोजेक्ट को चलने नहीं देंगे।
- निवेशकों में डर: इस हमले के बाद चीनी इंजीनियरों और कामगारों में दहशत है। अगर चीन ने हाथ खींचा, तो पाकिस्तान की डूबती अर्थव्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी।
- चीन का दबाव: अब चीन पाकिस्तान पर दबाव डालेगा कि वह अपनी सेना का पूरा इस्तेमाल करके विद्रोह को कुचले, जिससे मानवाधिकार उल्लंघन (Human Rights Violations) और बढ़ेंगे।
भाग 7: दुनिया की प्रतिक्रिया – भारत का रुख (Geopolitical Impact)
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस हमले को कैसे देखा जा रहा है?
भारत (India): भारत आधिकारिक तौर पर हिंसा की निंदा करता है, लेकिन भारत हमेशा से बलूचिस्तान में हो रहे मानवाधिकार हनन का मुद्दा उठाता रहा है। 2016 में पीएम मोदी ने लाल किले से बलूचिस्तान का जिक्र किया था। पाकिस्तान हमेशा आरोप लगाता है कि भारत RAW के जरिए विद्रोहियों को मदद दे रहा है, जिसे भारत सिरे से खारिज करता है। भारत के लिए, यह पाकिस्तान की अपनी नीतियों (“आतंकवाद के भस्मासुर”) का परिणाम है।
ईरान और अफगानिस्तान: बलूचिस्तान की सीमा ईरान और अफगानिस्तान से लगती है। पाकिस्तान अक्सर आरोप लगाता है कि विद्रोही इन देशों में पनाह लेते हैं। इससे पाकिस्तान के अपने पड़ोसियों के साथ रिश्ते और खराब होंगे। हाल ही में पाकिस्तान और ईरान के बीच हुई ‘मिसाइल स्ट्राइक’ की घटना ने पहले ही तनाव बढ़ा दिया था।
भाग 8: BLA की रणनीति – Asymmetric Warfare
बलूच लिबरेशन आर्मी अब गुरिल्ला युद्ध से आगे बढ़कर Asymmetric Warfare (असममित युद्ध) लड़ रही है।
- हाई-टेक हथियार: उनके पास अब नाइट विजन, स्नाइपर राइफल्स और एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन डिवाइस हैं।
- सोशल मीडिया प्रोपेगेंडा: हमले के तुरंत बाद BLA ने वीडियो और फोटो जारी किए। यह उनकी मीडिया विंग की मजबूती दिखाता है जो नैरेटिव को कंट्रोल कर रही है।
- आत्मघाती दस्ते: ‘मजीद ब्रिगेड’ का इस्तेमाल वे केवल हाई-वैल्यू टारगेट्स (जैसे चीनी काफिले या मिलिट्री बेस) के लिए करते हैं। यह उनकी प्रतिबद्धता (Commitment) को दर्शाता है कि वे मरने के लिए तैयार हैं।
भाग 9: पाकिस्तान का अगला कदम – Operation Rad-ul-Fasaad 2.0?
इतने बड़े नुकसान के बाद पाकिस्तानी सेना चुप नहीं बैठेगी।
- हवाई हमले (Aerial Bombardment): संभावना है कि पाकिस्तान वायु सेना (PAF) बलूचिस्तान के पहाड़ी इलाकों में भारी बमबारी करेगी। इससे आम नागरिकों (Civilians) के मारे जाने का खतरा बढ़ जाएगा।
- मीडिया ब्लैकआउट: बलूचिस्तान में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं पूरी तरह बंद की जा सकती हैं ताकि अत्याचार की खबरें बाहर न आएं।
- सैन्य अभियान: एक बड़ा सैन्य ऑपरेशन लॉन्च किया जाएगा, जिससे विस्थापन (Displacement) बढ़ेगा और मानवाधिकार संकट गहराएगा।
भाग 10: क्या बलूचिस्तान अगला बांग्लादेश बनेगा?
विशेषज्ञों के बीच अब यह बहस तेज हो गई है कि क्या 1971 में जिस तरह पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) अलग हुआ था, वैसा ही बलूचिस्तान में हो सकता है?
समानताएं (Similarities):
- शोषण: जैसे पश्चिम पाकिस्तान ने पूर्वी पाकिस्तान के जूट के पैसे लूटे, वैसे ही अब बलूचिस्तान की गैस और खनिजों को लूटा जा रहा है।
- सैन्य दमन: बंगाली बुद्धिजीवियों की तरह बलूच छात्रों और नेताओं को मारा जा रहा है।
- नफरत: स्थानीय लोगों में सेना के प्रति नफरत चरम पर है।
अंतर (Differences): हालांकि, बलूचिस्तान की आबादी कम और बिखरी हुई है, और उनके पास भारत जैसा कोई बड़ा बाहरी सैन्य समर्थन (खुले तौर पर) अभी नहीं है, जो 1971 में निर्णायक था। लेकिन जिस तरह से आग सुलग रही है, पाकिस्तान का नक्शा बदलना अब असंभव नहीं लगता।
एक अंतहीन युद्ध की शुरुआत
अंत में, Baloch Rebels Attack की यह घटना महज 200 सैनिकों की मौत का आंकड़ा नहीं है। यह पाकिस्तान के संघीय ढांचे (Federal Structure) के टूटने की आवाज है। जब कोई राज्य अपने ही नागरिकों को ‘दुश्मन’ मान ले और महिलाएं अपने शरीर पर बम बांधकर न्याय मांगने निकल पड़ें, तो समझ लेना चाहिए कि पानी सिर से ऊपर जा चुका है।
पाकिस्तान के लिए अब दो ही रास्ते हैं: या तो वह बलूच लोगों के अधिकारों का सम्मान करते हुए राजनीतिक समाधान निकाले (जो मुश्किल लगता है) या फिर वह और अधिक क्रूरता से दमन करे, जो विद्रोह की आग को और भड़काएगा।
2026 की यह शुरुआत दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में बड़े बदलावों का संकेत दे रही है। बलूचिस्तान अब एक ‘Forgotten Conflict’ नहीं रहा, यह दुनिया की सुर्खियों में आ चुका है।
आप इस स्थिति को कैसे देखते हैं? क्या पाकिस्तान अपनी आंतरिक कलह से बच पाएगा? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर लिखें।
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